# अलवर नगर निगम में मेयर के बराबर कुर्सी लगाकर बैठे पति, सफाईकर्मियों को दिए निर्देश

> अलवर नगर निगम में सफाई कर्मचारियों के अनुभव प्रमाण पत्र विवाद के बीच महापौर सुमन लता अग्रवाल के पति अजय अग्रवाल का कर्मचारियों को निर्देश देने और नियुक्ति का आश्वासन देने का वीडियो सामने आया है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/alwar-municipal-corporation-men-mayor-ke-barabara-kursi-lagakara-baithe-pati-saphaikarmiyon-ko-die-nirdesha-43749 · **Language:** Hindi
**Tags:** अलवर नगर निगम, सुमन लता अग्रवाल, अजय अग्रवाल, सफाई कर्मचारी, राजस्थान नगर निगम, अनुभव प्रमाण पत्र

राजस्थान के अलवर नगर निगम में सफाई कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया और अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद में बदल चुका है। आंदोलनकारी सफाई कर्मियों का एक प्रतिनिधिमंडल जब अपनी मांगों को लेकर महापौर सुमन लता अग्रवाल से मिलने उनके कार्यालय पहुंचा, तो वहां की तस्वीर ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। आधिकारिक चर्चा के दौरान महापौर की कुर्सी के ठीक बगल में उनके पति अजय अग्रवाल बैठे नजर आए, जो नगर निगम के प्रशासनिक अधिकारियों या निर्वाचित जनप्रतिनिधि की तरह कर्मचारियों से सीधे संवाद कर रहे थे और उन्हें निर्देश दे रहे थे, जबकि निर्वाचित महापौर पूरे समय लगभग खामोश बैठी रहीं।

## सफाई कर्मचारियों के अनुभव प्रमाण पत्र पर छिड़ा विवाद
अलवर नगर निगम में सफाई कर्मियों का एक बड़ा समूह काफी समय से अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने की मांग कर रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि आगामी औपचारिक नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होने और उसका लाभ लेने के लिए यह दस्तावेज बेहद अनिवार्य है। प्रमाण पत्र न मिलने से नाराज कर्मचारियों ने सोमवार को नगर निगम परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलन के बाद कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने महापौर कार्यालय का रुख किया ताकि वे अपनी समस्याएं सीधे शहर की प्रथम नागरिक के सामने रख सकें। इस गतिरोध के कारण करीब 900 सफाईकर्मियों का भविष्य और उनकी भर्ती प्रक्रिया सीधे तौर पर प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

## मेयर की मौजूदगी में पति ने दिए आश्वासन और निर्देश
प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई इस औपचारिक बातचीत का एक वीडियो सामने आने के बाद पूरे प्रशासनिक हलके में हलचल मच गई है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि अजय अग्रवाल कर्मचारियों से नियमों के दायरे में रहकर काम करने की बात कह रहे हैं। उन्होंने कर्मचारियों को आश्वस्त करने का प्रयास किया कि महापौर पूरी तरह से उनके साथ खड़ी हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने सफाई कर्मियों से यहां तक कहा कि शहर को सुधारने के लिए लोगों की जरूरत है और यह काम सफाईकर्मी ही कर सकते हैं। उन्होंने आगे यह भी जोड़ा कि वे हर दिन ठेकेदारों से सिरदर्दी नहीं लेना चाहते और जो लोग ईमानदारी से काम करेंगे, उन्हें वे अपने परिवार के सदस्य की तरह मानेंगे। उन्होंने कर्मचारियों से स्पष्ट कहा कि वे महापौर पर किसी भी तरह का संशय न रखें।

## नियुक्ति आदेश करवाने का दावा और विरोधाभास
बैठक के दौरान सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब अजय अग्रवाल ने कर्मचारियों से कहा कि वे दस्तावेज तैयार रखें, वे महापौर से उनके नियुक्ति आदेश ही जारी करवा देंगे। हालांकि, इस भारी-भरकम आश्वासन के तुरंत बाद ही उनकी बातों में एक बड़ा विरोधाभास भी सामने आया। उसी बातचीत में उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वास्तव में नियुक्ति संबंधी अधिकार उनके पास नहीं हैं और यह शक्ति तो सरकार के स्तर पर तय होती है। उन्होंने कहा कि अनुभव के आधार पर कर्मचारियों की बात को महापौर के स्तर से राज्य सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जाएगा। बिना किसी प्रशासनिक या निर्वाचित पद के इस तरह नियुक्ति कराने का भरोसा दिलाना और फिर अधिकार न होने की बात कहना अब प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

