सीबीआई रिश्वत मामले में घिरे पंजाब के पूर्व डीआईजी एचएस भुल्लर को सुप्रीम कोर्ट से झटका, जमानत याचिका पर सीजेआई की सख्त टिप्पणी भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद पूर्व डीआईजी एचएस भुल्लर की जमानत याचिका खारिज करने के संकेत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई चार हफ्ते के लिए टाल दी है। पंजाब पुलिस के पूर्व उप महानिरीक्षक (डीआईजी) एचएस भुल्लर को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बीच देश की सबसे बड़ी अदालत से भी कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। रिश्वतखोरी से जुड़े मामले में लंबे समय से न्यायिक हिरासत में बंद पूर्व पुलिस अधिकारी की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत का रुख बेहद कड़ा रहा। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिका के भविष्य को लेकर बेहद स्पष्ट टिप्पणी की, जिससे साफ संकेत मिलता है कि उच्चतम न्यायालय इस मामले में आरोपी को फिलहाल कोई ढील देने के पक्ष में नहीं है। पीठ की तीखी टिप्पणी और चार हफ्ते की मोहलत जमानत अर्जी पर दलीलें सुनते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने साफ तौर पर कहा कि यह मामला पूरी तरह खारिज किए जाने योग्य है। उन्होंने अदालत में मौजूद वकील से सवालिया लहजे में पूछा कि इस अर्जी को वे अभी खारिज करवाना चाहते हैं या फिर कुछ समय बाद। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के ऐसे गंभीर प्रकरण में गवाहों के बयान कलमबद्ध होना बेहद आवश्यक है। इसी आधार पर अदालत ने निर्देश दिया कि कुछ अहम गवाहों के बयान रिकॉर्ड पर आने के बाद ही इस याचिका पर आगे विचार किया जाएगा। इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। व्यापारी से वसूली और बिचौलिए का खेल यह पूरा मामला एक स्थानीय कारोबारी से जांच में राहत पहुंचाने के नाम पर अवैध धन उगाही से जुड़ा हुआ है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच के अनुसार, जब एचएस भुल्लर रोपड़ रेंज के डीआईजी पद पर तैनात थे, तब उन्होंने सिरहिंद पुलिस थाने में दर्ज एक प्राथमिकी में कारोबारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न करने और रियायत देने की एवज में रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता आकाश बट्टा ने इस संबंध में 11 अक्टूबर 2025 को जांच एजेंसी को एक औपचारिक लिखित शिकायत सौंपी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कृष्णानु नाम के एक बिचौलिए के जरिए उन पर अवैध रकम देने का लगातार दबाव बना रहे थे। कॉल रिकॉर्डिंग, सीबीआई का जाल और चंडीगढ़ में गिरफ्तारी कारोबारी की शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने गोपनीय स्तर पर अपनी प्राथमिक पड़ताल शुरू की। इस प्रारंभिक जांच के दौरान बिचौलिए कृष्णानु और तत्कालीन डीआईजी एचएस भुल्लर के बीच हुई टेलीफोनिक बातचीत को तकनीकी रूप से रिकॉर्ड किया गया। इस बातचीत में आरोपी पुलिस अधिकारी कथित तौर पर बिचौलिए को शिकायतकर्ता से 8 लाख रुपये वसूलने का सीधा निर्देश देते हुए पाए गए। पुख्ता सबूत हाथ लगने के बाद जांच एजेंसी ने 15 अक्टूबर 2025 को औपचारिक एफआईआर दर्ज कर ली। इसके ठीक अगले दिन, यानी 16 अक्टूबर 2025 को सीबीआई की टीम ने चंडीगढ़ में जाल बिछाया। इस ट्रैप ऑपरेशन के दौरान बिचौलिए कृष्णानु को शिकायतकर्ता से 5 लाख रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया गया। इसके तुरंत बाद मुख्य आरोपी एचएस भुल्लर को भी उसी दिन हिरासत में ले लिया गया। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और नई कानूनी संहिता के तहत कार्रवाई इस पूरे मामले में जांच एजेंसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और धारा 7-ए के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2) के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज किया है। 