# अहोई अष्टमी 2026 पर शाम को तारों को अर्घ्य देने का समय और पूजा मुहूर्त

> अहोई अष्टमी पर संतान के कल्याण और दीर्घायु के लिए माताओं ने व्रत रखा है, जिसमें शाम 5:36 से पूजा और शाम करीब 6:01 बजे तारों को अर्घ्य दिया जाएगा।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/ahoi-ashtami-2026-para-shama-ko-taron-ko-arghya-dene-ka-samaya-aura-puja-muhurta-54355 · **Language:** Hindi
**Tags:** अहोई अष्टमी 2026, अहोई माता, तारों के दर्शन, पूजा मुहूर्त, अर्घ्य का समय, व्रत पारण

संतान की मंगलकामना, बेहतर स्वास्थ्य और सुखी जीवन के लिए मनाया जाने वाला अहोई अष्टमी का पारंपरिक व्रत आज रखा जा रहा है। इस विशेष अवसर पर माताएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर अहोई माता की उपासना करती हैं और सायंकाल में विधिपूर्वक धार्मिक अनुष्ठान पूरा करती हैं। ऐसी मान्यता है कि अहोई माता का सच्चे मन से पूजन करने से बच्चों के मार्ग की बाधाएं समाप्त होती हैं तथा घर-परिवार में सुख और शांति का विस्तार होता है। इस पूरे पर्व में शाम के वक्त गगन में तारों के दीदार और उनके पूजन की विशेष धार्मिक परंपरा जुड़ी हुई है।

## पूजा का समय और तारों को अर्घ्य देने का विधान
अहोई अष्टमी के दिन संध्या पूजन के लिए शुभ मुहूर्त निर्धारित किया गया है। आज के दिन अहोई माता की मुख्य पूजा संपन्न करने का उत्तम समय शाम 5:36 बजे से लेकर शाम 6:54 बजे तक उपलब्ध रहेगा। इस शुभ अवधि में परिवार की महिलाएं अहोई माता का चित्र बनाकर अथवा स्थापित कर विधिवत आराधना करती हैं। इसके बाद जैसे ही गोधूलि वेला के उपरांत आसमान में तारे दृष्टिगोचर होते हैं, अर्घ्य की तैयारी शुरू की जाती है। तारों के दर्शन का समय शाम करीब 6:01 बजे तय माना गया है।

## तारों को जल अर्पण के साथ व्रत का पारण
धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार माताएं शाम को गगन मंडल में तारों के प्रकट होने पर लोटे में जल भरकर उन्हें अर्घ्य अर्पित करती हैं। अर्घ्य देते समय वे अपनी संतान के निरोगी काया, लंबी उम्र और उज्ज्वल भविष्य का आशीष मांगती हैं। तारों को जल समर्पित करने के बाद ही इस कठिन उपवास का पारण किया जाता है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश समेत देश के अलग-अलग क्षेत्रों में यह समय स्थानीय भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करता है। हालांकि वास्तविक दृश्यता स्थानीय मौसम, बादलों के जमावड़े तथा वातावरणीय दशाओं के आधार पर निर्धारित समय से कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकती है। श्रद्धा भाव से किए गए इस पूजन से मातृशक्ति को अहोई माता की असीम कृपा प्राप्त होती है।

## इसका आप पर असर
अहोई अष्टमी का व्रत रखने वाली माताओं को अपने दैनिक उपवास का पारण शाम को सही समय पर करने में मदद मिलेगी।

- **पूजा की तैयारी:** अहोई माता की मुख्य पूजा के लिए शाम 5:36 बजे से 6:54 बजे तक का समय निर्धारित है। व्रती महिलाओं को इस समयावधि के भीतर अपनी पूरी पूजा सामग्री तैयार कर अनुष्ठान समाप्त कर लेना चाहिए।
- **तारों का दर्शन:** शाम करीब 6:01 बजे आकाश में तारों के दर्शन होने की उम्मीद है। अर्घ्य देने के लिए जरूरी जल और पूजा का पात्र इसी समय से पहले व्यवस्थित कर लें।
- **मौसम का प्रभाव:** बादलों अथवा धुंध के कारण तारों के वास्तविक दर्शन में कुछ मिनटों का अंतर आ सकता है। व्रती महिलाएं आसमान की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अर्घ्य का क्रम पूरा कर सकती हैं।
- **व्रत पारण का समय:** तारों को जल अर्पित करने के उपरांत ही व्रत का पारण किया जाता है। शाम 6:01 बजे के बाद अर्घ्य देकर माताएं अपना उपवास विधिपूर्वक खोल सकती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
अहोई अष्टमी पर तारों की पूजा और शाम के समय उपवास खोलने की व्यवस्था प्राचीन धार्मिक मान्यताओं तथा खगोलीय स्थितियों से जुड़ी हुई है।

- **धार्मिक परंपरा:** सनातन परंपरा में संतान की लंबी आयु और पारिवारिक सुख के लिए अहोई माता की आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन तारों को अर्घ्य देकर प्रार्थना करने से बच्चों के जीवन के संकट दूर होते हैं।
- **मुहूर्त का निर्धारण:** पंचांग के अनुसार शाम 5:36 से 6:54 बजे तक पूजा का विशिष्ट मुहूर्त पड़ रहा है। इसी गणना के आधार पर शाम करीब 6:01 बजे तारों के दिखने का आकलन किया गया है।
- **मौसम और स्थानीय कारक:** विभिन्न नगरों में सूर्यास्त और गोधूलि के समय में अंतर होने से दृश्यता बदलती है। इसी कारण बादलों और वायुमंडलीय परिस्थितियों को देखते हुए समय में कुछ मिनटों का बदलाव संभव माना गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. अहोई अष्टमी पर अहोई माता की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:36 बजे से लेकर शाम 6:54 बजे तक है।

### 2. आकाश में तारे दिखने का समय क्या निर्धारित किया गया है?
आकाश में तारों के दर्शन शाम करीब 6:01 बजे होने का समय तय है।

### 3. तारों को अर्घ्य देने का धार्मिक महत्व क्या है?
तारों को जल अर्पित करने से संतान की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद मिलता है।

### 4. व्रत का पारण कब और कैसे किया जाता है?
शाम के समय तारों के दर्शन के बाद उन्हें जल अर्पित करके ही व्रत का पारण किया जाता है।

### 5. क्या अलग-अलग शहरों में तारों के दिखने के समय में बदलाव हो सकता है?
हां, स्थानीय मौसम, बादलों और वातावरण के प्रभाव से तारों के दर्शन में कुछ मिनट आगे-पीछे का अंतर आ सकता है।

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