# आमेर के शिलामाता मंदिर में शारदीय नवरात्रि अनुष्ठान शुरू, शुभ मुहूर्त में घटस्थापना के बाद खुले पट

> जयपुर के आमेर महल स्थित शिलामाता मंदिर में सुबह 11:55 बजे शुभ मुहूर्त में घटस्थापना के साथ शारदीय नवरात्रि का आगाज हुआ, जिसके बाद दोपहर 1 बजे से श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू किए गए।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/amer-ke-shila-mata-mndira-men-shardiya-navratri-anushthana-shuru-shubha-muhurta-men-ghatasthapana-ke-bada-khule-pata-46355 · **Language:** Hindi
**Tags:** शिलामाता मंदिर, आमेर महल, जयपुर, शारदीय नवरात्रि, घटस्थापना, महाराजा मानसिंह प्रथम, राजस्थान पर्यटन

राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित ऐतिहासिक आमेर महल के प्रसिद्ध शिलामाता मंदिर में शारदीय नवरात्रि का उत्सव पूरी धार्मिक निष्ठा के साथ प्रारंभ हो गया है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन शक्ति पर्व पर देवी के विग्रह के दर्शन करने के लिए भक्तों का भारी तांता लग रहा है। नवरात्रि के शुभारंभ पर मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी पारंपरिक विधि-विधानों का पालन करते हुए घटस्थापना की रस्म पूरी की गई, जिसके साथ ही नौ दिवसीय विशेष अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई।

## शुभ मुहूर्त में संपन्न हुई घटस्थापना
आमेर स्थित इस पवित्र पीठ में नवरात्रि के पहले दिन का कार्यक्रम अत्यंत भव्य रहा। मंदिर के मुख्य पुजारियों ने सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर निकले शुभ मुहूर्त में घटस्थापना की औपचारिक विधि संपन्न की। घटस्थापना के इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रों का सस्वर पाठ किया गया और विशेष पूजा-अर्चना की गई।

कलश स्थापना और आरंभिक पूजन पूरा होने के उपरांत माता रानी का मनोहारी और भव्य श्रृंगार किया गया। इसके बाद दोपहर लगभग 1 बजे मंदिर के गर्भगृह के पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही समूचा परिसर जय माता दी के उद्घोष से गूंज उठा और भक्तों ने शीश नवाकर आशीर्वाद लिया।

## सोलहवीं शताब्दी का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
आमेर का शिलामाता मंदिर स्थानीय नागरिकों के अलावा देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार, कछवाहा राजवंश के प्रतापी शासक महाराजा मानसिंह प्रथम सोलहवीं शताब्दी में माता की इस चमत्कारिक प्रतिमा को बंगाल के जसोर से लेकर आए थे, जो भूभाग वर्तमान समय में बांग्लादेश के अंतर्गत आता है।

मान्यताओं में ऐसा उल्लेख मिलता है कि देवी मां ने महाराजा मानसिंह प्रथम को स्वप्न में साक्षात दर्शन देकर मार्गदर्शन प्रदान किया था। इस ऐतिहासिक घटना के बाद से ही जयपुर के राजपरिवार और आम जनमानस में शिलामाता के प्रति प्रगाढ़ श्रद्धा कायम है। नवरात्रि के पावन पर्व पर यहां पूजा-अर्चना करने का विशिष्ट महत्व माना जाता है, जिसके चलते नौ दिनों की इस अवधि में लाखों की तादाद में श्रद्धालु नतमस्तक होने पहुंचते हैं।

## प्रथम दिन माता शैलपुत्री की आराधना
नवरात्रि के पहले दिवस पर मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की उपासना का विधान प्रचलित है। इस उपलक्ष्य में शिलामाता दरबार में भोर से ही श्रद्धालुओं की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। जयपुर नगर के अतिरिक्त राजस्थान के अन्य जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग माता के दर्शन के लिए आमेर पहुंचे।

कतारबद्ध होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करने वाले महिला, पुरुष और बाल श्रद्धालुओं ने माता के समक्ष शीश झुकाकर परिवार के कल्याण, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। इस पावन अवसर के लिए पूरे मंदिर परिसर को नयनाभिराम रंग-बिरंगे पुष्पों और भव्य रोशनी से सजाया गया है, जो वहां पहुंचने वाले सभी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

## सुरक्षा व्यवस्था और नागरिक सुविधाएं
नवरात्रि के दौरान उमड़ने वाली व्यापक भीड़ को सुव्यवस्थित रखने और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को रोकने के लिए स्थानीय पुलिस व प्रशासनिक महकमे ने व्यापक प्रबंध किए हैं। आमेर महल, मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार तथा आसपास के पूरे क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

