# पश्चिम बंगाल दुर्गा पूजा में सियासी पारा: ममता बनर्जी की सिमटी सक्रियता और शुभेंदु अधिकारी का बढ़ा दखल

> पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा इस बार राजनीतिक सरगर्मी का केंद्र बन गई है, जहां ममता बनर्जी की उपस्थिति काफी सीमित हो गई है और शुभेंदु अधिकारी समेत बीजेपी नेताओं ने प्रमुख पंडालों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-10-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/west-bengal-durga-puja-politics-mamata-banerjee-limited-presence-suvendu-adhikari-expanding-reach-48688 · **Language:** Hindi
**Tags:** पश्चिम बंगाल, दुर्गा पूजा, ममता बनर्जी, शुभेंदु अधिकारी, बीजेपी, तृणमूल कांग्रेस, कोलकाता

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा हमेशा से धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान के साथ राजनीतिक मेलजोल का भी एक बहुत बड़ा मंच रही है। राज्य के इस सबसे बड़े उत्सव के दौरान पूजा समितियों के कार्यक्रमों में राजनेताओं का आना-जाना और भव्य पंडालों का उद्घाटन करना स्थानीय राजनीति का एक अहम हिस्सा बना हुआ है। इस बार के आयोजनों में भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी के नेताओं की बढ़ती सक्रियता और तृणमूल कांग्रेस के कई दिग्गज चेहरों की गैर-मौजूदगी खासी चर्चा का विषय बनी हुई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सहित पार्टी के तमाम बड़े नेता विभिन्न पूजा पंडालों में नजर आए, जबकि दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल के कई सीनियर नेताओं की सार्वजनिक उपस्थिति पहले की तुलना में काफी सिमट गई है। राजनीतिक गलियारों में बड़े उत्सवों से जुड़े चेहरों में आए इस बड़े बदलाव को राज्य की बदलती हुई राजनीतिक परिस्थितियों और सत्ता समीकरणों के आईने में देखा जा रहा है।

## ममता बनर्जी की सीमित मौजूदगी और कालीघाट तक सिमटा दायरा
पिछले लगभग डेढ़ दशक से ममता बनर्जी का कोलकाता के अलग-अलग दुर्गा पूजा पंडालों का उद्घाटन करना उत्सव से ठीक पहले की सबसे मुख्य राजनीतिक गतिविधियों में शुमार रहा है। नवरात्रि की शुरुआत से पहले वह शहर की तमाम नामी पूजा समितियों के आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया करती थीं। साल 2025 में भी उनके पूजा उद्घाटनों का शेड्यूल काफी व्यस्त रहा था, लेकिन इस बार उनकी सार्वजनिक चहल-पहल पहले के मुकाबले काफी कम दिखाई दी। सामने आई जानकारी के अनुसार, इस बार उन्होंने केवल कालीघाट स्थित अपने आवास के बिल्कुल पास के एक ही पूजा पंडाल का उद्घाटन किया। पिछले वर्षों के उनके व्यापक और व्यस्त दौरों से इस बार की स्थिति की तुलना की जाए तो उनकी उपस्थिति में जमीन-आसमान का बड़ा अंतर साफ नजर आता है, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

## तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज चेहरों की दूरी और संगठन पर असर
कोलकाता के कई सबसे बड़े और प्रतिष्ठित पूजा आयोजनों के साथ तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का पुराना और गहरा नाता रहा है। पूर्व मंत्री अरूप विश्वास, सुजीत बोस और फिरहाद हकीम जैसे कद्दावर नेता लंबे समय से अपने-अपने इलाकों की प्रमुख पूजा समितियों से गहराई से जुड़े रहे हैं। इस बार इन आयोजनों में उनकी भूमिका और उपस्थिति को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालिया विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने के बाद से तृणमूल कांग्रेस के सामने अपने संगठन को जमीन पर फिर से मजबूत करने की एक बड़ी चुनौती खड़ी है। ऐसे में महत्वपूर्ण सार्वजनिक और सांस्कृतिक आयोजनों से पार्टी के बड़े नेताओं की दूरी को राजनीतिक नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है। कोलकाता के बेहद चर्चित नाकतला उदयन संघ के पूजा आयोजन के साथ पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी का पुराना जुड़ाव रहा है, लेकिन शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे पार्थ चटर्जी इस बार इस पूरे आयोजन से पूरी तरह दूर रहे।

## शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी नेताओं की आक्रामक सक्रियता
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस बार के दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान कई अलग-अलग पूजा आयोजनों में बढ़-चढ़कर शिरकत की। उन्होंने न सिर्फ कोलकाता बल्कि राज्य के अन्य दूर-दराज के हिस्सों में भी जाकर पूजा पंडालों का दौरा किया और कई जगह भव्य उद्घाटन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इन सभी आयोजनों में श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब की पूजा ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं। यह पूजा लंबे समय से सुजीत बोस के प्रभाव क्षेत्र में मानी जाती रही है, और पिछले साल इस पंडाल का उद्घाटन ममता बनर्जी ने किया था। इस बार इस पंडाल में शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी को सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य में पूरी तरह बदल चुके राजनीतिक समीकरणों के एक बड़े उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। बीजेपी के लिए इस तरह के बड़े सांस्कृतिक आयोजन स्थानीय कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच सीधा संपर्क मजबूत करने का एक बेहतरीन जरिया साबित हो रहे हैं।

## पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की मैदान में मौजूदगी
दुर्गा पूजा के इन खास दिनों के दौरान बीजेपी के कई अन्य प्रमुख नेता भी राज्यभर के विभिन्न आयोजनों में लगातार सक्रिय नजर आए। इनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार के अलावा पार्टी की जानी-पहचानी नेत्री लॉकेट चटर्जी और अग्निमित्रा पॉल शामिल रहीं। इन सभी नेताओं की ताबड़तोड़ सक्रियता से पार्टी को धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के बहाने स्थानीय स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने का शानदार मौका मिला है। जब बीजेपी विपक्ष में हुआ करती थी, तब उसके नेता अक्सर तृणमूल कांग्रेस पर पूजा आयोजनों के जरिए अपना राजनीतिक दबदबा बनाने के गंभीर आरोप लगाते थे। अब खुद सत्ता में आने के बाद पार्टी के नेताओं की इन बड़े आयोजनों में इतनी व्यापक भागीदारी को एक बिल्कुल नए राजनीतिक संदर्भ में परखा जा रहा है।

## चक्षुदान की रस्म और पंडालों के उद्घाटन में बदले चेहरे
उत्तर कोलकाता के मशहूर अहीरीटोला सार्वजनिक दुर्गोत्सव में इस बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जहां बीजेपी विधायक पूर्णिमा चक्रवर्ती ने मां दुर्गा की प्रतिमा के नेत्र गढ़ने की पारंपरिक रस्म यानी चक्षुदान में उत्साह के साथ हिस्सा लिया। बीते कई वर्षों से यह खास रस्म तृणमूल कांग्रेस की पूर्व मंत्री शशि पांजा द्वारा निभाई जाती रही थी। इसी तरह मध्य कोलकाता के ऐतिहासिक मोहम्मद अली पार्क की पूजा में भी राजनीतिक चेहरों को लेकर आया बदलाव चर्चा का विषय बना। इस बार बीजेपी सरकार के मंत्री तापस रॉय ने इस प्रसिद्ध पंडाल का औपचारिक उद्घाटन किया। वहीं दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय की भूमिका और उनकी खामोशी को लेकर भी कई तरह के सियासी सवाल उठने लगे हैं.

## राहुल सिन्हा का बयान और इंद्रनील खान का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य राहुल सिन्हा ने मौजूदा राजनीतिक हालात की तुलना एक ऐसे खेल से की है जिसमें गोलपोस्ट के सामने कोई भी प्रतिद्वंद्वी या रोकने वाला खिलाड़ी मौजूद नहीं है। उन्होंने खुलकर कहा कि इस बार दुर्गा पूजा के दौरान उनकी पार्टी को अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक मौजूदगी दर्ज कराने में किसी भी प्रकार की बड़ी राजनीतिक चुनौती का सामना नहीं करना पड़ रहा है। इसके साथ ही राहुल सिन्हा ने तृणमूल कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं पर पूजा के नाम पर जबरन चंदा वसूलने का गंभीर आरोप भी मढ़ दिया। इन तमाम बयानों के जवाब में बीजेपी नेता और राज्य सरकार के मंत्री इंद्रनील खान ने पूजा पंडालों पर किसी भी तरह के राजनीतिक कब्जे के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल के हर एक आम नागरिक का अपना उत्सव है और यह किसी एक विशेष राजनीतिक दल की बपौती या संपत्ति नहीं है, इसलिए उनके नेता इन आयोजनों में पूरी श्रद्धा और सहजता से शामिल होने आ रहे हैं।

