अलवर के खेत में मिला 11 फुट लंबा विशाल अजगर, बाजरा काट रहे किसान के उड़े होश अलवर के सरिस्का क्षेत्र के सुकल गांव में बाजरे की फसल काट रहे एक किसान के सामने अचानक 11 फुट लंबी मादा अजगर आ गई। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग और रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर अजगर को सुरक्षित पकड़ लिया और सिलीसेढ़ वन क्षेत्र में छोड़ दिया। अलवर जिले के सरिस्का क्षेत्र से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां खेती के दौरान एक बड़ा वन्यजीव दिखाई देने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। सुकल गांव में एक किसान अपने खेत में बाजरे की फसल की कटाई कर रहा था, तभी उसकी नजर एक विशालकाय मादा अजगर पर पड़ी। इतने बड़े आकार के जीव को अचानक सामने देखकर किसान के होश उड़ गए और उसने तुरंत आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद पूरे इलाके में सतर्कता बरतने की बात कही गई। बाजरा कटाई के दौरान हुआ आमना-सामना घटना के समय सुकल गांव का एक स्थानीय किसान अपने खेत में शांतिपूर्वक बाजरा काट रहा था। काम के दौरान जैसे ही उसने फसल के बीच हलचल देखी और करीब से निरीक्षण किया, तो उसका सामना लगभग 11 फुट लंबे अजगर से हुआ। खेत में काम कर रहे मजदूरों और किसानों के लिए अचानक इतने भारी-भरकम जीव को देखना किसी बड़े खतरे से कम नहीं था। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए ग्रामीणों ने खुद कोई जोखिम उठाने के बजाय समझदारी का परिचय दिया और फौरन वन विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। वन विभाग और रेस्क्यू टीम की त्वरित कार्रवाई सूचना मिलते ही अकबरपुर क्षेत्रीय वन अधिकारी हेमेन्द्र राजावत को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया। इसके बाद वन विभाग की एक टीम तुरंत सुकल वन क्षेत्र के उस खेत में पहुंची जहां अजगर मौजूद था। मौके पर पहुंचकर अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और यह सुनिश्चित किया कि बिना किसी जल्दबाजी के अजगर को सुरक्षित बाहर निकाला जाए, ताकि इंसानों और वन्यजीव दोनों को कोई नुकसान न पहुंचे। अभियान को सफलता पूर्वक पूरा करने के लिए वन विभाग ने वाइल्डलाइफ रिसर्च एंड रेस्क्यू सेंटर के अध्यक्ष विवेक जसाईवाल से संपर्क किया और उनकी टीम को भी मौके पर बुलाया। सुरक्षित रेस्क्यू के बाद प्राकृतिक आवास में वापसी वन विभाग के कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों के आपसी सहयोग से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। टीम ने पूरी सावधानी बरतते हुए करीब 16 वर्ष से अधिक उम्र की आंकी गई इस 11 फुट लंबी मादा अजगर को अपने नियंत्रण में ले लिया। अजगर को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के बाद उसे एक उपयुक्त वाहन में लादकर उसके प्राकृतिक आवास के अनुकूल वन क्षेत्र में ले जाया गया। अंत में वन विभाग की टीम ने इस विशाल अजगर को सिलीसेढ़ वन क्षेत्र में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया, जिससे बिना किसी अप्रिय घटना के पूरे अभियान का सफलतापूर्वक समापन हुआ। सरिस्का क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही और जरूरी सबक सरिस्का का यह पूरा भूभाग विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों के लिए एक महत्वपूर्ण और समृद्ध प्राकृतिक क्षेत्र माना जाता है। इस प्रकार के संरक्षित और जंगली