अटरू पालिका अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस की निशा नैनीवाल विजयी, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई हारे बारां जिले की नवगठित अटरू नगरपालिका में अध्यक्ष पद पर कांग्रेस की निशा नैनीवाल ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई कृष्ण मुरारी को 3 मतों से हरा दिया। बारां जिले की नवगठित अटरू नगरपालिका के पहले अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस ने बाजी मारते हुए स्थानीय निकाय पर कब्जा जमा लिया है। सोमवार को संपन्न हुए मतदान में कांग्रेस प्रत्याशी निशा नैनीवाल ने राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के सगे छोटे भाई कृष्ण मुरारी दिलावर को पराजित कर दिया। इस चुनाव में निशा नैनीवाल को 14 वोट हासिल हुए, जबकि भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार कृष्ण मुरारी दिलावर के पक्ष में 11 मत पड़े। इस तरह तीन वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर निशा नैनीवाल अटरू नगर पालिका की पहली निर्वाचित अध्यक्ष बन गई हैं। नवगठित नगरपालिका के पहले चुनाव में सियासी घमासान अटरू के नगर पालिका बनने के पश्चात यह पहला मौका था जब यहां निकाय स्तर के चुनाव आयोजित कराए गए। यही वजह थी कि सूबे भर की सियासी निगाहें इस मुकाबले पर टिकी हुई थीं। अटरू नगर पालिका क्षेत्र में कुल 25 वार्ड शामिल हैं। हाल ही में संपन्न हुए पार्षद पद के चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 25 में से 14 वार्डों में जीत दर्ज की थी और स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा छू लिया था। वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के खाते में 10 वार्ड गए थे, जबकि एक वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवार ने कामयाबी हासिल की थी। क्रॉस वोटिंग रोकने में सफल रही कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने सूबे के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई कृष्ण मुरारी दिलावर पर भरोसा जताते हुए उन्हें मैदान में उतारा था। उधर कांग्रेस ने निशा नैनीवाल को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया। अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। मतदान के दौरान भारतीय जनता पार्टी निर्दलीय पार्षद का समर्थन जुटाने में तो कामयाब रही, जिससे उनके प्रत्याशी को 11 वोट मिले, लेकिन वह कांग्रेस के खेमे में कोई सेंधमारी नहीं कर पाई। कांग्रेस के सभी 14 पार्षदों ने एकजुट रहते हुए अपनी पार्टी की प्रत्याशी निशा नैनीवाल के पक्ष में मतदान किया। नतीजतन नैनीवाल ने पूरे 14 वोटों के साथ अध्यक्ष की कुर्सी अपने नाम कर ली। टिकट बंटवारे से ही सुर्खियों में था मुकाबला भाजपा प्रत्याशी कृष्ण मुरारी दिलावर अटरू के वार्ड नंबर 5 से पार्षद निर्वाचित होकर आए हैं। वे इलाके के कोई नए चेहरे नहीं हैं, बल्कि लंबे अरसे से स्थानीय राजनीति का हिस्सा रहे हैं। वे चरड़ाना ग्राम पंचायत के लगातार 4 बार सरपंच भी रह चुके हैं। पार्षद चुनाव के दौरान वार्ड नंबर 5 की सीट उस वक्त खासी चर्चा में आ गई थी, जब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर ने भी इसी वार्ड से भाजपा का टिकट मांगा था। एक ही परिवार के भीतर चाचा और भतीजे दोनों के एक ही सीट से दावेदारी करने के कारण यह मामला पार्टी और जनता के बीच खींचतान का विषय बन गया था। हालांकि बाद में संगठन ने मंत्री के भाई कृष्ण मुरारी को अधिकृत प्रत्याशी बनाया और वे पार्षद का चुनाव जीतने में सफल रहे थे, लेकिन अध्यक्ष पद की अंतिम जंग में उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा। इसका आप पर असर अटरू