# पंजाब असेंबली परिसर में आप और कांग्रेस के बीच तीखी झड़प, झाड़ू जलाने से लेकर शराब की बोतल तक गरमाई सियासत

> पंजाब विधानसभा में विधायकों को सदन में जाने से रोकने के विरोध में झाड़ू जलाने को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच धक्का-मुक्की हो गई, वहीं बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू शराब की बोतल लेकर पहुंचे।

**Type:** article · **Category:** पंजाब · **Published:** 2026-10-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/punjab/punjab-assembly-parisara-men-aap-aura-congress-ke-bicha-tikhi-jharapa-jharu-jalane-se-lekara-sharaba-ki-botala-taka-garamai-siyasa-52277 · **Language:** Hindi
**Tags:** पंजाब विधानसभा, प्रताप सिंह बाजवा, भगवंत मान, रवनीत बिट्टू, आम आदमी पार्टी, पंजाब कांग्रेस, मानसा

पंजाब विधानसभा के बाहर मंगलवार को बेहद नाटकीय राजनीतिक टकराव देखने को मिला, जहाँ सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के विधायक सीधे तौर पर आपस में भिड़ गए। सदन की कार्यवाही में प्रवेश न मिलने से गुस्साए कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया और अपना कड़ा असंतोष दर्ज कराने के लिए आम आदमी पार्टी के चुनाव चिह्न झाड़ू को आग के हवाले कर दिया। इस प्रतीकात्मक विरोध के बाद दोनों पक्षों के बीच शुरू हुई तकरार कुछ ही पलों में हाथापाई और धक्का-मुक्की में बदल गई, जिसने राज्य की संसदीय राजनीति के माहौल को पूरी तरह गरमा दिया।

## पोडियम पर कब्जे को लेकर बढ़ा तनाव और हुई धक्का-मुक्की
झाड़ू जलाने के बाद विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा प्रेस को संबोधित करने के लिए मीडिया गैलरी की ओर बढ़े। इससे पहले कि वे कुछ कह पाते, आम आदमी पार्टी के विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने आगे बढ़कर पोडियम पर अपनी जगह बना ली और अपना भाषण शुरू कर दिया। इस कदम से कांग्रेस खेमा भड़क गया। प्रताप सिंह बाजवा के साथ मौजूद पार्टी के अन्य विधायक तुरंत पोडियम के सामने आ डटे और जोर-जोर से नारेबाजी करने लगे। देखते ही देखते नेताओं के बीच तीखी बहस छिड़ गई, जिसने कुछ ही मिनटों में तीखे टकराव और धक्का-मुक्की का रूप ले लिया।

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## महिला विधायकों से बदसलूकी के आरोप और खैरा-मानुके में तीखी नोकझोंक
इस पूरे हंगामे के बाद आप विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने विपक्षी दल पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि कांग्रेस नेताओं ने सत्ताधारी दल की महिला विधायकों के साथ बदसलूकी की और उन्हें धक्के दिए। धालीवाल ने स्पष्ट किया कि वे इस अमर्यादित व्यवहार की आधिकारिक शिकायत विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष रखेंगे। इसके तुरंत बाद सदन के बाहर माहौल और तनावपूर्ण हो गया जब कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने मीडिया माइक संभाला। आप के विधायकों ने उनके खिलाफ भी नारेबाजी शुरू कर दी। इसी गहमागहमी के बीच आप विधायक सर्वजीत कौर मानुके ने सुखपाल सिंह खैरा के हाथ से कागज छीनने का प्रयास किया। खैरा ने टकराव से बचते हुए सत्ताधारी दल पर आरोप लगाया कि वह महिला नेताओं को ढाल बनाकर ओछी राजनीति कर रहा है। इसके जवाब में सर्वजीत कौर मानुके ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वे महिला हैं लेकिन किसी से डरती नहीं हैं और यदि उन्होंने अपना मुंह खोला तो खैरा के लिए उसका जवाब देना भारी पड़ जाएगा।

## स्पीकर के कामकाज पर प्रताप सिंह बाजवा के तीखे सवाल
पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका पर सीधा हमला बोला। बाजवा ने आरोप लगाया कि विधानसभा के स्पीकर पूरी तरह से एक तानाशाह की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि निर्वाचित कांग्रेस विधायकों को विधानसभा के मुख्य सदन में जाने से रोकना पूरी तरह से गैरकानूनी और असंवैधानिक कृत्य है। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा हनन बताते हुए पूरे घटनाक्रम को जनविरोधी करार दिया।