## संवैधानिक मर्यादा और समानांतर व्यवस्था पर सवाल
नगर निगम जैसी स्वायत्त और लोकतांत्रिक संस्था में निर्वाचित महापौर का एक निश्चित संवैधानिक और प्रशासनिक दायरा कानून द्वारा निर्धारित है। ऐसे में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि किसी निर्वाचित जन प्रतिनिधि के आधिकारिक कार्यालय में उनके परिजन किस कानूनी हैसियत से कर्मचारियों को दिशा-निर्देश दे सकते हैं। महापौर की उपस्थिति में उनके पति द्वारा आश्वासन देना और नीतिगत फैसले लेने जैसी बातें करना यह दर्शाता है कि क्या नगर निगम के निर्णय निर्वाचित प्रतिनिधि ले रहे हैं या पर्दे के पीछे कोई समानांतर व्यवस्था सक्रिय है। 900 कर्मचारियों की आजीविका से जुड़े इस संवेदनशील मामले में इस तरह की कार्यशैली ने नगर निगम की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

## इसका आप पर असर
यह घटनाक्रम स्थानीय निकाय प्रशासन में पारदर्शिता और सफाईकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया पर सीधा असर डालता है।

- **राजस्थान में:** राज्य भर में स्थानीय निकायों में काम कर रहे संविदा और अस्थायी कर्मचारियों के अनुभव प्रमाण पत्रों की जांच और जारी करने के नियम कड़े हो सकते हैं। इससे भर्ती प्रक्रियाओं में नियमों के पालन को लेकर प्रशासनिक निगरानी बढ़ाई जा सकती है।
- **अलवर में:** अनुभव प्रमाण पत्र की मांग कर रहे करीब 900 सफाई कर्मचारियों की नियमित नियुक्ति प्रक्रिया में देरी हो सकती है। कर्मचारियों को अपने दस्तावेज सत्यापित कराने के लिए आधिकारिक प्रशासनिक चैनलों पर निर्भर रहना होगा।
- **नागरिक सेवाओं पर:** सफाई कर्मचारियों के आंदोलन या असंतोष से शहर की स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। नगर निगम की आंतरिक खींचतान का असर वार्ड स्तर पर दैनिक सफाई कार्यों पर पड़ सकता है।
- **प्रशासनिक मर्यादा:** निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के दफ्तरों में गैर-अधिकारिक व्यक्तियों के हस्तक्षेप को लेकर प्रशासनिक नियम और सख्त किए जा सकते हैं। इससे सामान्य नागरिकों के लिए कार्यालयों में आधिकारिक संवाद का तरीका अधिक स्पष्ट होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब सफाई कर्मचारियों की आधिकारिक बैठक का वीडियो सार्वजनिक हुआ, जिसमें महापौर की जगह उनके पति प्रशासनिक निर्देश देते दिखाई दिए।

- **मूल कारण:** सफाई कर्मचारी भर्ती प्रक्रिया में लाभ पाने के लिए अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने की मांग को लेकर नगर निगम में प्रदर्शन कर रहे थे। समाधान के लिए कर्मचारियों का एक प्रतिनिधिमंडल सीधे महापौर से मिलने उनके कार्यालय पहुंचा था।
- **परिस्थितियां:** आधिकारिक वार्ता के दौरान महापौर सुमन लता अग्रवाल के साथ उनके पति अजय अग्रवाल भी मौजूद थे और वे ही कर्मचारियों को आश्वासन दे रहे थे। महापौर की चुप्पी और उनके पति द्वारा नियुक्ति कराने का दावा करने से प्रशासनिक मर्यादा पर सवाल खड़े हो गए।
- **जांच व स्थिति:** बातचीत के दौरान ही अजय अग्रवाल ने यह भी माना कि नियुक्ति की कानूनी शक्ति उनके पास नहीं है। इस विरोधाभास और अनाधिकृत हस्तक्षेप के चलते पूरा मामला अब प्रशासनिक और सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बन गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. अलवर नगर निगम में विवाद किस बात को लेकर शुरू हुआ?
सफाई कर्मचारियों द्वारा भर्ती प्रक्रिया के लिए अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने की मांग को लेकर यह विवाद शुरू हुआ था।

### 2. महापौर के पति पर क्या आरोप या सवाल उठ रहे हैं?
महापौर सुमन लता अग्रवाल की मौजूदगी में उनके पति अजय अग्रवाल द्वारा कर्मचारियों को निर्देश देने और नियुक्ति आदेश करवाने का आश्वासन देने पर सवाल उठ रहे हैं।

### 3. इस विवाद से कितने सफाई कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है?
अनुभव प्रमाण पत्र न मिलने से करीब 900 सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

### 4. अजय अग्रवाल ने अपनी शक्तियों को लेकर बातचीत में क्या विरोधाभासी बयान दिया?
उन्होंने पहले महापौर से नियुक्ति आदेश कराने की बात कही, लेकिन बाद में खुद ही स्वीकार किया कि नियुक्ति से जुड़ी पावर उनके पास नहीं है।

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