{
  "type": "article",
  "title": "अनूपगढ़ में सिंचाई पानी की मांग पर अड़े किसान, हनुमान बेनीवाल के दखल से बढ़ी राजनीतिक हलचल",
  "summary": "पश्चिमी राजस्थान के घड़साना में 32 दिनों से चल रहा किसान आंदोलन तेज हो गया है, जहां आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल के समर्थन के बाद भजनलाल सरकार पर दबाव बढ़ गया है।",
  "content": "पश्चिमी राजस्थान के अनूपगढ़ क्षेत्र स्थित घड़साना में किसानों का असंतोष गहराता जा रहा है। श्रीगंगानगर जिले के इस इलाके में पिछले 32 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन अब प्रदेश प्रशासन के लिए एक बेहद पेचीदा स्थिति पैदा कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज चुनाव की सरगर्मियां तेज हैं, और ऐसे नाजुक समय में अन्नदाताओं का यह रोष सत्ता पक्ष की चिंताओं को बढ़ाने वाला साबित हो रहा है। प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच हुई हालिया बातचीत किसी सहमति पर नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद आंदोलन की राह देख रही संघर्ष समिति अपनी पुरानी मांगों पर अडिग बनी हुई है।\n\nराष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम और यातायात का संकट\nअपनी मांगों पर सरकार का ध्यान खींचने के लिए आंदोलनकारी किसानों ने रविवार को लगातार दूसरे दिन भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग 911 पर 12 एमडी टोल नाके के निकट पड़ाव डाले रखा। इस रुकावट के चलते अनूपगढ़, घड़साना और बीकानेर के बीच चलने वाला सड़क यातायात पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। लंबी दूरी की गाड़ियों और दैनिक यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।\n\nसार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर इस चक्का जाम की सीधी मार पड़ी। अनूपगढ़ डिपो प्रबंधक के अनुसार इस महत्वपूर्ण मार्ग पर राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की लगभग 60 प्रतिशत बसों का आवागमन ठप पड़ गया। निजी वाहनों, व्यापारिक ट्रकों और छोटे वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से निकलने में पसीने छूट गए। कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को टालने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया, जो स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।\n\nपानी की बारी पर तकरार और बेनतीजा रही वार्ता\nइस पूरे टकराव की मुख्य जड़ फसलों की सिंचाई के लिए नहर के पानी का वितरण है। आंदोलन कर रहे किसानों की स्पष्ट मांग है कि उन्हें सिंचाई के लिए 6+2 की पानी की बारी दी जाए। दूसरी ओर, सरकार का रुख 5+2 सिंचाई बारी देने पर अड़ा हुआ है। दोनों पक्षों के बीच घंटों चली चर्चा के बावजूद इस बुनियादी गणित पर कोई सहमति नहीं बन सकी और बातचीत बेनतीजा समाप्त हो गई।\n\nगतिरोध गहराने के बीच रविवार देर रात राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल धरना स्थल पर पहुंचे। उनके आगमन से आंदोलनकारियों में नया उत्साह देखने को मिला। बेनीवाल ने संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर राज्य सरकार के रुख का आकलन किया, लेकिन जब सरकारी पक्ष से कोई लचीलापन नहीं दिखा तो स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई।\n\nचुनावी व्यस्तता के बीच आंदोलन को नई धार देने का संकल्प\nधरना स्थल पर मौजूद किसानों की जमीनी परेशानियों और सड़क पर फंसे आम नागरिकों की दिक्कतों को देखते हुए हनुमान बेनीवाल ने फिलहाल राजमार्ग से जाम हटाने की सलाह दी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पीछे हटना नहीं बल्कि एक अल्पकालिक रणनीति है। बेनीवाल ने बताया कि पंचायती राज चुनाव के प्रथम चरण के नामांकन दाखिल करने में अब केवल दो दिन का समय बचा हुआ है, जिसके कारण वह चुनावी जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं।\n\nसांसद ने दो टूक कहा कि नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, यानी 13 और 14 अक्टूबर के उपरांत, वह पूरी ताकत के साथ वापस किसानों के बीच लौटेंगे। उन्होंने आगामी रणनीति का पूरा फैसला आंदोलन की स्थानीय संघर्ष समिति पर छोड़ दिया है। बेनीवाल ने जोर देकर कहा कि किसानों के हक, सम्मान और आजीविका की इस लड़ाई में वह पीछे नहीं हटेंगे और आने वाले दिनों में प्रशासन को झुकने पर मजबूर कर दिया जाएगा।\n\nसाल 2004 के ऐतिहासिक संघर्ष की यादें और सरकार की चुनौतियां\nघड़साना का यह इलाका सिंचाई जल विवादों को लेकर पहले भी चर्चा में रहा है। किसान संगठनों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगें नहीं मानी गईं तो वे दो दशक पुराने रावला घड़साना किसान आंदोलन के इतिहास को दोहराने से पीछे नहीं हटेंगे। साल 2004 में हुए उस बड़े जनांदोलन ने राज्य की राजनीति को हिलाकर रख दिया था।