# पंजाब का टेक्सटाइल मॉडल: धागे से परिधान तक एक ही राज्य में पूरा होता है उत्पादन का चक्र

> कपास उत्पादन से लेकर वैश्विक निर्यात तक पंजाब अपनी संगठित कपड़ा श्रृंखला के दम पर नई औद्योगिक पहचान बना रहा है। राज्य सरकार ने तकनीकी वस्त्रों और सिंगल विंडो व्यवस्था से निवेश आकर्षित करने की रणनीति बनाई है।

**Type:** article · **Category:** पंजाब · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/punjab/punjab-ka-teksataila-modala-dhage-se-paridhana-taka-eka-hi-rajya-men-pura-hota-hai-utpadana-ka-chakra-54471 · **Language:** Hindi
**Tags:** पंजाब टेक्सटाइल, भगवंत मान, लुधियाना होजरी, कपड़ा उद्योग, भारत टेक्स 2026, टेक्सटाइल निर्यात, इन्वेस्ट पंजाब

कच्ची कपास की चुगाई से लेकर कताई, बुनाई, रंगाई और सिले-सिलाए परिधानों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने का संपूर्ण ढांचा पंजाब के भीतर सुगठित रूप से मौजूद है। किसी भी कपड़ा निर्माता के लिए सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग राज्यों में फैले विनिर्माण चरणों के बीच तालमेल बैठाना होती है, लेकिन पंजाब की भौगोलिक और औद्योगिक बनावट इन सभी प्रक्रियाओं को एक ही सीमा के भीतर समेट देती है। नई दिल्ली में आयोजित भारत टेक्स 2026 के वैश्विक मंच पर राज्य की इसी विनिर्माण क्षमता को निवेशकों के सामने प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय कपड़ा कंपनियों को राज्य में अपनी विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने और मौजूदा संयंत्रों का विस्तार करने के लिए आमंत्रित किया, जहां संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला पहले से पूरी दक्षता के साथ कार्यरत है।

## कपास के खेतों से तैयार कपड़ों तक संगठित विनिर्माण तंत्र
पंजाब का कपड़ा उद्योग एक सिरे से दूसरे सिरे तक पूरी तरह से जुड़ा हुआ है। यह सिलसिला राज्य के खेतों में कपास की खेती से आरंभ होता है, जिसके बाद आधुनिक कताई मिलों में धागा निर्माण, पावरलूम और अत्याधुनिक बुनाई इकाइयों में फैब्रिक तैयार करना, फिर कपड़ा प्रोसेसिंग, निटिंग और अंत में रेडीमेड गारमेंट्स का सिलाई कार्य संपन्न होता है। इस मुकम्मल व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह है कि ब्रांड्स और कपड़ा निर्माताओं को लॉजिस्टिक्स की अनावश्यक लागत नहीं उठानी पड़ती। मुख्यमंत्री मान ने इस बात पर विशेष बल दिया कि पंजाब का यह एकीकृत कपड़ा वातावरण न केवल औद्योगिक निवेश के लिए अनुकूल है, बल्कि यह स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार देने और निर्यात को गति देने का एक सशक्त माध्यम है। इस पूरे तंत्र में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ-साथ हजारों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम रीढ़ की हड्डी बनकर काम कर रहे हैं।

## 1.2 अरब डॉलर से अधिक का वार्षिक वैश्विक निर्यात
आंकड़ों के नजरिए से देखें तो पंजाब के वस्त्र उद्योग की धमक दुनिया भर के बाजारों में महसूस की जा रही है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान पंजाब से कपड़ा और परिधान का कुल निर्यात 1.2 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर गया। देश के कुल कपड़ा और गारमेंट निर्यात में पंजाब की सीधी हिस्सेदारी लगभग 4 प्रतिशत दर्ज की गई है। यहां तैयार होने वाले कपड़े मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन जैसे कड़े गुणवत्ता मानकों वाले देशों में बड़े पैमाने पर खरीदे जाते हैं। राज्य प्रशासन अब अपने निर्यात पोर्टफोलियो को केवल इन पारंपरिक बाजारों तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पैठ बनाने, निर्यात उत्पादों में विविधता लाने और क्षेत्रीय विनिर्माताओं को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ सीधे जोड़ने की व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रहा है।

