अजमेर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी के घर 3 करोड़ की फर्जी ईडी-आईटी रेड मामले में सातवां आरोपी गिरफ्तार, 1.40 करोड़ के जेवर जब्त नसीराबाद में फर्जी अफसर बनकर ट्रांसपोर्ट कारोबारी से की गई लूट में पुलिस ने सातवें आरोपी किशन सिंह को पकड़ा, जबकि 1.40 करोड़ रुपये के आभूषण पहले ही बरामद हो चुके हैं। राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित नसीराबाद में एक ट्रांसपोर्ट कारोबारी के आवास पर फर्जी जांच एजेंसी का नाटक रचकर की गई भारी लूट के मामले में पुलिस को एक और कामयाबी हाथ लगी है। आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का फर्जी अधिकारी बनकर करीब 3 करोड़ रुपये की संपत्ति लूटने की इस पूरी साजिश में शामिल सातवें आरोपी को नसीराबाद सदर थाना पुलिस ने धर दबोचा है। पकड़े गए इस नए आरोपी का नाम किशन सिंह पुत्र विजय राम जाट है, जो मूल रूप से भरतपुर के कलसाड़ा का रहने वाला है और वर्तमान में अजमेर के माखूपुरा इलाके में निवास कर रहा था। साजिश का पर्दाफाश और जांच दल की कार्रवाई नसीराबाद सदर थानाधिकारी राधेश्याम चौधरी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला के स्पष्ट निर्देशों और नसीराबाद के पुलिस उपाधीक्षक लक्ष्मणराम के सुपरविजन में संचालित की जा रही है। जांच प्रक्रिया के दौरान तकनीकी पड़ताल और साक्ष्यों के आधार पर किशन सिंह की इस डकैती की साजिश में संलिप्तता उजागर हुई, जिसके बाद पुलिस टीम ने उसे दबोच लिया। पुलिस अब किशन सिंह को हिरासत में रखकर गहन पूछताछ कर रही है, ताकि इस सनसनीखेज वारदात में उसकी सटीक भूमिका, योजना की रूपरेखा और गिरोह के अन्य सहयोगियों के साथ उसके संपर्कों का पूरा ब्योरा हासिल किया जा सके। 1.40 करोड़ के सोने-चांदी के जेवरात और गाड़ी जब्त इस बड़े मामले में पुलिस तंत्र पहले ही छह अन्य आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा चुका है। पहले पकड़े गए उन छह आरोपियों की गहन निशानदेही पर पुलिस ने अब तक कुल 769.15 ग्राम सोने के जेवर और 1841.03 ग्राम चांदी के सिक्के बरामद करने में बड़ी सफलता हासिल की है। बरामद किए गए इन बहुमूल्य स्वर्ण आभूषणों और चांदी के सिक्कों की कुल अनुमानित बाजार कीमत लगभग 1 करोड़ 40 लाख रुपये आंकी गई है। इसके अतिरिक्त, इस फर्जी रेड को अंजाम देने और घटनास्थल से भागने के लिए गिरोह द्वारा उपयोग में लाई गई एक स्कॉर्पियो गाड़ी को भी पुलिस दल ने अपने कब्जे में लेकर जब्त कर लिया है। रिमांड पर पूछताछ और बाकी नकदी की तलाश लूट के दौरान हड़पी गई शेष नकदी और अन्य सामान की बरामदगी के लिए पुलिस का अभियान लगातार जारी है। मामले की तह तक पहुंचने के लिए जांच दल ने तीन आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लिया है, जबकि चौथे आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश करके अग्रिम कानूनी प्रक्रियाओं और पूछताछ का क्रम बढ़ाया जा रहा है। पुलिस अधिकारी अब रिमांड पर चल रहे आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ करके लूट की शेष बची रकम, छिपाए गए अन्य साजो-सामान और साजिश के मास्टरमाइंड से जुड़े हर पहलू का पर्दाफाश करने में जुटे हैं। इसके साथ ही पुलिस यह आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाल रही है कि क्या यह गिरोह प्रदेश के किसी अन्य जिले में भी इसी प्रकार की फर्जी रेड अथवा डकैती की वारदातों में लिप्त रहा है। इसका आप पर असर सरकारी जांच एजेंसियों का फर्जी भेष बनाकर की जाने वाली डकैतियों के मामलों में पुलिस कार्रवाई आम नागरिकों और व्यापारियों को सतर्क रहने का स्पष्ट संकेत देती है। • नागरिकों और व्यापारियों के लिए: किसी भी जांच अधिकारी के घर या दफ्तर आने पर उनका