भीड़ प्रबंधन को पुख्ता बनाने के लिए होमगार्ड के जवानों के साथ राजस्थान आर्म्ड कांस्टेबुलरी (आरएसी) के जवानों को भी सुरक्षा मोर्चे पर तैनात किया गया है। साथ ही मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में स्वच्छता तथा जनसुविधाएं बनाए रखने के लिए नगर निगम की टीमें लगातार कार्यरत हैं। किसी भी स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने के लिए मौके पर विशेष मेडिकल टीम को भी तैनात किया गया है ताकि नौ दिवसीय महोत्सव शांतिपूर्वक और सुगमता से संपन्न हो सके।

## इसका आप पर असर
आमेर के शिलामाता मंदिर में नवरात्रि उत्सव शुरू होने से जयपुर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए दर्शन व्यवस्था व यात्रा कार्यक्रम सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।

- **जयपुर में:** आमेर महल क्षेत्र में रोजाना हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण यातायात और आवागमन पर असर पड़ेगा। दर्शनार्थियों को सुरक्षा जांच और कतार व्यवस्था के कारण दर्शन के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलना होगा।
- **राजस्थान में:** राज्यभर से आमेर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए परिवहन और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। नौ दिनों तक आमेर क्षेत्र में नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें आपातकालीन सेवाओं के लिए तैनात रहेंगी।
- **दर्शनार्थियों के लिए:** घटस्थापना के बाद रोजाना सामान्य दर्शन की व्यवस्था निर्धारित समय पर संचालित की जा रही है। सुगम दर्शन के लिए मंदिर प्रशासन द्वारा बनाई गई कतार प्रणाली और सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करना आवश्यक होगा।
- **पर्यटकों के लिए:** आमेर महल घूमने आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को सामान्य दिनों की तुलना में भारी भीड़ का सामना करना पड़ेगा। सुरक्षा बलों और आरएसी की तैनाती के चलते महल परिसर में प्रवेश और निकास के मार्गों पर विशेष निगरानी रहेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन हिंदू पंचांग के अनुसार शक्ति उपासना का शुभारंभ होता है, जिसके चलते आमेर के शिलामाता मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और घटस्थापना की गई।

- **धार्मिक परंपरा:** आश्विन मास के प्रथम नवरात्र पर कलश अथवा घटस्थापना कर शक्ति स्वरूपा देवी की आराधना शुरू करने का शास्त्रीय विधान है। मंदिर के पुजारियों द्वारा निर्धारित शुभ मुहूर्त में पूजा संपन्न कर नौ दिवसीय अनुष्ठानों की शुरुआत की गई।
- **ऐतिहासिक विरासत:** कछवाहा राजवंश के शासक महाराजा मानसिंह प्रथम सोलहवीं सदी में इस विग्रह को बंगाल के जसोर से आमेर लेकर आए थे। सदियों पुरानी इस परंपरा के कारण जयपुर राजघराने और श्रद्धालुओं की देवी के प्रति गहरी निष्ठा चली आ रही है।
- **व्यवस्थात्मक प्रबंध:** नवरात्रि में हर साल लाखों श्रद्धालुओं का आगमन होता है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने पूर्व योजना के तहत भारी सुरक्षा बल और नागरिक टीमें तैनात कीं। भीड़ नियंत्रण और सुलभ दर्शन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दर्शन के समय को अनुष्ठान संपन्न होने के बाद खोला गया।

## सवाल-जवाब

### 1. आमेर के शिलामाता मंदिर में घटस्थापना किस समय संपन्न हुई?
शिलामाता मंदिर में घटस्थापना की रस्म सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर शुभ मुहूर्त में पुजारियों द्वारा संपन्न की गई।

### 2. श्रद्धालुओं के लिए माता के दर्शन कब शुरू किए गए?
घटस्थापना और माता के विशेष श्रृंगार के बाद दोपहर करीब 1 बजे से आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन खोले गए।

### 3. शिलामाता की मूर्ति आमेर कौन और कब लाया था?
कछवाहा वंश के महाराजा मानसिंह प्रथम सोलहवीं शताब्दी में माता की प्रतिमा को बंगाल के जसोर से आमेर लाए थे।

### 4. नवरात्रि के पहले दिन देवी के किस रूप की पूजा की जाती है?
नवरात्रि के प्रथम दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा-अर्चना का विधान है।

### 5. मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण के लिए कौन से सुरक्षा बल तैनात हैं?
भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस बल के साथ होमगार्ड और राजस्थान आर्म्ड कांस्टेबुलरी (आरएसी) के जवानों को तैनात किया गया है।

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