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  "type": "article",
  "title": "पंजाब पुलिस के बर्खास्त AIG राज जीत सिंह तीन साल बाद पटियाला से पकड़े गए, ड्रग्स गठजोड़ का है आरोप",
  "summary": "पंजाब पुलिस और नशा तस्करों के बीच कथित सांठगांठ मामले में पिछले करीब तीन साल से फरार बर्खास्त AIG राज जीत सिंह को एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने पटियाला से हिरासत में ले लिया है।",
  "content": "पंजाब में पुलिस अफसरों और मादक पदार्थ तस्करों की कथित मिलीभगत के मामले में करीब तीन साल से बचते फिर रहे पूर्व सहायक पुलिस महानिरीक्षक (AIG) राज जीत सिंह को पटियाला से गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच अधिकारियों ने उन्हें गुरुवार के दिन पटियाला स्थित दर्शन सिंह नगर के एक रिहायशी ठिकाने से दबोचा। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को लंबे समय से उनकी तलाश थी, जिसके बाद यह अहम कामयाबी हाथ लगी है।\n\nएंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स की कार्रवाई\nएक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, बर्खास्त अधिकारी को पकड़ने का अभियान एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स की एक विशेष टीम ने पूरा किया। इस पूरे ऑपरेशन को तकनीकी निगरानी और वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण के आधार पर अंजाम दिया गया। अधिकारी लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था, लेकिन डिजिटल साक्ष्यों और बैंक रिकॉर्ड्स की पड़ताल ने जांच एजेंसी को सीधे पटियाला के उस मकान तक पहुंचा दिया जहां वह छिपा हुआ था।\n\nअप्रैल 2023 में मुख्यमंत्री ने किया था बर्खास्त\nराज जीत सिंह को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अप्रैल 2023 में सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया था। यह कड़ा प्रशासनिक कदम पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की निगरानी में गठित विशेष जांच दल (SIT) की तीन अलग-अलग रिपोर्टों के अध्ययन के बाद उठाया गया था। इन रिपोर्टों में खाकी और नशे के काले कारोबारियों के बीच की गहरी सांठगांठ का सिलसिलेवार ब्योरा दर्ज किया गया था, जिसके आधार पर राज्य सरकार ने विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ाई थी।\n\n2017 में बनी SIT और इंदरजीत सिंह कनेक्शन\nपुलिस अधिकारियों के विवरण के मुताबिक, इस मामले की जड़ें वर्ष 2017 से जुड़ी हैं जब विशेष जांच दल का गठन किया गया था। उस दौरान टीम को निर्देश दिया गया था कि मोगा के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) राज जीत सिंह और बर्खास्त पुलिस निरीक्षक इंदरजीत सिंह के बीच के कथित संपर्कों की गहन छानबीन की जाए। इंदरजीत सिंह को साल 2017 में ही स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा कथित तौर पर नशीले पदार्थों की बरामदगी के तुरंत बाद पुलिस महकमे से बर्खास्त कर दिया गया था।\n\nजांच रिपोर्ट में सांठगांठ और रिकॉर्ड के खुलासे\nविशेष जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि ऐसे ठोस तथ्य मौजूद हैं जो राज जीत सिंह की इंदरजीत सिंह के साथ गहरी संलिप्तता की पुष्टि करते हैं। वर्ष 2023 में जारी सरकारी आदेश में रेखांकित किया गया था कि SIT की तीनों रिपोर्टों की सामग्री से दोनों अधिकारियों के आपसी तालमेल और ड्रग सिंडिकेट के साथ उनके रिश्तों का पर्दाफाश हुआ है। जांच में सामने आया कि कानून के रक्षक ही नशा तस्करों के ढाल बनकर काम कर रहे थे।\n\n50 से अधिक नमूनों के फेल होने और पद के दुरुपयोग का मामला\nप्रशासनिक आदेश के अनुसार, जब राज जीत सिंह तरनतारन के SSP थे और इंदरजीत सिंह सीआईए (CIA) प्रभारी के पद पर तैनात थे, उस दौरान NDPS Act से संबंधित मामलों के 50 से अधिक सैंपल जांच में फेल पाए गए थे। आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग करते हुए निजी फायदे कमाए। उन्होंने नशा तस्करों को सख्त कानूनी कार्रवाई से बचाया, बेकसूर नागरिकों को फर्जी मामलों में उलझाया और इंदरजीत सिंह के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच को भटकाने का प्रयास किया।\n\nतकनीकी खामियों का फायदा और जबरन वसूली\nसरकारी आदेश में यह भी दर्ज किया गया था कि राज जीत सिंह NDPS Act की विधिक और तकनीकी बारीकियों को भली-भांति समझते थे। उन्होंने बर्खास्त निरीक्षक इंदरजीत सिंह के साथ मिलकर इन कानूनी पेचीदगियों का इस्तेमाल तस्करों को बचाने और कथित तौर पर धन उगाही करने के लिए किया। कानून की खामियों का सहारा लेकर गंभीर अपराधियों को सजा से दूर रखने में मदद की गई। पटियाला से गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस और जांच एजेंसियां उनके खिलाफ आगे की विधिक प्रक्रिया पूरी कर रही हैं।\n\nइसका आप पर असर\nइस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी से पंजाब में पुलिस और नशा तस्करों के पुराने गठजोड़ की जांच में तेजी आएगी।