# अजमेर के नन्हे प्रांश दगदी का कमाल, तीन किलो भार लेकर स्केटिंग में बनाया विश्व कीर्तिमान

> अजमेर के पौने तीन साल के प्रांश दगदी ने शरीर पर तीन किलोग्राम वजन बांधकर 60 मीटर स्केटिंग मात्र 1 मिनट 12 सेकंड में पूरी कर विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया है.

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/ajmer-ke-nanhe-pransh-dagdi-ka-kamala-tina-kilo-bhara-lekara-sketinga-men-banaya-vishva-kirtimana-54501 · **Language:** Hindi
**Tags:** प्रांश दगदी, अजमेर, स्केटिंग, विश्व रिकॉर्ड, बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, सूरज दगदी

राजस्थान के अजमेर शहर के एक बेहद छोटे बच्चे ने अपनी असाधारण प्रतिभा और कड़े अनुशासन के दम पर स्केटिंग की दुनिया में नया इतिहास रच दिया है. महज 2 साल, 10 महीने और 7 दिन की आयु में प्रांश दगदी ने वह करिश्मा कर दिखाया है जो बड़े-बड़े खिलाड़ियों के लिए भी आसान नहीं होता. उन्होंने अतिरिक्त भार के साथ तीव्र गति से स्केटिंग करते हुए एक अनूठा विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है, जिससे उनके परिवार सहित समूचे शहर का मान बढ़ा है.

## प्रमाण पत्र के साथ मिली आधिकारिक मान्यता
इस नन्हे स्केटिंग उस्ताद के साहसिक प्रदर्शन को ‘बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ ने विधिवत सत्यापित करते हुए आधिकारिक प्रमाण पत्र जारी किया है. रिकॉर्ड के विवरण के मुताबिक, प्रांश ने अपने नन्हे शरीर पर पूरे 3 किलोग्राम का भार उठाया और स्केटिंग ट्रैक पर उतर गए. उन्होंने 60 मीटर की पूरी दूरी को महज 1 मिनट 12 सेकंड के भीतर नाप लिया. संतुलन, गति और वजन का ऐसा तालमेल इस नन्ही उम्र में देखने वालों को अचरज में डाल देता है.

इस संपूर्ण प्रयास की वीडियो रिकॉर्डिंग और सभी तकनीकी साक्ष्यों को ‘बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ की केंद्रीय वेरिफिकेशन कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया गया था. विशेषज्ञों की समिति द्वारा हर पहलू की बारीकी से जांच और सत्यापन किए जाने के बाद ही इस रिकॉर्ड पर आधिकारिक मुहर लगाई गई. संगठन द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्र पर दर्ज होने की तिथि 14 अक्टूबर 2026 दर्ज है, जबकि इस वैश्विक कीर्तिमान की आधिकारिक रिकॉर्ड संख्या BWR/IND/2026/001604 अंकित की गई है.

## प्रतिदिन चार घंटे का कड़ा और अनुशासित अभ्यास
अजमेर स्थित वंडर वर्ल्ड प्ले स्कूल में पढ़ने वाले नन्हे प्रांश के पिता सूरज दगदी और माता निर्मला बागड़ी हैं. परिजनों ने बचपन में ही उनके भीतर स्केटिंग के प्रति गहरा रुझान भांप लिया था. प्रांश ने जब पहली बार स्केटिंग के पहिए अपने पैरों में बांधे थे, तब उनकी उम्र केवल 2 साल और 2 महीने थी. इसके बाद से बीते 10 महीनों के दौरान उनका स्केटिंग प्रशिक्षण लगातार और पूरी लगन से जारी रहा.

उनकी दैनिक दिनचर्या किसी पेशेवर खिलाड़ी की तरह अनुशासित रही है. प्रांश हर दिन सुबह 4 बजे से 6 बजे तक दो घंटे का सत्र पूरा करते हैं और फिर शाम को 5 बजे से 7 बजे तक दोबारा दो घंटे ट्रैक पर पसीना बहाते हैं. इस प्रकार प्रतिदिन कुल 4 घंटे के अनथक अभ्यास ने उनके पैरों को इतनी मजबूती और संतुलन प्रदान किया कि वे अतिरिक्त वजन के साथ भी बिना डगमगाए तेजी से आगे बढ़ सके. माता-पिता और परिजनों के मजबूत संबल ने नन्हे प्रांश के आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया.

## सफलता से परिवार और शहर में खुशी की लहर
इतनी छोटी उम्र में ऐसा अविश्वसनीय संकल्प, गजब का आत्मविश्वास और शारीरिक संतुलन किसी भी खेल प्रेमी को विस्मित कर सकता है. विश्व कीर्तिमान के सत्यापन की खबर मिलते ही प्रांश के निवास स्थान और उनके पूरे इलाके में जश्न का माहौल बन गया. परिवार के सदस्य, पड़ोसी और खेल जगत के प्रशंसक नन्हे प्रांश और उनके माता-पिता को इस ऐतिहासिक सफलता पर बधाई देने पहुंच रहे हैं.

