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  "type": "article",
  "title": "पंजाब में ड्रग सेंसस रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग, बीजेपी ने भगवंत मान सरकार पर बोला हमला",
  "summary": "पंजाब में कराए गए बहुचर्चित ड्रग सेंसस की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करने को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने भगवंत मान सरकार पर सरकारी खजाने के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए इस सर्वे की रिपोर्ट तुरंत सामने लाने की मांग की है।",
  "content": "पंजाब में नशे की गंभीर समस्या को लेकर कराए गए व्यापक ड्रग सर्वे की रिपोर्ट को अब तक जनता के सामने नहीं लाए जाने पर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इस गोपनीय रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक करने की पुरजोर मांग उठाई है। राज्य में इसी साल यह बड़ा सर्वे करवाया गया था, जिसके तहत सरकारी अमले ने घर-घर जाकर स्थिति का जायजा लिया था, लेकिन इसकी फाइंडिंग्स बाहर न आने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।\n\n \n\nघर-घर सर्वे और भारी-भरकम खर्च पर सवाल\n इस बड़े अभियान के तहत पंजाब सरकार ने अपने लगभग 28 हजार सरकारी कर्मचारियों को मैदान में उतारा था। इन कर्मचारियों ने राज्यभर के करीब 65 लाख परिवारों तक पहुंचकर सीधा संवाद स्थापित किया था। इस घर-घर जाकर किए गए संपर्क का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि किन घरों के कितने लोग नशे की चपेट में हैं, उन्हें प्रतिबंधित पदार्थ कहां से मिल रहे हैं और कितनों को रिहैबिलिटेशन सेंटर भेजने की आवश्यकता है। हालांकि, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस पूरी कवायद के नतीजे साझा न किए जाने से भगवंत मान सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है।\n\n \n\nसुनील जाखड़ ने लगाए गंभीर वित्तीय आरोप\n पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील जाखड़ ने सरकार से सीधा सवाल किया है कि इस विशाल सर्वे पर आखिर 250 करोड़ रुपये क्यों खर्च किए गए, जबकि इसका कोई सार्वजनिक नतीजा सामने नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया के नाम पर सरकारी खजाने को दोनों हाथों से लूटा गया है और जनता के पैसे का भारी दुरुपयोग हुआ है। बीजेपी ने अब इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कराने के लिए केंद्र सरकार से सीबीआई और एनआईए जांच की मांग की है, ताकि वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही की परतें उधेड़ी जा सकें।\n\n \n\nक्या था पंजाब का ड्रग सेंसस अभियान\n राज्य प्रशासन ने पंजाब में ड्रग्स की वास्तविक स्थिति और इसकी सप्लाई चेन का पर्दाफाश करने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया था। वर्ष 2025 में इस महत्वाकांक्षी ऑपरेशन के लिए 150 करोड़ रुपये का बजट तय किए जाने की बात सामने आई थी। इस विशाल डेटा कलेक्शन ड्राइव की शुरुआत 5 मई 2026 को हुई थी, जिसमें नियमित सरकारी शिक्षकों के अलावा संविदा यानी कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले शिक्षकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों को भी ड्यूटी पर लगाया गया था। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राज्य के दौरे पर कहा था कि ड्रग्स माफिया को पाताल से ढूंढकर निकाला जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nपंजाब में ड्रग सेंसस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग से राज्य की प्रशासनिक पारदर्शिता और सुरक्षा नीतियों पर सीधा असर पड़ा है।\n\n• भारत में: केंद्रीय एजेंसियों द्वारा संभावित जांच से अन्य राज्यों में भी बड़े सरकारी सर्वे की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रशासनिक नियंत्रण आ सकता है।\n• पंजाब में: स्थानीय नागरिकों और पीड़ित परिवारों को यह जानने का अधिकार मिलेगा कि उनके क्षेत्र में नशे की रोकथाम के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।\n• वित्तीय प्रबंधन: सरकारी खजाने से खर्च किए गए भारी-भरकम बजट के कारण टैक्सपेयर्स के पैसों के उपयोग पर भविष्य में कड़ी निगरानी रखी जाएगी।\n• राजनीतिक असर: विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा राज्य की सियासत में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस का मुख्य केंद्र बन गया है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह राजनीतिक विवाद सरकार द्वारा कराए गए सर्वे के आंकड़ों को सार्वजनिक न किए जाने और उस पर किए गए भारी वित्तीय खर्च के कारण उत्पन्न हुआ है।\n\n• बजट आवंटन: वर्ष 2025 में इस विशाल ऑपरेशन के लिए 150 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था, जबकि कुल खर्च 250 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।\n• कर्मचारियों की तैनाती: राज्यभर में 28 हजार से अधिक सरकारी और संविदा कर्मचारियों को घर-घर जाकर डेटा जुटाने के काम में लगाया गया था।\n• रिपोर्ट की गोपनीयता: 65 लाख परिवारों से आंकड़े जुटाने के बावजूद रिपोर्ट को जनता के सामने न लाना विपक्ष के आरोपों का मुख्य कारण बना।\n• राजनीतिक दबाव: विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी दलों द्वारा कानून-व्यवस्था और सरकारी धन के दुरुपयोग को बड़ा मुद्दा बनाया जा रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पंजाब में ड्रग सेंसस सर्वे कब शुरू हुआ था?\nइस व्यापक सर्वे अभियान की आधिकारिक शुरुआत 5 मई 2026 को हुई थी।\n\n2. इस सर्वे में कितने परिवारों को कवर किया गया था?\nसरकारी कर्मचारियों ने राज्य के करीब 65 लाख परिवारों तक पहुंचकर आंकड़े जुटाए थे।\n\n3. इस सर्वे में कितने कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी?\nइस अभियान में लगभग 28 हजार सरकारी और संविदा कर्मचारियों को शामिल किया गया था।\n\n4. बीजेपी ने इस मामले में क्या मांग की है?\nबीजेपी ने रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक करने और मामले की सीबीआई तथा एनआईए से जांच कराने की मांग की है।\n\n5. इस सर्वे पर कुल कितना खर्च होने की बात कही गई है?\nसुनील जाखड़ ने इस सर्वे पर 250 करोड़ रुपये खर्च होने का आरोप लगाया है, जबकि 2025 में 150 करोड़ का बजट तय हुआ था।",
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  "publishedAt": "2026-10-29",
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