युवाओं और GEN-Z के मुद्दों पर प्रयागराज से राहुल गांधी की हुंकार, पूर्वांचल की राजनीति में क्या 2027 से पहले बड़ा बदलाव आएगा? प्रयागराज के केपी ग्राउंड में राहुल गांधी ने GEN-Z और प्रतियोगी छात्रों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। शिक्षा, रोजगार और पेपर लीक के मुद्दों के जरिए कांग्रेस पूर्वांचल में अपनी राजनीतिक पैठ मजबूत करने में जुटी है। उत्तर प्रदेश की भावी राजनीति का रुख तय करने में पूर्वांचल हमेशा से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। साल 2024 के आम चुनाव में प्रयागराज संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी उज्ज्वल रमण सिंह की जीत और उसके बाद समाजवादी पार्टी तथा कांग्रेस गठबंधन के प्रदर्शन ने इलाके के राजनीतिक गणित को नया आयाम दिया था। अब 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले ही राजनीतिक बिसात बिछने लगी है। इसी क्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रयागराज का दौरा कर वहां के प्रतियोगी छात्रों और युवाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित किया है। प्रयागराज में ‘छात्रों की गूंज’ नाम से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम के बाद वे दिल्ली लौट गए हैं, लेकिन इस दौरे से राज्य के राजनीतिक हलकों में एक नई बहस शुरू हो गई है कि क्या यह संवाद 2027 के चुनाव में किसी बड़े बदलाव का आधार बनेगा। छात्र संवाद के मुख्य बिंदु और इलाहाबाद विश्वविद्यालय का संकट प्रयागराज के ऐतिहासिक केपी ग्राउंड में आयोजित इस विशाल संवाद कार्यक्रम में हजारों की संख्या में युवाओं और प्रतियोगी छात्रों ने भाग लिया। इस मंच से राहुल गांधी ने भर्ती परीक्षाओं में बनी अनिश्चितता, गिरते शैक्षणिक स्तर और रोजगार के घटते अवसरों को जोर-शोर से उठाया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के GEN-Z छात्रों ने मंच पर अपनी आपबीती साझा करते हुए कई गंभीर मुद्दे सामने रखे। छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अप्रत्याशित रूप से फीस में भारी वृद्धि कर दी गई है और विभिन्न पाठ्यक्रमों में उपलब्ध सीटों में कटौती की जा रही है। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले मेधावी छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त, परिसर में शिक्षकों की भारी कमी, खस्ताहाल बुनियादी ढांचा, छात्रसंघ चुनावों पर रोक और प्रशासनिक उत्पीड़न जैसे मुद्दों को भी छात्रों ने प्रमुखता से रेखांकित किया। पेपर लीक, रद्द होती परीक्षाएं और पुलिस कार्रवाई का दर्द प्रयागराज को देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का प्रमुख केंद्र और छात्र राजनीति की पौधशाला माना जाता रहा है। देश के कोने-कोने से आने वाले लाखों छात्र यहां किराए के कमरों और कोचिंग संस्थानों के सहारे अपने उज्ज्वल भविष्य का सपना बुनते हैं। संवाद के दौरान उत्तर प्रदेश सिपाही भर्ती, यूपी एसआई परीक्षा और आरओ-एआरओ जैसी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं के बार-बार लीक होने और रद्द होने की घटनाओं पर छात्रों का गुस्सा साफ छलका। छात्रों ने राहुल गांधी के सामने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए बताया कि कई वर्षों की कठोर मेहनत और समर्पण के बाद भी परीक्षाएं या तो रद्द कर दी जाती हैं या फिर कानूनी मुकदमों में फंसकर लटक जाती हैं। जब छात्र अपने हक के लिए फीस बढ़ोतरी या पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करते हैं, तो उन पर लाठीचार्ज किया जाता है। इतना ही नहीं, पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज कर युवाओं के भविष्य और करियर को हमेशा के लिए खतरे में डाल दिया जाता है। सरकारी भर्तियों में सालों-साल की देरी और परीक्षा एजेंसियों की कोई जवाबदेही तय न होने से युवाओं का सब्र टूट रहा है। पूर्वांचल की राजनीति और 2027 का राजनीतिक समीकरण 2024 के चुनाव में प्रयागराज सीट पर दर्ज की गई जीत के साथ कांग्रेस ने दशकों बाद इस क्षेत्र में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाई थी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रयागराज से उठी यह आवाज केवल एक जिले तक सीमित नहीं रहेगी। प्रयागराज में रहकर पढ़ाई करने वाले छात्र पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों जैसे कि प्रतापगढ़, कौशांबी, जौनपुर, भदोही, वाराणसी, मिर्जापुर और आजमगढ़ से आते हैं। जब ये छात्र अपनी पढ़ाई के बाद अपने-अपने गृह जनपदों और गांवों में लौटेंगे, तो प्रयागराज में बनी यह राजनीतिक लहर पूरे पूर्वांचल के सुदूर कस्बों तक पहुंचेगी। