# अलवर में एंबुलेंस बनी प्रसूति गृह, अस्पताल से रेफर दो महिलाओं ने रास्ते में नवजात शिशुओं को जन्म दिया

> अलवर के प्रतापगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जयपुर रेफर की गई दो गर्भवती महिलाओं ने 108 एंबुलेंस में बच्चों को जन्म दिया, जिससे स्थानीय चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/alwar-men-enbulensa-bani-prasuti-griha-aspatala-se-rephara-do-mahilaon-ne-raste-men-navajata-shishuon-ko-janma-diya-31422 · **Language:** Hindi
**Tags:** अलवर समाचार, प्रतापगढ़ सीएचसी, 108 एंबुलेंस, स्वास्थ्य विभाग लापरवाही, राजस्थान स्वास्थ्य सेवा, जयपुर अस्पताल, गर्भवती महिला प्रसव

राजस्थान के अलवर जिले के प्रतापगढ़ में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की लाचार चिकित्सा सेवाओं के कारण दो गर्भवती महिलाओं को एंबुलेंस में ही प्रसव कराने के लिए मजबूर होना पड़ा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक इलाज देने के बजाय डॉक्टरों ने दोनों महिलाओं को गंभीर स्थिति बताकर जयपुर स्थित गणगौरी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जयपुर पहुंचने से पहले ही रास्ते में दोनों महिलाओं को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई, जिसके बाद आपातकालीन 108 एंबुलेंस कर्मियों की तत्परता और समझदारी से सुरक्षित प्रसव कराया गया। सौभाग्य से दोनों नवजात और उनकी माताएं सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की पोल खोल दी है।

## पहले मामले में चलती एंबुलेंस में गूंजी किलकारी
पहला मामला प्रतापगढ़ क्षेत्र के पडाकछापली गांव का है। यहां रहने वाले रमेश की 33 वर्षीय पत्नी उषा को अचानक प्रसव पीड़ा होने पर स्वजन उन्हें प्रतापगढ़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर आए थे। हालांकि, वहां तैनात स्वास्थ्यकर्मियों ने महिला की हालत को नाजुक बताते हुए तत्काल जयपुर के गणगौरी अस्पताल ले जाने की सलाह दी और रेफर कर दिया। स्वजन महिला को 108 एंबुलेंस में लेकर जयपुर की ओर रवाना हुए।

एंबुलेंस जब जयपुर से लगभग 20 किलोमीटर पहले सड़वा मोड़ के पास पहुंची, तो उषा को असहनीय दर्द होने लगा। प्रसव पीड़ा बढ़ती देख एंबुलेंस में तैनात आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन (ईएमटी) अमित कुमार सैनी और चालक मनोज कुमार शर्मा ने तुरंत सूझबूझ दिखाई। उन्होंने वाहन को सड़क के किनारे सुरक्षित रूप से खड़ा किया और एंबुलेंस के भीतर ही सुरक्षित प्रसव कराने का निर्णय लिया। ईएमटी अमित कुमार सैनी के मार्गदर्शन और चालक मनोज के सहयोग से डिलीवरी संपन्न हुई। उषा ने अपनी सातवीं संतान के रूप में एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। दंपति की पहले से ही छह बेटियां हैं।

## दूसरी घटना में भानपुर मोड़ के पास हुआ प्रसव
बिल्कुल ऐसी ही दूसरी घटना भी इसी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आई। गुवाडा गुगली गांव के रहने वाले गिर्राज प्रसाद योगी की 30 वर्षीया पत्नी धौली देवी को भी प्रसव हेतु प्रतापगढ़ के इसी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां मौजूद चिकित्साकर्मियों ने बिना आवश्यक उपचार उपलब्ध कराए उन्हें भी जयपुर के लिए रेफर कर दिया।

जयपुर से करीब 30 किलोमीटर पूर्व भानपुर मोड़ के पास पहुंचते ही धौली देवी की प्रसव वेदना बेहद तीव्र हो गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 108 एंबुलेंस के कर्मचारियों ने तुरंत वाहन रोका और अंदर ही प्रसव प्रक्रिया शुरू की। कर्मचारियों की मदद से धौली देवी ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। यह धौली देवी का भी सातवां प्रसव था, जिनसे पहले उनके घर में पांच बेटियां और एक बेटा है। यदि एंबुलेंस कर्मचारी समय पर निर्णय न लेते, तो जच्चा-बच्चा दोनों की जान खतरे में पड़ सकती थी।

## अस्पताल की दुर्दशा पर डॉक्टर ने खुद मोहर लगाई
इन दोनों मामलों के एक साथ उजागर होने के बाद प्रतापगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधाओं और रेफरल प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे। इस संबंध में जब अस्पताल प्रबंधन से जानकारी ली गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। केंद्र में कार्यरत स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहिनी बलाई ने अस्पताल में सुविधाओं और संसाधनों की भारी कमी की बात स्वयं स्वीकार की।

डॉ. मोहिनी बलाई ने बताया कि अस्पताल के प्रसूति वार्ड में आवश्यक चिकित्सा उपकरणों और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि संसाधनों की कमी के चलते अस्पताल में सामान्य प्रसव करा पाना भी अत्यधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसी परिस्थिति में यदि किसी मामले में थोड़ी सी भी चिकित्सीय जटिलता आती है, तो मरीज और बच्चे की जान बचाने के लिए उन्हें जयपुर के उच्च स्तरीय अस्पताल में रेफर करने के अतिरिक्त कोई विकल्प शेष नहीं रहता।

