दीवाली से पहले राजस्थान में हवा हुई जहरीली, भिवाड़ी का AQI पहुंचा 373 के पार दीवाली के त्योहार से पहले राजस्थान के कई शहरों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। भिवाड़ी में AQI 373 को पार कर गया है जबकि जयपुर और जोधपुर जैसे प्रमुख शहरों में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है। राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में मौसम के मिजाज में आए बदलाव के साथ ही वायु प्रदूषण का संकट गहराने लगा है। प्रदेश के प्रमुख शहरी इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स का ग्राफ तेजी से ऊपर की ओर भाग रहा है। दीवाली के पावन पर्व से ठीक पहले औद्योगिक नगरी के रूप में पहचान रखने वाले भिवाड़ी में प्रदूषण का स्तर भयावह रूप ले चुका है। हवा की सुस्त चाल और मौसम के रूख के कारण वातावरण में प्रदूषित कणों और धुंध का दायरा बढ़ गया है, जिसके चलते पूरे राज्य में हवा की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। विभिन्न शहरों में चिंताजनक स्थिति राज्य के अलग-अलग जिलों में वायु गुणवत्ता का पैमाना अब खतरनाक श्रेणी की ओर अग्रसर है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार औद्योगिक और महानगरों में हवा का दम घुटने लगा है। भिवाड़ी में प्रदेश भर में सबसे ज्यादा 373 एक्यूआई दर्ज किया गया है। इसके अलावा सवाई माधोपुर में एयर क्वालिटी इंडेक्स 291 तक जा पहुंचा है। राजधानी जयपुर में यह आंकड़ा 272 दर्ज किया गया है, जहां प्रदूषण का स्तर सामान्य से दोगुने से भी अधिक हो गया है। जोधपुर में हवा की गुणवत्ता 255 के आसपास रिकॉर्ड की गई है। बीकानेर शहर में एक्यूआई का स्तर 250 पर बना हुआ है। कोटा में एयर क्वालिटी इंडेक्स 151 रिकॉर्ड किया गया है, जबकि उदयपुर में यह आंकड़ा 138 तक पहुंच चुका है। इन सबके बीच अजमेर में सबसे कम 103 एयर क्वालिटी इंडेक्स दर्ज किया गया है। भिवाड़ी में लगातार बिगड़ते हालात मौसम के बदलते समीकरणों के बीच राजस्थान में वायु प्रदूषण की सबसे डरावनी तस्वीर खैरथल तिजारा जिले के अंतर्गत आने वाले भिवाड़ी से सामने आ रही है। इस प्रमुख औद्योगिक केंद्र में प्रदूषण का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। सुबह के वक्त एयर क्वालिटी इंडेक्स 340 से छलांग लगाकर 370 और 373 के आंकड़े को पार कर गया है। हवा की यह स्थिति बेहद खराब श्रेणी में आती है। भिवाड़ी के पिछले तीन दिनों के रिकॉर्ड पर गौर करें तो वायु गुणवत्ता में भारी गिरावट साफ दिखाई देती है। तीन नवंबर को यहां एक्यूआई 262 दर्ज किया गया था। चार नवंबर को यह बढ़कर 288 के स्तर पर पहुंच गया। पांच नवंबर को प्रदूषण का यह स्तर और उछलकर 337 तक जा पहुंचा। दीवाली के मौके पर होने वाली आतिशबाजी से प्रदूषण बढ़ने की आशंका पहले से ही जताई जाती है, लेकिन भिवाड़ी में तो दीवाली से दो दिन पूर्व ही हालात पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं। स्वास्थ्य पर मंडराता गंभीर खतरा हवा में लगातार घुल रहे इस ज़हर और बढ़ते एयर क्वालिटी इंडेक्स की वजह से आम नागरिकों के साथ-साथ श्वास संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों की मुश्किलें काफी बढ़ने की आशंका है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण का यह मौजूदा स्तर बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से ही फेफड़ों या दमा की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। सुबह और शाम के समय आसमान