अनादरा के नरेश कुमार ने आरएएस 2024 में पाई सफलता, ऑटो चालक के घर से निकलकर बने गांव के पहले तहसीलदार सिरोही जिले के अनादरा गांव निवासी नरेश कुमार ने आरएएस 2024 परीक्षा उत्तीर्ण कर राजस्थान तहसीलदार सेवा हासिल की। इससे पहले वह पटवारी और वीडीओ पदों पर भी चयनित हो चुके थे। कठिन परिस्थितियों और सीमित साधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प से बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है, इसे सिरोही जिले के अनादरा गांव निवासी नरेश कुमार ने सच साबित किया है। एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले नरेश कुमार ने प्रतिष्ठित आरएएस 2024 भर्ती परीक्षा में शानदार सफलता प्राप्त की है। इस चयन के आधार पर उन्हें राजस्थान तहसीलदार सेवा आवंटित की गई है, जिसके साथ ही वह अपने समूचे गांव के पहले तहसीलदार बन गए हैं। इस गौरवशाली उपलब्धि के बाद जब वह अपने गृह नगर अनादरा पहुंचे, तो स्थानीय ग्रामीणों और समाज के लोगों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका भव्य और आत्मीय स्वागत किया। माता-पिता के संघर्ष और मजदूरी ने बनाया अफसर नरेश कुमार के पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उनके पिता गोपाराम मेघवाल आजीविका चलाने के लिए ऑटो रिक्शा चलाते हैं। घर की आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य होने के कारण उनके माता-पिता ने बेटे की उच्च शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्षों तक हाड़-तोड़ मजदूरी भी की। बेटे को प्रशासनिक सेवा का बड़ा अधिकारी बनता देखकर परिवार के सदस्यों की आंखें खुशी से छलक उठीं। नरेश की इस कामयाबी ने न केवल परिवार बल्कि पूरे अंचल का मान बढ़ाया है। अनादरा से दिल्ली यूनिवर्सिटी तक का सफर अपनी प्रारंभिक पढ़ाई के दौरान नरेश कुमार ने अनादरा गांव के ही स्कूल से बुनियादी शिक्षा पूरी की। गांव से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च अध्ययन के लिए दिल्ली का रुख किया और देश के प्रतिष्ठित संस्थान दिल्ली यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। स्नातक डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने पूरी लगन और अनुशासन के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में खुद को समर्पित कर दिया। प्रतियोगी परीक्षाओं में हैट्रिक: पटवारी और वीडीओ के बाद तहसीलदार प्रशासनिक सेवाओं में चयन से पूर्व भी नरेश कुमार ने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया था। आरएएस 2024 से पहले उन्होंने दो अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं को भी पास किया था, जहां उनका चयन पटवारी और विलेज डेवलपमेंट ऑफिसर (VDO) के पद पर हो चुका था। सरकारी नौकरियों की इस हैट्रिक के बाद उन्होंने अपनी मंजिल राजस्थान तहसीलदार सेवा के रूप में पाई। नरेश कुमार ने अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता के त्याग, शिक्षकों के मार्गदर्शन और अपनी निरंतर मेहनत को दिया है। उनकी यह उपलब्धि गांव के अन्य नौजवानों को भी आगे बढ़ने का हौसला दे रही है। इसका आप पर असर यह सफलता साबित करती है कि सीमित आर्थिक पृष्ठभूमि के बावजूद निरंतर तैयारी से प्रशासनिक पदों तक पहुंचा जा सकता है। • राजस्थान में: राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे ग्रामीण अभ्यर्थियों को इस परिणाम से सकारात्मक दिशा मिलती है। यह दिखाता है कि चरणबद्ध तरीके से छोटी नौकरियों से शुरू करके भी राज्य प्रशासनिक सेवा तक पहुंचा जा सकता है। • सिरोही में: अनादरा और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं के लिए यह स्थानीय स्तर पर करियर की नई राहें खोलने जैसा है। ग्रामीण परिवेश के छात्र अब उच्च शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं को व्यावहारिक लक्ष्य के रूप में देख सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह सफलता निरंतर शैक्षणिक अनुशासन, चरणबद्ध भर्ती परीक्षाओं में भाग लेने और परिवार के अनवरत सहयोग का परिणाम है। • चरणबद्ध प्रतियोगी अनुभव: नरेश कुमार ने सीधे एक ही परीक्षा पर निर्भर रहने के बजाय पहले पटवारी और वीडीओ जैसी परीक्षाओं में सफलता हासिल की। इस व्यावहारिक अनुभव ने उन्हें आरएएस परीक्षा के दबाव को संभालने में मदद की। • उच्च स्तरीय शिक्षा का आधार: अनादरा से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक करने से उनके अकादमिक दायरे का विस्तार हुआ। इसने उन्हें राज्य स्तरीय प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी के लिए मजबूत आधार दिया। • पारिवारिक समर्थन और समर्पण: सीमित आय के बावजूद माता-पिता ने मजदूरी और ऑटो चलाकर उनकी शिक्षा को प्राथमिकता दी। इस पारिवारिक त्याग ने नरेश को लक्ष्य पर केंद्रित रहने की प्रेरणा दी। सवाल-जवाब 1. नरेश कुमार का चयन किस परीक्षा के माध्यम से हुआ है? नरेश कुमार का चयन आरएएस 2024 भर्ती परीक्षा के माध्यम से हुआ है, जिसमें उन्हें राजस्थान तहसीलदार सेवा आवंटित हुई है। 2. नरेश कुमार किस जिले और गांव के निवासी हैं? नरेश कुमार राजस्थान के सिरोही जिले के अनादरा गांव के निवासी हैं। 3. आरएएस से पहले नरेश कुमार ने कौन सी परीक्षाएं पास की थीं? आरएएस से पूर्व उनका चयन पटवारी और विलेज डेवलपमेंट ऑफिसर (VDO) के पद पर भी हो चुका था। 4. नरेश कुमार ने अपनी स्नातक की पढ़ाई कहां से पूरी की? नरेश कुमार ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया है। प्रेरणा और सबक नरेश कुमार की यात्रा यह दर्शाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद निरंतर प्रयास से बड़े लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं। • सीमित साधनों को बाधा न बनने दें: आर्थिक तंगी या साधारण पृष्ठभूमि आपकी अंतिम सीमा तय नहीं करती। समर्पण और कठिन परिश्रम से कोई भी बड़ा प्रशासनिक मुकाम हासिल किया जा सकता है। • कदम दर कदम आगे बढ़ें: सीधे शीर्ष पर पहुंचने के बजाय पहले अन्य अवसरों को भुनाना बुद्धिमानी है। पटवारी और वीडीओ बनकर उन्होंने जो आत्मविश्वास अर्जित किया, वही तहसीलदार बनने का आधार बना। • शिक्षा को प्राथमिकता दें: विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा पर अडिग रहना सबसे बड़ा संबल होता है। सही मार्गदर्शन और माता-पिता के त्याग का सम्मान करते हुए निरंतर अध्ययन जारी रखना चाहिए। https://trendkia.com/rajasthan/anadara-ke-naresh-kumar-ne-ras-2024-men-pai-saphalata-to-chalaka-ke-ghara-se-nikalakara-bane-ganva-ke-pahale-tehsildar-44835 TrendKia — Har trend, sabse pehle.