## लुधियाना बना उत्तर भारत का सबसे बड़ा कपड़ा गढ़
पंजाब के औद्योगिक मानचित्र में लुधियाना शहर का स्थान सबसे प्रमुख और प्रतिष्ठित है। मुख्यमंत्री मान के अनुसार, लुधियाना पूरे उत्तर भारत का सबसे बड़ा निटवेयर और गारमेंट केंद्र है। देश के कुल ऊनी निटवेयर उत्पादन में अकेले लुधियाना की हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर होजरी उत्पादन में यह शहर करीब 65 प्रतिशत का योगदान देता है। इस औद्योगिक क्लस्टर में वर्धमान, सनातन टेक्सटाइल्स, नाहर, मोंटे कार्लो, गंगा एक्रोवूल, स्पोर्टकिंग, शिंगोरा और ऑक्टेव जैसे देश के विख्यात ब्रांड्स सक्रिय रूप से विनिर्माण कर रहे हैं। इन विशाल कॉर्पोरेट घरानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हजारों छोटी इकाइयां काम करती हैं, जो सिलाई, बटनिंग, पैकेजिंग और कढ़ाई जैसे कार्यों में विशेषज्ञता रखती हैं। लुधियाना की यही एकीकृत शक्ति पंजाब को भारत के शीर्ष परिधान केंद्रों में मजबूती से स्थापित करती है।

## तकनीकी और मेडिकल टेक्सटाइल के नए क्षेत्रों में कदम
पारंपरिक परिधानों और होजरी की स्थापित ताकत के बाद पंजाब अब अत्याधुनिक विनिर्माण क्षेत्रों की ओर रुख कर रहा है। राज्य सरकार की योजना पारंपरिक कपड़ों से आगे बढ़कर औद्योगिक, तकनीकी, मेडिकल और सुरक्षात्मक कपड़ों के निर्माण को बढ़ावा देने की है। इसके अतिरिक्त आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण में उपयोगी जियोटेक्सटाइल, टिकाऊ पर्यावरण-अनुकूल फाइबर, आधुनिक तकनीक वाले स्मार्ट फैब्रिक, विशिष्ट सुरक्षा परिधान और एथलीटों के लिए उच्च प्रदर्शन वाले स्पोर्ट्सवियर के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इस आधुनिक बदलाव को गति देने और नवाचार को जमीन पर उतारने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के समक्ष जालंधर में एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें आधुनिक अनुसंधान प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी।

## औद्योगिक नीति 2026 और पारदर्शी सिंगल विंडो प्रक्रिया
निवेशकों को आकर्षित करने और प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने के लिए पंजाब इंडस्ट्रियल एंड बिजनेस डेवलपमेंट पॉलिसी 2026 लागू की गई है। इस नीति का मुख्य ध्येय कारोबार को सुगम बनाना और कारखाने लगाने के लिए आवश्यक मंजूरियों को त्वरित गति से जारी करना है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह नीति उद्योग प्रतिनिधियों और हितधारकों से गहन विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई है। इसमें मजबूत बुनियादी ढांचे, चौबीसों घंटे भरोसेमंद बिजली आपूर्ति, कुशल कार्यबल के लिए कौशल विकास, शोध और निर्यात प्रोत्साहन पर सीधा जोर दिया गया है। विभिन्न सरकारी विभागों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाने के लिए सिंगल विंडो और सिंगल पेन प्रणाली बनाई गई है। इन्वेस्ट पंजाब और फास्टट्रैक पंजाब पोर्टल्स के जरिए सभी आवश्यक अनुमतियां पूरी पारदर्शिता के साथ डिजिटल माध्यम से दी जा रही हैं, ताकि लालफीताशाही पूरी तरह समाप्त हो सके।

## चार वर्षों में भारी निवेश और रोजगार सृजन का रिकॉर्ड
मुख्यमंत्री मान ने भारत टेक्स सम्मेलन में पिछले चार वर्षों के आर्थिक आंकड़े साझा करते हुए बताया कि राज्य में 2 लाख करोड़ रुपये का औद्योगिक निवेश सफलतापूर्वक आकर्षित किया गया है, जिसके माध्यम से करीब 5 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा हुए। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों के समय बने जटिल नियमों और प्रशासनिक उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया, जिसके कारण कई उद्योग पंजाब छोड़कर चले गए थे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वर्तमान सरकार पारदर्शी व्यवस्था देकर उद्योगों को वापस ला रही है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मोहाली को 'भारत की दूसरी सिलिकॉन वैली' के रूप में विकसित करने की दिशा स्पष्ट की, जहां सूचना प्रौद्योगिकी, शैक्षणिक संस्थानों, तकनीकी कंपनियों और अनुसंधान केंद्रों का एक आधुनिक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है ताकि कपड़ा उद्योग सहित सभी क्षेत्रों को आधुनिक डिजिटल तकनीक का सीधा सहारा मिल सके।

## इसका आप पर असर
पंजाब के कपड़ा उद्योग के विस्तार और नई औद्योगिक नीति से स्थानीय कामगारों, कपड़ा व्यापारियों और नए निवेशकों के लिए व्यापारिक अवसर बढ़ेंगे।

