# पश्चिम बंगाल में उपचुनाव से पहले टीएमसी में बढ़ी रार, ममता बनर्जी की विधानसभा वापसी पर कयास तेज

> पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और नंदीग्राम सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के असली नाम व चुनाव चिह्न पर दो गुटों के बीच जंग छिड़ गई है। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चुनाव मैदान में उतरने को लेकर सियासी चर्चाएं गर्म हैं।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-09-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/west-bengal-men-upachunava-se-pahale-tmc-men-barhi-rara-mamata-banerjee-ki-vidhanasabha-vapasi-para-kayasa-teja-31797 · **Language:** Hindi
**Tags:** पश्चिम बंगाल चुनाव, ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस, रिताब्रत बनर्जी, सुवेंदु अधिकारी, नंदीग्राम उपचुनाव, रेजीनगर विधानसभा

पश्चिम बंगाल में आगामी दो विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों से पहले राज्य का राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दो परस्पर विरोधी गुटों के बीच खींचतान तेज हो गई है। इसी गहमागहमी के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राज्य विधानसभा में सदस्य के रूप में लौटने की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। भारत निर्वाचन आयोग (EC) ने पार्टी के असली वजूद और चुनाव चिह्न पर मालिकाना हक साबित करने के लिए दोनों पक्षों को अपनी-अपनी दलीलें पेश करने की मोहलत दी है।

## चुनाव आयोग की मोहलत और पार्टी चिह्न पर खींचतान
पश्चिम बंगाल की दो महत्वपूर्ण सीटों पर 6 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे, जिसके लिए नामांकन पत्र दाखिल करने का अंतिम दिन बुधवार तय किया गया है। मतदान की तारीख नजदीक आते ही तृणमूल कांग्रेस के दोनों धड़े संगठन पर अपना नियंत्रण साबित करने के लिए चुनाव आयोग के पास पहुंच चुके हैं। एक तरफ ममता बनर्जी की अगुवाई वाला गुट है, जिसे उनके आवासीय पते की वजह से 'कालीघाट तृणमूल' के नाम से भी जाना जाता है। दूसरी तरफ पूर्व वामपंथी नेता और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रिताब्रत बनर्जी की कमान वाला गुट खड़ा है। दोनों ही समूह उपचुनाव से पहले आयोग से वास्तविक TMC के रूप में मान्यता हासिल करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।

## रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों का पूरा समीकरण
उपचुनाव की स्थिति राज्य की दो हाई-प्रोफाइल सीटों रेजीनगर और नंदीग्राम में विधायकों के त्यागपत्र के कारण उत्पन्न हुई है। रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद खाली घोषित की गई थी। कबीर ने अपनी नावदा सीट अपने पास बरकरार रखी और रेजीनगर छोड़ दी। हुमायूं कबीर को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के रेजीनगर क्षेत्र में अयोध्या की बाबरी मस्जिद जैसी एक मस्जिद के निर्माण की विवादास्पद योजना के बाद पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। अब कबीर ने ममता बनर्जी को रेजीनगर से ही चुनाव मैदान में उतरने का औपचारिक न्योता दिया है और वहां से उनकी आसान जीत सुनिश्चित करने का दावा किया है। दूसरी ओर, नंदीग्राम सीट मौजूदा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट के लिए खाली की थी। साल 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को नंदीग्राम में सुवेंदु अधिकारी से हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्हें लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए भवानीपुर उपचुनाव में उतरकर जीत दर्ज करनी पड़ी थी।

## विपक्षी गुटों के दांव-पेच और राजनीतिक गणित
इस बीच रिताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े ने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम का संकेत दिया है। उनके गुट के सदस्यों का कहना है कि यदि ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ने का फैसला करती हैं, तो वे वहां उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारेंगे। हालांकि, विपक्ष के नेता रिताब्रत बनर्जी ने इस विषय पर चुटकी लेते हुए कहा कि यदि ममता बनर्जी इस बार जीत हासिल भी कर लेती हैं, तो वह पुनर्मतदान के जरिए ही विधानसभा में प्रवेश कर पाएंगी। रिताब्रत बनर्जी का यह बयान ममता बनर्जी की पिछली दो लगातार पराजयों और उसके बाद पुनर्निर्वाचन प्रक्रिया के जरिए हासिल की गई सफलताओं की ओर इशारा कर रहा था। फिलहाल ममता बनर्जी या उनके कालीघाट स्थित खेमे ने आगामी उपचुनाव लड़ने को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं और कोई अंतिम बयान जारी नहीं किया है।

