अंतरराष्ट्रीय मैगजीन फॉर्ब्स इंडिया के पन्नों पर छाए उदयपुर निवासी राजेश चपलोत, 'सेव टाइम' मुहीम से बनाई अलग पहचान उदयपुर के चार्टर्ड अकाउंटेंट और उद्यमी राजेश चपलोत को फॉर्ब्स इंडिया के अगस्त अंक में फीचर किया गया है। मैगजीन ने युगांडा में उनके कारोबारी सफर, राष्ट्रपति सलाहकार की भूमिका और 'सेव टाइम' अभियान को स्थान दिया है। राजस्थान के उदयपुर की माटी में जन्मे और वैश्विक स्तर पर अपनी व्यावसायिक कुशलता का परचम लहराने वाले अप्रवासी भारतीय (NRI) राजेश चपलोत की सफलता गाथा अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकी है। प्रतिष्ठित बिजनेस पत्रिका फॉर्ब्स इंडिया ने अपने अगस्त अंक में पृष्ठ संख्या 81 पर राजेश चपलोत के जीवन के प्रेरक सफर और उनके अनूठे समाज सुधारक प्रयास 'सेव टाइम' अभियान को प्रमुखता से स्थान दिया है। उदयपुर के गलियारों से निकलकर अफ्रीका के उद्योग जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले चपलोत की इस उपलब्धि से न केवल उनका परिवार बल्कि संपूर्ण उदयपुर और राजस्थान प्रदेश गौरवान्वित महसूस कर रहा है। समय प्रबंधन और सामाजिक सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को वैश्विक पन्नों पर सराहा गया है। उदयपुर से युगांडा तक का व्यावसायिक सफर राजेश चपलोत की प्रारंभिक शिक्षा और पालन-पोषण राजस्थान के उदयपुर शहर में हुआ। उन्होंने वर्ष 1989 में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की प्रतिष्ठित परीक्षा उत्तीर्ण की और अपने करियर की शुरुआती नींव उदयपुर में ही रखी। व्यावसायिक महत्वाकांक्षाओं और नई संभावनाओं की तलाश में वे वर्ष 1996 में पूर्वी अफ्रीकी देश युगांडा चले गए। युगांडा में उन्होंने वर्ष 1996 से लेकर 2023 तक लगभग 27 वर्षों की लंबी अवधि बिताई, जहाँ उन्होंने न केवल अपना व्यवसाय स्थापित किया बल्कि संस्थागत नेतृत्व और सामाजिक सरोकारों में भी ऐतिहासिक मुकाम हासिल किए। उनकी दूरदर्शिता और आर्थिक समझ को देखते हुए उन्हें लगातार छह वर्षों तक युगांडा के राष्ट्रपति के आधिकारिक सलाहकार के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। वर्तमान समय में वे एलाइड ग्राफिक सिस्टम और काम्यो टेकएज सर्विसेज जैसी प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनियों में डायरेक्टर का दायित्व संभाल रहे हैं। इसके साथ ही वे मंगलम अफ्रीका लिमिटेड में मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं और वैश्विक व्यापार का कुशल संचालन कर रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिले सर्वोच्च सम्मान व्यापारिक उत्कृष्टता, कुशल नेतृत्व और जनसेवा के प्रति अनवरत समर्पण के लिए राजेश चपलोत को भारत और विदेश दोनों स्थानों पर सर्वोच्च नागरिक और व्यावसायिक पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। वर्ष 2019 में भारत सरकार ने उन्हें गैर-आवासीय भारतीयों को दिए जाने वाले देश के सर्वोच्च पुरस्कार 'प्रवासी भारतीय सम्मान' से विभूषित किया, जिसे भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया गया था। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2020 में युगांडा के राष्ट्रपति ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान और 'स्वर्ण जयंती पुरस्कार' से सम्मानित कर उनकी सेवाओं की सराहना की। लेखांकन और वित्त क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी योगदान के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने वर्ष 2018 में उन्हें प्रतिष्ठित 'इंटरनेशनल लीडर पुरस्कार' से सम्मानित किया था। यह पुरस्कार उनकी वैश्विक प्रतिष्ठा और व्यावसायिक दक्षता का स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। 'सेव टाइम' अभियान और बाल साहित्य में विशिष्ट योगदान व्यापारिक व्यस्तताओं के मध्य भी राजेश चपलोत ने जीवन के सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू पर वैश्विक ध्यानाकर्षण के लिए 'सेव टाइम' मुहीम की शुरुआत की है। उनका मानना है कि वर्तमान दौर में पर्यावरण संरक्षण, जल संचयन और वित्तीय प्रबंधन पर व्यापक वैश्विक चर्चाएं होती हैं, किंतु मानव जीवन की सबसे अनमोल निधि 'समय' के संरक्षण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। समय की अनमोलता को रेखांकित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि बीता हुआ समय कभी वापस नहीं लौट सकता, इसलिए समय का सदुपयोग अत्यंत आवश्यक है। इसी सोच के आधार पर संचालित उनके 'सेव टाइम' अभियान के दूरगामी प्रभाव को फॉर्ब्स इंडिया ने अपने अंक में रेखांकित किया है। युवाओं को समय नियोजन का व्यावहारिक ज्ञान देने के लिए वे शीघ्र ही समय प्रबंधन पर आधारित एक नई प्रेरक पुस्तक भी प्रकाशित करने जा रहे हैं। इसके साथ ही, सामाजिक उत्तरदायित्वों को निभाते हुए चपलोत ने बाल साहित्य के क्षेत्र में भी अमूल्य योगदान दिया है। उनकी