# आदिलाबाद के जननायक कस्ताला रामकिष्टू की कहानी जिन्होंने निजाम के खिलाफ संघर्ष में बेच दी अपनी संपत्ति

> तेलंगाना सशस्त्र संघर्ष के निस्वार्थ नेता कस्ताला रामकिष्टू ने निजाम के रजाकारों से मुकाबला किया और गरीबों को 20,000 एकड़ जमीन के पट्टे दिलाए।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/adilabad-ke-jananayaka-kastala-ramkistu-ki-kahani-jinhonne-nizam-ke-khilapha-sngharsha-men-becha-di-apani-snpatti-31494 · **Language:** Hindi
**Tags:** कस्ताला रामकिष्टू, तेलंगाना इतिहास, आदिलाबाद, निजाम शासन, स्वतंत्रता सेनानी, भूमि सुधार

तेलंगाना के इतिहास और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में ऐसे अनेक महापुरुष हुए हैं, जिन्होंने जनता के अधिकार और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन न्योछावर कर दिया। तेलंगाना के आदिलाबाद क्षेत्र की ऐतिहासिक धरती पर जन्मे कस्ताला रामकिष्टू ऐसे ही एक अनूठे स्वतंत्रता सेनानी और जननेता थे। हैदराबाद के निजाम के शासनकाल में रजाकारों के अत्याचारों के विरुद्ध उन्होंने अटूट साहस के साथ आवाज उठाई। जनसेवा को ही अपने जीवन का ध्येय बनाने वाले इस महान नेता ने गरीब और शोषित समाज के उत्थान के लिए अपनी निजी संपत्ति तक न्योछावर कर दी।

## रजाकारों का मुकाबला और निजाम का सख्त आदेश
इतिहास के जानकार शाहिद उमेर के अनुसार, कस्ताला रामकिष्टू का जन्म 16 अगस्त 1918 को हुआ था। उन्होंने न केवल भारत के राष्ट्रीय स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय भाग लिया, बल्कि निजाम के निरंकुश शासन व्यवस्था के खिलाफ चले तेलंगाना सशस्त्र संघर्ष में भी अग्रणी भूमिका निभाई। उस दौर में जब रजाकारों का उपद्रव और अत्याचार चरम पर था, तब रामकिष्टू ने बिना किसी भय के उनका कड़ा विरोध किया। उनके बढ़ते प्रभाव और जनसंघर्ष को देखते हुए तत्कालीन निजाम सरकार ने उन्हें देखते ही गोली मारने का प्रशासनिक आदेश जारी कर दिया था। इस भीषण खतरे के बावजूद वे अपने रास्ते से पीछे नहीं हटे और बेसहारा तथा भूमिहीन लोगों के अधिकारों की लड़ाई लगातार लड़ते रहे।

## जनआंदोलन के लिए निजी जमीन की बिक्री और बेघर होने का दौर
सशस्त्र संघर्ष और लोक कल्याणकारी आंदोलन को निरंतर चलाने के लिए आर्थिक संसाधनों की सख्त जरूरत थी। ऐसे कठिन समय में कस्ताला रामकिष्टू ने अपने साथियों की आर्थिक मदद और आंदोलन की निरंतरता बनाए रखने के लिए अपनी निजी जमीन तक बेच डाली। अपनी व्यक्तिगत संपत्ति न्योछावर करने के कारण एक समय ऐसा आया जब उनके पास अपना खुद का कोई मकान या ठिकाना नहीं बचा था। वे पूरी तरह बेघर हो गए थे। लेकिन आदिलाबाद के जिन निर्धन और शोषित लोगों के लिए उन्होंने अपना सब कुछ त्याग दिया था, उन गरीबों ने मिलकर एकजुटता दिखाई और अपने इस जननायक के रहने के लिए एक घर का निर्माण कराया।

## 1967 का विधानसभा चुनाव और 20,000 एकड़ जमीन के पट्टे
जनता के प्रति कस्ताला रामकिष्टू के इस अनूठे समर्पण और त्याग का प्रतिफल था कि वर्ष 1967 के विधानसभा चुनाव में आदिलाबाद की जनता ने उन्हें भारी समर्थन देकर अपना विधायक चुन लिया। जनप्रतिनिधि बनने के पश्चात उन्होंने सत्ता का उपयोग केवल जनकल्याण के कार्यों में किया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भूमिहीन गरीबों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए ऐतिहासिक प्रयास किए और लगभग 20,000 एकड़ सरकारी भूमि के पट्टे जरूरतमंदों के नाम करवाए। इसके अतिरिक्त उन्होंने आदिलाबाद शहर तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों बेघर परिवारों को आवासीय भूमि उपलब्ध कराई।

