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  "title": "आजादी के दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाओं से महरूम राजसमंद का उलपुराफार्म गांव, चुनावी चर्चा में गूंजे सवाल",
  "summary": "राजसमंद जिले की झोर पंचायत में स्थित उलपुराफार्म गांव के निवासी करीब 50 साल से पक्की सड़क, पेयजल, शिक्षा और अस्पताल की कमी झेल रहे हैं।",
  "content": "पंचायतीराज चुनाव 2026 की घोषणा के साथ ही ग्रामीण इलाकों में लोकतांत्रिक हलचल तेज हो चुकी है, लेकिन इस चुनावी सरगर्मी के बीच जमीनी हकीकत की कुछ बेहद परेशान करने वाली तस्वीरें भी सामने आ रही हैं। राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित झोर पंचायत का उलपुराफार्म गांव आज भी उस विकास की राह देख रहा है जिसका वादा हर चुनाव में किया जाता है। इस गांव में रहने वाले लगभग 35 से 40 परिवार आजादी के दशकों बीत जाने के बाद भी सड़क, सुरक्षित पेयजल, इलाज और बच्चों की पढ़ाई जैसी बेहद जरूरी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों की व्यथा यह है कि पिछले करीब 50 वर्षों से उन्होंने अपने गांव में डामर की पक्की सड़क नहीं देखी है, जिसके चलते सामान्य दिनों के साथ-साथ आपात स्थिति में भी जीवन मुश्किलों से घिर जाता है।\n\nबरसात में बदहाल रास्ते और एम्बुलेंस तक पहुंचने का संकट\nउलपुराफार्म के निवासियों के मुताबिक पक्की सड़क का अभाव उनके रोजमर्रा के जीवन को बुरी तरह प्रभावित करता है। मानसून के मौसम में जब तेज बारिश होती है, तो कच्चे रास्तों पर कीचड़ और गड्ढों के कारण चलना भी दूभर हो जाता है। ऐसी स्थिति में यदि कोई ग्रामीण गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए, गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा हो या कोई दुर्घटना घट जाए, तो गांव के भीतर एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच पाती है। मरीजों को खाट या कंधों पर उठाकर मुख्य मार्ग तक ले जाना एक सामान्य लेकिन बेहद जोखिम भरी मजबूरी बन चुका है। इसके अलावा गांव में रात के समय रोशनी का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। गलियों में रोड लाइटें न होने के कारण अंधेरा पसरा रहता है, जिससे जहरीले जीव-जंतुओं का डर और हादसों की आशंका लगातार बनी रहती है।\n\nनल योजना से वंचित आबादी और पड़ोसी जिले पर निर्भरता\nपेयजल आपूर्ति के क्षेत्र में बड़े-बड़े सरकारी दावों के बावजूद इस गांव के लोगों का कहना है कि केंद्र व राज्य सरकार की हर घर नल योजना का लाभ अब तक उनके घरों तक नहीं पहुंच सका है। पीने के साफ पानी के लिए लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है। गांव में प्राथमिक उपचार या नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए कोई चिकित्सा केंद्र मौजूद नहीं है और न ही बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए पर्याप्त शैक्षणिक ढांचा तैयार किया गया है। प्रशासनिक नक्शे के अनुसार यह गांव राजसमंद जिले का हिस्सा है, लेकिन चिकित्सा और जरूरी रोजमर्रा की सेवाओं के अभाव में यहां के लोगों को पड़ोसी जिले भीलवाड़ा पर निर्भर रहना पड़ता है। स्थानीय निवासियों का दर्द है कि प्रशासनिक सीमाओं के इस फेर में उनकी सुनवाई किसी भी स्तर पर गंभीरता से नहीं होती।\n\nपंचायतीराज चुनाव 2026 में जनप्रतिनिधियों से तीखे सवाल\nसरदारगढ़ तहसील के तहत आने वाली झोर ग्राम पंचायत में मतदाताओं की कुल संख्या करीब 2100 है। इस बार पंचायत के शीर्ष पद यानी सरपंच पद के लिए दो प्रत्याशी चुनावी मैदान में एक-दूसरे के आमने-सामने हैं। जैसे-जैसे वोट मांगने वाले नेता और उम्मीदवार घर-घर दस्तक दे रहे हैं, वैसे-वैसे उलपुराफार्म के ग्रामीण उनसे विकास के पुराने वादों का हिसाब मांग रहे हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि हर बार चुनाव के दौरान प्रत्याशी हाथ जोड़कर विकास की गंगा बहाने की कसमें खाते हैं, मगर नतीजा निकलने के बाद कोई मुड़कर भी नहीं देखता। इस बार ग्रामीणों ने तय किया है कि वे सड़क, पानी, रोशनी, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस बार के पंचायती चुनाव के बाद उलपुराफार्म की सूरत बदलती है या फिर उनका पांच दशकों का इंतजार यूं ही आगे बढ़ता रहेगा।