80 वर्ष से अधिक उम्र में 10 हजार तक का वर्गमूल जुबानी निकालने वाले राजस्थान के तुलछाराम जाखड़ की कहानी नागौर के 80 वर्षीय किसान तुलछाराम जाखड़ बिना कागज-पेन या कैलकुलेटर के सेकंडों में कठिन गणितीय गणनाएं हल करते हैं। 28 अक्टूबर 2022 को 10,000 तक की संख्याओं का वर्गमूल और भिन्नों के पहाड़े मौखिक निकालने के लिए उनका नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। राजस्थान के नागौर जिले में स्थित मेड़ता क्षेत्र का लाम्पोलाई गांव इन दिनों एक बुजुर्ग किसान के असाधारण गणितीय कौशल के कारण चर्चा में है। 80 वर्ष की आयु पार कर चुके तुलछाराम जाखड़ ने बिना किसी आधुनिक उपकरण, कैलकुलेटर या कागज-पेन के जटिल गणितीय गणनाएं सेकंडों में हल करके सभी को अचंभित कर दिया है। मात्र चौथी कक्षा तक शिक्षित होने के बावजूद उनकी यह अद्भुत मानसिक क्षमता बड़े-बड़े गणितशास्त्रियों के लिए भी कौतुक का विषय बनी हुई है। ग्रामीण उन्हें आदर और स्नेह से 'कंप्यूटर बाबा' तथा 'गणितमैन' कहकर पुकारते हैं। मुश्किल से मुश्किल पहाड़ों की फर्राटेदार मौखिक गणना तुलछाराम जाखड़ की सबसे बड़ी विशेषता उनकी तेज गति से मानसिक हिसाब लगाने की शक्ति है। जहां एक सामान्य व्यक्ति 20 तक के पहाड़े याद रखने में मशक्कत करता है, वहीं तुलछाराम 869 जैसी विषम और बड़ी संख्याओं का पहाड़ा बिना रुके धाराप्रवाह सुना देते हैं। उनके इस अनोखे हुनर के वीडियो जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित हुए, तो उनकी ख्याति गांव की चौपालों से निकलकर पूरे देश में फैल गई। जब भी कोई आगंतुक या ग्रामीण उनकी परीक्षा लेने के लिए कोई जटिल संख्या देता है, तो वे पलक झपकते ही सटीक उत्तर सामने रख देते हैं। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम अपनी इस नैसर्गिक प्रतिभा के बल पर तुलछाराम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान अर्जित की है। 28 अक्टूबर 2022 को उनके नाम दो अलग-अलग मानसिक गणना उपलब्धियों के लिए 'गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में विश्व कीर्तिमान दर्ज किया गया। उन्होंने 10,000 तक की किसी भी संख्या का वर्गमूल (Square Root) बिना किसी लिखित सहायता के केवल दिमाग में गणना करके निकालने का प्रदर्शन किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने भिन्नों (Fractions) जैसे कि आधा (1/2), एक-चौथाई (1/4) तथा तीन-चौथाई (3/4) के पहाड़ों को मौखिक रूप से हल करने में भी नया कीर्तिमान स्थापित किया। खेतों की नाप-जोख बनी असली पाठशाला तुलछाराम की औपचारिक पढ़ाई चौथी कक्षा के पश्चात ही छूट गई थी, जिसके बाद वे पूर्ण रूप से कृषि कार्यों में लग गए। हालांकि, स्कूल छूटने के बाद भी उन्होंने संख्याओं के साथ अपना अभ्यास कभी बंद नहीं किया। खेतों की सीमा तय करना, बीघा और बिस्वा का रकबा निकालना, तथा जमीन के बंटवारे के दौरान कठिन स्थानीय मापों का हिसाब-किताब लगाना ही उनकी वास्तविक प्रयोगशाला बन गया। वर्षों तक व्यावहारिक धरातल पर लगातार किए गए इस अभ्यास ने उनके मस्तिष्क को किसी इलेक्ट्रॉनिक कैलकुलेटर से भी अधिक तीव्र और कुशल बना दिया। आज भी जब गांव में भूमि विवाद या रकबा मापने की जटिल स्थिति उत्पन्न होती है, तो ग्रामीण परामर्श के लिए उन्हीं के पास आते हैं। निरंतर अभ्यास और अनुभव का अनुपम उदाहरण तुलछाराम जाखड़ की यह उपलब्धि इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि ज्ञान और बौद्धिक क्षमता किसी औपचारिक डिग्री या आधुनिक साधनों की मोहताज नहीं होती। 