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  "title": "असम में तैनात चित्तौड़गढ़ के जवान जितेंद्र सिंह चौहान का निधन, पदोन्नति से महज 25 दिन पहले तोड़ा दम",
  "summary": "भारतीय सेना की 629 साटा बैटरी में तैनात आरटी हवलदार जितेंद्र सिंह चौहान का असम में ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने से निधन हो गया। पैतृक गांव में सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।",
  "content": "राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार तहसील स्थित सूरत सिंह जी का खेड़ा गांव के जांबाज सैनिक जितेंद्र सिंह चौहान का असम में सैन्य ड्यूटी के दौरान अचानक निधन हो गया। भारतीय सेना में आरटी हवलदार पद पर सेवाएं दे रहे चौहान की अचानक सांसें थमने की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव समेत पूरे इलाके में गहरा शोक फैल गया। अपने सपूत के अंतिम दर्शन करने और श्रद्धांजलि देने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग और युवा एकत्र हो गए। जब तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर गांव की सीमा में दाखिल हुआ, तो ग्रामीणों ने गगनभेदी नारों के साथ उनका स्वागत किया और माहौल पूरी तरह भावुक हो उठा।\n\nड्यूटी पर अचानक गिरा ऑक्सीजन स्तर, दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन\nजितेंद्र सिंह चौहान भारतीय सेना की 629 साटा बैटरी यूनिट में अपनी सेवाएं दे रहे थे। असम में तैनाती के दौरान अचानक उनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर काफी नीचे चला गया। इसके तुरंत बाद उन्हें दिल का दौरा पड़ा और तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। असम में स्थानीय स्तर पर सभी जरूरी कागजी प्रक्रियाओं और पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद गुरुवार को उनके पार्थिव शरीर को राजस्थान के लिए रवाना किया गया।\n\nराजस्थान पहुंचने पर नसीराबाद छावनी से आई भारतीय सेना की विशेष टुकड़ी पार्थिव देह को चित्तौड़गढ़ जिला अस्पताल लेकर पहुंची। वहां आवश्यक प्रक्रियाओं के पश्चात पार्थिव देह को उनके गृह गांव सूरत सिंह जी का खेड़ा पहुंचाया गया, जहां परिवार और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।\n\nविशाल तिरंगा यात्रा के बीच सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार\nगांव में पार्थिव देह के पहुंचते ही युवाओं और ग्रामीणों ने अपने लाडले जवान के सम्मान में एक विशाल तिरंगा यात्रा निकाली। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे जनसैलाब ने भारत माता की जय और जितेंद्र सिंह अमर रहें के नारों से पूरे मार्ग को गुंजायमान कर दिया। हर किसी की आंखें नम थीं और समूचा वातावरण गमगीन हो गया था।\n\nइसके बाद गांव के श्मशान स्थल पर भारतीय सेना की टुकड़ी ने पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। सेना के जवानों ने विधिवत शस्त्र झुकाए और मातमी बिगुल की धुन बजाकर अपने साथी जवान को अंतिम सलामी पेश की। परिजनों और ग्रामीणों ने अश्रुपूरित नेत्रों से उन्हें अंतिम विदाई दी।\n\n22 साल से अधिक समय तक दी सेवाएं, 1 नवंबर को होना था प्रमोशन\nजितेंद्र सिंह चौहान जून 2004 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उन्होंने 22 साल और 4 महीने के अपने लंबे सेवाकाल में देश की दुर्गम सीमाओं और बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में समर्पण भाव से अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। अपने पूरे सैन्य जीवन में उन्होंने अनुशासन और राष्ट्र सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।\n\nइस दुखद घटना का सबसे भावुक पहलू यह है कि आगामी 1 नवंबर को उनकी पदोन्नति होने वाली थी। वह हवलदार के पद से पदोन्नत होकर नायब सूबेदार बनने वाले थे, जिसको लेकर परिवार और परिचितों में उत्साह का माहौल था। घर में खुशियों के आगमन की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से ठीक 25 दिन पहले ही नियति ने उनके जीवन की डोर काट दी।