## आदिलाबाद का विकास, किसान मुआवजा और अमर विरासत
क्षेत्र के आर्थिक विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में भी कस्ताला रामकिष्टू की दूरदर्शी भूमिका रही। आदिलाबाद में सीसीआई स्पिनिंग मिल की स्थापना कराने में उनकी प्रमुख भूमिका रही। इसके साथ ही सातनाला सिंचाई परियोजना के शुरुआती भूमि सर्वेक्षण कार्य को गति प्रदान करने में उन्होंने अहम योगदान दिया। जब आदिलाबाद हवाई पट्टी के निर्माण के लिए 109 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया, तब उन्होंने किसानों के पक्ष में मजबूती से खड़े होकर उन्हें उचित और न्यायसंगत मुआवजा दिलवाया। 8 सितंबर 1985 को इस महान जननायक का देहावसान हो गया। आज भी आदिलाबाद स्थित केआरके कॉलोनी उनके संघर्षों और जनसेवा की जीवंत याद दिलाती है।

## इसका आप पर असर
कस्ताला रामकिष्टू का जीवन आज की भावी पीढ़ी और जनप्रतिनिधियों के लिए निस्वार्थ सेवा का एक बड़ा मार्गदर्शक है।

- **भारत में:** यह कहानी युवाओं को याद दिलाती है कि स्वतंत्रता संग्राम केवल राजनीतिक आजादी नहीं था, बल्कि गरीबों के अधिकारों और भूमि सुधारों की बुनियाद भी था।
- **आदिलाबाद और तेलंगाना में:** स्थानीय स्तर पर करीब 20,000 एकड़ जमीन का आवंटन और केआरके कॉलोनी जैसे प्रयास आज भी हजारों परिवारों को छत और आजीविका की सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
कस्ताला रामकिष्टू का संघर्ष और उनकी जनप्रियता तात्कालिक सामाजिक संकट और निजाम के निरंकुश शासन के खिलाफ उभरी जनाकांक्षाओं का परिणाम थी।

- **रजाकारों के अत्याचार:** निजाम शासन के दौरान रजाकारों द्वारा आम जनता और किसानों पर किए जा रहे उत्पीड़न के जवाब में स्थानीय स्तर पर सशस्त्र विरोध खड़ा हुआ।
- **भूमिहीन गरीबों की समस्याएं:** तेलंगाना के ग्रामीण इलाकों में बहुसंख्यक गरीब जनता के पास खेती या रहने के लिए जमीन नहीं थी, जिससे रामकिष्टू ने भूमि वितरण को अपना मुख्य ध्येय बनाया।
- **आंदोलन के लिए व्यक्तिगत त्याग:** अपने साथियों की वित्तीय मदद और संघर्ष जारी रखने के लिए उन्होंने अपनी जमीन बेची, जिसके कारण जनता ने उन्हें अपना संरक्षक मानकर उनका अपना मकान बनवाया।

## सवाल-जवाब

### 1. कस्ताला रामकिष्टू कौन थे?
कस्ताला रामकिष्टू तेलंगाना के आदिलाबाद के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और जनप्रतिनिधि थे, जिन्होंने निजाम शासन और रजाकारों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

### 2. कस्ताला रामकिष्टू का जन्म कब और कहां हुआ था?
उनका जन्म 16 अगस्त 1918 को हुआ था और उन्होंने तेलंगाना के आदिलाबाद क्षेत्र में जनसेवा की।

### 3. निजाम सरकार ने उनके खिलाफ क्या आदेश जारी किया था?
रजाकारों के अत्याचारों के खिलाफ कड़े प्रतिरोध के कारण तत्कालीन निजाम सरकार ने उन्हें देखते ही गोली मारने का आदेश जारी किया था।

### 4. विधायक बनने के बाद उन्होंने क्या प्रमुख कार्य किए?
1967 में विधायक बनने के बाद उन्होंने गरीबों को करीब 20,000 एकड़ सरकारी जमीन के पट्टे दिलवाए और सीसीआई मिल व सिंचाई परियोजनाओं में अहम योगदान दिया।

### 5. कस्ताला रामकिष्टू का निधन कब हुआ?
उनका निधन 8 सितंबर 1985 को हुआ, और आदिलाबाद की केआरके कॉलोनी आज भी उनकी स्मृति में स्थित है।

## प्रेरणा और सबक
कस्ताला रामकिष्टू का जीवन त्याग, निष्ठा और सच्चे नेतृत्व की अद्भुत प्रेरणा प्रस्तुत करता है।

- **जनसेवा को प्राथमिकता:** सत्ता और पद पाने से पहले समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए लड़ना ही एक सच्चे नेता की पहचान है।
- **व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठना:** आंदोलन और साथियों की मदद के लिए अपनी जमीन तक बेच देना दिखाता है कि सार्वजनिक उद्देश्य के आगे व्यक्तिगत संपत्ति गौण है।
- **सहानुभूति और समुदाय का बल:** जब आप ईमानदारी से लोगों की सेवा करते हैं, तो पूरा समाज संकट के समय आपके साथ खड़ा होता है।
- **अधिकारों की ठोस लड़ाई:** 20,000 एकड़ जमीन के पट्टे दिलवाकर उन्होंने दिखाया कि नेतृत्व का असली लक्ष्य लोगों के जीवन में वास्तविक सकारात्मक बदलाव लाना है।

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