अजमेर की ऐतिहासिक सोनी जी की नसियां का पहला तल नए स्वर्ण रूप में खुला, कारीगरों ने चार साल में संवारा अजमेर स्थित ऐतिहासिक सोनी जी की नसियां के पहले तल को करीब चार वर्षों के जीर्णोद्धार के बाद पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है, जहां 30 कारीगरों ने असली सोने की नक्काशी, ग्रेनाइट और विशेष लाइटिंग से भव्य रूप दिया है। राजस्थान के अजमेर शहर में स्थित प्रसिद्ध और ऐतिहासिक सोनी जी की नसियां में दर्शनार्थियों और पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण जुड़ गया है। यहां का पहला तल, जो लंबे अरसे से आम लोगों और सैलानियों के लिए बंद पड़ा हुआ था, अब पूरी तरह संवरकर तैयार हो चुका है और इसे आधिकारिक तौर पर दर्शकों के लिए खोल दिया गया है। इस पूरे तल को पारंपरिक स्थापत्य कला और अत्यंत सूक्ष्म शिल्पकला को आधार बनाकर सजाया गया है, जिससे इसका ऐतिहासिक आकर्षण और ज्यादा प्रभावशाली नजर आ रहा है। चार वर्षों तक चला जीर्णोद्धार कार्य इस ऐतिहासिक हिस्से को संवारने की प्रक्रिया काफी विस्तृत और समय लेने वाली रही। करीब चार साल तक लगातार चले इस पुनरुद्धार कार्य में लगभग 30 कुशल कारीगरों के दल ने मिलकर पूरे तल का कायाकल्प किया। इस बदलाव का सबसे बड़ा और प्रमुख केंद्र यहां कराया गया स्वर्ण कार्य है। लॉबी और दीवारों पर की गई सूक्ष्म नक्काशी में असली सोने का इस्तेमाल हुआ है, जिसकी चमक पूरे परिसर की भव्यता में चार चांद लगा रही है। दीवारों पर असली सोने का काम और प्लास्टिक कोटिंग सोनी जी की नसियां की देखरेख व्यवस्था से जुड़े भूपेंद्र के अनुसार, सेठ साहब की विशेष पहल के बाद ही इस पहले तल को विजिटर्स के लिए खोलने का फैसला किया गया। इस तल पर आने वाले पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा कौतूहल यहां की दीवारों पर किया गया गोल्ड वर्क ही साबित हो रहा है। दीवारों तथा गलियारों में बेहद बारीक नक्काशी के ऊपर असली सोने का काम बड़ी कुशलता से उकेरा गया है। इस काम को अंजाम देने के लिए अनुभवी और ख्यातिप्राप्त कारीगरों की सेवाएं ली गईं। काम के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि नसियां की पुरानी मूल डिजाइन और अंदर पहले से मौजूद पारंपरिक नक्काशीदार संरचना के साथ कोई छेड़छाड़ न हो, बल्कि उसे ही बेहद संजीदगी से री-टच दिया जाए। इससे इमारत के पुराने ऐतिहासिक वैभव और नए शिल्पकर्म के बीच एक सहज संतुलन स्थापित हुआ है। इसके अलावा, इस बहुमूल्य स्वर्ण कार्य को किसी भी प्रकार की क्षति, धूल या नमी से बचाने और उसकी प्राकृतिक चमक को लंबे समय तक बरकरार रखने के उद्देश्य से उस पर पारदर्शी प्लास्टिक कोटिंग भी चढ़ाई गई है। पुराने मार्बल की जगह ग्रेनाइट और नई प्रकाश व्यवस्था नवीनीकरण की इस विस्तृत परियोजना में फर्श और प्रकाश व्यवस्था को लेकर भी व्यापक स्तर पर बदलाव किए गए हैं। इमारत के जिन हिस्सों में पहले पुराना मार्बल फर्श बिछा हुआ था, उसे हटाकर वहां आधुनिक और टिकाऊ नया ग्रेनाइट लगाया गया है। यह ग्रेनाइट कार्य तीन से चार मंजिलों तक फैले अलग-अलग हिस्सों में चरणबद्ध तरीके से कराया गया है। इसके साथ ही परिसर की छत और दीवारों पर लगी पुरानी लाइटों को हटाकर समूची प्रकाश व्यवस्था को नए सिरे से तैयार किया गया है। नई रोशनी की व्यवस्था इस तरह की गई है कि दीवारों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी और उस पर चढ़ी सोने की चमक दर्शकों के सामने पूरी स्पष्टता के साथ निखरकर सामने आती है। पहले इस तल पर प्रवेश की अनुमति न होने के कारण आगंतुक इसके आंतरिक सौंदर्य से वंचित रह जाते थे, लेकिन अब असली सोने के काम, पारंपरिक शिल्पकला, नए ग्रेनाइट