# अलवर के बुध विहार कांजी हाउस में दलदल और अव्यवस्था के बीच तड़प रहा गोवंश, तीन की मौत पर भड़के गोसेवक

> अलवर नगर निगम के बुध विहार स्थित कांजी हाउस में कर्मचारियों की किल्लत और बारिश के बाद बने कीचड़ के कारण गोवंश गंभीर संकट में है, जहां तीन पशुओं की मौत के बाद गोसेवकों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/alwar-ke-budh-vihar-kanji-hausa-men-daladala-aura-avyavastha-ke-bicha-tarapa-raha-govnsha-tina-ki-mauta-para-bharake-gosevaka-53739 · **Language:** Hindi
**Tags:** अलवर, कांजी हाउस, गोवंश, नगर निगम, बुध विहार, गोसेवक, पशु कल्याण

राजस्थान के अलवर शहर स्थित बुध विहार गो-नंदीशाला कांजी हाउस में मवेशियों की दयनीय हालत सामने आई है। नगर निगम की लचर कार्यप्रणाली और स्टाफ की भारी किल्लत के चलते यहां आश्रय पाए गोवंश को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। पशुओं के लिए दाना-पानी और चारे का संकट गहरा गया है, वहीं पूरे परिसर में स्वच्छता का अभाव बना हुआ है। हालिया बरसात के चलते कांजी हाउस परिसर गहरे कीचड़ और दलदल में तब्दील हो चुका है, जिसके चलते 300 से ज्यादा मवेशी लगातार गीली जमीन पर खड़े रहने को मजबूर हैं। परिसर में उनके बैठने या विश्राम करने के लिए कोई सूखी जमीन नहीं बची है।

## परिसर में मिले मृत पशु और लंपी वार्ड में बदहाली
कांजी हाउस के भीतरी हालात का जायजा लेने पर नगर निगम प्रशासन की घोर लापरवाही उजागर हुई है। बाड़े के लंपी वार्ड के भीतर दो गोवंश मृत पड़े मिले, जबकि एक गंभीर रूप से बीमार गाय दलदल के बीच दर्द से कराहती पाई गई। इसके अलावा टीनशेड के नीचे एक बछड़े का शव कई दिनों से लावारिस पड़ा सड़ रहा था, जिससे पूरे इलाके में असहनीय दुर्गंध फैलने के साथ संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई थी। परिसर में करीब आठ गायों के शरीर पर गहरे और गंभीर जख्म नजर आए, जिन्हें समय पर कोई चिकित्सकीय उपचार नहीं मिल पा रहा था और उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ रही थी।

## स्टाफ की भारी कमी और चुनाव ड्यूटी का असर
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार बुध विहार कांजी हाउस में लगभग 450 गोवंश मौजूद हैं। नगर निगम की ओर से इस पूरे आश्रय स्थल की देखरेख, चारा वितरण और साफ-सफाई के लिए कुल छह कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। हालांकि प्रशासनिक आदेशों के तहत इनमें से चार कर्मचारियों को पंचायत चुनाव के कार्यों में तैनात कर दिया गया। इसके चलते अब केवल दो कर्मचारी ही पूरे कांजी हाउस का जिम्मा संभाल रहे हैं। महज दो कर्मियों के सहारे 450 बेजुबान पशुओं के भोजन, पानी, उपचार और परिसर की सफाई का संचालन करना व्यावहारिक रूप से असंभव साबित हो रहा है। नगर निगम की राजस्व अधिकारी अमीषा ने इस स्थिति पर माना कि चुनावी ड्यूटी के कारण कर्मचारियों की कमी से संचालन में दिक्कतें पैदा हुई हैं। उन्होंने बताया कि तीन मृत पशुओं के शवों को वहां से हटवा दिया गया है और अस्वस्थ मवेशियों के उपचार हेतु पशु चिकित्सकों को बुलाया गया है।

## गोसेवकों का कड़ा रोष और प्रशासन को अल्टीमेटम
पशुओं की दुर्दशा और मौतों की सूचना मिलने के बाद स्थानीय गोसेवक बड़ी तादाद में कांजी हाउस पहुंचे। परिसर की भयानक स्थिति और मवेशियों की दुर्दशा को देखकर लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। गोसेवकों ने तत्काल पशु एंबुलेंस को मौके पर बुलाया और तड़प रही एक बीमार गाय को इलाज के लिए पशु चिकित्सालय पहुंचाया। गोसेवक कमलकांत शास्त्री ने नगर निगम के मेयर और जिला प्रशासन से सीधे हस्तक्षेप करने की मांग उठाई। उन्होंने परिसर में अतिरिक्त टीनशेड लगाने, पर्याप्त चारे की नियमित आपूर्ति करने और घायल तथा बीमार पशुओं के नियमित इलाज की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। शास्त्री ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासनिक अमले ने कांजी हाउस की बदहाल दशा को तत्काल दुरुस्त नहीं किया, तो सभी गोसेवक लामबंद होकर जिला प्रशासन के विरुद्ध सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।

