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  "title": "अजमेर नगर निगम में मेयर चुनाव आज, कांग्रेस की किरण गढ़वाल और बीजेपी की अनामिका शर्मा में कड़ा मुकाबला",
  "summary": "अजमेर नगर निगम में मेयर पद के लिए कांग्रेस और बीजेपी के बीच रोमांचक मुकाबला जारी है, जहां 11 निर्दलीय पार्षद सत्ता की चाबी अपने हाथ में लिए हुए हैं।",
  "content": "राजस्थान के अजमेर नगर निगम में नया मेयर चुनने के लिए चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। अस्सी वार्डों वाले इस प्रतिष्ठित नगर निगम में सत्ता की चाबी किसी एक पार्टी के पास नहीं है, बल्कि पूरा दारोमदार निर्दलीय जीतकर आए ग्यारह पार्षदों के रुख पर आ टिका है। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के गृहक्षेत्र में होने वाले इस चुनाव में बहुमत के लिए इकतालीस का जादुई आंकड़ा हासिल करना अनिवार्य है। इस मुकाबले में कांग्रेस की ओर से किरण गढ़वाल और बीजेपी की तरफ से अनामिका शर्मा आमने-सामने खड़ी हैं। दोनों ही खेमों ने शहर की सत्ता संभालने के लिए अपनी पूरी राजनीतिक ताकत झोंक दी है।\n\nबहुमत के समीकरण और दोनों दलों की स्थिति\nअजमेर नगर निगम चुनावों के जो नतीजे सामने आए हैं, उनमें कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। कांग्रेस पार्टी के खाते में कुल सैंतीस पार्षद आए हैं, जबकि बीजेपी बत्तीस सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही है। इसके अलावा ग्यारह वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। कांग्रेस को अपना बोर्ड गठित करने और किरण गढ़वाल को मेयर बनाने के लिए केवल चार और पार्षदों के समर्थन की जरूरत है। दूसरी ओर बीजेपी की अनामिका शर्मा को मेयर पद की कुर्सी तक पहुंचने के लिए नौ अतिरिक्त पार्षदों का आंकड़ा जुटाना होगा। दोनों पार्टियां लगातार यह दावा कर रही हैं कि निर्दलीय उनके साथ हैं और वे आसानी से अपना बोर्ड बना लेंगी।\n\nबेंगलुरु से पुष्कर तक पार्षदों की बाड़ाबंदी\nपार्षदों को टूटने और पाला बदलने से बचाने के लिए दोनों ही सियासी दलों ने भारी घेराबंदी की रणनीति अपनाई। कांग्रेस पार्टी मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद से ही बेहद सतर्कता बरत रही थी। अपने पार्षदों को किसी भी तरह की टूट से सुरक्षित रखने के लिए कांग्रेस ने उन्हें राजस्थान से बाहर कर्नाटक के बेंगलुरु भेज दिया था। इस पूरी घेराबंदी का जिम्मा पार्टी नेता धर्मेंद्र राठौड़ ने संभाला हुआ था। बेंगलुरु की इस बाड़ाबंदी में तीन निर्दलीय पार्षद भी कांग्रेस पार्षदों के साथ मौजूद रहे। रविवार को इन सभी पार्षदों को वापस अजमेर लाया गया। कांग्रेस खेमे का कहना है कि उनके साथ तीन निर्दलीय पहले से हैं और उन्हें केवल एक और पार्षद का समर्थन चाहिए। दो अन्य निर्दलीय पार्षद मुस्लिम समुदाय से आते हैं, जिन्हें लेकर कांग्रेस आश्वस्त है कि वे उनके पक्ष में ही मतदान करेंगे।\n\nदूसरी तरफ बीजेपी ने भी अपने बत्तीस पार्षदों को एकजुट रखने के लिए पहले राजधानी जयपुर में रखा और बाद में उन्हें तीर्थनगरी पुष्कर स्थानांतरित कर दिया गया। बीजेपी की इस बाड़ाबंदी में छह निर्दलीय पार्षद शामिल बताए गए हैं। इस समीकरण के मुताबिक बीजेपी को बहुमत साबित करने के लिए अब भी तीन अन्य पार्षदों का समर्थन हासिल करना बाकी है। सियासी हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि बीजेपी विपक्षी खेमे में सेंधमारी करने की कोशिश कर रही है, ताकि क्रॉस वोटिंग के जरिए आवश्यक संख्या बल जुटाया जा सके।\n\nप्रशासन का कड़ा पहरा और आरोप-प्रत्यारोप\nमतदान का समय सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक निर्धारित किया गया है। चुनाव की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस पूरी तरह मुस्तैद हैं। नगर निगम परिसर के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और बैरिकेडिंग लगाकर त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है। निगम कार्यालय में केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश दिया जा रहा है और किसी भी बाहरी व्यक्ति की एंट्री पर पूर्ण प्रतिबंध है। यहां तक कि मीडिया कर्मियों को भी परिसर से तीन सौ मीटर दूर रोक दिया गया है।