{
  "type": "article",
  "title": "पश्चिम बंगाल में असली तृणमूल कांग्रेस पर संग्राम, ऋतब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग के सामने 'जोड़ाफूल' चुनाव चिह्न पर जताया दावा",
  "summary": "तृणमूल कांग्रेस में 28 साल के इतिहास का सबसे बड़ा विवाद अब चुनाव आयोग की चौखट पर पहुंच चुका है। बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने 60 से अधिक विधायकों के समर्थन के साथ पार्टी के नाम और 'जोड़ाफूल' निशान पर अपनी दावेदारी पेश की है।",
  "content": "पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस के 28 वर्षों के लंबे इतिहास में पहली बार पार्टी का अंदरूनी कलह देश की राजधानी दिल्ली स्थित भारत चुनाव आयोग के दरबार तक आ पहुंचा है। वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के बहुसंख्यक विधायकों को अपने साथ जोड़कर राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के समक्ष पार्टी के आधिकारिक नाम और उसके प्रसिद्ध चुनाव चिह्न 'जोड़ाफूल' (घास-फूल) पर अपना कानूनी दावा ठोका है। इस कदम ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि नंदीग्राम उपचुनाव की तारीखें नजदीक आ रही हैं और चुनाव आयोग का फैसला तृणमूल कांग्रेस के भविष्य को तय करने वाला साबित हो सकता है।\n\nचुनाव आयोग में दिल्ली की बैठक और 60 से अधिक विधायकों का लिखित समर्थन\nदिल्ली में भारत के निर्वाचन आयोग के शीर्ष अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक करने के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने अपने गुट को ही असली तृणमूल कांग्रेस बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बागी गुट के पास पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के 60 से अधिक विधायकों का ठोस और लिखित समर्थन प्राप्त है। इसी जनमत और विधायी बहुमत के आधार पर उन्होंने आयोग के समक्ष पार्टी के नाम और प्रतीक चिह्नों पर अपना पूर्ण अधिकार होने का तर्क दिया है। आयोग की ओर से पूछे गए विभिन्न तकनीकी और कानूनी सवालों के बारे में ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनकी ओर से आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए गए हैं और आयोग द्वारा मांगे जाने वाले अन्य अतिरिक्त कागजात भी समय पर सौंप दिए जाएंगे। उन्होंने X पर साझा किए गए संदेश में भी इस बैठक को बेहद फलदायी और सकारात्मक बताया।\n\n \n\nममता बनर्जी की नेतृत्व शैली और 28 साल पुरानी पार्टी की साख पर सवाल\nपार्टी की अंदरूनी व्यवस्था पर बात करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काम करने के तौर-तरीकों पर सीधे तीखे हमले बोले। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में वर्षों से एक कहावत प्रचलित हो चुकी थी कि पार्टी के भीतर न कोई खाता है और न कोई बही, केवल वही सही माना जाता है जो ममता बनर्जी कह देती हैं। ऋतब्रत बनर्जी का आरोप था कि तृणमूल कांग्रेस में लंबे समय से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को किनारे रखकर केवल एक व्यक्ति की मर्जी से निर्णय लिए जाते रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि 1998 में गठित हुई इस पार्टी को अब एक लोकतांत्रिक संस्था के रूप में संवैधानिक नियमों, नियमावलियों और विधिवत दस्तावेजों के आधार पर चलाया जाना चाहिए। दूसरी तरफ, कालीघाट स्थित तृणमूल कांग्रेस मुख्यालय पर काबिज ममता बनर्जी समर्थित धड़े का कहना है कि वे ही पार्टी की मूल संस्थापक हैं और पार्टी का अस्तित्व उनके ही नेतृत्व में शुरू हुआ था।\n\nनंदीग्राम व रेजिनगर उपचुनाव और ऋतब्रत बनर्जी की अनोखी सियासी पेशकश\nराज्य की नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले आगामी उपचुनावों को लेकर दोनों धड़ों के बीच राजनीतिक रस्साकशी चरम पर पहुंच गई है। इन उपचुनावों के लिए मतदान 6 अक्टूबर को होना है, जबकि नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 16 सितंबर तय की गई है। ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के चुनावी ट्रैक रिकॉर्ड पर सवाल खड़े करते हुए टिप्पणी की कि वे आम चुनाव के मुकाबले हमेशा उपचुनावों के रास्ते विधानसभा में प्रवेश करने में अधिक सहज महसूस करती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भी ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट से पराजित हो गई थीं और बाद में एक अन्य सीट पर उपचुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंची थीं। इसी तरह 2026 के आम चुनावों में भी वे चुनावी दौड़ में पीछे रह गईं, यहां तक कि उनके अपने भवानीपुर वार्ड और उनके गृह क्षेत्र के मतदाताओं ने भी उनका समर्थन नहीं किया। इसी संदर्भ में ऋतब्रत बनर्जी ने एक अनोखा सियासी दांव खेलते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने नंदीग्राम से अपना प्रत्याशी लगभग तय कर लिया है, लेकिन यदि ममता बनर्जी वहां से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की इच्छा जताती हैं, तो उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए बागी गुट अपना उम्मीदवार वापस ले लेगा ताकि वे विधानसभा में पहुंच सकें।