# पश्चिम बंगाल में शहरी चुनावों से पहले ममता बनर्जी ने कसी कमर, वफादार कार्यकर्ताओं की मांग रही सूचियां

> पश्चिम बंगाल में इस साल के अंत तक होने वाले सात शहरी निकाय चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। ममता बनर्जी ने अपने खेमे के वफादार नेताओं और कार्यकर्ताओं की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं ताकि चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा मजबूत किया जा सके।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-10-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/west-bengal-men-urban-elections-se-pahale-mamata-banerjee-ne-kasi-kamara-51840 · **Language:** Hindi
**Tags:** पश्चिम बंगाल, ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस, शहरी निकाय चुनाव, ऋतब्रत बनर्जी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में आगामी सात शहरी निकाय चुनावों को लेकर सरगर्मी काफी बढ़ गई है। साल के आखिरी महीनों में होने वाले इन स्थानीय चुनावों के मद्देनजर तृणमूल कांग्रेस की एक प्रमुख नेता ने अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पार्टी के भीतर चल रही खींचतान के बीच वफादार कार्यकर्ताओं की पहचान करना इस रणनीति का मुख्य हिस्सा बन गया है।

नेतृत्व ने जिला स्तर पर उन सभी जमीनी कार्यकर्ताओं और नेताओं का पूरा विवरण जुटाने का काम शुरू कर दिया है जो ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े हैं। जैसे ही जिलों से ये फेहरिस्त केंद्रीय नेतृत्व को मिल जाएगी, पार्टी आलाकमान राज्य स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक करेगा। इस मंत्रणा के दौरान ही आगामी शहरी निकाय चुनावों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी और चुनाव जीतने की ठोस रणनीति भी तैयार की जाएगी।

इस पूरी कवायद के पीछे चुनाव आयोग के समक्ष अपनी दावेदारी को पुख्ता करना मुख्य वजह है। पार्टी के एक जिम्मेदार पदाधिकारी ने बताया कि वफादारों की यह सत्यापित सूची भारतीय चुनाव आयोग को सौंपी जाएगी ताकि यह कानूनी रूप से साबित किया जा सके कि असली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और ‘फूल और घास’ वाला चुनाव चिह्न किसके पास रहना चाहिए। इसके साथ ही जिला स्तर के कार्यकर्ताओं से शपथ-पत्र हासिल करने का सिलसिला भी जोरों पर चल रहा है।

हालांकि इस प्रक्रिया में सांगठनिक अड़चनों का सामना भी करना पड़ रहा है। अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि राज्य सरकार की मशीनरी और पुलिस स्थानीय स्तर के कार्यकर्ताओं पर यह दबाव बना रही है कि वे बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के गुट के समर्थन में शपथ-पत्रों पर अपने हस्ताक्षर करें। इसके बावजूद ममता खेमे के कार्यकर्ता अपनी निष्ठा पर डटे हुए हैं और प्रशासनिक दबाव के आगे झुकने से इनकार कर रहे हैं।

पूर्व मेदिनीपुर के नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद के रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में हाल ही में संपन्न हुए उपचुनावों की तर्ज पर ही इस बार भी ममता बनर्जी के गुट को नए नाम और नए चुनाव चिह्न के साथ चुनावी मैदान में उतरना होगा। इस खेमे को आधिकारिक रूप से “ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस” नाम और “फुटबॉल खिलाड़ी” वाला चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है, जिसके सहारे वे अपनी राजनीतिक जमीन बचाने उतरेंगे।

दूसरी तरफ, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी खेमा ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम से चुनाव लड़ेगा और उन्हें निर्वाचन आयोग की तरफ से ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न मिला है। कोलकाता नगर निगम और हावड़ा नगर निगम समेत कुल सात शहरी निकायों के लिए मतदान प्रक्रिया नवंबर माह के अंतिम सप्ताह में संपन्न होने की पूरी संभावना है, जबकि इन सभी चुनावों के परिणाम दिसंबर के शुरुआती सप्ताह में सार्वजनिक किए जा सकते हैं।

चुनावी समीकरणों की बात करें तो ममता बनर्जी का गुट कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर इन चुनावों को लड़ना चाहता था ताकि विपक्षी ताकतों को एकजुट रखा जा सके। लेकिन कांग्रेस की प्रदेश इकाई ने इस तरह के किसी भी चुनावी गठबंधन से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। वहीं दूसरी ओर, बागी नेता ऋतब्रत का खेमा भी पूरी तरह से अकेले ही दम पर चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर चुका है, जिससे त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबले के आसार बन गए हैं।

## इसका आप पर असर
इन चुनावों का असर स्थानीय नागरिकों और शहरी विकास से जुड़े मुद्दों पर सीधा पड़ेगा।

- **राज्य स्तर पर:** कोलकाता और हावड़ा समेत सात प्रमुख शहरी निकायों में मतदान होने से स्थानीय प्रशासन और नागरिक सेवाओं की गतिशीलता प्रभावित होगी। मतदाता अपने इलाकों में बुनियादी नागरिक सुविधाओं के भविष्य को लेकर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
- **राजनीतिक स्तर पर:** इन चुनावों के परिणाम राज्य में पार्टी के भीतर वर्चस्व की लड़ाई की दिशा तय करेंगे। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि आम जनता का झुकाव किस राजनीतिक धड़े और संगठन की तरफ है।

## ऐसा क्यों हुआ
इन चुनावों के आयोजन और सांगठनिक संघर्ष के पीछे राजनीतिक वर्चस्व और कानूनी मान्यता की लड़ाई मुख्य वजह है।

- **आंतरिक कलह:** पार्टी के भीतर हुए वैचारिक और नेतृत्वगत मतभेदों के कारण दो अलग-अलग धड़े बन गए हैं।
- **वैधानिक दावेदारी:** चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के मूल नाम और चुनाव चिह्न पर अधिकार जमाने के लिए वफादार कार्यकर्ताओं का समर्थन जरूरी हो गया है।
- **गठबंधन की विफलता:** कांग्रेस पार्टी द्वारा गठबंधन से इनकार किए जाने के बाद सभी पक्ष अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरने को विवश हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. पश्चिम बंगाल में कितने शहरी निकायों के चुनाव होने वाले हैं?
पश्चिम बंगाल में इस साल के अंत तक कुल सात शहरी निकायों के चुनाव होने हैं।

### 2. ममता बनर्जी के गुट को कौन सा नया नाम और चुनाव चिह्न मिला है?
ममता बनर्जी के गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न मिला है।

### 3. ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट का चुनाव चिह्न क्या है?
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट को 'लिफाफा' चुनाव चिह्न और 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम मिला है।

### 4. कोलकाता और हावड़ा नगर निगमों के चुनाव कब संभावित हैं?
कोलकाता और हावड़ा नगर निगमों समेत सात शहरी निकायों के लिए मतदान नवंबर के आखिरी हफ्ते में होने की संभावना है।

### 5. क्या कांग्रेस इन चुनावों में ममता गुट के साथ गठबंधन कर रही है?
नहीं, कांग्रेस की राज्य इकाई ने निकाय चुनावों में गठबंधन करने से साफ इनकार कर दिया है।

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