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  "title": "अचलगढ़ दुर्ग में खंडहर बन रहा ओखा रानी का महल, उपेक्षा के चलते मिट रही सदियों पुरानी पहचान",
  "summary": "सिरोही जिले के अचलगढ़ में मंदाकिनी कुंड के समीप स्थित महाराणा कुंभा की रानी ओखा का दो मंजिला महल उचित रखरखाव के अभाव में तेजी से जर्जर हो रहा है।",
  "content": "राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित माउंट आबू का अचलगढ़ इलाका अपने गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र में मौजूद मुख्य दुर्ग से तो अधिकांश लोग भली-भांति परिचित हैं, परंतु इसी परिसर की सुरक्षा पंक्ति के भीतर निर्मित रानी ओखा का आवास धीरे-धीरे गुमनामी के अंधेरे में खो रहा है। यह प्राचीन दो मंजिला भवन उचित संरक्षण न मिलने के कारण अब बदहाली की मार झेल रहा है, जबकि कभी इसे पूरे किले का सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता था।\n\nमेवाड़ शासक ने कराया था पुनर्निर्माण\nऐतिहासिक घटनाओं के अनुसार, आक्रमणकारियों के हमले के बाद जब अचलगढ़ का दुर्ग क्षतिग्रस्त हो गया था, तब मेवाड़ के तत्कालीन शासक महाराणा कुंभा ने वर्ष 1452 में विजय प्राप्त कर इस परिसर का नए सिरे से जीर्णोद्धार करवाया। इस नवनिर्माण के दौरान राजपरिवार की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए राजा और रानी के रहने के लिए अलग-अलग आवासीय भवनों की व्यवस्था की गई थी। इसी योजना के अंतर्गत महाराणा ने अपनी रानी ओखा के निवास के लिए एक विशेष महल तैयार करवाया था।\n\nमंदाकिनी कुंड की तलहटी में बिखरे अवशेष\nपहाड़ी ढलानों और प्राकृतिक हरियाली के बीच मंदाकिनी कुंड के पास निर्मित यह ऐतिहासिक इमारत आज जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी है। देखरेख की भारी कमी के चलते कुछ साल पहले ही इस दो मंजिला ढांचे का एक बड़ा भाग भरभराकर नीचे गिर गया था। वर्तमान में खंडहर का रूप ले चुकी इस विरासत में पुरातन दौर की बड़ी ईंटों से तैयार मजबूत दीवारें, नक्काशीदार खिड़कियां और पारंपरिक झरोखे अब भी मौजूद हैं, जो उस युग की कारीगरी को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।\n\nसुरक्षित ऊंचाई पर बना ओखा रानी का नोहरा\nइस परिसर की स्थापत्य शैली को लेकर टूरिस्ट गाइड दीपक सिंह का कहना है कि यह निर्माण सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण ऊंचाई पर कराया गया था। स्थानीय बोलचाल में इस स्थल को 'ओखा रानी का नोहरा' नाम से भी पहचाना जाता है। सदियों का समय बीतने के साथ ही इस पूरे किले और महल के हिस्से टूट-फूट का शिकार हो गए, फिर भी ये अवशेष तत्कालीन वास्तुकला की दृढ़ता की गवाही देते हैं। सैलानी आज भी हनुमान पोल तथा चंपा पोल नामक ऐतिहासिक द्वारों से गुजरते हुए इस वीरान स्थल तक अपनी राह बना सकते हैं।\n\nमार्ग की जानकारी न होने से भटकते हैं पर्यटक\nअचलगढ़ घूमने आने वाले पर्यटकों और पुरातत्व के प्रति रुचि रखने वालों के लिए यह स्थान मध्यकालीन रजवाड़ों के जीवन की झलक पाने का अनूठा जरिया है। हालांकि, सटीक रास्ते और पर्याप्त प्रचार-प्रसार के अभाव में अधिकांश भ्रमणकारी यहां तक पहुंच ही नहीं पाते। बहुत सीमित संख्या में ही लोग इस दो मंजिला महल तक अपनी पहुंच बना पाते हैं। यह उपेक्षित धरोहर आज भी अपनी स्थापत्य कला और उस दौर के निर्माण कौशल का अनूठा प्रमाण प्रस्तुत करती है।