के पहले नगर पालिका बोर्ड के गठन से क्षेत्र के प्रशासनिक कामकाज और स्थानीय विकास कार्यों की दिशा तय हो गई है। • राजस्थान में: यह परिणाम दर्शाता है कि मजबूत सत्ताधारी मंत्रियों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी विपक्षी दल एकजुट होकर स्थानीय स्तर पर बढ़त बना सकते हैं। इससे आने वाले अन्य स्थानीय और उप-चुनावों में राजनीतिक दलों की रणनीति और जमीनी तैयारियों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। • अटरू (बारां) में: नवगठित नगर पालिका में कांग्रेस का बोर्ड बनने से शहर के विकास कार्यों, सफाई और बुनियादी ढांचे के बजट आवंटन की जिम्मेदारी निशा नैनीवाल के नेतृत्व वाली परिषद पर होगी। स्थानीय निवासियों को अपने नागरिक कार्यों और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए अब नए प्रशासनिक बोर्ड से संपर्क करना होगा। • वार्ड पार्षदों के लिए: सभी 25 वार्डों के पार्षदों को अपने क्षेत्रों के विकास प्रस्ताव पारित कराने के लिए नवनिर्वाचित अध्यक्ष और पूर्ण बहुमत वाले बोर्ड के साथ समन्वय बनाकर काम करना पड़ेगा। • स्थानीय राजनीति में: मंत्री परिवार के भीतर टिकट खींचतान और उसके बाद अध्यक्ष पद की हार से स्थानीय स्तर पर भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच संगठनात्मक मंथन तेज होने की संभावना है। ऐसा क्यों हुआ कांग्रेस प्रत्याशी निशा नैनीवाल की जीत का मुख्य कारण पार्टी का नगर पालिका में पहले से मौजूद स्पष्ट बहुमत और पार्षदों की एकजुटता रहा। • वार्ड स्तर पर पहले से बहुमत: 25 वार्डों वाली अटरू नगर पालिका के चुनाव में कांग्रेस पहले ही 14 वार्ड जीत चुकी थी, जिससे उसे अध्यक्ष पद के लिए जरूरी जादुई आंकड़ा हासिल था। • क्रॉस वोटिंग में विफलता: भाजपा के पास 10 पार्षद थे और उसने 1 निर्दलीय को भी अपने पाले में ले लिया, लेकिन वह कांग्रेस के 14 पार्षदों में किसी भी प्रकार की टूट कराने में नाकाम रही। • एकजुट मतदान: कांग्रेस के सभी 14 पार्षदों ने अनुशासित रहकर अपनी उम्मीदवार निशा नैनीवाल को वोट दिया, जिससे किसी भी तरह का अप्रत्याशित परिणाम नहीं बन सका। • पारिवारिक टिकट विवाद की पृष्ठभूमि: पार्षद चुनाव के समय शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर और उनके भाई कृष्ण मुरारी के बीच एक ही वार्ड से टिकट को लेकर हुई खींचतान से स्थानीय स्तर पर पार्टी के भीतर असहज स्थिति पैदा हुई थी। सवाल-जवाब 1. अटरू नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव में किसकी जीत हुई? अटरू नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवार निशा नैनीवाल ने जीत दर्ज की। 2. निशा नैनीवाल को कितने वोट मिले और हारने वाले प्रत्याशी कौन थे? निशा नैनीवाल को 14 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई कृष्ण मुरारी को 11 वोट प्राप्त हुए। 3. अटरू नगर पालिका में कुल कितने वार्ड हैं और उनमें दलों की क्या स्थिति थी? अटरू नगर पालिका में कुल 25 वार्ड हैं, जिनमें से 14 में कांग्रेस, 10 में भाजपा और 1 में निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। 4. कृष्ण मुरारी दिलावर किस वार्ड से पार्षद चुने गए थे? कृष्ण मुरारी दिलावर अटरू के वार्ड नंबर 5 से पार्षद चुने गए थे और वे चरड़ाना ग्राम पंचायत के 4 बार सरपंच भी रह चुके हैं। 5. अटरू नगर पालिका अध्यक्ष का पद किस वर्ग के लिए आरक्षित था? अटरू नगर पालिका अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित था। https://trendkia.com/rajasthan/ataru-palika-adhyaksha-chunava-men-congress-ki-nisha-nainiwal-vijayi-shiksha-mntri-madan-dilawar-ke-bhai-hare-36231 TrendKia — Har trend, sabse pehle.