\n\n• भारत में: सीमावर्ती राज्यों में नशीले पदार्थों के खिलाफ चल रही राष्ट्रीय मुहिम को इससे बड़ा प्रशासनिक बल मिलेगा। कानून प्रवर्तन एजेंसियों में बैठे भ्रष्ट तत्वों पर शिकंजा कसने से संगठित अपराध सिंडिकेट्स की कमर टूटेगी।\n• पंजाब में: नशा मुक्ति के लिए संघर्ष कर रहे स्थानीय परिवारों और आम जनता का पुलिस व्यवस्था में भरोसा बहाल होगा। तरनतारन और मोगा जैसे संवेदनशील जिलों में दर्ज पुराने एनडीपीएस मामलों की निष्पक्ष समीक्षा का रास्ता भी साफ होगा।\n• कानूनी प्रणाली पर: पुलिस जांच में जानबूझकर छोड़ी जाने वाली खामियों और फॉरेंसिक सैंपलों की हेराफेरी पर निगरानी सख्त होगी। इससे अदालतों में वास्तविक नशा तस्करों को मिलने वाले अनुचित तकनीकी लाभ पर रोक लगेगी।\n• भ्रष्ट तंत्र पर चेतावनी: खाकी की आड़ में अपराध को संरक्षण देने वाले सेवारत या पूर्व अफसरों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि तीन साल की फरारी के बाद भी गिरफ्तारी से बचा नहीं जा सकता। जवाबदेही तय होने से निचले स्तर पर भी सुधार देखने को मिलेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह गिरफ्तारी पंजाब में नशा तस्करों और पुलिस अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत की छह साल पुरानी जांच का परिणाम है। उच्च न्यायालय द्वारा गठित विशेष जांच दल की सिफारिशों के बाद इस मामले में बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई थी।\n\n• एसआईटी रिपोर्ट के निष्कर्ष: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की निगरानी में गठित विशेष जांच दल ने तीन रिपोर्टें सौंपी थीं, जिनमें तत्कालीन एसएसपी राज जीत सिंह और बर्खास्त इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह के बीच सीधी साठगांठ पाई गई थी। इन रिपोर्टों में दोनों अधिकारियों पर नशा तस्करों को संरक्षण देने और निर्दोषों को फंसाने के गंभीर आरोप लगाए गए थे।\n• अप्रैल 2023 की बर्खास्तगी: एसआईटी के सबूतों के आधार पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अप्रैल 2023 में राज जीत सिंह को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। इसके तुरंत बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जिसके बाद से वह लगातार गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार चल रहे थे।\n• सैंपल फेल करने का षड्यंत्र: जांच में सामने आया कि तरनतारन में तैनाती के दौरान एनडीपीएस मामलों के 50 से अधिक फोरेंसिक सैंपल फेल कराए गए थे। तकनीकी बारीकियों का गलत इस्तेमाल करके तस्करों को कानूनी सजा से बचाया गया और कथित तौर पर भारी अवैध वसूली की गई।\n• तकनीकी और वित्तीय सुराग: एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और बैंक खातों के वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण कर उनके सटीक ठिकाने का पता लगाया। इसी तकनीकी इनपुट के दम पर पटियाला के दर्शन सिंह नगर से उन्हें हिरासत में लिया गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राज जीत सिंह कौन हैं और उन्हें कहां से गिरफ्तार किया गया?\nराज जीत सिंह पंजाब पुलिस के बर्खास्त सहायक पुलिस महानिरीक्षक (AIG) हैं, जिन्हें एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने पटियाला के दर्शन सिंह नगर स्थित एक मकान से पकड़ा है।\n\n2. राज जीत सिंह कितने समय से फरार चल रहे थे?\nवह पुलिस अधिकारियों और कथित नशा तस्करों के बीच गठजोड़ से जुड़े मामले में पिछले करीब तीन साल से फरार चल रहे थे।\n\n3. उन्हें पंजाब पुलिस सेवा से कब और किसने बर्खास्त किया था?\nउन्हें अप्रैल 2023 में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सेवा से बर्खास्त किया था।\n\n4. बर्खास्तगी का आधार क्या था?\nयह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की तीन रिपोर्टों के आधार पर की गई थी।\n\n5. एसआईटी का गठन कब हुआ था और इसे क्या जांच सौंपी गई थी?\nएसआईटी का गठन वर्ष 2017 में तत्कालीन मोगा एसएसपी राज जीत सिंह और बर्खास्त इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह की कथित संलिप्तता की जांच के लिए किया गया था।\n\n6. इंदरजीत सिंह को कब बर्खास्त किया गया था?\nइंदरजीत सिंह को साल 2017 में स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा मादक पदार्थ बरामद किए जाने के बाद बर्खास्त किया गया था।\n\n7. तरनतारन में तैनाती के दौरान क्या गड़बड़ी सामने आई थी?\nसरकारी आदेश के अनुसार, उनके कार्यकाल के दौरान एनडीपीएस एक्ट से जुड़े 50 से अधिक मामलों के फॉरेंसिक सैंपल फेल पाए गए थे।\n\n8. राज जीत सिंह पर क्या मुख्य आरोप हैं?\nउन पर पद का दुरुपयोग कर नशा तस्करों को बचाने, निर्दोषों को झूठे मुकदमों में फंसाने, जबरन वसूली करने और जांच को प्रभावित करने के आरोप हैं।",
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  "category": "पंजाब",
  "publishedAt": "2026-09-24",
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