# अजमेर में 16.16 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी का पैसा खपाने वाला दूसरा साथी गिरफ्तार

> अजमेर की सिविल लाइन थाना पुलिस ने राजनीतिक फंड खाते में साइबर धोखाधड़ी की रकम जमा करवाकर निकालने के मामले में दूसरे संदिग्ध अमजद खान को पकड़ा है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/ajmer-men-16-16-lakha-rupaye-ki-nalaina-thagi-ka-paisa-khapane-vala-dusara-sathi-giraphtara-42875 · **Language:** Hindi
**Tags:** अजमेर, साइबर अपराध, गिरफ्तारी, बैंक धोखाधड़ी, राजस्थान पुलिस, सिविल लाइन थाना

राजस्थान के अजमेर जिले में भोले-भाले नागरिकों के बैंक खातों का दुरुपयोग कर ऑनलाइन धोखाधड़ी की रकम ठिकाने लगाने वाले गिरोह के खिलाफ कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। सिविल लाइन थाना पुलिस ने वित्तीय जालसाजी से जुड़े इस सुनियोजित अपराध में शामिल दूसरे प्रमुख संदिग्ध को हिरासत में लेने में सफलता पाई है। जांच दल इससे पहले मामले के प्राथमिक अभियुक्त को सलाखों के पीछे भेज चुका था, जिसके जरिए मिले तकनीकी और वित्तीय सुरागों ने इस नई गिरफ्तारी की राह तैयार की।

## झांसे में लेकर खाते का किया इस्तेमाल
इस पूरे षड्यंत्र का शिकार लाडपुरा निवासी मुकेश रावत बने, जिन्होंने समाज सेवा और राजनीतिक गतिविधियों के संचालन के मकसद से ‘अखिल भारतीय राजनीतिक’ शीर्षक से एक खाता बैंक में चालू करवाया था। इसी गांव के रहने वाले दीपेंद्र उर्फ दीपू रावत ने मुकेश से नजदीकी बढ़ाई और उनके इस खाते को अपने नापाक मंसूबों के लिए साधन बनाया। दीपेंद्र ने मुकेश को विश्वास में लेकर कुल 16 लाख 16 हजार 500 रुपये की अवैध रकम उस खाते में मंगवाई।

रकम जमा होते ही उसने मुकेश को यह झांसा दिया कि भविष्य में आने वाला सारा पैसा भी सीधे उन्हीं को सौंप दिया जाएगा। इस तरह मुकेश का भरोसा जीतकर दीपेंद्र ने उनसे खुद के नाम का एक सेल्फ चेक हासिल कर लिया। चेक हाथ में आते ही आरोपी बैंक से नकदी समेटकर मौके से रफूचक्कर हो गया, जिससे पीड़ित को शुरुआत में किसी प्रकार के फरेब की भनक तक नहीं लगी।

## खाते पर लगी पाबंदी से सामने आई सच्चाई
इस जालसाजी का पर्दाफाश तब हुआ जब बैंक प्रबंधन ने संदिग्ध ऑनलाइन लेन-देन को चिन्हित करते हुए मुकेश के खाते के संचालन पर अचानक रोक लगा दी। अपना खाता फ्रीज होने की सूचना पाकर जब मुकेश बैंक शाखा पहुंचे, तब शाखा अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उनके खाते में पहुंची भारी-भरकम राशि असल में साइबर अपराध के जरिए हड़पी गई थी। यह हकीकत जानकर पीड़ित के होश उड़ गए और उन्होंने बिना देरी किए अदालत की शरण ली।

न्यायालय के निर्देश पर इस्तगासे के माध्यम से सिविल लाइन थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। रिपोर्ट दर्ज होते ही पुलिस की विशेष टीम सक्रिय हुई और सबसे पहले दबिश देकर दीपेंद्र उर्फ दीपू को दबोच लिया गया। हिरासत में लेकर जब उससे कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने स्वीकार किया कि वह अकेले इस गिरोह का संचालन नहीं कर रहा था।

## कॉल डिटेल और लेन-देन से पकड़ा गया दूसरा साथी
पुलिस अधिकारियों ने जब दीपेंद्र के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और संबंधित बैंक खातों के लेन-देन का विश्लेषण किया, तो लोहाखान निवासी अमजद खान उर्फ अम्मू का नाम सीधे तौर पर सामने आया। तकनीकी साक्ष्यों से पुष्टि हुई कि दोनों मिलकर साइबर ठगी के जरिए हासिल किए गए रुपयों को इधर-उधर करने और ठिकाने लगाने की योजना तैयार करते थे।

पर्याप्त सबूत जुटाने के बाद पुलिस ने घेराबंदी करके अमजद खान को भी धर दबोचा। जांच अधिकारी अब दीपेंद्र और अमजद दोनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अजमेर या आसपास के क्षेत्रों में और कितने लोगों के खातों को जरिया बनाकर ऑनलाइन लूट की रकम निकाली है तथा इस अंतरराज्यीय नेटवर्क में और कौन-कौन से चेहरे शामिल हैं।