## बीजेपी को संभावित बढ़त और ममता गुट की मौजूदा चुनौतियां
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि रिताब्रत गुट नंदीग्राम में अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं करता है, तो इसका सीधा फायदा राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिल सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि विरोधी धड़े की उपस्थिति ममता बनर्जी के खिलाफ पड़ने वाले मतों को विभाजित कर सकती है। इससे उन मतदाताओं को एक नया विकल्प मिल जाएगा जो पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार की नीतियों से असंतुष्ट हैं लेकिन सीधे तौर पर BJP को समर्थन नहीं देना चाहते। इसके अलावा, ममता बनर्जी का खेमा इस समय बहुआयामी दबावों का सामना कर रहा है। इस साल के चुनावों में मिली हार, कई वरिष्ठ नेताओं, सांसदों और विधायकों का पाला बदलना, तथा ममता बनर्जी के भतीजे एवं पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी सहित कई प्रमुख चेहरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई व गिरफ्तारियां शुरू होने से जुझारू पूर्व मुख्यमंत्री का गुट सांगठनिक रूप से कमजोर नजर आ रहा है।

## इसका आप पर असर
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक घटनाक्रम और आगामी उपचुनावों का असर आम नागरिकों और राज्य की भावी प्रशासनिक नीतियों पर सीधा पड़ेगा।

- **भारत में:** राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक विश्लेषक इस उपचुनाव को तृणमूल कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय क्षत्रपों के प्रभाव के रूप में देख रहे हैं। इसका प्रभाव आगामी राष्ट्रीय राजनीतिक गठबंधनों और संसद में विपक्षी एकजुटता की रणनीति पर भी पड़ेगा।
- **पश्चिम बंगाल में:** रेजीनगर और नंदीग्राम के मतदाताओं के लिए यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि 6 अक्टूबर को होने वाला मतदान नए विधायकों का चुनाव करेगा। इससे स्थानीय विकास परियोजनाओं, प्रशासनिक कार्यों और क्षेत्रीय नेतृत्व के भविष्य का निर्धारण होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
तृणमूल कांग्रेस में चल रहा यह विवाद और उपचुनावों की नौबत विधायकों के इस्तीफों और पार्टी के भीतर उत्पन्न सांगठनिक विभाजन की वजह से आई है।

- **सीटों का खाली होना:** रेजीनगर सीट से विधायक हुमायूं कबीर ने इस्तीफा देकर अपनी दूसरी सीट नावदा अपने पास रखी, जबकि नंदीग्राम सीट को सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर के लिए खाली किया था।
- **बाबरी मस्जिद विवाद:** हुमायूं कबीर द्वारा रेजीनगर में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति बनाने के फैसले के बाद उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया था, जिससे वहां राजनीतिक संकट गहराया।
- **पार्टी का दोहाड़ विभाजन:** चुनाव में मिली हार, नेताओं के पाला बदलने और कानूनी कार्रवाइयों के बीच ममता बनर्जी के कालीघाट गुट और रिताब्रत बनर्जी के गुट के बीच असली TMC और चुनाव चिह्न पर दावा पेश करने की होड़ शुरू हुई है।

## सवाल-जवाब

### 1. रेजीनगर और नंदीग्राम सीटों पर उपचुनाव कब होंगे?
इन सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा और नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि बुधवार रखी गई है।

### 2. तृणमूल कांग्रेस पर दावेदारी को लेकर कौन-से दो मुख्य गुट आमने-सामने हैं?
पहला गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला 'कालीघाट तृणमूल' है और दूसरा गुट पूर्व वामपंथी नेता रिताब्रत बनर्जी की अगुवाई में है।

### 3. रेजीनगर सीट खाली क्यों हुई थी?
यह सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी, जिन्होंने रेजीनगर में बाबरी मस्जिद की नकल बनाने के विवाद के बाद इस्तीफा दिया और अपनी नावदा सीट अपने पास रखी।

### 4. रिताब्रत बनर्जी गुट का नंदीग्राम सीट को लेकर क्या रुख है?
रिताब्रत बनर्जी के गुट ने कहा है कि यदि ममता बनर्जी स्वयं नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं, तो वे उनके खिलाफ अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं करेंगे।

### 5. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को किन मुख्य चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?
ममता बनर्जी का गुट हालिया चुनाव में हार, कई नेताओं के पाला बदलने और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी सहित प्रमुख नेताओं के खिलाफ शुरू हुई कानूनी कार्रवाई व गिरफ्तारियों से जूझ रहा है।

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