रचित पुस्तक 'नंदू और दादू' आधुनिक जीवनशैली के बीच बच्चों में नैतिक संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों को स्थापित करने का एक सुंदर प्रयास है। इस कृति की सराहना करते हुए भारत के केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उन्हें विशेष प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया है। वर्तमान में राजेश चपलोत अपनी आगामी पुस्तक 'नमस्ते अफ्रीका' और समय प्रबंधन की नई पांडुलिपि पर कार्य कर रहे हैं। युगांडा से लेकर लंदन तक अपने परिवार और कारोबार का विस्तार करने के बावजूद वे उदयपुर की जड़ों से सदैव आत्मीयता से जुड़े हुए हैं। इसका आप पर असर फॉर्ब्स इंडिया जैसी अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में उदयपुर के उद्यमी का स्थान पाना भारत के व्यावसायिक नेतृत्व और प्रवासी समुदाय के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है। • उदयपुर और राजस्थान में: स्थानीय युवाओं और उद्यमियों के लिए यह उपलब्धि वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने का प्रोत्साहन देती है। यह सिद्ध करता है कि छोटे शहर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता पाई जा सकती है। • भारत में: देश के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और वित्तीय विशेषज्ञों की वैश्विक साख में मान बढ़ा है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय प्रतिभाओं और नेतृत्व क्षमता की प्रासंगिकता को रेखांकित करता है। • युवाओं के लिए: 'सेव टाइम' अभियान जीवन में समय प्रबंधन और अनुशासन के महत्व को व्यावहारिक रूप से सिखाता है। युवा अपनी दैनिक कार्यशैली में समय संरक्षण को शामिल करके करियर में बेहतर परिणाम पा सकते हैं। • अभिभावकों के लिए: 'नंदू और दादू' जैसी पुस्तकें बच्चों में नैतिक संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों को सहजता से विकसित करने का माध्यम बनती हैं। यह आधुनिक दौर में बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़े रखने में मदद करेगी। सवाल-जवाब 1. राजेश चपलोत को फॉर्ब्स इंडिया में क्यों फीचर किया गया है? फॉर्ब्स इंडिया ने अपने अगस्त अंक के पेज 81 पर उनके जीवन के प्रेरक सफर, व्यावसायिक सफलताओं और उनके अनूठे 'सेव टाइम' अभियान के प्रभाव को रेखांकित करते हुए उन्हें स्थान दिया है। 2. राजेश चपलोत का संबंध राजस्थान के किस शहर से है? राजेश चपलोत का जन्म और पालन-पोषण राजस्थान के उदयपुर शहर में हुआ था और उन्होंने वर्ष 1989 में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की पढ़ाई पूरी की। 3. राजेश चपलोत ने युगांडा में क्या प्रशासनिक भूमिका निभाई थी? उन्होंने लगातार छह वर्षों तक युगांडा के राष्ट्रपति के सलाहकार के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं और वहाँ व्यावसायिक व सामाजिक क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए। 4. राजेश चपलोत का 'सेव टाइम' अभियान क्या है? यह समय संरक्षण और उसके सही उपयोग के प्रति जागरूकता फैलाने का एक वैश्विक अभियान है, जो लोगों को सिखाता है कि बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता। 5. राजेश चपलोत को कौन-कौन से प्रमुख सम्मान मिल चुके हैं? उन्हें 2019 में भारत के राष्ट्रपति से 'प्रवासी भारतीय सम्मान', 2020 में युगांडा का सर्वोच्च नागरिक सम्मान तथा 2018 में ICAI द्वारा 'इंटरनेशनल लीडर पुरस्कार' मिल चुका है। 6. राजेश चपलोत की किस पुस्तक को केंद्रीय मंत्री से प्रशंसा पत्र मिला है? बच्चों में नैतिक संस्कारों पर आधारित उनकी पुस्तक 'नंदू और दादू' के लिए उन्हें केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से विशेष प्रशंसा पत्र मिला है। प्रेरणा और सबक राजेश चपलोत की जीवन यात्रा से प्राप्त मुख्य सीख और प्रेरणादायक बिंदु इस प्रकार हैं: • समय को सर्वोच्च संपत्ति मानना: जीवन में धन या संसाधनों से अधिक समय अनमोल है क्योंकि बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता। कार्यकुशलता के लिए समय का सही प्रबंधन आवश्यक है। • स्थान या पृष्ठभूमि बाधा नहीं: उदयपुर जैसे शहर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों का नेतृत्व करना यह दर्शाता है कि संकल्प से कहीं भी सफलता पाई जा सकती है। • व्यापार के साथ सामाजिक दायित्व: व्यावसायिक व्यस्तताओं के बीच समाज सुधार और बाल साहित्य में योगदान देना एक संतुलित और अर्थपूर्ण जीवन का आधार है। • अपनी जड़ों से जुड़ाव: युगांडा और लंदन में वैश्विक विस्तार के बावजूद अपनी जन्मभूमि से आत्मीय संबंध बनाए रखना जीवन मूल्यों की स्थिरता को दिखाता है। https://trendkia.com/rajasthan/antararashtriya-maigajina-forbes-india-ke-pannon-para-chhae-udaipur-nivasi-rajesh-chaplot-save-time-muhima-se-banai-alaga-pahachan-26066 TrendKia — Har trend, sabse pehle.