यूसुफ पठान को गुजरात सरकार से जमीन मिलने का रास्ता साफ, वडोदरा नगर निगम में प्रस्ताव पेश गुजरात सरकार ने वडोदरा में यूसुफ पठान को आवासीय भूखंड का एक हिस्सा मुफ्त और बाकी जमीन 45 प्रतिशत रियायत पर देने का प्रस्ताव रखा है। इस मामले पर 23 अक्टूबर को वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति में विचार किया जाएगा। गुजरात सरकार की ओर से एक बड़ा कदम उठाया गया है, जिसके तहत वडोदरा में एक आवासीय भूखंड का बड़ा हिस्सा मुफ्त और शेष हिस्सा रियायती दरों पर उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। यह मामला काफी समय से चर्चा में रहा है और अब इस पर अंतिम फैसला लेने के लिए वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति के सामने प्रस्ताव रखा गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि इससे जुड़ा विवाद पिछले एक दशक से भी अधिक समय से चल रहा था। वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति में होगा विचार प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुल 978 वर्गमीटर के इस भूखंड का 500 वर्गमीटर हिस्सा मुफ्त में दिए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, बाकी बची हुई 478 वर्गमीटर जमीन को 45 प्रतिशत की छूट के साथ उपलब्ध कराने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। वडोदरा नगर निगम के आयुक्त की तरफ से यह प्रस्ताव पेश किया गया है, जिस पर 23 अक्टूबर को वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति की बैठक में विचार किया जाएगा और इसे अंतिम मंजूरी दिए जाने पर मुहर लग सकती है। शेष जमीन के लिए तय की गई है विशेष मूल्यांकन दर प्रस्ताव के मुताबिक, जो हिस्सा मुफ्त में नहीं दिया जाएगा, उसकी कीमत का निर्धारण वडोदरा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी की मूल्यांकन समिति द्वारा तय की गई दर के आधार पर किया जाएगा। इस शेष जमीन की कीमत निर्धारित दर की 55 प्रतिशत रखी गई है, जिसका सीधा मतलब यह है कि जमीन हासिल करने वाले पक्ष को बाकी हिस्से पर 45 प्रतिशत की भारी छूट का लाभ मिलेगा। वर्ष 2012 से चला आ रहा है जमीन का पुराना विवाद यह पूरा विवाद वडोदरा के तांदलजा इलाके से जुड़ा हुआ है, जहां यह भूखंड स्थित है और यह आवासीय जमीन से जुड़ा मामला काफी पुराना है। संबंधित पक्ष द्वारा वर्ष 2012 से इस जमीन को प्राप्त करने की मांग की जा रही थी। शुरुआती दौर में वडोदरा नगर निगम ने इस जमीन को बेचने पर अपनी सहमति जता दी थी, लेकिन साल 2014 में गुजरात सरकार ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था, जिसके बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया था और विवाद गहराता गया था। अतिक्रमण हटाने का नोटिस और कानूनी लड़ाई विवाद तब एक बार फिर चर्चा में आया जब नगर निगम की ओर से कथित अतिक्रमण हटाने और जमीन खाली करने का औपचारिक नोटिस जारी किया गया। इस कार्रवाई के खिलाफ गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया और अदालत में दलील दी गई कि मामला एक दशक से ज्यादा पुराना है और कोई भी कठोर कदम उठाने से पहले विधिवत कारण बताओ नोटिस दिया जाना चाहिए था। साथ ही यह भी तर्क दिया गया था कि यह जमीन राज्य सरकार की न होकर नगर निगम के अधीन आती है। हाई कोर्ट में अपील और कानूनी प्रक्रिया का समापन हालांकि शुरुआती कानूनी मोर्चे पर हाई कोर्ट ने भूखंड के आवंटन के अनुरोध को नामंजूर करने वाले राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराया था, जिसके बाद खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की गई थी। इस साल के अगस्त महीने के दौरान अदालत में सुनवाई के दौरान यह पक्ष रखा गया कि राज्य सरकार की मौजूदा नीति के तहत ही अपना दावा आगे बढ़ाया जाएगा। इसके बाद अपील को वापस लेने की अनुमति के साथ उस कानूनी