\n\nगांव के युवाओं को सेना में जाने के लिए लगातार करते थे प्रेरित\nग्रामीणों और परिचितों का कहना है कि जितेंद्र सिंह जब भी अवकाश पर अपने गांव आते थे, तो गांव के युवाओं के साथ समय बिताते थे। वह युवाओं को शारीरिक व्यायाम और दौड़ की तैयारी करने के गुर सिखाते थे और उन्हें सेना में शामिल होकर देश सेवा करने के लिए लगातार प्रेरित करते रहते थे। उनके असमय चले जाने से उन नौजवानों ने अपना सच्चा मार्गदर्शक खो दिया है। सूरत सिंह जी का खेड़ा गांव और गंगरार क्षेत्र में उनके समर्पण, सादगी और युवाओं को आगे बढ़ाने की लगन को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nइस खबर से सैनिकों के स्वास्थ्य, दुर्गम इलाकों में तैनाती की चुनौतियों और ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं के सैन्य मार्गदर्शन से जुड़े कई पहलू सामने आते हैं।\n\n• चित्तौड़गढ़ में: गंगरार तहसील के युवाओं ने अपना एक प्रमुख प्रेरणास्रोत खो दिया है, जो उन्हें सेना भर्ती की तैयारी में मदद करते थे। गांव के युवाओं को अब अपनी शारीरिक और सैन्य तैयारी के लिए नए मार्गदर्शन पर निर्भर रहना होगा।\n• भारत में: दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों में अचानक ऑक्सीजन गिरने और हृदय संबंधी जोखिमों की निगरानी के महत्व को रेखांकित करता है। यह परिवारों के लिए भी भावनात्मक संदेश है जहां वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद प्रमोशन की दहलीज पर जवान के खोने का गम गहरा होता है।\n• सैन्य परिवारों के लिए: कर्तव्य के दौरान प्राण गंवाने वाले जवानों के परिवारों को दी जाने वाली सैन्य सम्मान और पेंशन प्रक्रियाओं की व्यवस्था सामने आती है। सेना की आधिकारिक औपचारिकताओं के बाद पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक गृह जिले पहुंचाया गया।\n• भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए: यह घटना युवाओं को अपने स्वास्थ्य और फिटनेस की लगातार निगरानी रखने की सीख देती है। साथ ही कठिन परिस्थितियों में देश सेवा करने वाले जवानों के अदम्य साहस को समझने का अवसर प्रदान करती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nजितेंद्र सिंह चौहान का निधन असम में सैन्य ड्यूटी के दौरान अचानक उत्पन्न हुई गंभीर स्वास्थ्य समस्या के कारण हुआ। आधिकारिक जानकारी के अनुसार उनके शरीर में अचानक ऑक्सीजन का स्तर कम हो गया था, जिससे उन्हें दिल का दौरा पड़ा।\n\n• सीधा कारण: असम में ड्यूटी पर तैनात रहने के दौरान उनके शरीर का ऑक्सीजन स्तर अप्रत्याशित रूप से गिर गया था। इसके तुरंत बाद उन्हें गंभीर दिल का दौरा पड़ा, जिससे मौके पर ही उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।\n• तैयारियां और औपचारिकताएं: घटना के तुरंत बाद असम में स्थानीय सैन्य अधिकारियों ने पोस्टमार्टम और सभी आधिकारिक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कीं। इसके बाद शव को राजस्थान भेजने की प्रक्रिया गुरुवार को शुरू की गई।\n• गृह जिले में वापसी: पार्थिव देह को नसीराबाद छावनी से आई भारतीय सेना की विशेष इकाई की निगरानी में चित्तौड़गढ़ जिला अस्पताल और फिर उनके पैतृक गांव पहुंचाया गया। पूरे घटनाक्रम में सेना ने निर्धारित स्वास्थ्य और प्रोटोकॉल प्रक्रियाओं का पालन किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जितेंद्र सिंह चौहान किस सैन्य यूनिट में पदस्थ थे?\nजितेंद्र सिंह चौहान भारतीय सेना की 629 साटा बैटरी यूनिट में आरटी हवलदार के पद पर सेवाएं दे रहे थे।\n\n2. उनका निधन किस कारण से हुआ?\nड्यूटी के दौरान अचानक उनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिर गया था, जिसके बाद दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।\n\n3. जितेंद्र सिंह चौहान की सेना में कुल सेवा अवधि कितनी थी?\nवह जून 2004 में सेना में भर्ती हुए थे और उन्होंने 22 साल और 4 महीने तक देश की सेवा की।\n\n4. उनका प्रमोशन कब होने वाला था?\nउनका प्रमोशन 1 नवंबर को होने वाला था, जिसमें वह हवलदार से पदोन्नत होकर नायब सूबेदार बनने वाले थे।\n\n5. उनका पैतृक गांव कौन सा था?\nवह राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले की गंगरार तहसील के सूरत सिंह जी का खेड़ा गांव के निवासी थे।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-09",
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