## मुख्यमंत्री भगवंत मान का कांग्रेस की गुटबाजी पर कटाक्ष
दूसरी तरफ राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कांग्रेस की अंदरूनी एकजुटता पर गहरा तंज कसा। पंजाब में राहुल गांधी की प्रस्तावित रैली की तैयारियों को लेकर कांग्रेस नेताओं की लगातार बैठकें चल रही हैं। हाल ही में एक वीडियो सामने आया था, जिसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता एक ही गाड़ी में सवार होकर बैठक स्थल पर पहुंचे थे। उस वाहन को पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट चला रहे थे, उनके बगल वाली सीट पर केसी वेणुगोपाल बैठे थे, जबकि पिछली सीट पर प्रताप सिंह बाजवा, चरणजीत सिंह चन्नी, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और परगट सिंह बैठे नजर आए थे। इसी वाकये पर चुटकी लेते हुए भगवंत मान ने टिप्पणी की कि पंजाब में कांग्रेस की स्थिति ठीक वैसी ही है जैसी उस कार में बैठे पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष परगट सिंह की थी। उन्होंने कहा कि जब परगट सिंह को अपनी ही पार्टी की गाड़ी में ढंग से बैठने की जगह नहीं मिल पा रही, तो पंजाब की जनता उन्हें भला क्या तवज्जो देगी।

## शराब की बोतल और घंटी लेकर विधानसभा पहुंचे रवनीत बिट्टू
जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री भगवंत मान कांग्रेस पर सियासी तीर चला रहे थे, वहीं दूसरी ओर बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू ने सीधे मुख्यमंत्री को अपने निशाने पर ले लिया। रवनीत बिट्टू विधानसभा परिसर में शराब की एक बोतल लेकर पहुंचे, जिस पर एक घंटी बंधी हुई थी। वे परिसर में लगातार उस घंटी को बजाते रहे और दावा किया कि शराब की बोतल को देखकर मुख्यमंत्री भगवंत मान का दिल डोलने लगता है। रवनीत बिट्टू ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि इसी शराब की बोतल से जुड़े मामले के कारण मुख्यमंत्री को दिल्ली एयरपोर्ट पर तीन घंटे तक रोके रखा गया था और उन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका गया था।

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## मानसा में नशे की ओवरडोज से युवक की मौत और सड़क पर प्रदर्शन
राज्य में मचे इस सियासी घमासान के बीच पंजाब में नशे का संकट एक बार फिर विकराल रूप में सामने आया, जब मानसा जिले के भम्मे कलां गांव निवासी 35 वर्षीय दलजीत की मौत हो गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, दलजीत की जान नशे की ओवरडोज के चलते गई। इस घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने युवक के शव को सिरसा-मानसा मार्ग पर रखकर सड़क जाम कर दी और जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इलाके में तनाव पहले से ही गहराया हुआ था, क्योंकि मानसा में नशे के गैरकानूनी कारोबार का खुलकर विरोध करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की लगभग 15 दिन पहले गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। झोटा के परिजनों ने घटना के बाद से अब तक उनका अंतिम संस्कार नहीं किया है और उनका पार्थिव शरीर मानसा में रखकर लगातार इंसाफ की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है।

## शव को शहर ले जाने की कोशिश, पुलिस की सख्ती और नेताओं की शिरकत
दलजीत की मौत के बाद उनके परिजनों और ग्रामीणों ने मृतक के शव को मानसा शहर ले जाने का फैसला किया। इस दौरान कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के कई नेता भी पीड़ित परिवार के समर्थन में सड़क पर उतर आए। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए पुलिस और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को तुरंत मौके पर भेजा गया ताकि वे परिवार और ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत करा सकें। कई दौर की प्रशासनिक बातचीत के बावजूद परिजन अपनी मांगों पर अड़े रहे और हटने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया, मृतक दलजीत के शव को जबरन अपने कब्जे में लिया और पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। पुलिस और प्रशासन की इस एकतरफा कार्रवाई के चलते पूरे मानसा इलाके में स्थानीय लोगों के भीतर गहरा रोष फैल गया है।

## भगवंत मान सरकार के लिए गहराती राजनीतिक चुनौती
पंजाब में विपक्षी दल, विशेषकर बीजेपी, नशे की अनियंत्रित समस्या को राज्य सरकार के खिलाफ सबसे प्रमुख राजनीतिक हथियार बना रहे हैं। लगातार हो रही मौतों, परिवारों के अनवरत धरनों और पुलिस की सख्त कार्यशैली के चलते यह मुद्दा मुख्यमंत्री भगवंत मान के लिए एक गंभीर प्रशासनिक व राजनीतिक संकट बनता जा रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री आमतौर पर अपने चिरपरिचित हाजिरजवाबी और चुटीले अंदाज से राजनीतिक विरोधियों पर पलटवार करते रहे हैं, लेकिन धरातल पर नशे से उजड़ते परिवारों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों का ठोस समाधान तलाशना उनके प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो रहा है।

