# पश्चिम बंगाल की लाइब्रेरियों से क्यों हटेगी ममता बनर्जी की कविता 'एपांग ओपांग झपांग'? जानिए पूरी वजह

> पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने पब्लिक लाइब्रेरियों से ममता बनर्जी की किताबें हटाने का फैसला किया है, जिनमें उनकी मशहूर कविता 'एपांग ओपांग झपांग' भी शामिल है। सरकार का कहना है कि बिना शैक्षिक महत्व वाली किताबों को जगह नहीं दी जाएगी।

**Category:** राजनीति · **Published:** 2026-06-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/west-bengal-ki-laibreriyon-se-kyon-hategi-mamata-banarji-ki-kavita-epanga-opanga-99

**ममता बनर्जी किताब विवाद:** पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए राज्य की पब्लिक लाइब्रेरियों से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लिखी किताबों को बाहर करने का निर्णय लिया है। इनमें ममता बनर्जी की खूब चर्चित रही कविता 'एपांग ओपांग झपांग' भी गिनी जा रही है। सरकारी अधिकारियों का तर्क है कि जिन किताबों में पढ़ाई-लिखाई या चरित्र-निर्माण से जुड़ा कोई ठोस मूल्य नहीं है, उन्हें लाइब्रेरी की अलमारियों में रखने की कोई वजह नहीं बनती।

## ममता बनर्जी की 90 किताबें खरीदने की बाध्यता खत्म

सरकार की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि अब लाइब्रेरियों में रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद जैसी महान विभूतियों की कृतियों को प्राथमिकता और जगह दी जाएगी। यह नई नीति सीधे तौर पर जून, 2025 के उस आदेश को रद्द कर देती है, जिसके तहत स्कूलों के लिए ममता बनर्जी की लिखी करीब 90 किताबें खरीदना अनिवार्य कर दिया गया था।

## लाइब्रेरियों से बाहर होंगी गैर-जरूरी किताबें

इस पूरे मामले पर लाइब्रेरी मंत्री गौरी शंकर घोष ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछली सरकार ने राज्य को तानाशाही अंदाज में चलाया, और यही वजह रही कि ममता बनर्जी की लिखी किताबें जबरन लाइब्रेरियों में शामिल करा दी गईं। उन्होंने कहा कि अब जब नई सरकार सत्ता में आ चुकी है, तो ऐसी तमाम गैर-जरूरी किताबों को हटाने का काम किया जाएगा।

## आखिर 'एपांग ओपांग झपांग' है क्या?

'एपांग ओपांग झपांग' पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लिखी हुई एक खासी चर्चित कविता है। ममता बनर्जी की कविताओं का संग्रह 'कविता बिटान' के नाम से प्रकाशित हुआ था। बता दें कि 'कविता बिटान' का शाब्दिक अर्थ 'कविताओं का बगीचा' होता है।

## क्या ममता बनर्जी 150 से ज्यादा किताबें लिख चुकी हैं?

उल्लेखनीय है कि ममता बनर्जी अब तक 150 से अधिक किताबें लिख चुकी हैं। उन्होंने अपनी पहली किताब 'उपलब्धि' साल 1995 में लिखी थी। उनकी प्रमुख किताबों की सूची में Trinamul Stare Trinamuler Joy, कबिता बिटान, गुलदस्ता-ए-शायरी, Sishumon और दुआरे सरकार जैसे नाम शामिल हैं। इसके साथ ही ममता बनर्जी ने आमार जंगल, आमार पहाड़, अजब छड़ा, Singur Joyee, Banglar Kanyashree और सहिसुष्णता समेत कई और किताबें भी लिखी हैं। उनकी ये तमाम किताबें अंग्रेजी, उर्दू और दूसरी भाषाओं में भी अनुवादित हो चुकी हैं।

## सत्ता गंवाने के बाद एक और झटका

ध्यान देने वाली बात यह है कि ममता बनर्जी पूरे 15 साल बाद सत्ता से बाहर हुई हैं। फिलहाल उनके सामने अपनी पार्टी TMC को एकजुट और जिंदा रखने की भी बड़ी चुनौती खड़ी है। उनके ज्यादातर सांसद और विधायक बगावत का रुख अपना चुके हैं। ऐसे माहौल में पश्चिम बंगाल की लाइब्रेरियों से उनकी किताबों का हटाया जाना भी इस संकट के बीच उनके लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।

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