# अटल बिहारी वाजपेयी का पुराना संसद भाषण क्यों वायरल है, जब चीनी हुई थी 20 रुपये किलो?

> देश में चीनी के दाम बढ़ने के बीच पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का पुराना संसद भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने 20 रुपये प्रति किलो चीनी होने पर सरकार को घेरा था।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-08-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/why-atala-bihar-i-vajapeyis-old-parliament-speech-on-sugar-prices-is-viral-again-20691 · **Language:** Hindi
**Tags:** अटल बिहारी वाजपेयी, चीनी की कीमत, महंगाई, संसद भाषण, खाद्य मंत्रालय

देश के कई हिस्सों में चीनी की कीमतें बढ़ने के बाद रसोई का बजट गड़बड़ा गया है और कई राज्यों में इसके दाम 60 रुपये प्रति किलो के आंकड़े को पार कर चुके हैं। इस मौजूदा हालात के बीच पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का संसद में दिया गया वर्षों पुराना एक भाषण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उस दौर में जब चीनी की कीमत करीब 20 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी, तब विपक्ष के नेता के तौर पर अटल बिहारी वाजपेयी ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार की नीतियों, प्रशासनिक तैयारियों और महंगाई से निपटने के तौर-तरीकों पर बेहद तीखे सवाल उठाए थे।

## संसद में सरकार से पूछे गए थे तीखे सवाल
अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद के भीतर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए यह सवाल किया था कि यदि चीनी का भाव 20 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, तो इसके पीछे आखिर क्या कारण हैं। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि क्या शासन तंत्र को इस बात का पहले से कोई अंदाजा नहीं था कि गन्ने का उत्पादन कम हो सकता है और उसके परिणामस्वरूप देश में चीनी की भारी किल्लत पैदा हो जाएगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि जब उत्पादन घटने की पूरी आशंका बनी हुई थी, तो विदेशों से समय रहते चीनी मंगाने के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

## निर्णय प्रक्रिया और मंत्रालयों के बीच खींचतान
उनका यह विरोध सिर्फ बढ़ती कीमतों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने सरकार की पूरी निर्णय प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने सदन में कहा था कि चीनी के आयात जैसा महत्वपूर्ण फैसला कौन लेगा, यह बात तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी और एक मंत्रालय अपनी नाकामी छुपाने के लिए जिम्मेदारी दूसरे मंत्रालय पर टाल रहा था। उन्होंने सरकार के भीतर आपसी तालमेल की भारी कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि एक विभाग दूसरे विभाग को दोष दे रहा है और एक मंत्री सरेआम अपने ही सचिव को डांट-फटकार लगा रहा है। ऐसी असमंजस की स्थिति में प्रधानमंत्री का सचिवालय आखिर क्या कर रहा है, यह एक बड़ा सवाल था।

## मुनाफाखोरी और विदेशी आयात की जांच की मांग
चीनी के दामों में आए इस उछाल के पीछे छिपी संभावित मुनाफाखोरी का मुद्दा भी अटल बिहारी वाजपेयी ने जोरदार ढंग से उठाया था। उनका कहना था कि खुले बाजार में चीनी के दाम बढ़ने की वजह से देश के बड़े उद्योगपतियों और व्यापारियों ने करोड़ों रुपये का भारी मुनाफा कमाया है। उन्होंने सदन के पीठासीन अधिकारी से मुखातिब होकर कहा था कि विदेशों से चीनी मंगाने के पूरे पहलू और तौर-तरीकों की गहन जांच करवाना बेहद आवश्यक है। उनका यही पुराना और चर्चित भाषण अब आज के मौजूदा संकट के दौर में सोशल मीडिया पर फिर से लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

## वर्तमान में क्यों चर्चा में आया पुराना वीडियो
अटल बिहारी वाजपेयी का वह पुराना वीडियो ऐसे समय में दोबारा सामने आया है जब देश भर में चीनी के खुदरा मूल्यों में तेज उछाल देखा जा रहा है और सरकार की तरफ से इसके अलग-अलग कारण गिनाए जा रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान चीनी के दाम लगातार ऊपर गए हैं। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, 20 जुलाई को देश में चीनी का राष्ट्रीय औसत खुदरा मूल्य 48.18 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया था, जो 20 अगस्त को बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया। इसके ठीक अगले दिन यानी 21 अगस्त को राष्ट्रीय औसत कीमत और बढ़कर 58.23 रुपये प्रति किलो हो गई।