आधिकारिक पहचान पत्र और सर्च वारंट अवश्य जांचें। संदेह होने पर तुरंत स्थानीय पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना देकर उनकी वास्तविकता की पुष्टि करें। • राजस्थान और अजमेर में: जिले की पुलिस ने फर्जी छापेमारी करने वाले गिरोह के नेटवर्क पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इससे क्षेत्र के व्यवसायियों में सुरक्षा का भरोसा बहाल होगा और अनधिकृत तत्वों के खिलाफ निगरानी और सख्त होगी। • लूट की रकम और संपत्ति की वापसी: बरामद हुए 1.40 करोड़ रुपये के आभूषण न्यायिक प्रक्रिया के बाद पीड़ित परिवार को वापस मिलने का रास्ता साफ होगा। बाकी बची नकदी तलाशने के लिए पुलिस रिमांड पर पूछताछ तेज कर रही है। • अपराध नियंत्रण के स्तर पर: पुलिस अब ऐसे अपराधियों के पुराने रिकॉर्ड और अंतर-जिला संपर्कों को खंगाल रही है। इससे नकली आईडी और वाहनों का उपयोग कर की जाने वाली संगठित वारदातों पर लगाम लगेगी। ऐसा क्यों हुआ यह घटना संगठित अपराधियों द्वारा केंद्रीय जांच एजेंसियों का डर दिखाकर व्यापारियों को निशाना बनाने की सोची-समझी साजिश का नतीजा है। • सीधा कारण: अपराधियों के एक गिरोह ने आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय का फर्जी अधिकारी बनकर ट्रांसपोर्ट कारोबारी के घर में अनधिकृत प्रवेश किया और धमकाकर करीब 3 करोड़ रुपये की संपत्ति लूट ली। • साजिश और स्थानीय संपर्क: भरतपुर के मूल निवासी और अजमेर में रह रहे किशन सिंह जैसे आरोपियों ने स्थानीय स्तर पर सूचना जुटाकर और योजना बनाकर गिरोह को वारदात अंजाम देने में सहयोग दिया। • वाहनों और फर्जी पहचान का दुरुपयोग: आरोपियों ने खुद को आधिकारिक टीम साबित करने के लिए स्कॉर्पियो वाहन और नकली प्रशासनिक रौब का सहारा लिया, जिससे पीड़ित तुरंत विरोध न कर सके। • जांच और आगे की कार्रवाई: पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने छह आरोपियों को पहले पकड़ा और अब साजिशकर्ता किशन सिंह को गिरफ्तार कर बाकी नकदी और संपर्कों की पड़ताल शुरू की है। सवाल-जवाब 1. अजमेर के नसीराबाद में क्या वारदात हुई थी? बदमाशों ने आयकर विभाग और ईडी का फर्जी अधिकारी बनकर एक ट्रांसपोर्ट कारोबारी के घर से करीब 3 करोड़ रुपये की नकदी और आभूषण लूट लिए थे। 2. हाल ही में गिरफ्तार किए गए सातवें आरोपी का नाम क्या है? गिरफ्तार आरोपी का नाम किशन सिंह पुत्र विजय राम जाट है, जो मूल रूप से भरतपुर के कलसाड़ा का निवासी है और अजमेर के माखूपुरा में रह रहा था। 3. पुलिस ने अब तक कितने मूल्य के आभूषण बरामद किए हैं? पुलिस ने 769.15 ग्राम सोने के आभूषण और 1841.03 ग्राम चांदी के सिक्के बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 1.40 करोड़ रुपये है। 4. वारदात में इस्तेमाल किस वाहन को जब्त किया गया है? वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपियों द्वारा इस्तेमाल की गई एक स्कॉर्पियो गाड़ी को पुलिस ने जब्त किया है। 5. मामले में अन्य आरोपियों की कानूनी स्थिति क्या है? पूर्व में पकड़े गए छह आरोपियों में से तीन को पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जबकि एक अन्य को अदालत में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। 6. इस जांच की निगरानी कौन से पुलिस अधिकारी कर रहे हैं? यह जांच पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला के निर्देश और नसीराबाद डीएसपी लक्ष्मणराम के सुपरविजन में सदर थानाधिकारी राधेश्याम चौधरी द्वारा की जा रही है। https://trendkia.com/rajasthan/ajmer-ke-transaporta-karobari-ke-ghara-3-karora-ki-pharji-ed-it-reda-mamale-men-satavan-aropi-giraphtara-1-40-karora-ke-jevara-jab-46661 TrendKia — Har trend, sabse pehle.