# अजमेर के पटेल मैदान में दिखेगी गंगा-जमुनी तहजीब, फतेहपुर सीकरी के मुस्लिम परिवार ने तैयार किया रिमोट से उड़ने वाले सिरों वाला 65 फीट का रावण

> अजमेर नगर निगम के दशहरा महोत्सव में फतेहपुर सीकरी से आए मुस्लिम कारीगर जाकिर अहमद और उनका परिवार 65 फीट ऊंचा तकनीकी खूबियों वाला रावण तैयार कर रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/ajmer-ke-patel-maidan-men-dikhegi-gnga-jamuni-tahajiba-fatehpur-sikri-ke-muslima-parivara-ne-taiyara-kiya-rimota-se-urane-vale-sir-43092 · **Language:** Hindi
**Tags:** अजमेर दशहरा, पटेल मैदान, रावण दहन, फतेहपुर सीकरी, जाकिर अहमद, गंगा जमुनी तहजीब, सांप्रदायिक सौहार्द

राजस्थान के अजमेर शहर में स्थित ऐतिहासिक पटेल मैदान इस बार विजयादशमी के मौके पर न केवल भव्य आतिशबाजी और पुतला दहन का गवाह बनेगा, बल्कि आपसी भाईचारे की अनूठी कहानी भी पेश करेगा। नगर निगम की देखरेख में आयोजित होने वाले इस दशहरा उत्सव की तैयारियां अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी हैं। बुराई पर अच्छाई के प्रतीक के रूप में जलाए जाने वाले रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के विशालकाय पुतलों को आकार देने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी से आए मुस्लिम कारीगरों ने संभाली है। हिंदू पर्व के लिए मुस्लिम शिल्पकारों का यह समर्पण दोनों समुदायों के बीच दशकों पुरानी गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक सद्भाव को जीवंत करता है।

## फतेहपुर सीकरी में तीन महीने तक चला निर्माण कार्य
पुतलों के निर्माण का जिम्मा संभाल रहे मुख्य कारीगर जाकिर अहमद के अनुसार, इस पूरे आयोजन की रूपरेखा काफी समय पहले ही तय कर ली गई थी। उत्सव को भव्य रूप देने के लिए पुतलों का प्राथमिक ढांचा और सजावट से जुड़ा अधिकांश कार्य पिछले तीन महीने से उत्तर प्रदेश स्थित उनके पैतृक गांव फतेहपुर सीकरी में चल रहा था। पुतलों में लगने वाला अधिकतर साजो-सामान ट्रकों के जरिए सड़क मार्ग से अजमेर पहुंचाया गया है। जाकिर अहमद अपनी पूरी टीम के साथ पिछले पांच दिनों से अजमेर के पटेल मैदान में डेरा डाले हुए हैं, जहां बांस की खपच्चियों, मजबूत रस्सियों, कागजों और चमकीले कपड़ों को जोड़कर अंतिम रूप दिया जा रहा है।

## 65 फीट का रावण और 45 फीट ऊंचे कुंभकरण-मेघनाथ
पटेल मैदान में खड़े किए जा रहे पुतलों का आकार इस बार दर्शकों को दूर से ही आकर्षित करेगा। कारीगरों ने मुख्य रावण के पुतले की कुल ऊंचाई लगभग 65 फीट तय की है, जो मैदान के केंद्र में स्थापित होगा। इसके अगल-बगल कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले खड़े किए जाएंगे, जिनकी ऊंचाई करीब 45-45 फीट रखी गई है। इन भीमकाय ढांचों को दूर से आकर्षक दिखाने के लिए विशेष चमकदार कागजों और रंग-बिरंगे कपड़ों का उपयोग किया जा रहा है। तेज हवा या वजन से पुतले झुकें नहीं, इसके लिए बुनियादी ढांचे की मजबूती की बार-बार तकनीकी जांच की जा रही है।

