# पंजाब की सियासत में पूर्व ईडी अधिकारी निरंजन सिंह और पूर्व डीएसपी बलविंदर सेखों का नया कदम, अमृतपाल सिंह के दल से जुड़े

> प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व उप निदेशक निरंजन सिंह और पूर्व पुलिस उपाधीक्षक बलविंदर सेखों ने अकाली दल वारिस पंजाब दे की सदस्यता ले ली है।

**Type:** article · **Category:** पंजाब · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/punjab/punjab-ki-siyasata-men-purva-ed-adhikari-niranjan-singh-aura-purva-dsp-balwinder-sekhon-ka-naya-kadama-amritpal-singh-ke-dala-se-j-37077 · **Language:** Hindi
**Tags:** निरंजन सिंह, बलविंदर सेखों, वारिस पंजाब दे, अमृतपाल सिंह, पंजाब राजनीति, बिक्रम सिंह मजीठिया, प्रवर्तन निदेशालय

पंजाब के राजनीतिक परिदृश्य में एक उल्लेखनीय घटनाक्रम के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पूर्व उप निदेशक निरंजन सिंह और पंजाब पुलिस के पूर्व डीएसपी बलविंदर सेखों ने बुधवार को अकाली दल वारिस पंजाब दे का दामन थाम लिया। दोनों पूर्व अधिकारियों ने चंडीगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी की औपचारिक सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर खडूर साहिब से सांसद और पार्टी प्रमुख अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह तथा विधायक मनप्रीत अयाली मुख्य रूप से मौजूद रहे। इस नए राजनीतिक गठजोड़ को राज्य में कानून व्यवस्था और नशा विरोधी अभियानों से जुड़े मुद्दों पर एक अहम कदम माना जा रहा है।

## भोला ड्रग रैकेट और मजीठिया से पूछताछ का पुराना विवाद
निरंजन सिंह अपने सेवाकाल के दौरान कई हाई-प्रोफाइल वित्तीय अपराधों और गंभीर मामलों की जांच से जुड़े रहे हैं। विशेष रूप से पंजाब के बहुचर्चित करोड़ों रुपये के सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क, जिसे भोला ड्रग केस के नाम से जाना जाता है, में उन्होंने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत गहन पड़ताल की थी। इसी जांच प्रक्रिया के अंतर्गत उन्होंने पंजाब के पूर्व राजस्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को भी तलब कर उनसे तीखे सवाल-जवाब किए थे। उस दौर में पूछताछ के बीच ही निरंजन सिंह के तबादले का आदेश जारी होने पर भारी राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया था, जिसे विपक्ष ने जांच को बाधित करने का प्रयास करार दिया था।

## राजनीतिक पारी की शुरुआत पर राज्य के हालातों का हवाला
सक्रिय राजनीति में प्रवेश को लेकर निरंजन सिंह ने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि उनका पहले चुनाव या सियासत में आने का कोई विचार नहीं था। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में राज्य की प्रशासनिक और सामाजिक स्थिति लगातार खराब होती चली गई है। उनका आरोप था कि शासन व्यवस्था पर पहले भी माफिया का असर था और आज भी वही लोग पर्दे के पीछे से प्रभाव डाल रहे हैं। राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सिंचाई घोटाले जैसे बड़े मामलों में भी मौजूदा सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया और जवाबदेही तय करने में नाकामी दिखाई है।

## जांच में रुकावट और केंद्रीय एजेंसी पर गंभीर आरोप
पूर्व उप निदेशक ने अपने कार्यकाल के दौरान झेली गई प्रशासनिक बाधाओं को भी खुलकर साझा किया। निरंजन सिंह का आरोप था कि प्रवर्तन निदेशालय के 3 निदेशकों ने उन्हें बिक्रम सिंह मजीठिया से जुड़े मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आगे नहीं बढ़ाने दी। उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार की मंशा ही मामले की तह तक जाने की नहीं थी, तो एक जांच अधिकारी के रूप में उनके पास सीमित रास्ते ही बचते थे। इस संबंध में उन्होंने औपचारिक तौर पर सरकार को पत्र लिखकर अपनी चिंताएं भी दर्ज कराई थीं। उनका यह भी कहना था कि कोई भी सत्तारूढ़ सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग से अछूती नहीं रही है।