- **पंजाब में:** लुधियाना, जालंधर और आसपास के औद्योगिक इलाकों में विनिर्माण इकाइयों को सिंगल विंडो मंजूरी से कारखाने लगाने में आसानी होगी। इससे सिलाई, बुनाई और तकनीकी टेक्सटाइल क्षेत्र में 5 लाख नए रोजगार के अवसरों का दायरा और बढ़ेगा।
- **भारत में:** राष्ट्रीय स्तर पर कपड़ा निर्माताओं को एक ही राज्य में धागे से लेकर अंतिम परिधान तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला सुलभ होगी। इससे विदेशी खरीदारों के लिए भारतीय कपड़ों की आपूर्ति अधिक तेज और लागत प्रभावी बनेगी।
- **कपास किसानों के लिए:** स्थानीय कताई और कपड़ा मिलों की बढ़ती मांग से राज्य के कपास उत्पादक किसानों को अपनी उपज की बेहतर बिक्री का अवसर मिलेगा। इससे कच्चे माल की घरेलू खपत मजबूत होगी और ढुलाई खर्च में कमी आएगी।
- **वैश्विक निर्यातकों के लिए:** आधुनिक तकनीकी और मेडिकल टेक्सटाइल पर जोर दिए जाने से भारतीय निर्यातकों को अमेरिका और यूरोप के उच्च मूल्य वाले परिधान बाजारों में नए आर्डर मिलेंगे। इससे पारंपरिक होजरी से इतर उत्पाद विविधता को बढ़ावा मिलेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
पंजाब के टेक्सटाइल उद्योग का यह संगठित विस्तार राज्य के प्राकृतिक कृषि संसाधनों और दशकों पुराने औद्योगिक नेटवर्क के संयोजन के कारण संभव हुआ है।

- **कृषि और विनिर्माण का मेल:** पंजाब में व्यापक स्तर पर कपास की खेती होती है, जिसके कारण स्थानीय मिलों को कच्चा माल बिना किसी अंतरराज्यीय ढुलाई के सुलभ हो जाता है। इसी स्थानीय उपलब्धता ने कताई और कपड़ा विनिर्माण के पूरे ढांचे को जन्म दिया।
- **लुधियाना का ऐतिहासिक क्लस्टर:** स्वतंत्रता के बाद से ही लुधियाना ने ऊनी वस्त्रों और होजरी निर्माण में विशिष्ट महारत विकसित की, जो आज देश के 90 प्रतिशत ऊनी निटवेयर उत्पादन का केंद्र बन चुका है। इस स्थापित कार्यबल और तकनीकी ज्ञान ने नई कपड़ा इकाइयों को सहजता से आकर्षित किया।
- **प्रशासनिक सुधार और नीतियां:** पिछली प्रशासनिक जटिलताओं के कारण उद्योगों के पलायन को रोकने के लिए पंजाब इंडस्ट्रियल एंड बिजनेस डेवलपमेंट पॉलिसी 2026 लाई गई। इसके माध्यम से डिजिटल सिंगल विंडो व्यवस्था शुरू की गई ताकि निवेशक आसानी से पूंजी लगा सकें।

## सवाल-जवाब

### 1. वित्त वर्ष 2024-25 में पंजाब से कितना कपड़ा निर्यात हुआ?
वित्त वर्ष 2024-25 में पंजाब से टेक्सटाइल और परिधान उत्पादों का निर्यात 1.2 अरब डॉलर से अधिक रहा, जो भारत के कुल निर्यात का करीब 4 प्रतिशत है।

### 2. देश के ऊनी निटवेयर उत्पादन में लुधियाना की कितनी हिस्सेदारी है?
देश के कुल ऊनी निटवेयर उत्पादन में लुधियाना की हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत और होजरी उत्पादन में करीब 65 प्रतिशत है।

### 3. पंजाब में किन प्रमुख टेक्सटाइल कंपनियों के विनिर्माण केंद्र हैं?
राज्य में वर्धमान, सनातन टेक्सटाइल्स, नाहर, मोंटे कार्लो, गंगा एक्रोवूल, स्पोर्टकिंग, शिंगोरा और ऑक्टेव जैसी प्रमुख कंपनियां सक्रिय हैं।

### 4. तकनीकी टेक्सटाइल के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कहां प्रस्तावित है?
जालंधर में आधुनिक अनुसंधान प्रयोगशाला के साथ तकनीकी टेक्सटाइल का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने के लिए भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) से संभावनाएं तलाशने को कहा गया है।

### 5. पंजाब सरकार के अनुसार पिछले 4 वर्षों में कितना औद्योगिक निवेश आया?
मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले 4 वर्षों में राज्य में 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया और इससे करीब 5 लाख रोजगार के अवसर सृजित हुए।

### 6. औद्योगिक मंजूरियों को आसान बनाने के लिए सरकार ने कौन से पोर्टल शुरू किए हैं?
मंजूरियों को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने इन्वेस्ट पंजाब और फास्टट्रैक पंजाब पोर्टल के जरिए सिंगल विंडो प्रणाली लागू की है।

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