\n\nइसका आप पर असर\nअचलगढ़ में उपेक्षित पड़ा यह ऐतिहासिक स्थल पर्यटकों और धरोहर प्रेमियों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।\n\n• राजस्थान में: सिरोही और माउंट आबू जाने वाले सैलानी अब अचलगढ़ के मुख्य दुर्ग के साथ-साथ इस प्राचीन महल के अवशेषों का भ्रमण कर सकते हैं। इसके लिए पर्यटकों को स्थानीय गाइड अथवा हनुमान पोल और चंपा पोल के रास्ते का उपयोग करना होगा।\n• पर्यटन अनुभव पर: इस स्थल के सटीक मार्ग की जानकारी न होने से सैलानियों को असुविधा हो सकती है। जो यात्री मध्यकालीन वास्तुकला देखना चाहते हैं, उन्हें पहले से योजना बनाकर ही इस पथरीले रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।\n• धरोहर संरक्षण: उपेक्षा के कारण इमारत का एक हिस्सा पहले ही गिर चुका है, जिससे आने वाले समय में इसके और नष्ट होने का जोखिम बना हुआ है। यदि इसका संरक्षण नहीं हुआ, तो आने वाली पीढ़ियां मेवाड़ कालीन इस स्थापत्य कला को देखने से वंचित रह जाएंगी।\n• स्थानीय मार्गदर्शन: मौके पर किसी औपचारिक दिशा-सूचक बोर्ड के न होने से पर्यटकों को स्थानीय मार्गदर्शकों की मदद लेनी पड़ सकती है। इससे गाइड सेवा पर निर्भरता बनी रहती है ताकि लोग भटकने से बच सकें।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअचलगढ़ में ओखा रानी के महल का निर्माण सुरक्षात्मक रणनीति और ऐतिहासिक आक्रमणों के बाद उपजी परिस्थितियों के कारण हुआ था।\n\n• ऐतिहासिक विजय और पुनर्निर्माण: पुराने किले के हमलों में ध्वस्त होने के बाद मेवाड़ के शासक महाराणा कुंभा ने वर्ष 1452 में विजय प्राप्त कर इस दुर्ग को दोबारा बनवाया था। इसी नवीनीकरण के दौरान उन्होंने अपनी रानी ओखा के लिए सुरक्षित पृथक आवासीय महल का निर्माण करवाया।\n• रणनीतिक सुरक्षा का चयन: आपातकालीन परिस्थितियों और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रानी का यह महल किले के सबसे ऊंचे हिस्से में स्थापित किया गया था। इस ऊंचाई और मंदाकिनी कुंड के समीप की स्थिति ने इसे प्राकृतिक सुरक्षा कवच प्रदान किया।\n• संरक्षण का अभाव और ढहाव: समय बीतने के साथ औपचारिक रखरखाव न मिलने की वजह से यह दो मंजिला भवन जर्जर हो गया। निरंतर उपेक्षा और मौसमी मार के चलते कुछ वर्ष पूर्व इस इमारत का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया था।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ओखा रानी का महल कहां स्थित है?\nयह महल राजस्थान के सिरोही जिले में माउंट आबू के अचलगढ़ दुर्ग क्षेत्र में मंदाकिनी कुंड के पास स्थित है।\n\n2. इस महल का निर्माण किसने और कब करवाया था?\nमेवाड़ के शासक महाराणा कुंभा ने वर्ष 1452 में अचलगढ़ दुर्ग पर विजय के बाद इसका निर्माण करवाया था।\n\n3. स्थानीय स्तर पर इस महल को किस अन्य नाम से जाना जाता है?\nस्थानीय लोग इस दो मंजिला ऐतिहासिक परिसर को 'ओखा रानी का नोहरा' के नाम से भी पुकारते हैं।\n\n4. पर्यटक इस महल तक किन रास्तों से पहुंच सकते हैं?\nसैलानी अचलगढ़ किले के हनुमान पोल और चंपा पोल दरवाजों से होकर इस प्राचीन स्थल तक जा सकते हैं।\n\n5. अधिकतर पर्यटक इस महल को देखने क्यों नहीं पहुंच पाते?\nरास्ते की समुचित जानकारी न होने के कारण अधिकांश पर्यटक यहां तक नहीं पहुंच पाते हैं।",
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  "publishedAt": "2026-10-31",
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