# अजमेर की गुदोलाव झील का सुनहरा अतीत, गंदे पानी और मछलियों ने उजाड़ी किसानों की रोजी-रोटी

> अजमेर जिले की किशनगढ़ स्थित गुदोलाव झील कभी सिंघाड़े की खेती के लिए मशहूर थी, लेकिन दूषित पानी और मछलियों के आतंक से यह कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/ajmer-ki-gudolav-lake-ka-sunhara-ateet-gande-pani-aur-machliyon-ne-ujadi-kisanon-ki-roji-roti-49704 · **Language:** Hindi
**Tags:** अजमेर, किशनगढ़, सिंघाड़े की खेती, गुदोलाव झील, राजस्थान न्यूज

राजस्थान के अजमेर जिले के अंतर्गत आने वाले किशनगढ़ इलाके की गुदोलाव झील एक समय अपनी बेहतरीन पैदावार के लिए खासा नाम रखती थी। यहां के सिंघाड़े अपनी खास क्वालिटी और बेहतरीन जायके के चलते दूर-दूर के इलाकों में पसंद किए जाते थे। इन फसलों की पहुंच केवल स्थानीय बाजारों तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि राज्य के अन्य बड़े शहरों के बाजारों में भी इनकी भारी मांग बनी रहती थी। सैकड़ों परिवारों के लिए यह जलाशय रोजी-रोटी का मुख्य साधन था, जिससे किसानों को नियमित तौर पर आर्थिक संबल प्राप्त होता था।

बीते कुछ वर्षों में इस ऐतिहासिक जलस्रोत की स्थिति काफी खराब हो गई, जिसके कारण लगभग डेढ़-दो दशक पहले यहां सिंघाड़े की पैदावार पूरी तरह बंद हो गई। इस क्षेत्र से जुड़ी कौशल्या का कहना है कि करीब सत्रह साल पहले उन्होंने इस खेती में लगभग चार लाख रुपये का बड़ा निवेश करके पौधे लगवाए थे। हालांकि, पानी में मौजूद मछलियों ने पूरी फसल को तबाह कर दिया, जिससे उन्हें बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। पानी के लगातार मैले होने और बार-बार होने वाले घाटे से आजिज आकर किसानों ने इस पुश्तैनी काम से हमेशा के लिए मुंह मोड़ लिया।

## आजीविका का संकट और बाहरी क्षेत्रों पर बढ़ती निर्भरता
इस जलस्रोत पर आधारित कामकाज थमने से कई घरों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। एक अन्य स्थानीय निवासी मीरा ने बताया कि अब किसानों को दूसरे इलाकों में जमीन किराए पर लेकर खेती करने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनका खर्च काफी बढ़ गया है। स्थिति यह हो गई है कि किशनगढ़ के बाजारों में सिंघाड़े की मांग पूरी करने के लिए केकड़ी और मसूदा जैसे बाहरी इलाकों का रुख करना पड़ता है। जिस जगह से कभी लोगों को भरपूर आमदनी और बेहतरीन फसल मिलती थी, वह आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।

## झील के जीर्णोद्धार की सख्त आवश्यकता
क्षेत्र के बाशिंदों और किसानों का यह मानना है कि यदि शासन-प्रशासन स्तर पर जलशोधन और पानी की निकासी के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, तो इस स्थान पर दोबारा खेती शुरू हो सकती है। पानी की खराबी दूर होने से पर्यावरण बेहतर होगा और लोगों को घर के पास ही रोजगार के नए अवसर मिल सकेंगे। जिस गुदोलाव झील की पहचान कभी खुशहाली और मिठास से जुड़ी थी, उसे सरकारी उदासीनता के दलदल से बाहर निकालने के लिए अब ठोस कदमों की दरकार है।

## इसका आप पर असर
गुदोलाव झील के बंजर होने और खेती रुकने का सीधा असर स्थानीय किसानों और बाजार की आपूर्ति पर पड़ा है।

- **स्थानीय किसानों पर असर:** किसानों को अपनी पुश्तैनी आय गंवाने के बाद अब दूसरे इलाकों में महंगी जमीन किराए पर लेकर खेती करनी पड़ रही है।
- **आर्थिक नुकसान:** फसल नष्ट होने के कारण किसानों को चार लाख रुपये तक के भारी शुरुआती निवेश का नुकसान उठाना पड़ा है।
- **बाजार की निर्भरता:** किशनगढ़ के बाजारों में सिंघाड़े की मांग पूरी करने के लिए अब केकड़ी और मसूदा जैसे बाहरी क्षेत्रों पर निर्भर रहना पड़ता है।
- **रोजगार का संकट:** सैकड़ों परिवारों का मुख्य आजीविका स्रोत छिन जाने से उन्हें वैकल्पिक रोजगार की तलाश में भटकना पड़ रहा है।

## ऐसा क्यों हुआ
गुदोलाव झील में सिंघाड़े की खेती बंद होने के पीछे पानी का लगातार दूषित होना और जलीय जीवों का बढ़ता प्रभाव मुख्य वजह रहा है। प्रशासनिक सुस्ती के कारण जल निकासी और सफाई के पुख्ता इंतजाम नहीं हो पाए।

- **पानी का दूषित होना:** झील के पानी की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई और लगातार गंदा पानी मिलने से फसलें नष्ट होने लगीं।
- **मछलियों का प्रभाव:** झील में मौजूद मछलियों ने रोपे गए सिंघाड़े के पौधों को पूरी तरह कुतरकर खत्म कर दिया।
- **प्रशासनिक उपेक्षा:** समय पर जलशोधन और झील के पुनरुद्धार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
- **आर्थिक संकट:** बार-बार होने वाले नुकसान और भारी लागत के चलते किसानों ने इस खेती से दूरी बना ली।

## सवाल-जवाब

### 1. गुदोलाव झील कहां स्थित है?
गुदोलाव झील राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ इलाके में स्थित है।

### 2. किशनगढ़ में सिंघाड़े की खेती क्यों बंद हुई?
झील के दूषित पानी और मछलियों द्वारा फसल को नष्ट किए जाने के कारण यह खेती बंद हो गई।

### 3. कौशल्या को खेती में कितना नुकसान हुआ था?
कौशल्या ने लगभग सत्रह साल पहले चार लाख रुपये की लागत से पौधे रोपे थे जो नष्ट हो गए।

### 4. अब किशनगढ़ में सिंघाड़े कहां से मंगाए जाते हैं?
किशनगढ़ के बाजारों में मांग पूरी करने के लिए केकड़ी और मसूदा जैसे बाहरी क्षेत्रों से सिंघाड़े मंगाए जाते हैं।

### 5. किसानों को क्या उम्मीद है?
स्थानीय निवासियों का मानना है कि प्रशासन द्वारा पानी के उपचार की व्यवस्था करने पर खेती फिर शुरू हो सकती है।

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