अजमेर पुष्कर मार्ग पर नाग पहाड़ की गुफा में स्थित नौसर माता मंदिर, दर्शन के लिए नीचे उतरनी पड़ती हैं पचास सीढ़ियां अजमेर और पुष्कर के बीच नाग पहाड़ की गुफा में स्थित प्राचीन नौसर माता मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को पहाड़ी चढ़ने के बाद पचास सीढ़ियां नीचे उतरना पड़ता है। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर अजमेर और पुष्कर क्षेत्र के धार्मिक स्थलों पर भक्तों का भारी जमावड़ा देखा जा रहा है। जगत जननी मां दुर्गा की उपासना के इस विशेष पर्व में श्रद्धालु शक्तिपीठों और प्राचीन देवालयों में शीश नवा रहे हैं। इसी कड़ी में अजमेर पुष्कर मार्ग पर स्थित नाग पहाड़ का एक अत्यंत प्राचीन मंदिर अपनी अनूठी भौगोलिक बनावट और पौराणिक मान्यताओं के चलते आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। नाग पहाड़ की प्राकृतिक गुफा में स्थित नौसर माता मंदिर तक पहुंचने की यात्रा आम मंदिरों से बिल्कुल जुदा है। पहाड़ चढ़ने के बाद गुफा में पचास सीढ़ियां उतरने की अनूठी परंपरा नाग पहाड़ की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद भक्तों को माता के दर्शन के लिए करीब पचास सीढ़ियां उतरकर गहरी प्राकृतिक गुफा में जाना पड़ता है। आमतौर पर पहाड़ी मंदिरों में शिखर तक पहुंचने के लिए केवल चढ़ाई की जाती है, परंतु यहां शिखर क्षेत्र तक पहुंचने के उपरांत नीचे गुफा में उतरना अनिवार्य होता है। गुफा के भीतर स्थापित गर्भगृह में मां भगवती का दिव्य विग्रह मौजूद है, जहां पहुंचकर भक्तजन असीम शांति और श्रद्धा का अनुभव करते हैं। इस विशिष्ट संरचना के कारण यह स्थान श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था का प्रतीक बना हुआ है। ग्वालियर राजघराने से जुड़ा तेरह सौ साल पुराना जीर्णोद्धार का इतिहास ऐतिहासिक दस्तावेजों और मान्यताओं के अनुसार, इस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार तेरह सौ साल पहले ग्वालियर राजघराने द्वारा संपन्न कराया गया था। सदियों से संजोई गई यह धार्मिक विरासत आज भी अपने मूल स्वरूप में जीवंत है। ऐतिहासिक कालखंड से ही इस मंदिर की महत्ता दूर-दूर तक फैली रही है और राजघरानों से लेकर आम जनमानस तक सभी ने इस पावन गुफा मंदिर के प्रति अपनी अटूट निष्ठा प्रकट की है। समय बीतने के साथ ही इस स्थल का महत्व निरंतर बढ़ता रहा है। पुष्कर में भगवान ब्रह्मा के सृष्टि यज्ञ से जुड़ी पौराणिक मान्यता मंदिर से जुड़ी धार्मिक कथा के संदर्भ में मंदिर के पुजारी बताते हैं कि जब तीर्थराज पुष्कर में भगवान ब्रह्मा सृष्टि यज्ञ का आयोजन कर रहे थे, उस समय उस अनुष्ठान को नकारात्मक शक्तियों और विघ्नों से सुरक्षित रखने के लिए भगवान ब्रह्मा ने नवदुर्गा की विधिवत आराधना की थी। जनश्रुति और धार्मिक विश्वास के अनुसार, उसी पावन काल से यहां मां दुर्गा के नौ स्वरूप इस गुफा में साक्षात विराजमान हैं। यही कारण है कि मंदिर को नौसर माता के पावन नाम से जाना जाता है और इसका आध्यात्मिक प्रभाव अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। कुलदेवी के रूप में पूजा और नवरात्र में दर्शनार्थियों की भारी भीड़ नौसर माता को कई प्रमुख समाजों द्वारा अपनी आराध्य कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। साल भर श्रद्धालुओं के आने का क्रम बना रहता है, किंतु विशेष रूप से शारदीय नवरात्र के दिनों में यहां आस्था का विराट सैलाब उमड़ता है। दूर-दराज से आने वाले भक्तजन मां के सभी नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर अपने परिवार के कल्याण, सुख, शांति और समृद्धि की मनोकामना मांगते हैं। नवरात्र उत्सव के दौरान पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहता है और विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं। यात्रियों के लिए सुगम मार्ग और ठहरने के समुचित साधन नौसर माता मंदिर तक पहुंचने के लिए अजमेर से पुष्कर जाने वाले मुख्य सड़क मार्ग का उपयोग किया जा सकता है, जिससे यात्रा बेहद सुलभ हो जाती है। इस मार्ग पर दिनभर विभिन्न सार्वजनिक और निजी वाहनों की निरंतर आवाजाही बनी रहती है। दूर से आने वाले दर्शनार्थियों के