## ग्रामीणों में आक्रोश और बुनियादी सुविधाओं की मांग
एक ही दिन में दो गर्भवती महिलाओं के साथ हुई इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब मरीजों को उचित इलाज न मिलने के कारण जयपुर जैसी दूरदराज की जगहों पर भागना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने राज्य सरकार और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से गुहार लगाई है कि प्रतापगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आवश्यक चिकित्सा उपकरण, पर्याप्त दवाएं और विशेषज्ञ स्टाफ तुरंत तैनात किए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं को जल्द सुधारा जाए ताकि भविष्य में किसी भी गर्भवती महिला या मरीज की जान जोखिम में न पड़े।

## इसका आप पर असर
**प्रतापगढ़ और अलवर में:** स्थानीय ग्रामीणों और गर्भवती महिलाओं के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त सुविधाएं न होने से आपातकाल में जयपुर भागना पड़ता है, जिससे समय और जान का खतरा रहता है। स्थानीय स्वास्थ्य ढांचे में सुधार से ग्रामीण इलाकों के परिवारों को अपने घर के पास सुरक्षित इलाज और प्रसव की सुविधा मिलेगी।

- **भारत में:** ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) की बदहाली और बिना इलाज मरीजों को बड़ी सिटी के अस्पतालों में रेफर करने की प्रवृत्ति से पूरे देश में ग्रामीण परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता है।
- **स्थानीय स्तर पर:** अलवर जिले के प्रतापगढ़ सीएचसी में उपकरणों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की तुरंत व्यवस्था होने से दर्जनों गांवों की महिलाओं को आपातकालीन स्थितियों में समय पर इलाज मिल सकेगा।
- **स्वास्थ्य सेवाओं पर असर:** 108 एंबुलेंस में प्रशिक्षित कर्मचारियों की मौजूदगी से कई जाने बच रही हैं, लेकिन अस्पतालों की जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है।
- **आम नागरिक क्या करें:** प्रसव पीड़ा या आपात स्थिति में 108 नंबर डायल कर तुरंत एंबुलेंस सेवा लें और किसी भी लापरवाही की शिकायत जिला चिकित्सा अधिकारी से करें।

## ऐसा क्यों हुआ
अलवर जिले के प्रतापगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दो गर्भवती महिलाओं को एंबुलेंस में प्रसव कराने की नौबत इसलिए आई क्योंकि अस्पताल के प्रसूति वार्ड में जरूरी चिकित्सा संसाधनों की भारी कमी थी। वहां मौजूद डॉक्टर और स्टाफ के अनुसार, उपकरणों के अभाव के कारण जोखिम उठाए बिना रेफर करना ही एकमात्र उपाय था।

- **बुनियादी ढांचे का अभाव:** सीएचसी के प्रसूति वार्ड में आवश्यक चिकित्सा उपकरणों और जीवन रक्षक संसाधनों की अनुपलब्धता के कारण सामान्य प्रसव भी मुश्किल हो जाता है।
- **रेफरल प्रथा की लाचारी:** थोड़ी सी भी पेचीदगी आने पर विशेषज्ञ सुविधाओं और उपकरणों की कमी के चलते डॉक्टरों के पास मरीज को जयपुर रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
- **एंबुलेंस कर्मियों की मुस्तैदी:** रास्ते में प्रसव पीड़ा अत्यधिक बढ़ने पर 108 एंबुलेंस के ईएमटी और चालक ने तुरंत निर्णय लेकर वाहन में ही प्रसव कराया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

## सवाल-जवाब

### 1. यह घटना राजस्थान के किस जिले और किस अस्पताल से जुड़ी है?
यह घटना राजस्थान के अलवर जिले के प्रतापगढ़ कस्बे में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की है।

### 2. एंबुलेंस में किन दो महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया?
पडाकछापली गांव की 33 वर्षीया उषा और गुवाडा गुगली गांव की 30 वर्षीया धौली देवी ने एंबुलेंस में बच्चों को जन्म दिया।

### 3. एंबुलेंस में सुरक्षित प्रसव कराने में किन कर्मचारियों ने भूमिका निभाई?
108 एंबुलेंस के ईएमटी अमित कुमार सैनी और पायलट मनोज कुमार शर्मा की सूझबूझ और सहयोग से महिलाओं का सुरक्षित प्रसव हुआ।

### 4. अस्पताल की गायनकोलॉजिस्ट ने सुविधाओं की कमी को लेकर क्या कहा?
डॉ. मोहिनी बलाई ने माना कि प्रसूति वार्ड में जरूरी संसाधनों और उपकरणों का भारी अभाव है, जिससे जटिलताओं के समय जयपुर रेफर करना पड़ता है।

### 5. दोनों महिलाओं ने अपनी-अपनी कौन-सी संतान को जन्म दिया?
उषा ने अपनी सातवीं संतान के रूप में बेटी को जन्म दिया, जबकि धौली देवी ने भी अपनी सातवीं संतान के रूप में बेटे को जन्म दिया।

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