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  "title": "अलवर के तिजारा नगर परिषद में कांग्रेस का कब्जा, 2 वोटों से जीते रामावतार सैनी",
  "summary": "तिजारा नगर परिषद सभापति चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रामावतार सैनी ने भाजपा के सुभाष चंद सैनी को 2 मतों से हराकर जीत हासिल की। 35 में से 31 निर्दलीय पार्षदों वाले इस चुनाव में मुकाबला देर रात तक खिंचा रहा।",
  "content": "राजस्थान के अलवर जिले के अंतर्गत तिजारा नगर परिषद के सभापति पद के चुनावी दंगल का नाटकीय पटाक्षेप हो गया है। देर रात तक चले रोमांचक मतदान और मतों की गिनती के बाद कांग्रेस प्रत्याशी रामावतार सैनी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी के सुभाष चंद सैनी को 2 मतों के मामूली अंतर से पराजित कर दिया। पूरे 35 वार्डों वाली इस नगर परिषद में बहुमत हासिल करने के लिए आवश्यक 18 मतों की संख्या जुटाते हुए रामावतार सैनी ने जीत दर्ज की। परिणाम घोषित होने के साथ ही मतदान केंद्र के बाहर प्रतीक्षा कर रहे कांग्रेस समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई और उन्होंने जमकर नारेबाजी तथा आतिशबाजी करते हुए उत्सव मनाया।\n\n35 पार्षदों का मतदान और वोटों का पूरा ब्योरा\nतिजारा नगर परिषद के इस चुनाव में सभी 35 नवनिर्वाचित पार्षदों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। सुबह से शुरू हुई चुनावी प्रक्रिया देर शाम तक चली और लगभग रात 9:45 बजे तक मतदान तथा मतगणना का काम पूरा किया गया। अधिकारियों द्वारा मतों की जांच के दौरान कुल 35 वोटों में से 1 मत को अवैध घोषित कर दिया गया। शेष बचे 34 वैध मतों में से कांग्रेस उम्मीदवार रामावतार सैनी के पक्ष में 18 वोट पड़े, जबकि भाजपा के उम्मीदवार सुभाष चंद सैनी के खाते में 16 वोट आए। सभापति बनने के लिए जादुई आंकड़ा 18 वोटों का ही निर्धारित था, जिसे हासिल करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी विजयी घोषित हुए।\n\n31 निर्दलीय पार्षदों ने तय की पूरी राजनीतिक दिशा\nइस पूरे चुनावी घटनाक्रम की सबसे दिलचस्प कड़ी यहां का दलीय संतुलन था। तिजारा नगर परिषद के 35 वार्डों के लिए जब आम चुनाव हुए थे, तब जनता ने किसी भी मुख्य राजनीतिक दल को स्पष्ट जनादेश नहीं दिया था। उस चुनाव में 31 निर्दलीय प्रत्याशी जीतकर पार्षद बने थे, जबकि भाजपा को महज 3 और कांग्रेस को केवल 1 सीट पर संतोष करना पड़ा था। इस जमीनी हकीकत के चलते सभापति की कुर्सी पर बैठने का पूरा दारोमदार निर्दलीय पार्षदों के रुख पर टिका हुआ था। दोनों ही दल अपने-अपने पाले में इन 31 निर्दलीयों को खींचने के लिए हर संभव रणनीतिक कोशिशों में जुटे हुए थे।\n\nमतदान से ठीक पहले पंचकूला विवाद से गरमाया सियासी पारा\nमतदान की तारीख से ऐन पहले इस स्थानीय चुनाव ने अंतरराज्यीय राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया था। कांग्रेस खेमे ने गंभीर आरोप लगाया था कि हिमाचल प्रदेश से लौटते वक्त उनके समर्थक पार्षदों के काफिले को हरियाणा के पंचकूला क्षेत्र में रोका गया था। इस कथित गतिरोध को लेकर कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी रोष देखा गया, जिसके विरोध में उन्होंने पिंजौर पुलिस थाने के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। इस विवाद के सामने आने के बाद से तिजारा के चुनावी माहौल में भारी तनाव बना हुआ था और दोनों ही खेमों की नजरें प्रत्येक पार्षद की गतिविधियों पर टिकी हुई थीं।\n\nदेर रात तक जुटी रही भीड़, आतिशबाजी के साथ मनाया जश्न\nचुनावी गहमागहमी के बीच सुबह से लेकर रात तक मतदान केंद्र परिसर के आसपास समर्थकों और स्थानीय नागरिकों का भारी जमावड़ा लगा रहा। जब रात करीब 9:45 बजे मतगणना संपन्न हुई और आधिकारिक तौर पर रामावतार सैनी की जीत पर मुहर लगी, तो परिसर के बाहर का माहौल नारों से गूंज उठा। समर्थकों ने एक-दूसरे को बधाइयां दीं, मिठाइयां बांटीं और आतिशबाजी कर इस जीत का स्वागत किया। केवल 1 पार्षद वाली पार्टी द्वारा 31 निर्दलीयों के बीच से 18 वोट जुटाकर अध्यक्ष पद हासिल करना स्थानीय राजनीति में बेहद चर्चा का विषय बन गया है।