पंजाब ड्रग तस्करी मामले में बिक्रम सिंह मजीठिया को नया समन, जगदीश भोला के सामने बैठाकर हो सकती है पूछताछ पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम ने 6,000 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थों के मामले में बिक्रम सिंह मजीठिया और बर्खास्त सिपाही जगदीश भोला को 5 अक्टूबर को तलब किया है। पंजाब में 6,000 करोड़ रुपये के व्यापक नशीले पदार्थों के नेटवर्क की जांच कर रही विशेष जांच टीम यानी एसआईटी ने वरिष्ठ अकाली नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को नई कानूनी कार्रवाई के तहत तलब किया है। जांच अधिकारियों ने उन्हें 5 अक्टूबर को जांच दल के सामने पेश होने का निर्देश दिया है। इसी निर्धारित तिथि पर पंजाब पुलिस के बर्खास्त सिपाही जगदीश भोला को भी समन जारी किया गया है। अधिकारियों की योजना के अनुसार, इस बहुचर्चित ड्रग सिंडिकेट की पड़ताल में दोनों को आमने-सामने बैठाकर पहली बार विस्तृत पूछताछ की जा सकती है। जगदीश भोला की गिरफ्तारी और पुराने आरोप इस बड़े नशीले पदार्थों के नेटवर्क का खुलासा तब हुआ था जब पंजाब पुलिस ने नवंबर 2013 में जगदीश भोला को पकड़ा था। इसके बाद वर्ष 2014 में भोला ने इस अवैध कारोबार में बिक्रम सिंह मजीठिया की संलिप्तता का आरोप लगाया था। हालांकि, उस समय अकाली दल के वरिष्ठ नेता ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए खुद को बेकसूर बताया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू की थी। केंद्रीय एजेंसी ईडी के अधिकारियों ने 2014 में ही मजीठिया से सवाल-जवाब किए थे, उस दौरान वह तत्कालीन अकाली दल सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद पर आसीन थे। एनडीपीएस कानून के तहत दर्ज एफआईआर का आधार इस कानूनी मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब 20 दिसंबर 2021 को मजीठिया के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस कानून के तहत आपराधिक केस दर्ज किया गया। उस समय पंजाब में तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता संभाल रही थी। यह एफआईआर पंजाब पुलिस की एंटी-ड्रग स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ की 2018 की जांच रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई थी। एसटीएफ रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया एंटी-ड्रग टास्क फोर्स की 2018 की रिपोर्ट में 2013 के करोड़ों रुपये के ड्रग रैकेट से जुड़े प्रमुख आरोपियों की भूमिका दर्ज की गई थी, जिनमें जगजीत सिंह चहल, जगदीश सिंह भोला और मनिंदर सिंह औलख जैसे नाम शामिल थे। इस एफआईआर के दर्ज होने के बाद मजीठिया को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, जहां उन्होंने पटियाला जेल में पांच महीने से अधिक का समय बिताया। इसके पश्चात पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिलने के बाद वे अगस्त 2022 में जेल से रिहा हुए थे। अब एसआईटी द्वारा 5 अक्टूबर को दोनों व्यक्तियों को एक साथ बुलाए जाने से जांच में नए तथ्यों के सामने आने की संभावना बढ़ गई है। इसका आप पर असर इस बड़े नशीले पदार्थों के मामले में चल रही जांच पंजाब में कानून-व्यवस्था और नशा विरोधी अभियानों को प्रभावित करती है। • भारत में: सीमावर्ती राज्यों में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर केंद्रीय और राज्य जांच एजेंसियों की सख्त निगरानी जारी है। इससे अंतर-राज्यीय वित्तीय लेनदेन और नशा तस्करों के नेटवर्क पर लगातार कानूनी दबाव बना हुआ है। • पंजाब में: नशा मुक्ति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ा है। राज्य के नागरिकों और परिवारों के लिए नशा विरोधी अभियानों की निष्पक्षता और तेज अदालती कार्रवाई काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। • कानूनी प्रक्रिया: एसआईटी द्वारा दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने से कई पुराने विवादित बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। आगामी कानूनी तारीखों पर अदालत और जांच दल की कार्रवाइयों पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। • सार्वजनिक व्यवस्था: संवेदनशील मामलों में उच्च स्तरीय जांच से आम लोगों में पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता के प्रति विश्वास तय होता है। इससे नशा तस्करी से जुड़े मामलों में बिना किसी पक्षपात के त्वरित कार्रवाई की मांग को बल मिलता है। ऐसा क्यों हुआ पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम ने पुराने नशीले पदार्थों के मामले में बयानों के टकराव को सुलझाने के लिए दोनों व्यक्तियों को एक साथ तलब किया है। • सीधे आरोप और विरोधाभास: बर्खास्त सिपाही जगदीश भोला ने 2014 में बिक्रम सिंह मजीठिया का नाम इस रैकेट से जोड़ा था, जिसे मजीठिया ने हमेशा नकारा है। दोनों के परस्पर विरोधी दावों की सत्यता जांचने के लिए आमने-सामने पूछताछ की आवश्यकता महसूस की गई। • एसटीएफ की पुरानी रिपोर्ट: पंजाब पुलिस की एंटी-ड्रग स्पेशल टास्क फोर्स ने 2018 में अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें कई मुख्य आरोपियों की भूमिका रेखांकित की गई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर 2021 में मजीठिया के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट का मामला दर्ज हुआ था। • एजेंसियों की पड़ताल: प्रवर्तन निदेशालय ने पहले मनी लॉन्ड्रिंग के तहत 2014 में मजीठिया से पूछताछ की थी। अब एसआईटी 6,000 करोड़ रुपये के इस नेटवर्क के अनसुलझे पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए साक्ष्य जुटा रही है। सवाल-जवाब 1. एसआईटी ने बिक्रम सिंह मजीठिया और जगदीश भोला को कब पेश होने के लिए कहा है? एसआईटी ने दोनों को 5 अक्टूबर को पेश होने का निर्देश दिया है। 2. यह मामला कितने करोड़ रुपये के ड्रग रैकेट से जुड़ा है? यह पूरा मामला 6,000 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थों के नेटवर्क से संबंधित है। 3. जगदीश भोला को कब गिरफ्तार किया गया था? पंजाब पुलिस ने जगदीश भोला को नवंबर 2013 में गिरफ्तार किया था। 4. मजीठिया के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला कब दर्ज किया गया था? मजीठिया के खिलाफ 20 दिसंबर 2021 को एनडीपीएस कानून के तहत केस दर्ज किया गया था। 5. बिक्रम सिंह मजीठिया को अदालत से जमानत कब मिली थी? पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के बाद वह अगस्त 2022 में पटियाला जेल से बाहर आए थे। https://trendkia.com/punjab/punjab-draga-taskari-mamale-men-bikram-singh-majithia-ko-naya-samana-jagdish-bhola-ke-samane-baithakara-ho-sakati-hai-puchhatachha-40399 TrendKia — Har trend, sabse pehle.