# मेरठ में दिया गया नरेंद्र मोदी का पुराना भाषण सोशल मीडिया पर क्यों छाया हुआ है

> राजधानी दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फरवरी में मेरठ में दिया गया एक पुराना भाषण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/why-narendra-modi-s-past-speech-from-meerut-is-gaining-traction-on-social-media-48111 · **Language:** Hindi
**Tags:** नरेंद्र मोदी, मेरठ भाषण, संसद विरोध, कांग्रेस, राहुल गांधी, राजनीति, दिल्ली प्रदर्शन

देश की राजधानी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर 10 अक्टूबर 2026 को प्रदर्शन करने का प्रयास किया गया था, जिसके बाद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला और 16 अक्टूबर शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क से लहरा दो तिरंगा मार्च आयोजित करने की घोषणा की है। इन तमाम घटनाक्रमों और लगातार हो रहे प्रदर्शनों के कारण आम नागरिकों के साथ कारोबारियों को भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन आंदोलनों में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की भूमिका बेहद अहम रही है। इसी माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस साल फरवरी में मेरठ में दिया गया एक पुराना भाषण सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री बनने के लिए जनता का दिल जीतना आवश्यक है।

## मेरठ की जनसभा और संसद का विवाद
मौजूदा समय में जब विरोध प्रदर्शनों के चलते जनता और व्यापारी वर्ग परेशान है और युवा सड़कों पर हैं, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फरवरी का वह भाषण इंटरनेट पर छाया हुआ है। इस साल फरवरी में मेरठ में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने संसद के भीतर विपक्ष के रवैये पर कड़ा प्रहार किया था। प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर देश में अराजकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए साफ शब्दों में कहा था कि भारत का प्रधानमंत्री बनने के लिए केवल विरोध से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसके लिए देश की जनता का भरोसा जीतना होगा। उनका यह तीखा बयान उस घटना के तुरंत बाद सामने आया था जब संसद सत्र के दौरान विपक्षी दलों की कुछ महिला सांसद तख्तियां और बैनर लेकर सीधे प्रधानमंत्री की आसंदी के पास पहुंच गई थीं और वहां जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था।

## अराजकता और महिला सांसदों की भूमिका पर सवाल
मेरठ की उस रैली में प्रधानमंत्री ने विपक्षी खेमे को चेतावनी देते हुए कहा था कि अराजकता फैलाने वाले इस बात को अच्छी तरह समझ लें कि 140 करोड़ देशवासी उनके किसी भी नापाक मंसूब्रे को कभी पूरा नहीं होने देंगे। उन्होंने तीखा सवाल उठाया था कि आखिर विपक्षी दलों की ऐसी क्या मजबूरी थी जिसके चलते उन्हें अपनी राजनीतिक बात रखने के लिए देश की माताओं और बहनों को आगे करना पड़ा। प्रधानमंत्री ने महिला सांसदों को आगे करके देश के शीर्ष पद पर कब्जा जमाने की इस रणनीति को भारतीय लोकतंत्र और संसद की गरिमा के लिए एक बड़ा खतरा करार दिया था। अपने इस संबोधन के दौरान उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर सीधा हमला बोलते हुए उसे पूरी तरह खोखला बताया था, जिससे संसद के भीतर और बाहर सियासी पारा चढ़ गया था।

## संसदीय मर्यादा और राजनीतिक टकराव की पृष्ठभूमि
फरवरी महीने में संसद के भीतर जो हंगामा हुआ था, उसमें कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों की महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री की सीट के नजदीक पहुंचकर पोस्टर और बैनर लहराए थे। इस घटना के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई थी। भारतीय जनता पार्टी ने इसे संसदीय परंपराओं और गरिमा के पूरी तरह खिलाफ बताया था, जबकि विपक्षी दलों का कहना था कि वे सरकार की जनविरोधी नीतियों और अपने महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। इस पूरे प्रकरण ने सदन के भीतर विरोध जताने के तौर-तरीकों, राजनीतिक जवाबदेही और सदन की गरिमा को लेकर देश भर में एक लंबी बहस छेड़ दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मेरठ में दिया गया वह भाषण इसी गर्माए हुए राजनीतिक टकराव की पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ था। उन्होंने अपने संबोधन में जनता के अटूट समर्थन को ही सत्ता की असली चाबी बताते हुए विपक्ष को यह स्पष्ट संदेश दिया था कि शॉर्टकट या केवल विरोध प्रदर्शनों के बल पर देश के प्रधानमंत्री पद तक नहीं पहुंचा जा सकता है।