प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया था। राजनीतिक घटनाक्रम और ताजा परिस्थितियां यह पूरा मामला ऐसे समय में दोबारा सुर्खियों में आया है जब राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिले हैं। पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से निर्वाचन के बाद राजनीतिक घटनाक्रम बदले और संसद में नई परिस्थितियों के बीच फैसले लिए गए। अब वडोदरा नगर निगम के आयुक्त द्वारा लाए गए इस नए प्रस्ताव के बाद एक बार फिर से इस भूखंड के आवंटन की प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि अंतिम फैसला 23 अक्टूबर की बैठक के बाद ही सामने आएगा। इसका आप पर असर यह प्रस्ताव मुख्य रूप से स्थानीय निकाय और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों की बजाय संबंधित राजनीतिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर पड़ेगा। • भारत में: इस तरह के मामलों से सार्वजनिक संपत्तियों के आवंटन और रियायतों को लेकर प्रशासनिक नियमों पर बहस तेज होती है। देश भर के स्थानीय निकायों में जमीन के विवाद और उनके निपटारे की नीतियां चर्चा का विषय बनती हैं। • वडोदरा में: वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति के फैसले से शहर के तांदलजा इलाके की इस विशेष जमीन की स्थिति स्पष्ट होगी। स्थानीय स्तर पर सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन और नियमों को लेकर नागरिकों की नजरें इस पर टिकी हैं। ऐसा क्यों हुआ यह प्रस्ताव वडोदरा नगर निगम के आयुक्त द्वारा पेश किया गया है, जिसकी पृष्ठभूमि में एक दशक से अधिक पुराना जमीन का विवाद और कानूनी लड़ाइयां शामिल हैं। वर्ष 2012 से चल रहे इस मामले में पहले राज्य सरकार द्वारा प्रस्ताव खारिज किए जाने और बाद में अदालतों में चली लंबी प्रक्रिया के कारण यह मामला बार-बार चर्चा में आया है। • लंबा विवाद: वडोदरा के तांदलजा इलाके में स्थित इस भूखंड को लेकर वर्ष 2012 से मांग की जा रही थी, जिसे पहले नगर निगम ने अनुमति दी थी लेकिन 2014 में राज्य सरकार ने रद्द कर दिया था। • कानूनी हस्तक्षेप: नगर निगम द्वारा अतिक्रमण हटाने का नोटिस दिए जाने के बाद मामला गुजरात हाई कोर्ट पहुंचा, जहां कानूनी लड़ाइयों के बाद अपील वापस ली गई और सरकारी नीति के तहत दावा आगे बढ़ाने का रास्ता चुना गया। • राजनीतिक घटनाक्रम: राजनीतिक बदलावों और संसद में नए समीकरणों के बाद इस प्रशासनिक प्रस्ताव के आने से यह मामला एक बार फिर से निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में आ गया है। सवाल-जवाब 1. यूसुफ पठान को वडोदरा में कितनी जमीन देने का प्रस्ताव है? वडोदरा नगर निगम के प्रस्ताव के मुताबिक कुल 978 वर्गमीटर जमीन का आवंटन किया जाना है। 2. जमीन का कितना हिस्सा मुफ्त और कितना रियायती दर पर मिलेगा? कुल जमीन में से 500 वर्गमीटर हिस्सा मुफ्त देने और शेष 478 वर्गमीटर जमीन 45 प्रतिशत रियायत पर देने का प्रस्ताव है। 3. इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय कब लिया जाएगा? इस प्रस्ताव पर 23 अक्टूबर को वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति की बैठक में विचार किया जाएगा। 4. यह जमीन विवाद कब से चला आ रहा है? यह जमीन विवाद वर्ष 2012 से चल रहा है जब इसे खरीदने की मांग शुरू हुई थी। 5. गुजरात सरकार ने इस प्रस्ताव को पहले कब खारिज किया था? गुजरात सरकार ने वर्ष 2014 में इस जमीन को बेचने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। 6. इस मामले को लेकर कौन सी अदालत में याचिका दायर की गई थी? नगर निगम के नोटिस के खिलाफ यूसुफ पठान ने गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। https://trendkia.com/politics/yusuf-pathan-ko-gujarat-sarkar-se-zamin-milne-ka-rasta-saf-vadodara-nagar-nigam-mein-prastav-pesh-49792 TrendKia — Har trend, sabse pehle.