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## इसका आप पर असर
विधानसभा में हंगामे और मानसा में नशे से मौत के बाद उपजे जनाक्रोश का सीधा असर पंजाब के राजनीतिक माहौल और आम जनजीवन पर पड़ रहा है।

- **पंजाब में:** विपक्ष द्वारा सदन की कार्यवाही का बहिष्कार और सड़क पर प्रदर्शन से विधानसभा के विधायी कामकाज बाधित हो सकते हैं। आम लोगों से जुड़े कल्याणकारी मुद्दों और जनसमस्याओं पर सदन में ठोस चर्चा की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
- **मानसा में:** सिरसा-मानसा मार्ग पर धरने और पुलिस कार्रवाई के चलते स्थानीय यातायात प्रभावित हुआ है और भारी सुरक्षा बल तैनात है। यात्रियों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है और इलाके में तनाव के चलते सामान्य कारोबारी गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
- **राज्यव्यापी कानून-व्यवस्था:** नशे की ओवरडोज और सामाजिक कार्यकर्ताओं की हत्या के मामलों से राज्य पुलिस की गश्त और निगरानी सख्त की जा रही है। संदिग्ध गतिविधियों और नशा तस्करी पर नकेल कसने के लिए विभिन्न जिलों में तलाशी अभियान तेज हो सकते हैं।
- **राजनीतिक जवाबदेही:** विपक्षी दलों द्वारा नशे के मुद्दे पर सरकार को घेरने से प्रशासनिक तंत्र पर नशा तस्करों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का दबाव बढ़ेगा। इससे ग्रामीण इलाकों में स्थानीय पुलिस चौकियों और स्वास्थ्य केंद्रों पर नशे के इलाज से जुड़ी निगरानी बढ़ सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पूरा राजनीतिक और सामाजिक टकराव विधानसभा में विपक्ष के प्रवेश पर लगी कथित रोक और मानसा में नशे की समस्या के चलते हुई मौतों के बाद उपजा है।

- **विधानसभा में प्रवेश पर रोक:** कांग्रेस विधायकों का आरोप था कि उन्हें सदन की आधिकारिक कार्यवाही में भाग लेने से अनुचित तरीके से रोका गया। इसके विरोध में विधायकों ने प्रतीकात्मक रूप से झाड़ू जलाई और जब दोनों दल मीडिया मंच पर पहले बोलने की होड़ में आए तो विवाद धक्का-मुक्की में बदल गया।
- **नेताओं के बीच जुबानी रंजिश:** सुखपाल सिंह खैरा और सर्वजीत कौर मानुके के बीच पुराने राजनीतिक तनाव के चलते पोडियम पर कागज छीनने और आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बनी। सत्ताधारी दल ने जहां महिला विधायकों से दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया, वहीं विपक्ष ने इसे जानबूझकर की गई राजनीति बताया।
- **मानसा में नशा संकट और गुस्सा:** भम्मे कलां गांव के 35 वर्षीय दलजीत की संदिग्ध ओवरडोज से मौत के बाद ग्रामीणों का धैर्य टूट गया। क्षेत्र में 15 दिन पहले नशे का विरोध करने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद से ही जनता का रोष चरम पर था, जिसके चलते शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू हुआ।

## सवाल-जवाब

### 1. पंजाब विधानसभा परिसर में कांग्रेस विधायकों ने झाड़ू क्यों जलाई?
कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि उन्हें विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने से रोका गया, जिसके विरोध में उन्होंने आप के चुनाव चिह्न झाड़ू को जलाकर प्रदर्शन किया।

### 2. कुलदीप सिंह धालीवाल ने कांग्रेस नेताओं पर क्या आरोप लगाया?
आप विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने सत्ताधारी दल की महिला विधायकों के साथ बदसलूकी की और उन्हें धक्का दिया।

### 3. बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू विधानसभा में शराब की बोतल क्यों लेकर पहुंचे?
रवनीत बिट्टू ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर शराब से जुड़े विवादों को लेकर तंज कसने के लिए घंटी बंधी शराब की बोतल लहराते हुए प्रदर्शन किया।

### 4. मानसा में ग्रामीण सड़क जाम करके प्रदर्शन क्यों कर रहे थे?
भम्मे कलां गांव के 35 वर्षीय दलजीत की नशे की ओवरडोज से हुई मौत के बाद परिजन और ग्रामीण शव को सड़क पर रखकर विरोध जता रहे थे।

### 5. परविंदर सिंह झोटा कौन थे और उनका मामला क्या है?
परविंदर सिंह झोटा नशे के कारोबार का विरोध करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता थे, जिनकी करीब 15 दिन पहले गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और उनके परिवार ने अंतिम संस्कार नहीं किया है।

### 6. पुलिस ने दलजीत के शव को लेकर क्या कार्रवाई की?
वार्ता विफल होने के बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और दलजीत के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया।

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