## इसका आप पर असर
इन राजनीतिक गतिविधियों और विरोध प्रदर्शनों का सीधा असर आम नागरिकों की रोजमर्रा की आवाजाही और व्यापारियों के कारोबार पर पड़ रहा है।

- **दिल्ली में:** कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में मार्च और सुरक्षा पाबंदियों के कारण यातायात बाधित हो सकता है और स्थानीय बाजारों में कामकाज प्रभावित हो सकता है।
- **व्यापारियों के लिए:** लगातार होने वाले आंदोलनों और सुरक्षा घेराबंदी के चलते दुकानदारों को ग्राहकों की आवामी में कमी और व्यावसायिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
- **आम जनता के लिए:** राजधानी में बार-बार निकलने वाले जुलूसों और पुलिस पहरे के कारण दैनिक यात्रियों को रूट डायवर्जन और भारी ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ सकता है।
- **राष्ट्रीय स्तर पर:** संसद के भीतर के घटनाक्रम और राजनीतिक दलों के बीच चल रहे टकराव का असर देश की नीतिगत चर्चाओं और विधाई कामकाज पर पड़ता है।
- **राजनीतिक माहौल में:** इस तरह के बयानों और विरोध प्रदर्शनों से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वैचारिक और राजनीतिक तनाव और अधिक बढ़ जाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुराना भाषण और मौजूदा राजनीतिक विरोध प्रदर्शन कई प्रशासनिक और राजनीतिक घटनाओं के कारण चर्चा में आए हैं।

- **चुनावी आयोग से जुड़ा विवाद:** मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर राजधानी में विभिन्न समूहों द्वारा विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।
- **संसदीय व्यवधान:** फरवरी में संसद सत्र के दौरान विपक्षी महिला सांसदों द्वारा प्रधानमंत्री की सीट के पास जाकर बैनर लहराने की घटना ने तीखे राजनीतिक टकराव को जन्म दिया था।
- **राजनीतिक रणनीतियां:** सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने राजनीतिक एजेंडे और नीतियों को जनता के सामने रखने के लिए रैलियों, मार्च और बयानों का सहारा ले रहे हैं।
- **कानून व्यवस्था के कदम:** प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और यातायात को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को कड़े सुरक्षा इंतजाम करने पड़ रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. नरेंद्र मोदी का वायरल भाषण किस जगह दिया गया था?
यह भाषण इस साल फरवरी में मेरठ में एक जनसभा के दौरान दिया गया था।

### 2. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में विपक्ष पर क्या आरोप लगाया था?
उन्होंने विपक्ष पर देश में अराजकता फैलाने का आरोप लगाया था और कहा था कि प्रधानमंत्री बनने के लिए जनता का दिल जीतना जरूरी है।

### 3. संसद में फरवरी के दौरान कौन सी घटना हुई थी?
संसद सत्र के दौरान विपक्ष की कुछ महिला सांसद बैनर और पोस्टर लेकर प्रधानमंत्री की कुर्सी के नजदीक पहुंच गई थीं।

### 4. दिल्ली में किन मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं?
राजधानी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

### 5. किस पार्टी के आह्वान पर 10 अक्टूबर 2026 को प्रदर्शन का प्रयास किया गया था?
यह प्रयास कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर किया गया था।

### 6. 16 अक्टूबर को कौन सा मार्च निकाले जाने की घोषणा की गई है?
कॉकरोच जनता पार्टी ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क से लहरा दो तिरंगा मार्च निकालने का ऐलान किया है।

### 7. इस राजनीतिक घटनाक्रम में किस प्रमुख नेता की मुख्य भूमिका बताई गई है?
इस घटनाक्रम में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की भूमिका अहम बताई गई है।

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