## राज्यों में बढ़े हुए दाम और महंगाई की रफ्तार
अगर विभिन्न राज्यों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और भी स्पष्ट हो जाती है। ओडिशा में चीनी की खुदरा कीमत उछलकर 64.72 रुपये प्रति किलो तक जा पहुंची। केवल एक साल के भीतर इस राज्य में चीनी की कीमत में 17.80 रुपये प्रति किलो की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में भी कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। दिल्ली, मध्य प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल, गोवा, केरल, असम, त्रिपुरा और मेघालय सहित देश के कई अन्य राज्यों में उपभोक्ताओं को चीनी के लिए 60 रुपये प्रति किलो से ज्यादा की कीमत चुकानी पड़ रही है। मध्य प्रदेश में पिछले एक महीने के अंतराल में चीनी के दाम में करीब 15.70 रुपये प्रति किलो की तेजी आई है, जबकि पंजाब में यह बढ़ोतरी 14.67 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से साफ है कि कुछ चुनिंदा राज्यों में महंगाई बढ़ने की रफ्तार देश के राष्ट्रीय औसत से भी कहीं अधिक तेज रही है।

## सरकार की ओर से महंगे दामों के बताए गए कारण
केंद्र सरकार ने चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई मुख्य वजहों का हवाला दिया है। सरकार का कहना है कि गन्ने का कुल उत्पादन अनुमान से काफी कम रहना, आगामी त्योहारी सीजन से ठीक पहले मांग में अचानक बढ़ोतरी होना, मौसम की बेरुखी के कारण गन्ने की फसल को हुआ नुकसान, वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति का कम होना तथा देश के कुछ हिस्सों में जमाखोरी और सट्टेबाजी की घटनाएं इसके मुख्य कारण हैं। सरकार के मुताबिक, चालू सीजन के दौरान देश में चीनी का कुल उत्पादन लगभग 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि शुरुआत में प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों ने करीब 343 LMT उत्पादन होने का आकलन किया था। यानी शुरुआती उम्मीद के मुकाबले उत्पादन काफी कम रहने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इसके अलावा, अतिरिक्त चीनी को एथेनॉल उत्पादन की तरफ मोड़े जाने से चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति में जरूर सुधार हुआ है।

## कीमतों पर लगाम लगाने के लिए उठाए गए कदम
बढ़ती हुई कीमतों पर नियंत्रण पाने के मकसद से केंद्र सरकार ने देश के चीनी डीलरों के लिए 1 अगस्त से लेकर 30 नवंबर तक की अवधि के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा तय कर दी है। इसके अतिरिक्त 1 सितंबर से थोक उपभोक्ताओं को भी अपनी 15 दिनों की खपत से अधिक मात्रा में चीनी का स्टॉक अपने पास रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के वास्ते सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की भी मंजूरी दे दी है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन सभी सख्त कदमों के जरिए बाजार में आपूर्ति को सुचारू रखना और आम उपभोक्ताओं के लिए चीनी की कीमतों को स्थिर बनाए रखना है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** चीनी के दाम 60 रुपये प्रति किलो पार होने से आम नागरिकों की रसोई का मासिक बजट प्रभावित हो रहा है।

**राज्यों में:** ओडिशा, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में खुदरा कीमतें अधिक होने के कारण उपभोक्ताओं को अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. अटल बिहारी वाजपेयी का कौन सा भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है?
वाजपेयी का वह पुराना संसद भाषण वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने चीनी की कीमत 20 रुपये किलो होने पर तत्कालीन सरकार से सवाल किए थे।

### 2. वर्तमान में चीनी की राष्ट्रीय औसत खुदरा कीमत क्या है?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 21 अगस्त को चीनी की राष्ट्रीय औसत कीमत 58.23 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई थी।

### 3. किस राज्य में चीनी सबसे महंगी दर्ज की गई?
ओडिशा में चीनी की खुदरा कीमत 64.72 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

### 4. सरकार ने चीनी की कीमतें नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने डीलरों पर स्टॉक लिमिट लगाई है और 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है।

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