फर्श और विशेष लाइटिंग के साथ यह स्थल पर्यटकों को एक नया अनुभव प्रदान कर रहा है। इसका आप पर असर अजमेर स्थित सोनी जी की नसियां के पहले तल के खुलने से पर्यटकों और श्रद्धालुओं को एक नई ऐतिहासिक व कलात्मक धरोहर को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। • भारत में: राजस्थान के प्रसिद्ध पर्यटन सर्किट में आने वाले देश भर के सैलानियों को अजमेर में एक नया और समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव मिलेगा। यह ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण और पारंपरिक कारीगरी को देखने के इच्छुक पर्यटकों के लिए यात्रा का प्रमुख आकर्षण बनेगा। • अजमेर में: स्थानीय धार्मिक व ऐतिहासिक पर्यटन को इस नए तल के खुलने से सीधा बढ़ावा मिलेगा। शहर में आने वाले पर्यटकों के रुकने का समय बढ़ेगा, जिससे स्थानीय गाइडों, परिवहन और आसपास के बाजारों को सीधा आर्थिक लाभ हो सकेगा। • दर्शकों के लिए: वर्षों से बंद रहे पहले तल का आंतरिक सौंदर्य अब आम लोगों के लिए सुलभ हो गया है। आगंतुक अब दीवारों पर असली सोने की नक्काशी और पारंपरिक शिल्पकला को बिना किसी रोक-टोक के प्रत्यक्ष देख सकेंगे। • हेरिटेज प्रेमियों के लिए: पारंपरिक शिल्प को सुरक्षित रखने के लिए अपनाई गई प्लास्टिक कोटिंग जैसी तकनीक कला प्रेमियों के लिए अध्ययन का विषय है। इससे प्राचीन विरासतों के वैज्ञानिक संरक्षण के प्रति लोगों में नई समझ विकसित होगी। ऐसा क्यों हुआ सोनी जी की नसियां का पहला तल लंबे समय से आम जनता के लिए बंद था, जिसे ऐतिहासिक भव्यता बहाल करने और पर्यटकों के देखने योग्य बनाने के उद्देश्य से नए सिरे से संवारा गया है। • मुख्य कारण: पहले तल को आगंतुकों के लिए खोलने की योजना सेठ साहब की पहल के तहत शुरू की गई थी। इसके तहत वर्षों से बंद पड़े इस हिस्से को पर्यटकों के लिए आकर्षक और सुरक्षित बनाने का निर्णय लिया गया। • जीर्णोद्धार की प्रक्रिया: पुराने मार्बल के घिसने और अंदरूनी नक्काशी को नई चमक देने के लिए करीब 30 कारीगरों ने चार वर्षों तक लगातार काम किया। पुराने रूपांकनों को सुरक्षित रखते हुए दीवारों पर असली सोने का काम किया गया और सुरक्षा के लिए प्लास्टिक कोटिंग लगाई गई। • आधुनिकीकरण और प्रकाश: पुरानी लाइटों और फर्श को बदलकर नया ग्रेनाइट तथा आधुनिक प्रकाश व्यवस्था लगाई गई। इस बदलाव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि नक्काशीदार स्वर्ण काम आगंतुकों को पूरी स्पष्टता और गरिमा के साथ दिखाई दे। सवाल-जवाब 1. सोनी जी की नसियां कहां स्थित है? सोनी जी की नसियां राजस्थान के ऐतिहासिक शहर अजमेर में स्थित है। 2. नसियां के पहले तल को तैयार करने में कितना समय लगा? इस पूरे तल के नवीनीकरण और सजावट के कार्य में लगभग चार साल का समय लगा। 3. इस जीर्णोद्धार कार्य में कितने कारीगर शामिल थे? करीब 30 अनुभवी और प्रतिष्ठित कारीगरों ने मिलकर इस काम को पूरा किया। 4. दीवारों पर किए गए सोने के काम को सुरक्षित रखने के लिए क्या किया गया है? गोल्ड वर्क को नुकसान से बचाने और चमक बरकरार रखने के लिए उस पर प्लास्टिक कोटिंग की गई है। 5. परिसर में फर्श को लेकर क्या बदलाव किया गया है? पुराने मार्बल को हटाकर तीन से चार मंजिलों के विभिन्न हिस्सों में नया ग्रेनाइट लगाया गया है। 6. पहला तल पर्यटकों के लिए खोलने की पहल किसने की? देखरेख से जुड़े भूपेंद्र के अनुसार, सेठ साहब की विशेष पहल के बाद इसे विजिटर्स के लिए खोला गया है। https://trendkia.com/rajasthan/ajmer-ki-aitihasika-soniji-ki-nasiyan-ka-pahala-tala-nae-svarna-rupa-men-khula-karigaron-ne-chara-sala-men-snvara-40413 TrendKia — Har trend, sabse pehle.