## इसका आप पर असर
इस प्रशासनिक विफलता ने सरकारी पशु आश्रयों की कार्यप्रणाली और शहरी स्वच्छता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

- **राजस्थान में:** राज्य में बेसहारा गोवंश के लिए चलाए जा रहे आश्रय स्थलों के प्रबंधन और निगरानी तंत्र की वास्तविक स्थिति सामने आई है। यदि स्थानीय निकाय समय पर बुनियादी सुविधाएं नहीं सुधारते हैं तो आवारा पशु प्रबंधन पूरी तरह ध्वस्त हो सकता है।
- **अलवर में:** बुध विहार कांजी हाउस में संक्रमण और सड़न से आसपास के आवासीय इलाकों में संक्रामक बीमारियों और तीव्र दुर्गंध का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय नागरिकों और गोसेवकों के कड़े तेवर से नगर निगम प्रशासन पर सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं को तुरंत दुरुस्त करने का दबाव बढ़ गया है।
- **पशुपालकों और गोसेवकों के लिए:** पशुओं के समय पर उपचार और पोषण के अभाव ने सामाजिक संगठनों को हस्तक्षेप करने पर मजबूर किया है। स्थानीय गोसेवक अब सरकारी मदद पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं निजी स्तर पर एंबुलेंस और चिकित्सीय व्यवस्था जुटाने में लगे हैं।
- **प्रशासनिक जवाबदेही पर:** चुनाव ड्यूटी के नाम पर आवश्यक नागरिक और पशु सेवाओं से कर्मचारियों को हटाए जाने की नीति पर सवाल उठ रहे हैं। जनता अब आपातकालीन सेवाओं और आश्रयों में वैकल्पिक स्टाफ की स्थायी व्यवस्था की मांग कर रही है।

## ऐसा क्यों हुआ
अलवर के कांजी हाउस में मवेशियों की यह दुर्दशा मुख्य रूप से प्रशासनिक कुप्रबंधन, कर्मचारियों की आकस्मिक कमी और भारी जलभराव के तालमेल का नतीजा है।

- **कर्मचारियों की चुनावी ड्यूटी:** कुल छह कर्मचारियों में से चार को पंचायत चुनाव ड्यूटी पर भेज दिया गया था। इसके चलते 450 मवेशियों की देखरेख के लिए केवल दो कर्मचारी बचे, जिससे चारा वितरण और स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई।
- **जलभराव और मौसमी परिस्थितियां:** हालिया बारिश के बाद आश्रय परिसर में जल निकासी का कोई प्रबंध नहीं था, जिससे पूरा क्षेत्र कीचड़ और दलदल में बदल गया। सूखी जगह और पर्याप्त टीनशेड के अभाव में 300 से अधिक पशु लगातार दलदल में खड़े रहने को मजबूर हुए।
- **चिकित्सीय निगरानी का अभाव:** लंपी वार्ड और बाड़े में घायल तथा अस्वस्थ पशुओं को नियमित पशु चिकित्सा नहीं मिल सकी। समय पर इलाज और शवों का निस्तारण न होने से तीन मवेशियों की जान चली गई और शव परिसर में ही सड़ते रहे।

## सवाल-जवाब

### 1. अलवर के बुध विहार कांजी हाउस में वर्तमान में कितने गोवंश मौजूद हैं?
इस आश्रय स्थल में वर्तमान में लगभग 450 गोवंश मौजूद हैं।

### 2. कांजी हाउस में कर्मचारियों की कमी का मुख्य कारण क्या था?
तैनात छह कर्मचारियों में से चार कर्मचारियों को पंचायत चुनाव के कार्यों में ड्यूटी पर लगा दिया गया था।

### 3. कांजी हाउस परिसर में कितने पशु मृत पाए गए?
लंपी वार्ड में दो गोवंश और टीनशेड के नीचे एक बछड़े का शव मिला, यानी कुल तीन मवेशियों के शव मिले।

### 4. प्रशासन की तरफ से राजस्व अधिकारी ने क्या कदम उठाए हैं?
राजस्व अधिकारी अमीषा के अनुसार तीन मृत पशुओं के शवों को हटवा दिया गया है और बीमार पशुओं के इलाज हेतु डॉक्टरों को बुलाया गया है।

### 5. गोसेवक कमलकांत शास्त्री ने प्रशासन से क्या प्रमुख मांगें रखी हैं?
उन्होंने अतिरिक्त टीनशेड लगाने, नियमित चारा-पानी देने, बीमार पशुओं का तुरंत इलाज करने और ऐसा न होने पर उग्र आंदोलन की मांग रखी है।

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