\n\n1972 के सादिक अली केस का कानूनी पहलू और 'जोड़ाफूल' निशान फ्रीज होने का खतरा\nचुनाव आयोग के सामने असली तृणमूल कांग्रेस की पहचान और 'जोड़ाफूल' निशान के स्वामित्व की कानूनी लड़ाई अब काफी जटिल मोड़ पर है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 1972 में ऐतिहासिक 'सादिक अली बनाम चुनाव आयोग' मामले में स्थापित किए गए सिद्धांतों के अनुसार, जब भी किसी राजनीतिक दल के भीतर दो स्पष्ट धड़े बन जाते हैं, तो आयोग पार्टी के विधायी पंख (विधायकों और सांसदों) तथा संगठनात्मक प्रतिनिधियों के बहुमत का सूक्ष्मता से आकलन करता है। यदि 16 सितंबर की नामांकन समय-सीमा से पहले चुनाव आयोग किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाता है या दोनों पक्षों के दावों का पूर्ण निस्तारण नहीं हो पाता है, तो ऐसी स्थिति में 'जोड़ाफूल' (घास-फूल) चुनाव चिह्न को अस्थायी रूप से फ्रीज यानी जब्त किया जा सकता है। ऐसा होने पर चुनाव आयोग दोनों ही गुटों को उपचुनाव लड़ने के लिए नए अस्थायी नाम और नए चुनाव चिह्न आवंटित कर सकता है। इस प्रकार नंदीग्राम की चुनावी जंग और आयोग का आगामी फैसला तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक दिशा और स्वामित्व तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nपश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर सिंबल विवाद का असर राज्य के मतदाताओं से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक दिखाई देगा।\n\n• भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गोलबंदी पर इसका प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि निर्वाचन आयोग द्वारा किसी क्षेत्रीय दल का प्रतीक फ्रीज किए जाने से संसदीय और गठबंधन समीकरणों पर असर हो सकता है।\n• पश्चिम बंगाल में: राज्य के मतदाताओं को 6 अक्टूबर के नंदीग्राम उपचुनाव में टीएमसी के पारंपरिक चुनाव चिह्न जोड़ाफूल के बजाय नए चुनाव चिह्नों के साथ मतदान पत्र देख सकते हैं।\n• विधायकों और कार्यकर्ताओं के लिए: 60 से अधिक बागी विधायकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं को अपनी राजनीतिक सदस्यता और दल-बदल कानून के तहत कानूनी स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार करना होगा।\n• प्रशासन और चुनाव प्रबंधन के लिए: 16 सितंबर की नामांकन अंतिम तिथि से पहले नए सिंबल आवंटन के कारण चुनाव आयोग को नई मतपत्र व्यवस्था लागू करनी होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद तृणमूल कांग्रेस में आए राजनीतिक मोड़ और 60 से अधिक विधायकों के बागी धड़े में शामिल होने से यह विवाद उत्पन्न हुआ है।\n\n• विधायी बहुमत का दावा: ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने विधानसभा में 60 से अधिक विधायकों के समर्थन पत्र चुनाव आयोग को सौंपे हैं, जिसके आधार पर उन्होंने पार्टी प्रतीक पर दावा ठोका है।\n• 1972 के सादिक अली केस का कानूनी आधार: भारत में चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित सादिक अली सिद्धांत के तहत दल में विभाजन होने पर विधायी और संगठनात्मक बहुमत का आकलन करता है।\n• उपचुनाव की तात्कालिक समय-सीमा: 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया 16 सितंबर से शुरू हो रही है, जिससे आयोग को चुनाव चिह्न पर तुरंत फैसला या उसे फ्रीज करने का आदेश देना पड़ रहा है।\n• नेतृत्व और कार्यशैली पर मतभेद: पार्टी के भीतर लंबे समय से जारी प्रशासनिक असंतोष और फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर बागी गुट ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोला है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ऋतब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग के सामने क्या दावा पेश किया है?\nऋतब्रत बनर्जी ने 60 से अधिक तृणमूल कांग्रेस विधायकों के समर्थन का हवाला देकर पार्टी के आधिकारिक नाम और जोड़ाफूल चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश किया है।\n\n2. चुनाव आयोग में 1972 का सादिक अली केस किस प्रकार लागू होता है?\nसादिक अली केस के तहत चुनाव आयोग किसी पार्टी में विभाजन होने पर उसके विधायकों, सांसदों और सांगठनिक सदस्यों के बहुमत के आधार पर असली पार्टी का फैसला करता है।\n\n3. यदि 16 सितंबर से पहले सिंबल का फैसला नहीं हुआ तो क्या होगा?\nयदि 16 सितंबर की नामांकन तिथि तक फैसला नहीं हो पाता है, तो चुनाव आयोग जोड़ाफूल चिह्न को अस्थायी रूप से फ्रीज करके दोनों धड़ों को नए चुनाव चिह्न आवंटित कर सकता है।\n\n4. नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनाव की मुख्य तारीखें क्या हैं?\nनंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 16 सितंबर है और मतदान 6 अक्टूबर को आयोजित होगा।\n\n5. ऋतब्रत बनर्जी ने नंदीग्राम सीट को लेकर ममता बनर्जी को क्या पेशकश की है?\nउन्होंने कहा कि यदि ममता बनर्जी नंदीग्राम से निर्दलीय चुनाव लड़ने की इच्छा जताती हैं, तो उनका गुट अपने घोषित उम्मीदवार का नाम वापस ले लेगा।",
  "url": "https://trendkia.com/politics/west-bengal-men-asali-trinamool-congress-para-sngrama-ritabrata-banerjee-ne-chunava-ayoga-ke-samane-jora-phool-chunava-chihna-para-31509",
  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-09-12",
  "tags": [
    "तृणमूल कांग्रेस",
    "ऋतब्रत बनर्जी",
    "ममता बनर्जी",
    "चुनाव आयोग",
    "जोड़ाफूल सिंबल",
    "पश्चिम बंगाल राजनीति",
    "नंदीग्राम उपचुनाव"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}