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  "type": "article",
  "title": "अजमेर में राजनीतिक फंड के बैंक खाते से 16.16 लाख रुपये का साइबर फ्रॉड, आरोपी दीपेंद्र गिरफ्तार",
  "summary": "अजमेर की सिविल लाइन थाना पुलिस ने राजनीतिक फंड के बैंक खाते में साइबर ठगी की रकम डलवाकर सेल्फ चेक से निकालने वाले आरोपी दीपेंद्र उर्फ दीपू रावत को गिरफ्तार कर लिया है।",
  "content": "राजस्थान के अजमेर शहर में साइबर अपराध की काली कमाई को ठिकाने लगाने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। सिविल लाइन थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक ऐसे जालसाज को दबोच लिया है, जिसने अपने ही परिचित के बैंक खाते में ऑनलाइन ठगी का पैसा जमा करवाया और फिर चेक के जरिए पूरी नकदी निकाल ली। पकड़े गए आरोपी की पहचान लाडपुरा निवासी दीपेंद्र उर्फ दीपू रावत के रूप में की गई है। पुलिस हिरासत में आरोपी से कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह के बाकी तारों को भी जोड़ा जा सके।\n\nअदालत के निर्देश पर दर्ज हुआ धोखाधड़ी का मुकदमा\nइस पूरे फर्जीवाड़े की परतें तब खुलीं जब ठगी के शिकार मुकेश रावत ने इंसाफ के लिए अदालत की शरण ली। अदालत के स्पष्ट आदेश के बाद अजमेर के सिविल लाइन थाने में धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) से संबंधित धाराओं के तहत औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की गई। पीड़ित मुकेश रावत ने पुलिस को सौंपी गई अपनी शिकायत में पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पीड़ित के अनुसार, उसने 'अखिल भारतीय राजनीतिक' नाम से एक बैंक खाता खुलवाया हुआ था। इस विशेष खाते का इस्तेमाल मुख्य रूप से राजनीतिक फंड के लेन-देन और उसके वित्तीय प्रबंधन के लिए किया जाता था, और इसका पूरा संचालन भी वही संभाल रहा था।\n\nविश्वास में लेकर जमा करवाए 16.16 लाख रुपये\nमुकेश रावत की शिकायत के अनुसार, उसी के गांव लाडपुरा के रहने वाले दीपेंद्र उर्फ दीपू रावत ने सोची-समझी साजिश के तहत उसे अपने जाल में फंसाया। आरोपी ने कई मनगढ़ंत बातें बनाकर और झांसा देकर पीड़ित का विश्वास जीता। इसके बाद आरोपी ने किसी अज्ञात व्यक्ति से साइबर फ्रॉड के जरिए ठगे गए कुल 16 लाख 16 हजार 500 रुपये इस खाते में ट्रांसफर करवा दिए। आरोपी ने मुकेश को पूरी तरह आश्वस्त किया था कि यह लेनदेन पूरी तरह सुरक्षित है और इस पैसे को लेकर भविष्य में कोई विवाद या कानूनी अड़चन पैदा नहीं होगी। जैसे ही 16 लाख 16 हजार 500 रुपये की भारी राशि बैंक खाते में जमा हुई, आरोपी ने चतुराई से सेल्फ चेक भरकर समूची रकम नकद निकाल ली और मौके से फरार हो गया।\n\nबैंक खाता फ्रीज होने पर सामने आया सच\nइस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब बैंकों की सतर्कता प्रणाली और साइबर सेल ने उस खाते में संदिग्ध लेनदेन को पकड़ लिया। सुरक्षा कारणों से बैंक प्रशासन ने मुकेश रावत के खाते के सभी लेन-देन रोकते हुए उसे फ्रीज कर दिया। जब मुकेश अपने खाते की स्थिति जानने बैंक शाखा पहुंचा, तब उसे इस भयानक सच्चाई का पता चला कि उसके खाते में जमा की गई 16 लाख 16 हजार 500 रुपये की रकम असल में साइबर ठगी की अवैध कमाई थी। बैंक और साइबर सेल की कार्रवाई से सच सामने आते ही पीड़ित ने कानूनी रास्ता चुना और अदालत के जरिए पुलिस में मामला दर्ज कराया।