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन का मानना है कि यदि पूर्वांचल का युवा और छात्र वर्ग उनके साथ मजबूती से जुड़ता है, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में क्षेत्र की एक दर्जन से भी अधिक सीटों का समीकरण पूरी तरह पलट सकता है। इस बढ़ते जनाक्रोश के कारण अब राज्य सरकार पर भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और एक निश्चित भर्ती कैलेंडर जारी करने का चौतरफा दबाव बन गया है। राष्ट्रीय रणनीति, सोशल मीडिया संदेश और सत्ता पक्ष का पलटवार विश्लेषकों के अनुसार राहुल गांधी का यह प्रयागराज दौरा केवल एक सामान्य छात्र मिलन समारोह नहीं था, बल्कि यह 2027 के विधानसभा महासमर के लिए युवाओं को केंद्र में रखकर तैयार की गई रणनीति का हिस्सा है। कोटा और देहरादून के बाद प्रयागराज में छात्रों से संवाद कायम करके कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि वह परंपरागत जातिगत समीकरणों से अलग हटकर युवाओं के वास्तविक मुद्दों जैसे कि शिक्षा, रोजगार और पारदर्शी परीक्षाओं पर केंद्रित होकर चुनाव लड़ना चाहती है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर 8 अगस्त 2026 को एक वीडियो संदेश साझा करते हुए करप्ट एजुकेशन सिस्टम पर तंज कसा था। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का दावा है कि राज्य सरकार ने पूरी पारदर्शिता के साथ युवाओं को नौकरियां दी हैं और पेपर लीक माफिया के खिलाफ बुलडोजर से कठोरतम कार्रवाई की है। फिर भी, प्रयागराज के केपी ग्राउंड से उठी ‘छात्रों की गूंज’ ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि 2027 के चुनाव में पूर्वांचल का युवा वर्ग ही हार-जीत तय करने वाला सबसे बड़ा कारक साबित होगा। इसका आप पर असर भारत में: भर्ती परीक्षाओं में अनिश्चितता और पेपर लीक के मुद्दे राष्ट्रीय स्तर पर बहस का केंद्र बन रहे हैं, जिससे पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग तेज हो रही है। उत्तर प्रदेश में: प्रयागराज में उठ रहे छात्र आंदोलन और फीस वृद्धि का प्रभाव पूर्वांचल के युवाओं पर सीधा पड़ेगा, जिससे 2027 के चुनाव में युवा वोट बैंक अहम साबित होगा। सवाल-जवाब 1. राहुल गांधी ने प्रयागराज में किस कार्यक्रम में भाग लिया? राहुल गांधी ने प्रयागराज के केपी ग्राउंड में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में भाग लिया और प्रतियोगी छात्रों तथा GEN-Z युवाओं से संवाद किया। 2. इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने क्या मुख्य समस्याएं उठाईं? छात्रों ने फीस में भारी वृद्धि, सीटों की कटौती, शिक्षकों की कमी, छात्रसंघ चुनावों पर रोक और प्रशासनिक उत्पीड़न के मुद्दे उठाए। 3. किन-किन प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और रद्द होने का मुद्दा उठाया गया? छात्रों ने उत्तर प्रदेश सिपाही भर्ती, यूपी एसआई परीक्षा और आरओ-एआरओ परीक्षाओं के बार-बार लीक होने और रद्द होने का दर्द साझा किया। 4. पूर्वांचल के किन-किन जिलों के छात्रों पर इस दौरे का असर पड़ने की संभावना है? प्रयागराज में पढ़ाई करने वाले प्रतापगढ़, कौशांबी, जौनपुर, भदोही, वाराणसी, मिर्जापुर और आजमगढ़ के छात्रों के जरिए यह संदेश पूरे पूर्वांचल में फैलने की संभावना है। 5. इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी का क्या पक्ष है? भाजपा का तर्क है कि राज्य सरकार ने पारदर्शी तरीके से नौकरियां दी हैं और पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई जैसी सख्त कार्रवाई की है। https://trendkia.com/politics/yuvaon-aura-gen-z-ke-muddon-para-prayagraj-se-rahul-gandhi-ki-hunkara-purvanchal-ki-rajaniti-men-kya-2027-se-pahale-bara-badalava--15357 TrendKia — Har trend, sabse pehle.