80 वर्ष से अधिक की आयु में भी मानसिक रूप से इतने सतर्क और क्रियाशील रहकर उन्होंने साबित कर दिया है कि लगन और सतत अभ्यास से असंभव लगने वाले मुकाम भी हासिल किए जा सकते हैं। उनका यह प्रेरक जीवन ग्रामीण प्रतिभा और निरंतर स्वाध्याय की शक्ति को उजागर करता है। इसका आप पर असर 80 वर्षीय तुलछाराम जाखड़ की यह उपलब्धि गणितीय प्रतिभा और ग्रामीण क्षमता का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करती है। • भारत में: यह कहानी देश के युवाओं और छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत है कि बिना किसी औपचारिक डिग्री के भी केवल अभ्यास से गणितीय दक्षता हासिल की जा सकती है। यह दिखाता है कि उम्र बढ़ने के साथ दिमागी सतर्कता बनाए रखना संभव है। • नागौर और राजस्थान में: नागौर जिले के लाम्पोलाई गांव और मेड़ता क्षेत्र की ग्रामीण प्रतिभा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है। स्थानीय स्तर पर जमीन की पारंपरिक नाप-जोख और बीघा गणना की व्यावहारिक उपयोगिता को उजागर करती है। सवाल-जवाब 1. तुलछाराम जाखड़ कौन हैं और वे क्यों प्रसिद्ध हैं? तुलछाराम जाखड़ राजस्थान के नागौर जिले के लाम्पोलाई गांव के 80 वर्षीय किसान हैं, जो बिना कैलकुलेटर या कागज-पेन के सेकंडों में कठिन गणितीय गणनाएं और वर्गमूल निकालने के लिए प्रसिद्ध हैं। 2. तुलछाराम जाखड़ की औपचारिक शिक्षा कितनी हुई है? तुलछाराम जाखड़ की औपचारिक स्कूली शिक्षा केवल चौथी कक्षा तक ही हुई है। 3. उन्हें गांव में किन नामों से जाना जाता है? अपनी तीव्र मानसिक गणना क्षमता के कारण उन्हें गांव में 'कंप्यूटर बाबा' और 'गणितमैन' के नाम से जाना जाता है। 4. तुलछाराम जाखड़ ने गोल्डन बुक ऑफ WORLD RECORDS में नाम कब और क्यों दर्ज कराया? उन्होंने 28 अक्टूबर 2022 को 10,000 तक की संख्याओं का वर्गमूल मौखिक रूप से निकालने और भिन्नों (जैसे 1/2, 1/4, 3/4) के पहाड़े सुनाने की उपलब्धियों के लिए वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। 5. उन्हें गणित की यह अद्भुत क्षमता कैसे हासिल हुई? चौथी कक्षा के बाद खेती-किसानी से जुड़ने के दौरान खेतों की नाप-जोख, बीघा के हिसाब और जमीन के बंटवारे की गणनाएं लगातार दिमाग में करने से उनका मानसिक गणित तेज हुआ। प्रेरणा और सबक तुलछाराम जाखड़ का जीवन यह सिखाता है कि लगन और व्यावहारिक अभ्यास से बड़ी से बड़ी बाधाओं को पार किया जा सकता है। • डिग्री से बड़ा है अभ्यास: औपचारिक शिक्षा की सीमाएं किसी व्यक्ति की प्रतिभा या बुद्धिमत्ता को सीमित नहीं कर सकतीं। • उम्र केवल एक संख्या है: 80 वर्ष की उम्र में भी नियमित मानसिक अभ्यास से मस्तिष्क को अत्यंत तीव्र और चुस्त रखा जा सकता है। • व्यावहारिक कार्य ही सबसे बड़ी पाठशाला: रोजमर्रा के काम और कृषि संबंधी गणनाओं को सीखने और अभ्यास का साधन बनाया जा सकता है। • एकाग्रता और लगन: बिना किसी आधुनिक उपकरण के पूरी तरह से मानसिक क्षमताओं पर भरोसा करना गहरी एकाग्रता को जन्म देता है। https://trendkia.com/rajasthan/80-varsha-se-adhika-umra-men-10-hajara-taka-ka-vargamula-jubani-nikalane-vale-rajasthan-ke-tulchharam-jakhar-ki-kahani-26073 TrendKia — Har trend, sabse pehle.