\n\nइसका आप पर असर\nयह समाचार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक जवाबदेही और बुनियादी नागरिक अधिकारों की स्थिति को रेखांकित करता है।\n\n• भारत में: देश भर के ग्रामीण मतदाताओं के लिए यह चुनाव के समय नेताओं से बुनियादी विकास पर लिखित जवाबदेही मांगने का सबक है। नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत जल, स्वास्थ्य और सड़क संपर्क की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठा सकते हैं।\n• राजसमंद में: स्थानीय प्रशासन और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर सरदारगढ़ तहसील के इस उपेक्षित इलाके में सड़क और नल कनेक्शन पहुंचाने का भारी जनदबाव बनेगा। इससे झोर पंचायत के मतदाताओं को 2026 के पंचायत चुनाव में सही उम्मीदवार चुनने का सीधा मौका मिलेगा।\n• मरीजों और परिवारों के लिए: सड़क और स्वास्थ्य केंद्र की कमी के कारण लोगों को आपातकालीन उपचार में होने वाली जानलेवा देरी को लेकर प्रशासन को जगाने में मदद मिलेगी। एम्बुलेंस कनेक्टिविटी सुनिश्चित होने से बरसात के दिनों में मरीजों की जान बचाई जा सकेगी।\n• छात्रों और युवाओं के लिए: गांव में शिक्षा सुविधाओं की मांग उठने से आने वाली पीढ़ी को पड़ोसी जिले जाने की मजबूरी से राहत मिलने की उम्मीद जगेगी। पक्के संपर्क मार्ग बनने से बच्चों का स्कूल पहुंचना आसान और सुरक्षित हो सकेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nउलपुराफार्म गांव के दशकों से पिछड़े रहने के पीछे प्रशासनिक उपेक्षा और भौगोलिक सीमावर्ती स्थिति मुख्य वजह रही है।\n\n• प्रशासनिक अनदेखी: लगभग 35 से 40 परिवारों की छोटी आबादी होने के चलते यह बस्ती वर्षों से बड़े विकास बजट और जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता सूची से बाहर रही। कम मतदाता संख्या के कारण अक्सर दूरदराज की बस्तियों के बुनियादी काम उपेक्षित रह जाते हैं।\n• सीमावर्ती भूगोल की जटिलता: यह गांव राजसमंद जिले में स्थित होने के बावजूद पड़ोसी जिले भीलवाड़ा के नजदीक पड़ता है, जिससे कई जरूरी सेवाओं का समन्वय नहीं बन सका। दोनों जिलों के प्रशासनिक तालमेल के अभाव में स्थानीय नागरिक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रह गए।\n• सरकारी योजनाओं का अधूरा क्रियान्वयन: हर घर नल योजना और सड़क निर्माण जैसी केंद्रीय व राज्य स्तरीय पहलों का लाभ धरातल पर इस बस्ती तक नहीं पहुंच पाया। नियमित निगरानी और क्षेत्रीय समीक्षा के अभाव में विकास कार्य कागजों तक सीमित रहे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. उलपुराफार्म गांव किस जिले और पंचायत में आता है?\nउलपुराफार्म गांव राजस्थान के राजसमंद जिले की सरदारगढ़ तहसील के अंतर्गत झोर ग्राम पंचायत में आता है।\n\n2. गांव के लोग कितने समय से पक्की सड़क की मांग कर रहे हैं?\nग्रामीणों के अनुसार उन्होंने पिछले करीब 50 वर्षों से गांव में डामर की पक्की सड़क नहीं देखी है।\n\n3. बरसात के दिनों में ग्रामीणों को किस गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है?\nबरसात के समय रास्ते कीचड़ से भर जाने के कारण गांव के अंदर एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच पाती है।\n\n4. उलपुराफार्म गांव में कितने परिवार रहते हैं?\nइस गांव में लगभग 35 से 40 परिवार निवास करते हैं।\n\n5. झोर पंचायत में कुल कितने मतदाता हैं और सरपंच पद के लिए कितने उम्मीदवार हैं?\nझोर पंचायत में कुल 2100 मतदाता हैं और वहां सरपंच पद के लिए 2 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।\n\n6. ग्रामीणों को स्वास्थ्य व अन्य सुविधाओं के लिए किस जिले पर निर्भर रहना पड़ता है?\nराजसमंद जिले में रहने के बावजूद जरूरी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को भीलवाड़ा जिले पर निर्भर रहना पड़ता है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-10",
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