\n\nइस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस पार्टी लगातार स्थानीय प्रशासन पर मिलीभगत करने और पक्षपात बरतने का आरोप लगा रही है। इसके जवाब में बीजेपी नेताओं का कहना है कि वे चुनाव आयोग और प्रशासन की तय गाइडलाइन का पूरी निष्ठा से पालन कर रहे हैं। हालांकि मतदान प्रक्रिया के दौरान क्रॉस वोटिंग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। चर्चा है कि कुछ कांग्रेसी पार्षद राज्य सरकार की नीतियों के साथ जाकर अपना वोट बदल सकते हैं। अब दोनों दलों के दावों की अंतिम परीक्षा मतदान कक्ष के भीतर होने वाली वोटिंग पर टिकी है।\n\nइसका आप पर असर\nअजमेर नगर निगम चुनाव के परिणाम शहर के स्थानीय विकास, प्रशासनिक नीतियों और नागरिक सुविधाओं की दिशा तय करेंगे।\n\n• अजमेर में: अजमेर शहर को आज अपना नया प्रथम नागरिक मिल जाएगा, जिसके बाद नगर निगम के बोर्ड का औपचारिक गठन पूरा होगा। नया मेयर चुने जाने से शहर के सभी 80 वार्डों में लंबे समय से अटके बुनियादी विकास कार्य और सफाई व्यवस्था सुचारू हो सकेगी।\n• राजस्थान में: राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के गृहक्षेत्र में होने वाला यह परिणाम राज्य की स्थानीय राजनीति में दोनों प्रमुख दलों के राजनीतिक प्रभाव का संकेत देगा। दोनों पार्टियों की बाड़ाबंदी और निर्दलीयों की अहमियत आने वाले अन्य स्थानीय निकाय चुनावों की रणनीतियों पर असर डालेगी।\n• आम नागरिकों के लिए: निगम परिसर के 300 मीटर दायरे में सुरक्षा और बैरिकेडिंग के चलते आवाजाही पर पाबंदी रहेगी। नगर निगम कार्यालय में सामान्य नागरिक कार्यों के लिए आने वाले लोगों को मतदान प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करना होगा।\n• पार्षदों और निर्दलीयों के लिए: 11 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका नगर निगम में अत्यंत निर्णायक बन गई है। नई परिषद में विकास कार्यों और समितियों के आवंटन में इन पार्षदों का प्रभाव आगामी पांच वर्षों तक बना रहेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअजमेर नगर निगम के 80 वार्डों के चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट जनादेश नहीं मिलने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।\n\n• त्रिशंकु परिणाम: 80 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 41 का आंकड़ा आवश्यक था, लेकिन कांग्रेस को 37 और बीजेपी को 32 सीटें ही मिल सकीं। 11 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों के जीतने से सदन में कोई भी दल अपने दम पर बहुमत साबित करने की स्थिति में नहीं रहा।\n• निर्दलीयों का निर्णायक होना: दोनों ही दलों को जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए निर्दलीय पार्षदों की मदद लेना अनिवार्य हो गया। कांग्रेस को केवल 4 और बीजेपी को 9 अतिरिक्त पार्षदों की जरूरत पड़ने से निर्दलीयों का मोलभाव और समर्थन केंद्रीय मुद्दा बन गया।\n• हॉर्स ट्रेडिंग का भय: मतदान के तुरंत बाद पार्षदों के पाला बदलने की संभावना को देखते हुए कांग्रेस ने बेंगलुरु और बीजेपी ने जयपुर-पुष्कर में बाड़ाबंदी की। गुप्त मतदान में क्रॉस वोटिंग के खतरे के कारण दोनों खेमों ने कड़ी निगरानी बनाए रखी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अजमेर नगर निगम में कुल कितने वार्ड हैं और बहुमत का आंकड़ा क्या है?\nअजमेर नगर निगम में कुल 80 वार्ड हैं और मेयर पद पर जीत हासिल करने के लिए 41 पार्षदों के बहुमत का आंकड़ा आवश्यक है।\n\n2. मेयर पद के लिए मुख्य मुकाबला किन उम्मीदवारों के बीच है?\nमेयर पद के लिए कांग्रेस की किरण गढ़वाल और बीजेपी की अनामिका शर्मा के बीच सीधा मुकाबला है।\n\n3. चुनाव नतीजों में कांग्रेस और बीजेपी को कितनी-कितनी सीटें मिली हैं?\nचुनावों में कांग्रेस को 37 सीटें और बीजेपी को 32 सीटें मिली हैं, जबकि 11 वार्डों में निर्दलीय पार्षदों ने जीत हासिल की है।\n\n4. कांग्रेस और बीजेपी ने अपने पार्षदों की बाड़ाबंदी कहां की थी?\nकांग्रेस ने अपने पार्षदों को कर्नाटक के बेंगलुरु में रखा था, जबकि बीजेपी ने अपने पार्षदों को पहले जयपुर और बाद में पुष्कर में ठहराया था।\n\n5. मेयर चुनाव के लिए मतदान का समय क्या तय किया गया है?\nमतदान का समय सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक निर्धारित किया गया है।\n\n6. नगर निगम परिसर में सुरक्षा और मीडिया को लेकर प्रशासन के क्या निर्देश हैं?\nपरिसर में त्रिस्तरीय बैरिकेडिंग और पुलिस पहरा लगाया गया है, जबकि मीडिया कर्मियों को निगम भवन से 300 मीटर दूरी पर ही रोक दिया गया है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-21",
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