## आंखें झपकाएगा और तलवार लहराएगा हाईटेक रावण
इस वर्ष का पुतला दहन पारंपरिक आयोजनों की तुलना में अधिक रोमांचक और हाईटेक तकनीक से लैस रहेगा। कारीगरों ने रावण के पुतले के भीतर विशेष यांत्रिक प्रणालियां जोड़ी हैं, जिससे दशहरा मेले में मौजूद दर्शकों को यह पुतला अपनी आंखें झपकाता हुआ दिखाई देगा। इसके साथ ही रावण के हाथ में थमाई गई विशालकाय तलवार भी तकनीकी तालमेल की बदौलत हवा में लहराती नजर आएगी। पुतले के मुंह से अंगारे और चिंगारियां निकलने का विशेष प्रबंध भी किया गया है, जो दहन से ठीक पहले दृश्य को बेहद जीवंत बना देगा।

## रिमोट कंट्रोल का बटन दबाते ही हवा में उड़ेंगे 10 सिर
आतिशबाजी के मामले में भी इस बार आधुनिक सुरक्षा और तकनीकी उपाय अपनाए गए हैं। कारीगर जाकिर अहमद ने बताया कि रावण के सभी दस सिरों को एक साथ आग लगाने के बजाय उन्हें नियंत्रित करने के लिए रिमोट कंट्रोल प्रणाली लगाई गई है। जैसे ही मंच से रिमोट का बटन दबाया जाएगा, रावण के सभी दस सिर एक-एक करके सिलसिलेवार ढंग से हवा में उड़ते हुए नजर आएंगे। यह विशेष दृश्य मैदान में उमड़ने वाले हजारों दर्शकों के लिए सबसे बड़ा कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बनेगा।

## पीढ़ियों से अजमेर आ रहा है जाकिर का परिवार
इन पुतलों को तैयार करने के पीछे किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे परिवार का साझा श्रम लगा हुआ है। जाकिर अहमद बताते हैं कि उनका परिवार बीते कई सालों से नियमित रूप से अजमेर आकर दशहरा पुतलों का निर्माण करता आ रहा है। परिवार के सभी सदस्यों के बीच जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से बंटी हुई हैं। कुछ सदस्य बांस के भारी ढांचे को संतुलित और मजबूत बनाने में जुटे रहते हैं, जबकि अन्य सदस्य सजावट, रंगाई-पुताई और कागज चिपकाने का बारीक काम संभालते हैं। दिन-रात की इस सामूहिक मेहनत के दम पर विजयादशमी की तय तारीख तक तीनों पुतलों को दहन के लिए पूरी तरह तैयार कर लिया जाएगा।

## इसका आप पर असर
अजमेर में दशहरा उत्सव के आयोजन और अनूठे पुतला दहन से स्थानीय निवासियों और उत्सव में आने वाले दर्शकों को कई प्रत्यक्ष सुविधाएं और अनुभव मिलेंगे।

- **राजस्थान में:** राज्य भर में त्योहारों के दौरान आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक तालमेल का सकारात्मक संदेश मजबूत होगा। विभिन्न जिलों से आने वाले कारीगरों और हस्तशिल्पियों के काम को नए अवसर और मंच मिलेंगे।
- **अजमेर में:** पटेल मैदान में दशहरा मेले के दौरान दर्शकों को हाईटेक रावण दहन और रिमोट नियंत्रित आतिशबाजी का अनोखा अनुभव देखने को मिलेगा। स्थानीय नगर निगम द्वारा सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि उत्सव शांतिपूर्ण रहे।
- **त्योहारी खरीदारों के लिए:** पटेल मैदान के आसपास लगने वाले मेले से स्थानीय छोटे दुकानदारों, खानपान के स्टालों और खिलौना विक्रेताओं के व्यापार में बढ़ोतरी होगी। त्योहार के दिन परिवार के साथ जाने वाले लोगों को समय पर पहुंचकर निर्धारित पार्किंग स्थलों का इस्तेमाल करना होगा।
- **कारीगर समुदाय के लिए:** पारंपरिक पुतला निर्माण कला में नई रिमोट तकनीकों के जुड़ने से आने वाले समय में अन्य शहरों के उत्सवों में भी ऐसे शिल्पकारों की मांग बढ़ेगी। हस्तशिल्प से जुड़े ग्रामीण परिवारों को रोजगार और सम्मानजनक आमदनी का साधन मिलेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
अजमेर के दशहरा महोत्सव में उत्तर प्रदेश के कारीगरों द्वारा पुतले तैयार किए जाने के पीछे दशकों पुरानी शिल्प परंपरा और तकनीकी नवाचार की मांग रही है।