\n\nवर्तमान में भजनलाल सरकार के समक्ष इस सुलगते मुद्दे का शांतिपूर्ण हल तलाशने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। आगामी पंचायत चुनाव के पहले चरण के दौरान किसानों की यह नाराजगी चुनावी नतीजों पर सीधा असर डाल सकती है। यदि 13-14 अक्टूबर के बाद आंदोलन नए तेवर के साथ दोबारा तेज हुआ, तो पश्चिमी राजस्थान के इस सीमावर्ती इलाके में प्रशासनिक मशीनरी के लिए शांति बनाए रखना और अधिक मुश्किल हो सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nअनूपगढ़ और घड़साना क्षेत्र में चल रहे इस गतिरोध का सीधा असर परिवहन सेवाओं और खेती के आगामी चक्र पर पड़ रहा है।\n\n• भारत में: राष्ट्रीय राजमार्ग 911 पर बार-बार होने वाले चक्का जाम से अंतरराज्यीय माल ढुलाई और व्यापारिक आपूर्ति में देरी हो सकती है। लंबी दूरी के ट्रांसपोर्टरों को वैकल्पिक रास्तों की जानकारी लेकर ही इस रूट पर यात्रा की योजना बनानी चाहिए।\n• राजस्थान में: अनूपगढ़ और बीकानेर संभाग के स्थानीय यात्रियों के लिए रोडवेज बसों का संचालन 60 प्रतिशत तक बाधित होने से दैनिक आवागमन प्रभावित हुआ है। यात्रा करने से पहले यात्रियों को स्थानीय बस डिपो से मौजूदा रूट और बसों की उपलब्धता की पुष्टि करनी होगी।\n• किसानों के लिए: सिंचाई के लिए 6+2 बारी की मांग पूरी न होने पर रबी फसलों की बुवाई और उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। पानी के रोस्टर में बदलाव के आधिकारिक आदेश जारी होने तक किसानों को अपनी सिंचाई योजनाएं स्थगित रखनी पड़ रही हैं।\n• मतदाताओं के लिए: पंचायती राज चुनाव के प्रथम चरण के नामांकन में केवल दो दिन शेष होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक हलचल और तनाव बढ़ सकता है। स्थानीय ग्रामीण मतदाताओं के बीच जल संकट एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनकर उभर रहा है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nघड़साना में यह आंदोलन नहर से मिलने वाले सिंचाई पानी के बंटवारे और सरकार के साथ बातचीत विफल होने के कारण भड़का है। किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए लंबे समय से पानी की अधिक आपूर्ति की मांग कर रहे थे।\n\n• सिंचाई पानी का अनुपात: मुख्य विवाद पानी की बारी के निर्धारण को लेकर है, जहां किसान 6+2 चक्र की मांग कर रहे हैं जबकि प्रशासन केवल 5+2 चक्र देने पर सहमत है। इस तकनीकी अंतर से खेतों को मिलने वाले कुल पानी के दिनों में सीधा फर्क पड़ता है।\n• बेनतीजा प्रशासनिक वार्ता: पिछले 32 दिनों से लगातार चल रहे धरने के बाद भी जब सरकार और संघर्ष समिति की बैठकों में कोई नतीजा नहीं निकला, तो किसानों ने राजमार्ग जाम करने का रुख किया। सरकारी प्रतिनिधियों की कथित हठधर्मिता ने गतिरोध को और गहरा दिया।\n• ऐतिहासिक असंतोष की पृष्ठभूमि: इस क्षेत्र में साल 2004 के दौरान भी रावला घड़साना में ऐतिहासिक जल आंदोलन हुआ था। उस दौर की अनसुलझी शिकायतें और सीमित जल संसाधन आज भी स्थानीय किसानों में तीव्र आक्रोश को जन्म देते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. घड़साना में किसान आंदोलन कितने दिनों से चल रहा है?\nयह आंदोलन पिछले करीब 32 दिनों से अनूपगढ़ इलाके के घड़साना में अपनी मांगों को लेकर जारी है।\n\n2. किसानों की मुख्य मांग क्या है?\nकिसान फसलों की सिंचाई के लिए नहर के पानी की 6+2 बारी देने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार 5+2 बारी पर अड़ी है।\n\n3. चक्का जाम से कौन सा राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभावित हुआ?\nकिसानों के धरने से भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग 911 पर अनूपगढ़-घड़साना-बीकानेर मार्ग पर यातायात बाधित हुआ।\n\n4. रोडवेज बसों के संचालन पर कितना असर पड़ा?\nअनूपगढ़ डिपो प्रबंधक के अनुसार इस रूट पर लगभग 60 प्रतिशत रोडवेज बसों का संचालन प्रभावित हुआ।\n\n5. सांसद हनुमान बेनीवाल ने आंदोलन को लेकर क्या घोषणा की?\nउन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव के नामांकन के दो दिन बाद, यानी 13-14 अक्टूबर के बाद, वह किसानों के साथ खड़े होकर आंदोलन को और तेज करेंगे।\n\n6. किसानों ने किस पुराने आंदोलन को दोहराने की चेतावनी दी है?\nकिसानों ने चेताया है कि मांगें न मानने पर वे साल 2004 में हुए ऐतिहासिक रावला घड़साना किसान आंदोलन को दोहराने से पीछे नहीं हटेंगे।",
  "url": "https://trendkia.com/rajasthan/anupagarha-men-sinchai-pani-ki-manga-para-are-kisana-hanuman-beniwal-ke-dakhala-se-barhi-rajanitika-halachala-46971",
  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-12",
  "tags": [
    "घड़साना किसान आंदोलन",
    "हनुमान बेनीवाल",
    "भजनलाल सरकार",
    "अनूपगढ़",
    "श्रीगंगानगर",
    "सिंचाई पानी",
    "पंचायती राज चुनाव",
    "आरएलपी"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}