अजमेर में कृषि विशेषज्ञों की सलाह, मिट्टी की जांच से किसान बढ़ा सकते हैं मुनाफा अजमेर के कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेत की मिट्टी की जांच कराने से खाद पर होने वाला खर्च कम होता है और किसानों का मुनाफा डेढ़ से दो गुना तक बढ़ सकता है। खेती-किसानी के क्षेत्र में बेहतर और उन्नत पैदावार प्राप्त करने के लिए अन्नदाता विभिन्न प्रकार के उर्वरकों और खादों का निरंतर प्रयोग करते हैं। हालांकि, अक्सर उचित मार्गदर्शन और सटीक जानकारी न होने के कारण खेतों में जरूरत से ज्यादा या असंतुलित मात्रा में खादों का छिड़काव कर दिया जाता है। इस तरह की लापरवाही से न केवल खेती की कुल लागत में इजाफा होता है, बल्कि कृषि भूमि की प्राकृतिक उपजाऊ क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है। इन्ही तमाम समस्याओं को देखते हुए कृषि से जुड़े विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि हर किसान को अपने खेत की मिट्टी की समय-समय पर जांच जरूर करवानी चाहिए। मिट्टी परीक्षण से मिलती है पोषक तत्वों की सटीक जानकारी अजमेर के कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. धर्मेंद्र भाटी ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि खेत की मिट्टी का लैब टेस्ट करवाना बेहद जरूरी है। इस परीक्षण की मदद से जमीन के भीतर मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर और अन्य तमाम जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों की सही मात्रा का सटीक आकलन किया जा सकता है। आमतौर पर वैज्ञानिक जांच के अभाव में किसान केवल अपने अनुमान के भरोसे ही खेतों में उर्वरक डालते हैं, जिससे खाद और रसायनों पर होने वाला अनावश्यक खर्च काफी बढ़ जाता है। इंसानी ब्लड टेस्ट की तरह ही अहम है सॉइल टेस्टिंग डॉ. धर्मेंद्र भाटी ने मिट्टी की जांच की उपयोगिता को बहुत ही सरल तरीके से समझाते हुए इसकी तुलना मानव स्वास्थ्य की जांच से की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार इंसानी शरीर में किसी भी बीमारी या अंदरूनी कमी का पता लगाने के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं, बिल्कुल उसी तरह कृषि भूमि की सेहत और उपजाऊ क्षमता को परखने के लिए मिट्टी का परीक्षण अनिवार्य है। इस जांच के बाद मिलने वाली रिपोर्ट यानी सॉइल हेल्थ कार्ड के जरिए किसान भाई यह आसानी से समझ सकते हैं कि उनकी फसल को किस विशेष पोषक तत्व की कितनी मात्रा की वास्तव में आवश्यकता है। असंतुलित खादों के इस्तेमाल से बंजर होने का खतरा कृषि विज्ञान से जुड़े जानकारों का मानना है कि खेत की मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों के साथ-साथ उसका पीएच और ईसी स्तर क्या है, यह जानना भी बहुत आवश्यक है। यदि किसी किसान को जमीन की इन बुनियादी जैविक और रासायनिक विशेषताओं के बारे में कोई जानकारी नहीं है और वह लगातार अंधाधुंध तरीके से उर्वरकों का प्रयोग कर रहा है, तो इससे मिट्टी की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ने लगती है। यदि लंबे समय तक इसी तरह असंतुलित रूप से खाद डाली जाती रही, तो उपजाऊ जमीन के बंजर होने का गंभीर खतरा भी पैदा हो जाता है। खेत बचाओ अभियान का मुख्य मकसद जमीन की सेहत सुधारना डॉ. धर्मेंद्र भाटी ने आगे बताया कि सरकार की ओर से शुरू किए गए खेत बचाओ अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को जागरूक करना है ताकि वे जमीन की असली जरूरत के हिसाब से ही संतुलित मात्रा में खादों का उपयोग करें। अगर किसान भाई मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर खेती करने का नियम बना लें, तो वे खेती पर आने वाली फालतू लागत को काफी हद तक कम कर सकते हैं। इसके अलावा, ऐसा करने से जमीन की सेहत भी सुरक्षित रहती है और किसान अपनी पैदावार तथा आर्थिक मुनाफे को डेढ़ से दो गुना तक आसानी से बढ़ा सकते हैं। इसका आप पर असर मिट्टी की जांच से किसानों को खेती में उर्वरकों पर होने वाला अनावश्यक खर्च बचाने और फसल का उत्पादन डेढ़ से दो गुना तक बढ़ाने में सीधी मदद मिलती है। • भारत में: देश भर के किसानों को अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या प्रयोगशाला में मिट्टी का परीक्षण कराकर खाद का सही इस्तेमाल करना चाहिए। इससे रासायनिक उर्वरकों पर होने वाले फालतू खर्च में उल्लेखनीय कमी आती है। • अजमेर में: अजमेर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को डॉ. धर्मेंद्र भाटी की सलाह के अनुसार अपनी जमीन की सेहत सुधारने के लिए मिट्टी की जांच को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर बंजर होने के खतरे से जमीन की रक्षा होती है। ऐसा क्यों हुआ खेती में मिट्टी की जांच न कराने के पीछे मुख्य कारण सही जानकारी का अभाव और केवल अनुमान के आधार पर खाद का इस्तेमाल करने की पुरानी परंपरा है। जब किसान जमीन की रासायनिक बनावट और उसमें मौजूद तत्वों को नहीं समझते हैं, तो वे जरूरत से अधिक उर्वरक डालते हैं। • जानकारी की कमी: कई किसानों को यह पता नहीं होता है कि मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस या पोटाश की वास्तविक मात्रा कितनी है। इस वजह से वे वैज्ञानिक तरीकों के बजाय केवल अंदाजे से खाद का छिड़काव करते हैं। • जैविक संतुलन का बिगड़ना: लगातार असंतुलित उर्वरक डालने से मिट्टी का पीएच और ईसी स्तर प्रभावित होता है। लंबे समय तक ऐसा होने से जमीन की प्राकृतिक उर्वरता खत्म होने लगती है। • सरकारी पहल का उद्देश्य: सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियानों का मुख्य मकसद किसानों को इस बात के प्रति जागरूक करना है कि वे अपनी मिट्टी की सेहत सुधारकर लागत घटाएं। सवाल-जवाब 1. खेत की मिट्टी की जांच क्यों जरूरी है? मिट्टी की जांच से खेत में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और अन्य पोषक तत्वों की सटीक मात्रा का पता चलता है, जिससे अनावश्यक खर्च बचता है। 2. डॉ. धर्मेंद्र भाटी किस संस्थान से जुड़े हैं? डॉ. धर्मेंद्र भाटी अजमेर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं। 3. मिट्टी परीक्षण न कराने से क्या नुकसान होता है? बिना जांच के लगातार असंतुलित उर्वरक डालने से जमीन की गुणवत्ता खराब होती है और लंबे समय में मिट्टी के बंजर होने का खतरा रहता है। 4. सॉइल हेल्थ कार्ड क्या मदद करता है? सॉइल हेल्थ कार्ड के जरिए किसान यह तय कर सकते हैं कि उनकी फसल को किस पोषक तत्व की कितनी मात्रा की जरूरत है। 5. खेत बचाओ अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है? इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को मिट्टी की आवश्यकतानुसार संतुलित मात्रा में पोषक तत्वों का उपयोग करने के प्रति जागरूक करना है। 6. मिट्टी परीक्षण से किसान कितना मुनाफा पा सकते हैं? वैज्ञानिक तरीकों से खेती करने और लागत घटाने पर किसान डेढ़ से दो गुना तक अधिक उत्पादन और आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। https://trendkia.com/rajasthan/ajmer-mein-krishi-visheshagyon-ki-salah-mitti-ki-jaanch-se-kisan-badha-sakte-hain-munafa-57817 TrendKia — Har trend, sabse pehle.