## इसका आप पर असर
यह उपलब्धि बाल प्रतिभा के संवर्धन और कम उम्र में खेल प्रशिक्षण की संभावनाओं को रेखांकित करती है.

- **भारत में:** यह घटना पूरे देश के अभिभावकों को यह दिखाती है कि उचित मार्गदर्शन और सुरक्षा के साथ छोटी उम्र में भी बच्चों की खेल प्रतिभा निखारी जा सकती है. माता-पिता अपने बच्चों की शुरुआती रुचियों को पहचान कर सही प्रशिक्षण दिलाने की प्रेरणा ले सकते हैं.
- **अजमेर में:** शहर के खेल प्रेमी और युवा स्केटर्स के बीच इस रिकॉर्ड से नया उत्साह जागा है. स्थानीय स्तर पर बच्चों के लिए स्केटिंग अकादमियों और खेल सुविधाओं में भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है.
- **अभिभावकों के लिए:** नियमित दिनचर्या और अनुशासन का असर बच्चों के शारीरिक विकास पर साफ नजर आता है. माता-पिता अपने बच्चों के स्क्रीन टाइम को कम कर उन्हें शारीरिक गतिविधियों में व्यस्त करने का प्रयास कर सकते हैं.
- **खेल अकादमियों के लिए:** प्रारंभिक आयु वर्ग के लिए सुरक्षित और संरचित खेल कार्यक्रमों की मांग में बढ़ोतरी हो सकती है. कोच बच्चों की सुरक्षा के अनुकूल आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियां अपनाने पर ध्यान दे सकते हैं.

## ऐसा क्यों हुआ
यह विश्व रिकॉर्ड पूर्व-निर्धारित कड़े अभ्यास और परिवार के निरंतर प्रोत्साहन की वजह से संभव हो सका.

- **शुरुआती पहचान और प्रशिक्षण:** परिजनों ने महज 2 साल 2 महीने की उम्र में प्रांश की स्केटिंग क्षमता को पहचान लिया था. इसके बाद उन्हें पिछले 10 महीनों तक बिना किसी रुकावट के लगातार तराशा गया.
- **कड़ा दैनिक अभ्यास:** प्रतिदिन सुबह और शाम दो-दो घंटे यानी कुल 4 घंटे का पसीना बहाने से नन्हे बच्चे की मांसपेशियों में संतुलन और 3 किलोग्राम भार सहने की ताकत विकसित हुई.
- **पारिवारिक समर्थन:** माता-पिता सूरज दगदी और निर्मला बागड़ी ने अपने बेटे की प्रतिभा को वैश्विक मंच पर प्रमाणित कराने का लक्ष्य निर्धारित किया और रिकॉर्ड सत्यापन की पूरी प्रक्रिया पूरी कराई.

## सवाल-जवाब

### 1. विश्व रिकॉर्ड बनाते समय प्रांश दगदी की आयु कितनी थी?
उस समय प्रांश की उम्र 2 साल, 10 महीने और 7 दिन थी.

### 2. प्रांश ने स्केटिंग में क्या रिकॉर्ड बनाया है?
उन्होंने 3 किलोग्राम वजन उठाकर 60 मीटर की दूरी केवल 1 मिनट 12 सेकंड में स्केटिंग करते हुए पूरी की.

### 3. इस रिकॉर्ड को किस संस्था ने मान्यता दी है?
इस उपलब्धि को ‘बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ ने आधिकारिक स्वीकृति और प्रमाण पत्र प्रदान किया है.

### 4. प्रांश दगदी किस शहर के निवासी हैं और उनके माता-पिता कौन हैं?
वे राजस्थान के अजमेर के रहने वाले हैं और उनके पिता सूरज दगदी तथा माता निर्मला बागड़ी हैं.

### 5. प्रांश प्रतिदिन कितने घंटे स्केटिंग का अभ्यास करते हैं?
वे प्रतिदिन कुल 4 घंटे (सुबह 4 से 6 बजे और शाम 5 से 7 बजे) अभ्यास करते हैं.

### 6. आधिकारिक प्रमाण पत्र पर कौन सी तिथि और रिकॉर्ड संख्या दर्ज है?
प्रमाण पत्र पर 14 अक्टूबर 2026 की तारीख और रिकॉर्ड संख्या BWR/IND/2026/001604 अंकित है.

## प्रेरणा और सबक
नन्हे प्रांश की यह सफलता दिखाती है कि उम्र किसी भी बड़े मुकाम को हासिल करने में बाधा नहीं बनती.

- **उम्र कोई सीमा नहीं:** सफलता और मेहनत कभी भी उम्र की मोहताज नहीं होती. लगन और सही मार्गदर्शन हो तो छोटी उम्र में भी असाधारण मुकाम हासिल किया जा सकता है.
- **अनुशासन ही सफलता की कुंजी:** सुबह 4 बजे उठकर नियमित 4 घंटे अभ्यास करना यह सिखाता है कि बिना कड़े अनुशासन के कोई भी बड़ा कीर्तिमान स्थापित नहीं हो सकता.
- **परिवार का संबल जरूरी:** बच्चों की स्वाभाविक प्रतिभा को पहचानकर माता-पिता का पूरा समर्थन मिलना उनकी सफलता की सबसे बड़ी नींव होता है.

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