- **पीढ़ियों का अनुभव:** फतेहपुर सीकरी का यह मुस्लिम कारीगर परिवार कई वर्षों से नियमित रूप से अजमेर नगर निगम के लिए दशहरा पुतले बनाता आ रहा है। उनकी लंबी शिल्प विशेषज्ञता और विश्वसनीयता के चलते हर साल उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है।
- **विशेष निर्माण कौशल:** इतने भीमकाय 65 फीट के पुतलों को संतुलित रखना और उनमें हिलने-डुलने वाले यांत्रिक अंग जोड़ना तकनीकी कुशलता मांगता है। इस काम के लिए कारीगर तीन महीने पहले से ही अपने गृह गांव में तैयारी शुरू कर देते हैं।
- **सांस्कृतिक परंपरा:** भारतीय शहरों में कई पीढ़ियों से विभिन्न समुदायों के लोग एक-दूसरे के धार्मिक पर्वों के आयोजन और सजावट में सक्रिय योगदान देते आए हैं। यह आयोजन उसी गंगा-जमुनी तहजीब की स्वाभाविक निरंतरता को दर्शाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. अजमेर में रावण के पुतले की ऊंचाई कितनी रखी गई है?
पटेल मैदान में तैयार किए जा रहे मुख्य रावण के पुतले की ऊंचाई लगभग 65 फीट है।

### 2. कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले कितने ऊंचे बनाए जा रहे हैं?
कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों की ऊंचाई करीब 45-45 फीट रखी गई है।

### 3. इन विशाल पुतलों का निर्माण कौन कर रहा है?
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी से आए मुस्लिम कारीगर जाकिर अहमद और उनके परिवार के सदस्य इन पुतलों का निर्माण कर रहे हैं।

### 4. इस बार के रावण के पुतले में क्या खास तकनीकी खूबियां हैं?
रावण का पुतला अपनी आंखें झपका सकेगा, तलवार लहराएगा और उसके मुंह से अंगारे निकलते दिखाई देंगे।

### 5. रावण के 10 सिरों को जलाने के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल होगा?
रावण के दसों सिरों को रिमोट कंट्रोल तकनीक के जरिए एक-एक करके हवा में उड़ाया जाएगा।

### 6. पुतले बनाने की तैयारी कितने समय से चल रही थी?
पुतलों का प्राथमिक ढांचा और सजावट का काम पिछले तीन महीने से फतेहपुर सीकरी में चल रहा था।

## प्रेरणा और सबक
जाकिर अहमद और उनके परिवार की कहानी यह सिखाती है कि कला, मेहनत और आपसी सद्भाव किसी भी सामाजिक या धार्मिक सीमा से कहीं ऊपर होते हैं।

- **साझा सांस्कृतिक विरासत:** एक हिंदू धार्मिक उत्सव के लिए मुस्लिम शिल्पकारों का पूरे समर्पण से काम करना दिखाता है कि मानवीय रिश्ते और परंपराएं सबको जोड़ती हैं। विविधता का सम्मान करते हुए मिलकर काम करना ही मजबूत समाज की नींव है।
- **पारिवारिक श्रम और टीमवर्क:** परिवार के सभी सदस्यों का मिलकर जिम्मेदारियां बांटना सिखाता है कि बड़े लक्ष्यों को सामूहिक प्रयास से ही हासिल किया जा सकता है। आपसी सहयोग से जटिल और विशालकाय काम भी आसान बन जाते हैं।
- **परंपरा में तकनीक का समावेश:** सदियों पुरानी पुतला निर्माण कला में रिमोट कंट्रोल और मैकेनिकल मूवमेंट जोड़ना यह दर्शाता है कि आधुनिक बदलावों को अपनाना हमेशा हुनर को निखारता है। हर पेशे में नवाचार सीखने की इच्छा प्रगति का रास्ता खोलती है।

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