## नशे और माफिया के खिलाफ साझा मुहिम का ऐलान
वारिस पंजाब दे से जुड़ने के कारण पर बोलते हुए निरंजन सिंह ने रेखांकित किया कि यह संगठन लंबे समय से जमीनी स्तर पर नशा उन्मूलन की दिशा में सक्रिय रहा है। उन्होंने कहा कि इसे किसी एक पंथ या मजहब के दायरे में बांधकर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह पूरे पंजाब के अवाम का साझा मंच है। उन्होंने कहा कि उनका अपना कोई व्यक्तिगत सियासी स्वार्थ नहीं है, बल्कि वह राज्य से नशाखोरी और भ्रष्टाचार के खात्मे के मकसद से इस मुहिम को ताकत देने पहुंचे हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि भविष्य में उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो विभिन्न अवैध धंधों और संगठित माफिया को राज्य छोड़ना पड़ेगा।

## इसका आप पर असर
पंजाब के दो पूर्व शीर्ष जांच अधिकारियों के एक दल में आने से राज्य की राजनीति और कानून-व्यवस्था के चुनावी विमर्श में बदलाव की संभावना है।

- **पंजाब में:** राज्य के मतदाताओं को अब नशा विरोधी अभियानों और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर एक नया राजनीतिक विकल्प देखने को मिलेगा। पूर्व जांच अधिकारियों के जुड़ने से ड्रग्स मामलों और पुराने घोटालों पर नए सिरे से राजनीतिक बहस तेज होगी।
- **भारत में:** केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और राजनीतिक दबाव के आरोपों पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो सकती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सेवानिवृत्त नौकरशाह और पुलिस अधिकारी क्षेत्रीय दलों में शामिल होकर जांच व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं।
- **राजनीतिक दलों के लिए:** पंजाब की मुख्यधारा की पार्टियों को पुराने घोटालों और नशा तस्करों से सांठगांठ के आरोपों पर अब सीधे पूर्व जांचकर्ताओं के सवालों का जवाब देना पड़ेगा। इससे आगामी चुनावों में भ्रष्टाचार और नशा उन्मूलन का मुद्दा सबसे आगे रहेगा।
- **आम नागरिकों के लिए:** आम जनता के बीच प्रशासनिक तंत्र में निष्पक्षता और अवैध माफिया नेटवर्क के खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई की मांग मजबूत होगी। नागरिक यह देख सकेंगे कि क्या पूर्व जांचकर्ताओं का यह कदम नीतिगत बदलाव ला पाता है या नहीं।

## ऐसा क्यों हुआ
पंजाब में लंबे समय से सक्रिय रहे दो पूर्व जांच अधिकारियों ने राज्य में व्याप्त नशाखोरी, प्रशासनिक शिथिलता और जांच में कथित राजनीतिक दखल के विरोध में यह सियासी कदम उठाया है।

- **जांच में कथित अवरोध:** पूर्व उप निदेशक निरंजन सिंह का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार ने उन्हें पूर्व मंत्री से जुड़े मामले की गहराई से जांच करने से रोका था। इसी प्रशासनिक बाधा और पत्र व्यवहार के बेअसर रहने से उन्होंने सार्वजनिक मंच चुना।
- **राज्य में नशा और माफिया की समस्या:** दोनों अधिकारियों ने राज्य में सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते प्रभाव और विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय माफिया पर रोक न लग पाने को व्यवस्था की बड़ी नाकामी माना। उनके अनुसार वर्तमान और पिछली सरकारों ने इस दिशा में अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई।
- **घोटालों में कार्रवाई का अभाव:** पंजाब के सिंचाई घोटाले जैसे गंभीर मामलों में नई सरकार द्वारा कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई न किए जाने से व्यवस्था के प्रति उनकी असंतुष्टि बढ़ी। इस असंतोष ने उन्हें सीधे राजनीतिक दल से जुड़कर संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया।

## सवाल-जवाब

### 1. कौन-से दो पूर्व अधिकारी अकाली दल वारिस पंजाब दे में शामिल हुए हैं?
प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व उप निदेशक निरंजन सिंह और पूर्व डीएसपी बलविंदर सेखों पार्टी में शामिल हुए हैं।

### 2. यह सदस्यता ग्रहण समारोह कहां आयोजित किया गया था?
दोनों पूर्व अधिकारियों ने चंडीगढ़ में पार्टी सदस्यता ग्रहण की।

### 3. इस मौके पर कौन-से प्रमुख नेता उपस्थित थे?
कार्यक्रम में सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह और विधायक मनप्रीत अयाली मुख्य रूप से मौजूद थे।

### 4. निरंजन सिंह ने अपने सेवाकाल में किस चर्चित मामले की जांच की थी?
उन्होंने पंजाब के बहुचर्चित भोला ड्रग केस में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की थी और बिक्रम सिंह मजीठिया से पूछताछ की थी।

### 5. निरंजन सिंह ने केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय के 3 निदेशकों ने उन्हें बिक्रम सिंह मजीठिया मामले की जांच आगे नहीं बढ़ाने दी।

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