लिए निकटवर्ती पुष्कर क्षेत्र में ठहरने के उद्देश्य से अनेक धर्मशालाएं, भवन और विश्राम गृह उपलब्ध हैं। भक्तजन सहजता से यहां पहुंचकर माता के दर्शन कर अपनी धार्मिक यात्रा पूर्ण करते हैं। इसका आप पर असर अजमेर और पुष्कर जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए नौसर माता मंदिर के दर्शन और यात्रा की सुगमता से जुड़े जरूरी बिंदु। • राजस्थान में: अजमेर और पुष्कर के मध्य यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को नाग पहाड़ स्थित इस प्राचीन गुफा मंदिर के दर्शन के लिए चढ़ाई के बाद 50 सीढ़ियां उतरने की तैयारी रखनी होगी। शारीरिक रूप से कमजोर या बुजुर्ग यात्रियों को सीढ़ियों पर आवागमन करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। • आवास सुविधा: दूरदराज से आने वाले दर्शनार्थियों को ठहरने के लिए पुष्कर में कई धर्मशालाएं और भवन उपलब्ध हैं। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार पुष्कर में रुककर पूरे दिन चलने वाले स्थानीय वाहनों से मंदिर तक सुगमता से पहुंच सकते हैं। • नवरात्र की भीड़: नवरात्र उत्सव के दौरान यहां भक्तों का भारी जमावड़ा होता है। इस अवधि में दर्शन करने जाने वाले परिवारों को समय का ध्यान रखकर जल्दी यात्रा शुरू करनी चाहिए ताकि सुचारू दर्शन हो सकें। • यातायात उपलब्धता: अजमेर-पुष्कर सड़क मार्ग पर दिनभर वाहनों की निरंतर सुविधा मिलती है। निजी वाहनों और सार्वजनिक टैक्सियों के जरिए बिना किसी लंबी पैदल यात्रा के मुख्य सड़क से पहाड़ी मार्ग तक पहुंचा जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ नाग पहाड़ की गुफा में स्थित नौसर माता मंदिर के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण जुड़े हुए हैं। • ब्रह्मा का सृष्टि यज्ञ: पौराणिक मान्यता के अनुसार, तीर्थराज पुष्कर में जब भगवान ब्रह्मा सृष्टि यज्ञ कर रहे थे, तब उन्होंने अनुष्ठान की सुरक्षा के लिए नवदुर्गा की उपासना की थी। माना जाता है कि उसी समय से देवी के नौ स्वरूप इस गुफा में विराजमान हैं। • राजघराने का संरक्षण: लगभग 1300 साल पहले ग्वालियर राजघराने ने इस गुफा मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। इस संरक्षण कार्य ने मंदिर के मूल स्वरूप को सदियों तक अक्षुण्ण बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। • कुलदेवी के रूप में मान्यता: कई समाजों द्वारा नौसर माता को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजने की सदियों पुरानी परंपरा चली आ रही है। इसी ऐतिहासिक और पारिवारिक निष्ठा के कारण श्रद्धालु पीढ़ी-दर-पीढ़ी यहां शीश नवाने आते हैं। सवाल-जवाब 1. नौसर माता का मंदिर कहां स्थित है? यह प्राचीन मंदिर अजमेर से पुष्कर जाने वाले मार्ग पर स्थित नाग पहाड़ की एक गुफा में मौजूद है। 2. मंदिर में माता के दर्शन के लिए कितनी सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं? पहाड़ पर चढ़ने के बाद गुफा में स्थित माता के दर्शन करने के लिए करीब 50 सीढ़ियां नीचे उतरना पड़ता है। 3. इस मंदिर का जीर्णोद्धार कब और किसने कराया था? मंदिर का जीर्णोद्धार 1300 साल पहले ग्वालियर राजघराने द्वारा कराया गया था। 4. नौसर माता मंदिर का संबंध भगवान ब्रह्मा से कैसे जुड़ा है? मान्यता है कि पुष्कर में सृष्टि यज्ञ के दौरान भगवान ब्रह्मा ने यज्ञ को नकारात्मक शक्तियों से बचाने के लिए नवदुर्गा की आराधना की थी, जिसके बाद से मां के नौ स्वरूप यहां विराजमान हैं। 5. नवरात्र के दौरान इस मंदिर का क्या महत्व है? नौसर माता कई समाजों की कुलदेवी हैं, इसलिए नवरात्र में भक्त यहां मां के नौ स्वरूपों के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। 6. श्रद्धालुओं के लिए अजमेर से मंदिर पहुंचना कितना सुगम है? सड़क मार्ग से मंदिर आसानी से पहुंचा जा सकता है, जहां दिनभर वाहनों की सुविधा रहती है और पुष्कर में ठहरने के लिए धर्मशालाएं उपलब्ध हैं। https://trendkia.com/rajasthan/ajmer-pushkar-marg-par-nag-pahar-ki-gufa-mein-sthit-nausar-mata-mandir-darshan-ke-liye-niche-utarni-padti-hain-pachas-seerhiyan-46894 TrendKia — Har trend, sabse pehle.