\n\nइसका आप पर असर\nतिजara नगर परिषद में नए सभापति के निर्वाचन से स्थानीय प्रशासन और आगामी नागरिक विकास कार्यों की दिशा तय होगी।\n\n• तिजारा में स्थानीय शासन: नगर परिषद को अब रामावतार सैनी के रूप में पूर्णकालिक सभापति मिल गया है। इससे क्षेत्र में रुकी हुई नागरिक विकास योजनाओं और बजट आवंटन को गति मिलने की उम्मीद है।\n• वार्ड विकास और स्थानीय मुद्दे: परिषद में 31 निर्दलीय पार्षद चुनकर आए हैं, इसलिए विकास कार्यों में उनकी प्राथमिकताओं का खास असर देखने को मिलेगा। स्थानीय निवासियों को अपने-अपने वार्ड की समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित पार्षदों और नए बोर्ड से सीधे संपर्क बनाए रखना होगा।\n• राजनीतिक समीकरण: सिर्फ 1 सीट वाली पार्टी द्वारा 18 सदस्यों का समर्थन जुटाकर बोर्ड बनाना आगे की बैठकों में समन्वय की चुनौती पेश कर सकता है। निर्णयों को सुचारू रूप से लागू कराने के लिए निर्दलीय सदस्यों के सहयोग की लगातार आवश्यकता पड़ेगी।\n• राजस्थान स्थानीय राजनीति पर असर: विधानसभा स्तर पर राजनीतिक पकड़ बनाए रखने के लिहाज से यह परिणाम कांग्रेस के लिए मनोबल बढ़ाने वाला है। भाजपा के लिए स्थानीय स्तर पर निर्दलीयों को एकजुट न रख पाना संगठनात्मक समीक्षा का विषय बनेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nतिजारा नगर परिषद के सभापति चुनाव का यह परिणाम जनता द्वारा दिए गए खंडित जनादेश और उसके बाद निर्दलीय पार्षदों की लामबंदी का सीधा नतीजा है।\n\n• अत्यधिक खंडित जनादेश: तिजारा के 35 वार्डों में हुए मूल चुनाव में किसी भी बड़ी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था और 31 निर्दलीय पार्षद चुने गए थे। इस स्थिति ने दोनों प्रमुख दलों को केवल 3 और 1 सीट होने के बावजूद सरकार बनाने के लिए जोड़-तोड़ करने पर मजबूर किया।\n• बहुमत का गणित: अध्यक्ष बनने के लिए 18 पार्षदों के समर्थन की कानूनी अनिवार्यता थी। कांग्रेस प्रत्याशी रामावतार सैनी 31 निर्दलीयों में से जरूरी समर्थन जुटाने में सफल रहे और ठीक 18 वोट पाकर बहुमत का आंकड़ा छू लिया।\n• अंतरराज्यीय राजनीतिक खींचतान: मतदान से ठीक पहले पार्षदों को लेकर हरियाणा के पंचकूला और पिंजौर में तनाव की स्थिति बनी। कांग्रेस द्वारा अपने समर्थक पार्षदों को रोके जाने के विरोध में प्रदर्शन के बाद पार्षदों की गोलबंदी और सख्त हो गई, जिसका असर मतदान पर दिखा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. तिजारा नगर परिषद सभापति चुनाव में किसकी जीत हुई?\nइस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रामावतार सैनी ने जीत हासिल कर सभापति पद पर कब्जा किया।\n\n2. रामावतार सैनी ने कितने मतों के अंतर से जीत दर्ज की?\nउन्होंने भाजपा प्रत्याशी सुभाष चंद सैनी को 2 मतों के अंतर से हराया।\n\n3. चुनाव में कुल कितने वोट पड़े और कितने मत वैध रहे?\nकुल 35 पार्षदों ने मतदान किया था, जिनमें से 1 मत अवैध घोषित हुआ और 34 मत वैध रहे।\n\n4. विजेता और उपविजेता को कितने-कितने वोट मिले?\nकांग्रेस के रामावतार सैनी को 18 वोट और भाजपा के सुभाष चंद सैनी को 16 वोट मिले।\n\n5. तिजारा नगर परिषद में दलीय स्थिति क्या थी?\n35 वार्डों में से 31 पर निर्दलीय, 3 पर भाजपा और केवल 1 वार्ड में कांग्रेस पार्षद निर्वाचित हुआ था।\n\n6. चुनाव से पहले पंचकूला में क्या विवाद हुआ था?\nकांग्रेस ने आरोप लगाया था कि हिमाचल से लौट रहे उनके समर्थक पार्षदों को हरियाणा के पंचकूला में रोका गया, जिसके विरोध में पिंजौर थाने पर प्रदर्शन किया गया था।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-22",
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