इलाकों के आसपास बसे गांवों और खेतों में अक्सर वन्यजीवों का भटककर पहुंच जाना आम बात है। सुकल गांव की यह घटना एक बार फिर इंसान और वन्यजीवों के बीच के उस संवेदनशील संपर्क को उजागर करती है, जहां सावधानी ही बचाव का सबसे बड़ा साधन है। ग्रामीणों की सूझबूझ और समय पर दी गई सूचना के कारण ही इस विशाल अजगर की जान बचाई जा सकी और उसे उसके प्राकृतिक माहौल में वापस भेजा जा सका। यह घटना सभी के लिए एक बड़ा उदाहरण है कि ग्रामीण इलाकों या खेतों में कभी भी कोई वन्यजीव दिखाई दे, तो उसे खुद भगाने या पकड़ने की कोशिश करने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचित करना चाहिए ताकि दोनों पक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसका आप पर असर अलवर के सरिस्का क्षेत्र में वन्यजीवों की मौजूदगी और खेतों में उनके निकलने की घटनाओं से स्थानीय किसानों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। • भारत में: देश के ग्रामीण और संरक्षित जंगलों के पास स्थित कृषि क्षेत्रों में फसल कटाई के सीजन के दौरान वन्यजीवों के बाहर आने की घटनाएं अक्सर बढ़ जाती हैं, जिससे किसानों को खेत में काम करते समय सतर्क रहना चाहिए। • अलवर में: सुकल गांव और सरिस्का के आसपास के ग्रामीण इलाकों में किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खेतों में अकेले काम करते समय झाड़ियों और फसलों के बीच पैनी नजर रखें तथा किसी भी वन्यजीव के दिखने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें। ऐसा क्यों हुआ सरिस्का और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में वन्यजीवों के खेतों तक पहुंचने के पीछे प्राकृतिक आवासों का दायरा और कृषि भूमि का जंगलों से सटा होना मुख्य कारण है। • प्राकृतिक गलियारे: सरिस्का क्षेत्र वन्यजीवों का समृद्ध प्राकृतिक आवास है, जिसके कारण जंगली जानवर भोजन और पानी की तलाश में अक्सर पास के खेतों और गांवों की तरफ भटक जाते हैं। • फसल की कटाई का मौसम: बाजरे की लंबी फसल और खेतों में लगातार इंसानी गतिविधियों के कारण छिपने की जगह तलाश रहे जीव अनजाने में कटाई वाले क्षेत्रों के करीब आ जाते हैं। • सुरक्षित दूरी और प्रोटोकॉल: वन्यजीव संरक्षण नियमों के तहत जंगली जीवों को उनके प्राकृतिक आवास से छेड़छाड़ किए बिना विशेषज्ञ टीमों द्वारा ही रेस्क्यू करने का प्रावधान है। सवाल-जवाब 1. अजगर कहां और किस परिस्थिति में मिला? अजगर अलवर जिले के सरिस्का क्षेत्र के सुकल गांव में एक खेत के दौरान बाजरा काट रहे किसान को मिला। 2. अजगर की लंबाई और उम्र कितनी थी? मिलने वाला अजगर करीब 11 फुट लंबा था और उसकी उम्र लगभग 16 वर्ष से अधिक आंकी गई थी। 3. ग्रामीणों ने अजगर को देखने के बाद क्या किया? ग्रामीणों ने खुद अजगर को पकड़ने की कोशिश नहीं की और तुरंत वन विभाग को इस मामले की जानकारी दी। 4. रेस्क्यू अभियान में कौन-कौन शामिल था? इस रेस्क्यू अभियान में अकबरपुर क्षेत्रीय वन अधिकारी हेमेन्द्र राजावत, वन विभाग की टीम और वाइल्डलाइफ रिसर्च एंड रेस्क्यू सेंटर के अध्यक्ष विवेक जसाईवाल की टीम शामिल थी। 5. रेस्क्यू के बाद अजगर को कहां छोड़ा गया? सुरक्षित रेस्क्यू के बाद 11 फुट लंबी इस मादा अजगर को सिलीसेढ़ वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया। https://trendkia.com/rajasthan/11-foot-giant-python-found-in-alwar-field-while-harvesting-millet-30692 TrendKia — Har trend, sabse pehle.