\n\nनेटवर्क और पैसों के ठिकाने की जांच में जुटी पुलिस\nशिकायत में दिए गए ठोस तथ्यों और बैंक दस्तावेजों की पड़ताल के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने दबिश देकर आरोपी दीपेंद्र उर्फ दीपू रावत को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब आरोपी से रिमांड पर पूछताछ कर रही है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि दीपेंद्र के साथ इस साइबर नेटवर्क में अन्य कौन से लोग सक्रिय हैं और ठगी का शिकार मूल रूप से कौन बना था। इसके साथ ही, खाते से सेल्फ चेक के जरिए निकाली गई 16 लाख 16 हजार 500 रुपये की राशि किन-किन जगहों पर पहुंचाई गई या छिपाई गई, इसका वित्तीय रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान कर उन्हें भी शीघ्र सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटना दर्शाती है कि परिचित लोगों के कहने पर अपने बैंक खाते में अज्ञात रकम जमा करवाना कानूनी संकट और वित्तीय नुकसान का कारण बन सकता है।\n\n• भारत में: किसी भी अनजान व्यक्ति या परिचित के कहने पर अपने बैंक खाते का दुरुपयोग न होने दें। यदि कोई आपके खाते में साइबर अपराध का पैसा मंगवाता है, तो कानूनी तौर पर आपका खाता तुरंत फ्रीज हो सकता है और आपको जांच का सामना करना पड़ सकता है।\n• अजमेर में: स्थानीय निवासी अपने बैंक खातों की सुरक्षा और चेक बुक के उपयोग को लेकर सतर्कता बरतें। किसी भी परिचित को अपने खाते का सेल्फ चेक देकर नकदी निकासी की अनुमति बिल्कुल न दें।\n• खाताधारकों के लिए: बड़ी रकम जमा होते ही और उसके स्रोत पर संदेह होने पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन को सूचित करें। संदिग्ध लेनदेन छुपाने पर खाताधारक भी पुलिस जांच और मुकदमे के दायरे में आ सकता है।\n• सावधानी बरतने का उपाय: अपने वित्तीय और राजनीतिक फंड खातों का नियंत्रण कभी भी किसी तीसरे व्यक्ति के हाथ में न सौंपें। बैंक अलर्ट को सक्रिय रखें ताकि हर लेनदेन की तत्काल जानकारी मिलती रहे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह साइबर अपराध योजनाबद्ध तरीके से निर्दोष व्यक्ति के खाते को पैसे छिपाने और निकालने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने की वजह से घटित हुआ।\n\n• सीधा कारण: आरोपी दीपेंद्र ने साइबर ठगी की 16 लाख 16 हजार 500 रुपये की अवैध कमाई को ठिकाने लगाने के लिए पीड़ित के खाते का इस्तेमाल किया और सेल्फ चेक से रकम निकाल ली।\n• परिस्थितिजन्य वजह: पीड़ित मुकेश और आरोपी दीपेंद्र एक ही गांव लाडपुरा के थे, जिसके कारण पीड़ित आसानी से उसके भरोसे में आ गया।\n• बैंकों की निगरानी: बड़ी और संदिग्ध रकम का लेनदेन होते ही साइबर सेल और बैंक निगरानी तंत्र ने खाते को फ्रीज कर दिया, जिससे पूरी साजिश उजागर हो गई।\n• आगे की कार्रवाई: पुलिस अब यह जांच कर रही है कि यह साइबर अपराध कहां अंजाम दिया गया था और इस सिंडिकेट में दीपेंद्र के साथ और कौन से लोग शामिल हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अजमेर में गिरफ्तार किए गए आरोपी का नाम क्या है?\nगिरफ्तार किए गए आरोपी का नाम लाडपुरा निवासी दीपेंद्र उर्फ दीपू रावत है।\n\n2. इस मामले में कुल कितनी रकम की साइबर ठगी की गई थी?\nइस मामले में कुल 16 लाख 16 हजार 500 रुपये की साइबर फ्रॉड की राशि खाते में जमा करवाई गई थी।\n\n3. पीड़ित मुकेश रावत के बैंक खाते का नाम क्या था?\nपीड़ित मुकेश रावत का बैंक खाता 'अखिल भारतीय राजनीतिक' के नाम से संचालित था, जिसका इस्तेमाल राजनीतिक फंड के प्रबंधन के लिए होता था।\n\n4. यह ठगी सामने कैसे आई?\nसाइबर सेल और बैंक की सतर्कता के कारण जब मुकेश रावत का खाता फ्रीज हुआ, तब बैंक जाकर पूछताछ करने पर ठगी का सच सामने आया।\n\n5. आरोपी ने बैंक खाते से पैसे कैसे निकाले थे?\nआरोपी ने पीड़ित को विश्वास में लेकर सेल्फ चेक भरकर पूरी रकम नकद निकाल ली थी।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-03",
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    "अजमेर पुलिस",
    "साइबर ठगी",
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