## तृणमूल कांग्रेस का पलटवार और पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप
तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक प्रवक्ता कृष्णु मित्रा ने पूजा आयोजनों में बीजेपी की लगातार बढ़ती हुई इस दखलअंदाजी को किसी भी प्रकार का स्वाभाविक सामाजिक बदलाव मानने से पूरी तरह इनकार कर दिया। उन्होंने उल्टा आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य की पुलिस और स्थानीय प्रशासन के ऊपर दबाव बनाकर विभिन्न पूजा समितियों को अपने पाले में करने और उन पर अनुचित प्रभाव डालने की पूरी कोशिश की जा रही है। कृष्णु मित्रा ने दावा किया कि देवराज चक्रवर्ती जैसे पार्टी के कई प्रमुख नेताओं को महज राजनीतिक दुर्भावना के चलते जेल के सलाखों के पीछे डाला गया है। हालांकि उन्होंने पूरा भरोसा जताते हुए यह भी दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के सभी नेता बहुत जल्द ही पूरी ताकत के साथ फिर से सार्वजनिक और सामाजिक आयोजनों में सक्रिय रूप से लौटेंगे।

## इसका आप पर असर
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान राजनीतिक समीकरणों में आए इस बदलाव का असर राज्य के स्थानीय उत्सवों और प्रशासनिक माहौल पर साफ देखने को मिल रहा है।

- **पश्चिम बंगाल में:** आम नागरिकों और पूजा समितियों के लिए राजनीतिक गतिविधियों और आयोजनों में नेताओं की भागीदारी के समीकरण बदल गए हैं। स्थानीय समितियों को प्रशासन और सत्ता पक्ष के नए शक्ति संतुलन के बीच अपने उत्सव आयोजित करने पड़ रहे हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा में इस बार राजनीतिक चेहरों की मौजूदगी और अनुपस्थिति में आए बड़े बदलाव के पीछे राज्य में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक दलों की नई रणनीतियां मुख्य वजह हैं।

- **सत्ता समीकरणों में बदलाव:** पिछले विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में राजनीतिक सत्ता में आए बदलाव ने पारंपरिक सार्वजनिक आयोजनों में नेताओं की भूमिका को पूरी तरह से बदल दिया है।
- **संगठन को मजबूत करने की कोशिश:** हालिया चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के कई नेता अपने इलाकों में आंतरिक चुनौतियों और कानूनी मामलों से जूझ रहे हैं, जिससे उनकी सार्वजनिक उपस्थिति सीमित हुई है।
- **जमीनी संपर्क बढ़ाने की रणनीति:** सत्ताधारी बीजेपी सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों के जरिए आम जनता और स्थानीय संगठनों के बीच अपनी पकड़ और पैठ मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. इस बार दुर्गा पूजा पंडालों के उद्घाटन में किसकी सक्रियता चर्चा में रही?
इस बार मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी के कई नेताओं की सक्रियता प्रमुख पंडालों में चर्चा का विषय रही।

### 2. ममता बनर्जी ने इस बार कितने पंडालों का उद्घाटन किया?
ममता बनर्जी ने इस बार कालीघाट स्थित अपने आवास के पास केवल एक ही पूजा पंडाल का उद्घाटन किया।

### 3. श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब की पूजा का उद्घाटन किसने किया?
इस बार श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब की पूजा में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रमुख मौजूदगी रही।

### 4. अहीरीटोला में चक्षुदान की रस्म किसने निभाई?
अहीरीटोला सार्वजनिक दुर्गोत्सव में बीजेपी विधायक पूर्णिमा चक्रवर्ती ने मां दुर्गा की प्रतिमा के चक्षुदान में हिस्सा लिया।

### 5. राहुल सिन्हा ने मौजूदा राजनीतिक हालात की तुलना किससे की?
राहुल सिन्हा ने मौजूदा स्थिति की तुलना ऐसे खेल से की जिसमें गोलपोस्ट के सामने कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं है।

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