## इसका आप पर असर
यह घटना दर्शाती है कि दूसरों के नाम पर बैंक खाते का उपयोग करवाना किसी भी सामान्य नागरिक को कानूनी संकट और वित्तीय पाबंदियों में डाल सकता है।

- **अजमेर और राजस्थान में:** स्थानीय निवासी किसी भी परिचित या ग्रामीण के कहने पर अपने बैंक खाते में अनजान लेनदेन की अनुमति देने से बचें। ऐसा करने पर पुलिस जांच और खाता फ्रीज होने की सीधी कानूनी कार्रवाई झेलनी पड़ सकती है।
- **देशभर के खाताधारकों के लिए:** किसी भी अजनबी या मित्र को कभी भी हस्ताक्षरित 'सेल्फ' चेक या पासबुक न सौंपें। साइबर गिरोह अवैध रकम को वैध दिखाने के लिए आपके खाते को म्युल अकाउंट की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।
- **संस्थागत खातों की सुरक्षा:** राजनीतिक, धार्मिक अथवा सामाजिक ट्रस्ट के बैंक खातों की नियमित ऑडिटिंग और निगरानी सुनिश्चित करें। संदिग्ध राशि आते ही बिना देरी किए तत्काल अपनी बैंक शाखा और साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
- **फ्रीज खातों के मामले में:** यदि बैंक बिना पूर्व सूचना के खाता ब्लॉक कर दे, तो घबराने के बजाय कानूनी प्रक्रिया और पुलिस प्राथमिकी के जरिए सच्चाई स्पष्ट करें। त्वरित कानूनी हस्तक्षेप से खाते को दुरुपयोग की जांच में सहयोग का प्रमाण मिलता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह धोखाधड़ी इसलिए संभव हो सकी क्योंकि आरोपियों ने व्यक्तिगत परिचय का दुरुपयोग कर सामाजिक फंड के खाते को मनी म्युल की तरह इस्तेमाल किया और पीड़ित को सतर्क होने का मौका नहीं दिया।

- **विश्वासघात और प्रलोभन:** आरोपी दीपेंद्र ने एक ही गांव का होने का फायदा उठाकर पीड़ित का भरोसा जीता और भविष्य में सारा पैसा सौंपने का झूठा दिलासा देकर खाता हासिल कर लिया। इसी बहकावे में आकर पीड़ित ने बिना पड़ताल किए बैंक में 16.16 लाख रुपये मंगाने की सहमति दे दी।
- **सेल्फ चेक से नकद निकासी:** जालसाजों ने डिजिटल ट्रांसफर के बजाय सीधे हस्ताक्षरित सेल्फ चेक प्राप्त किया, जिससे रकम बैंक से तुरंत नकदी में बदल गई और आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहा। इस कार्यप्रणाली से ठगी की रकम को डिजिटल जांच के दायरे से बाहर निकालना आसान हो गया।
- **संगठित नेटवर्क की सांठगांठ:** तकनीकी जांच से स्पष्ट हुआ कि दीपेंद्र अकेले काम नहीं कर रहा था, बल्कि लोहाखान का अमजद खान भी इस रैकेट में तकनीकी और वित्तीय प्रबंधन संभाल रहा था। दोनों मिलकर ठगी के धन को विभिन्न खातों में घुमाने का नेटवर्क चला रहे थे।
- **बैंक का निगरानी तंत्र:** साइबर ठगी से जुड़े मामलों में जब शिकायतें दर्ज होती हैं, तो नोडल एजेंसियां फंड के ट्रेल का पीछा करते हुए संदिग्ध खातों को फ्रीज कर देती हैं, जिससे यह राज खुला। इसके बाद पीड़ित के पास अदालत का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

## सवाल-जवाब

### 1. अजमेर में पुलिस ने किस नए आरोपी को गिरफ्तार किया है?
सिविल लाइन थाना पुलिस ने लोहाखान निवासी अमजद खान उर्फ अम्मू को ऑनलाइन ठगी की रकम खपाने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

### 2. इस मामले में पहले किस व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई थी?
पुलिस ने सबसे पहले लाडपुरा निवासी मुख्य आरोपी दीपेंद्र उर्फ दीपू रावत को गिरफ्तार किया था।

### 3. धोखाधड़ी में कुल कितनी रकम शामिल थी?
पीड़ित के बैंक खाते में कुल 16 लाख 16 हजार 500 रुपये की अवैध साइबर फ्रॉड राशि जमा करवाई गई थी।

### 4. पीड़ित का बैंक खाता किस नाम से संचालित था?
पीड़ित मुकेश रावत ने सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों के संचालन के लिए ‘अखिल भारतीय राजनीतिक’ नाम से खाता खुलवा रखा था।

### 5. इस पूरे मामले का खुलासा कैसे हुआ?
साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी रकम आने के कारण जब बैंक ने मुकेश रावत का खाता फ्रीज कर दिया, तब इस ठगी का पर्दाफाश हुआ।

### 6. पुलिस अब दोनों आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई कर रही है?
पुलिस दीपेंद्र और अमजद को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और अन्य संदिग्ध खातों का पता लगाया जा सके।

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