में धुंध छाए रहने के कारण लोगों को सांस लेने में भारी परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है। इसका आप पर असर राजस्थान में बढ़ते वायु प्रदूषण और खराब होती हवा का सीधा असर आम नागरिकों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। • भारत में: उत्तर भारत में दीवाली के करीब आते ही प्रदूषण का स्तर बढ़ना आम जनजीवन को प्रभावित करता है। इससे देश के अन्य औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में भी पर्यावरण नियमों और वायु गुणवत्ता को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं। • राजस्थान में: भिवाड़ी, जयपुर, जोधपुर और सवाई माधोपुर जैसे शहरों में रहने वाले लोगों को सुबह और शाम के वक्त घर से बाहर निकलते समय आंखों में जलन और सांस लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। • स्वास्थ्य सुरक्षा: बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा या फेफड़ों के मरीजों को इस अत्यधिक प्रदूषण के दौरान विशेष सावधानी बरतने और सुबह के समय सैर पर जाने से बचने की सलाह दी जाती है। • दैनिक गतिविधियां: जहरीली हवा के कारण लोगों को अपने रोजाना के आउटडोर कामों और व्यायाम के शेड्यूल में बदलाव करना पड़ रहा है ताकि जहरीले कणों के संपर्क में आने से बचा जा सके। ऐसा क्यों हुआ राजस्थान के विभिन्न शहरों में वायु गुणवत्ता के स्तर में आई भारी गिरावट के पीछे भौगोलिक स्थितियां, मौसम में बदलाव और स्थानीय औद्योगिक गतिविधियां मुख्य वजह हैं। हवा की रफ्तार सुस्त होने के कारण वातावरण में प्रदूषित कण फैल नहीं पाते और निचले वायुमंडल में ही स्थिर हो जाते हैं। • मौसम में बदलाव: सर्दियों की शुरुआत के साथ तापमान और वायुमंडलीय दबाव में होने वाले बदलावों के कारण हवा की गति धीमी पड़ जाती है, जिससे प्रदूषक तत्व ठहर जाते हैं। • औद्योगिक उत्सर्जन: भिवाड़ी जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्टरियों और विनिर्माण इकाइयों से निकलने वाला धुआं स्थानीय हवा को लगातार प्रदूषित कर रहा है। • धुंध का जमाव: सुबह और शाम के समय कम तापमान और नमी के कारण वायुमंडल में धुंध और जहरीले कणों का घनत्व बढ़ जाता है। • त्योहार से पहले का प्रभाव: दीवाली के नजदीक आते ही पारंपरिक गतिविधियों और स्थानीय आवाजाही के बढ़ने से भी हवा में प्रदूषण का स्तर तेजी से ऊपर चढ़ने लगता है। सवाल-जवाब 1. राजस्थान में सबसे ज्यादा AQI किस शहर में दर्ज किया गया है? राजस्थान में सबसे ज्यादा 373 एक्यूआई भिवाड़ी शहर में दर्ज किया गया है। 2. राजधानी जयपुर में एयर क्वालिटी इंडेक्स कितना रिकॉर्ड हुआ है? जयपुर में वायु गुणवत्ता का स्तर 272 एक्यूआई दर्ज किया गया है। 3. भिवाड़ी में पिछले कुछ दिनों में AQI में किस प्रकार बदलाव आया है? भिवाड़ी में 3 नवंबर को AQI 262 था, जो 4 नवंबर को 288 और 5 नवंबर को बढ़कर 337 तक पहुंच गया था। 4. बढ़ते प्रदूषण से किन लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो सकती है? इस बढ़ते वायु प्रदूषण से बुजुर्गों, बच्चों और सांस या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो सकती है। 5. अजमेर में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी रही है? अजमेर में प्रदेश का सबसे कम 103 एयर क्वालिटी इंडेक्स दर्ज किया गया है। https://trendkia.com/rajasthan/air-quality-turns-toxic-across-rajasthan-ahead-of-diwali-bhiwadi-aqi-crosses-373-57037 TrendKia — Har trend, sabse pehle.