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  "title": "अमृतसर नॉर्थ के विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने छोड़ा पद, पंजाब में सत्ताधारी दल पर गहराया संकट",
  "summary": "अमृतसर नॉर्थ से विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेज दिया है, जबकि पटियाला जिले के दो अन्य विधायक पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं।",
  "content": "पंजाब की सत्तारूढ़ राजनीति में अंदरूनी कलह तेज होने के बीच अमृतसर नॉर्थ के जन प्रतिनिधि कुंवर विजय प्रताप सिंह ने अपनी विधानसभा सदस्यता त्यागने का कदम उठाया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र विधिवत रूप से विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दिया है। पुलिस सेवा में आईपीएस अधिकारी रह चुके कुंवर विजय प्रताप सिंह ने पिछले राज्य विधानसभा चुनावों से ऐन पहले अपनी सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति का रुख किया था और पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। उनके इस ताजा फैसले से राज्य में सत्ताधारी दल को लगातार झटके लग रहे हैं।\n\nपटियाला जिले के दो अन्य प्रतिनिधियों ने भी तोड़ा नाता\nकुंवर विजय प्रताप सिंह के इस कदम से ठीक पहले पटियाला अंचल के दो विधायकों ने संगठन से अलग होने का औपचारिक ऐलान किया था। इनमें समाना हलके के विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा तथा सनौर के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा शामिल हैं। दोनों नेताओं ने रविवार के दिन दल की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। इन दोनों नेताओं की विदाई ऐसे मोड़ पर सामने आई, जब संगठन ने 2027 के राज्य विधानसभा चुनाव के वास्ते चालीस प्रत्याशियों की आरंभिक सूची जारी की थी। हालांकि उस पहली सूची में समाना और सनौर दोनों ही सीटों के लिए किसी प्रत्याशी के नाम पर मुहर नहीं लगाई गई थी। इन दोनों नेताओं के भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने को लेकर राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं, मगर किसी भी नेता ने अपने भावी सियासी रुख की औपचारिक घोषणा नहीं की है।\n\nप्रशासनिक कार्यप्रणाली और सामाजिक मुद्दों पर उठाए सवाल\nचंडीगढ़ में मीडिया कर्मियों से रूबरू होते हुए चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भगवंत मान के नेतृत्व वाले शासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल दागे। उन्होंने प्रदेश में मादक पदार्थों के बढ़ते फैलाव को लेकर चिंता जताई और इस दिशा में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के कत्ल का मामला उठाया। इसके साथ ही उन्होंने संगरूर जिले के गांव तुरबंजारा के रहने वाले गुलजार सिंह द्वारा की गई खुदकुशी की घटना को लेकर भी मौजूदा निजाम को आड़े हाथों लिया। जौड़ामाजरा ने खेती किसानी से जुड़े मसलों की चर्चा करते हुए फसलों पर एमएसपी उपलब्ध कराने के अधूरे वादों और सरकारी विद्यालयों में अध्यापकों की भारी कमी की ओर भी ध्यान दिलाया।\n\nराज्य के बढ़ते कर्ज और शासन व्यवस्था पर आरोप\nसनौर हलके के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने प्रांतीय प्रशासन पर चढ़ते वित्तीय कर्ज को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। पठानमाजरा ने आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली में बैठे संगठन के शीर्ष रणनीतिकार राज्य की सत्ता को नियंत्रित कर रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर चुने गए प्रांतीय नेताओं के पास प्रशासनिक निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं बचा है। अपने भविष्य की योजना पर पठानमाजरा ने केवल इतना कहा कि वे उस राजनीतिक मंच को चुनेंगे जिससे समूचे पंजाब का व्यापक हित सध सके। यह पहला अवसर नहीं है जब पठानमाजरा ने अपने ही दल के कामकाज की आलोचना की हो, वे पूर्व में भी ऐसी आवाजें उठाते रहे हैं। इससे पहले जीरकपुर की एक महिला द्वारा दर्ज कराई गई दुष्कर्म की शिकायत पर उनके खिलाफ कानूनी केस दर्ज हुआ था। इसी मामले में मार्च के महीने में पंजाब पुलिस ने उन्हें मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर से हिरासत में लिया था, जिसके बाद मई माह में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की ओर से उन्हें नियमित जमानत मंजूर की गई थी।