16 अक्टूबर 2025 को हुई गिरफ्तारी के बाद से ही पूर्व डीआईजी और बिचौलिया दोनों न्यायिक हिरासत में सलाखों के पीछे हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी इस मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 193 के तहत अदालत में अपनी चार्जशीट पहले ही दाखिल कर चुकी है। अब शीर्ष अदालत द्वारा चार हफ्ते बाद सुनवाई तय किए जाने और गवाहों के बयानों को प्राथमिकता दिए जाने से पूर्व पुलिस अधिकारी की मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं। इसका आप पर असर यह अदालती कार्रवाई उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही और न्यायिक रुख को स्पष्ट करती है। • भारत में: शीर्ष अदालत की यह सख्त टिप्पणी प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार के मामलों में कड़ा संदेश देती है कि जांच प्रक्रिया के दौरान प्रभावशाली आरोपियों को आसानी से रियायत नहीं मिलेगी। इससे आम नागरिकों में न्याय व्यवस्था और भ्रष्टाचार विरोधी जांच एजेंसियों के प्रति भरोसा मजबूत होता है। • पंजाब में: राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से जुड़े वसूली मामलों में न्यायिक सख्ती के चलते स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों को पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने का बल मिलेगा। इससे राज्य की कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन में मनमानी पर रोक लगने की उम्मीद बंधती है। ऐसा क्यों हुआ यह अदालती कार्यवाही और गिरफ्तारी एक व्यवसायी से पुलिसिया कार्रवाई रोकने के बदले बिचौलिए के जरिए लाखों रुपये की रिश्वत मांगने के सीधे आरोपों से उपजी है। • कारोबारी की शिकायत: 11 अक्टूबर 2025 को आकाश बट्टा ने लिखित रूप से सीबीआई को सूचित किया कि सिरहिंद थाने के एक मामले में राहत देने के लिए रोपड़ रेंज के तत्कालीन डीआईजी बिचौलिए के जरिए घूस मांग रहे हैं। इस आधिकारिक शिकायत के आधार पर ही जांच एजेंसी हरकत में आई। • ऑडियो टेप और बातचीत के सुबूत: प्राथमिक जांच के दौरान सीबीआई ने याचिकाकर्ता और बिचौलिए के बीच हुई बातचीत को रिकॉर्ड किया, जिसमें कथित तौर पर 8 लाख रुपये लेने की हिदायत दी गई थी। इस तकनीकी सुबूत ने रिश्वत की मांग की पुष्टि की। • रंगे हाथों गिरफ्तारी: 16 अक्टूबर 2025 को चंडीगढ़ में बिचौलिए को 5 लाख रुपये लेते हुए पकड़ा गया, जिसके तुरंत बाद डीआईजी को भी हिरासत में ले लिया गया। आरोप पत्र दाखिल होने और गवाहों के बयान बाकी होने के कारण अदालत ने जमानत देने से इनकार के संकेत दिए। सवाल-जवाब 1. एचएस भुल्लर कौन हैं और वे किस मामले में आरोपी हैं? एचएस भुल्लर पंजाब के पूर्व डीआईजी हैं, जिन पर रोपड़ रेंज में तैनाती के दौरान एक कारोबारी से 8 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है। 2. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने जमानत याचिका पर क्या टिप्पणी की? सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि यह केस शत-प्रतिशत खारिज करने योग्य है और पूछा कि इसे अभी खारिज किया जाए या बाद में। 3. सीबीआई ने इस मामले में गिरफ्तारी कब की थी? सीबीआई ने ट्रैप ऑपरेशन में 5 लाख रुपये लेते बिचौलिए को पकड़ने के बाद 16 अक्टूबर 2025 को एचएस भुल्लर को गिरफ्तार किया था। 4. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई कब तय की है? उच्चतम न्यायालय ने गवाहों के बयान दर्ज होने की आवश्यकता बताते हुए मामले को चार सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। 5. इस मामले में किन कानूनी धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया है? इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और 7-ए, बीएनएस की धारा 61(2) और बीएनएसएस की धारा 193 के तहत कार्रवाई की गई है। https://trendkia.com/punjab/sibiai-rishvata-mamale-men-ghire-punjab-ke-purva-dig-hs-bhullar-ko-supreme-court-se-jhataka-jamanata-yachika-para-cji-surya-kant-k-32407 TrendKia — Har trend, sabse pehle.