\n\nइसका आप पर असर\nविधायकों के इस्तीफों से पंजाब के शासन और भावी चुनावी गणित पर सीधा असर पड़ सकता है।\n\n• भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के आंतरिक समन्वय और राज्य इकाइयों पर नियंत्रण को लेकर सवाल उठेंगे। इससे आगामी चुनावों में अन्य राज्यों के भीतर राजनीतिक रणनीतियों और प्रचार अभियानों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।\n• पंजाब में: राज्य में विपक्षी दलों को सरकार की नीतियों, बढ़ते कर्ज और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर घेरने का नया हथियार मिल गया है। समाना, सनौर और अमृतसर नॉर्थ के आम नागरिकों के स्थानीय विकास कार्यों तथा प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर अनिश्चितता का असर दिख सकता है।\n• मतदाताओं के लिए: चुनावी टिकट वितरण और अंदरूनी नाराजगी के चलते जनता के सामने नए राजनीतिक विकल्प उभर सकते हैं। मतदाता अब विभिन्न दलों द्वारा घोषित उम्मीदवारों और उनके ट्रैक रिकॉर्ड पर बारीकी से नजर रखेंगे।\n• सरकारी कामकाज पर: विधानसभा में विधायकों के जाने से नीतिगत बहसों और बजटीय प्राथमिकताओं पर सत्तारूढ़ दल के लिए जवाबदेही बढ़ जाएगी। प्रशासनिक मशीनरी को जनता से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर अधिक सतर्कता बरतनी होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपंजाब में सत्तारूढ़ दल के भीतर टिकट आवंटन, केंद्रीय हस्तक्षेप और स्थानीय प्रशासनिक उपेक्षा के चलते असंतोष उभरा है।\n\n• टिकट वितरण का दबाव: पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की, लेकिन समाना और सनौर जैसी सीटों को लंबित रखा गया, जिससे संबंधित विधायकों में असुरक्षा बढ़ी।\n• दिल्ली केंद्रित नियंत्रण के आरोप: विधायकों का आरोप है कि पंजाब सरकार के फैसले दिल्ली स्थित नेतृत्व द्वारा लिए जा रहे हैं और राज्य के नेताओं को निर्णय लेने की आजादी नहीं मिल रही है।\n• स्थानीय व सामाजिक मुद्दों की अनदेखी: नशा मुक्ति, एमएसपी के वादे, स्कूल शिक्षकों की कमी और कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या जैसे मामलों पर सरकारी उदासीनता से भी विधायकों में नाराजगी बनी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कुंवर विजय प्रताप सिंह किस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं?\nकुंवर विजय प्रताप सिंह पंजाब के अमृतसर नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।\n\n2. कुंवर विजय प्रताप सिंह ने राजनीति में आने से पहले कौन सा पद संभाला था?\nवह एक पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस सेवा से इस्तीफा देकर राजनीति में प्रवेश किया था।\n\n3. पटियाला जिले से किन दो विधायकों ने इस्तीफा दिया है?\nसमाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा और सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने अपनी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ी है।\n\n4. चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने प्रशासन पर किन प्रमुख मुद्दों को लेकर सवाल उठाए?\nउन्होंने नशे की समस्या, कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या, गुलजार सिंह की आत्महत्या, फसलों पर एमएसपी और शिक्षकों की कमी के मुद्दे उठाए।\n\n5. हरमीत सिंह पठानमाजरा ने सरकार के संदर्भ में क्या आरोप लगाया?\nउन्होंने पंजाब पर बढ़ते कर्ज और दिल्ली स्थित पार्टी नेताओं द्वारा पंजाब की सरकार चलाए जाने का आरोप लगाया।",
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  "publishedAt": "2026-11-02",
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