# बहन को 52 वर्ष की उम्र में मिले जुड़वा बेटे तो रक्षाबंधन पर भाई ने शुरू की रामदेवरा की कठिन दंडवत यात्रा

> गुजरात के रामसन निवासी गमना भाई मालवी ने बहन के घर जुड़वा बेटों के जन्म की मन्नत पूरी होने पर रामदेवरा के लिए कठिन दंडवत यात्रा शुरू की है. रक्षाबंधन के मौके पर भाई का यह अनोखा संकल्प अटूट प्रेम की मिसाल बना हुआ है.

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-08-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/bahana-ko-52-varsha-ki-umra-men-mile-jurava-bete-to-raksha-bandhan-para-bhai-ne-shuru-ki-ramdevra-ki-kathina-dndavata-yatra-23437 · **Language:** Hindi
**Tags:** रक्षाबंधन, गमना भाई मालवी, रामदेवरा यात्रा, दंडवत यात्रा, बाबा रामदेव, भ्रातृ प्रेम, जोधपुर

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की एक अद्भुत और भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है. गुजरात के रामसन गांव के रहने वाले गमना भाई मालवी अपनी बहन के प्रति अगाध प्रेम और गहरी आस्था का परिचय देते हुए गुजरात से राजस्थान स्थित बाबा रामदेव की पावन नगरी रामदेवरा तक की कठिन दंडवत यात्रा कर रहे हैं. दशकों पुरानी मन्नत पूरी होने और बहन की गोद जुड़वा बच्चों से भरने के बाद उन्होंने यह कठोर संकल्प पूरा करने का फैसला किया. जोधपुर के रास्ते से गुजर रही उनकी यह यात्रा राहगीरों और श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है.

## डॉक्टरों ने छोड़ दी थी उम्मीद, भाई ने बाबा रामदेव से लगाई गुहार
गमना भाई मालवी की बहन शादी के कई वर्षों बाद भी निःसंतान थीं. लगभग 20 से 25 वर्ष पहले गमना भाई ने अपनी बहन के सूने आंगन में किलकारी गूंजने की कामना के साथ अपने गांव में दो-तीन स्थानों पर धार्मिक बाधा और मन्नतें रखीं. जब इससे कोई परिणाम नहीं निकला, तो वे अपनी बहन को लेकर गुजरात के पालनपुर गए, जहां उन्होंने विशेषज्ञों से गहन चिकित्सकीय जांच करवाई. हालांकि, डॉक्टरों ने स्पष्ट कह दिया कि उनकी बहन के मां बनने की कोई संभावना नहीं बची है. मेडिकल साइंस के जवाब देने के बाद भी गमना भाई ने अपनी उम्मीद नहीं खोई और बाबा रामदेव के दरबार में अर्जी लगाई.

## चार बार नंगे पैर यात्रा और पांचवीं बार दंडवत यात्रा का संकल्प
भाई के मन में केवल एक ही इच्छा थी कि बहन की सूनी गोद भर जाए, चाहे संतान लड़का हो या लड़की. इस अटूट विश्वास के साथ उन्होंने बाबा रामदेव से प्रार्थना की और कई कठिन यात्राएं शुरू कीं. मन्नत की आस में गमना भाई ने बिना चप्पल पहने चार बार जमीन नापते हुए रामदेवरा तक की पैदल यात्रा पूरी की. इसके बाद उन्होंने पांचवीं बार दंडवत यात्रा करते हुए बाबा से बहन के लिए संतान का आशीर्वाद मांगा. उनकी इस अनवरत भक्ति और बहन के प्रति निष्ठा का फल आखिरकार मिला.

## 52 वर्ष की उम्र में मिली जुड़वा बेटों की खुशी
गमना भाई की वर्षों पुरानी याचना और अटूट विश्वास रंग लाया. डॉक्टरों द्वारा असंभव बताए जाने के बावजूद, उनकी बहन को करीब 52 वर्ष की आयु में जुड़वा बेटों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ. बहन के जीवन में आई इस अपार खुशी ने गमना भाई के संकल्प को और अधिक मजबूत कर दिया. बहन की सूनी गोद भरते ही भाई ने बाबा रामदेव से किया अपना वादा निभाने का निर्णय लिया और गुजरात से रामदेवरा की ओर कठिन दंडवत यात्रा पर निकल पड़े.

## भक्तों का सहयोग और अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ती यात्रा
यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भाई-बहन के निस्वार्थ प्रेम का एक अनुपम उदाहरण बन चुकी है. इस कठिन मार्ग पर उनके साथ परिवार के सदस्य और अनेक श्रद्धालु जुड़े हुए हैं. रास्ते में जगह-जगह लोग गमना भाई का स्वागत कर रहे हैं और उनकी सेवा में लगे हैं. कोई उनके लिए भोजन और शीतल जल का प्रबंध कर रहा है तो कोई यात्रा के दौरान अन्य आवश्यक सहायता दे रहा है. लगातार दंडवत करते हुए गमना भाई की यह यात्रा अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और अगले कुछ दिनों में वे रामदेवरा पहुंचकर अपनी मन्नत पूरी करेंगे.

## इसका आप पर असर
यह अनोखा प्रसंग पारिवारिक मूल्यों और अटूट आस्था के सामाजिक प्रभाव को उजागर करता है.

- **भारत में:** रक्षाबंधन के अवसर पर यह अनूठी कहानी देश भर के लोगों को भाई-बहन के निस्वार्थ रिश्ते और समर्पण की सीख देती है. यह विपरीत परिस्थितियों में उम्मीद न खोने और रिश्तों के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा प्रदान करती है.
- **गुजरात और राजस्थान में:** गुजरात के रामसन से राजस्थान के रामदेवरा तक के मार्ग पर यह यात्रा स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए गहरी प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है. इस रास्ते से गुजरने वाले राहगीर और सेवाभावी लोग आपसी सहयोग और सामुदायिक भावना का प्रदर्शन कर रहे हैं.

## सवाल-जवाब

### 1. गमना भाई मालवी दंडवत यात्रा क्यों कर रहे हैं?
वे अपनी बहन को 52 वर्ष की उम्र में जुड़वा बेटे मिलने पर बाबा रामदेव के प्रति ली गई मन्नत पूरी करने के लिए यह यात्रा कर रहे हैं.

### 2. यह यात्रा कहां से शुरू होकर कहां तक जा रही है?
यह यात्रा गुजरात के रामसन गांव से शुरू होकर राजस्थान के रामदेवरा स्थित बाबा रामदेव के मंदिर तक जा रही है.

### 3. डॉक्टरों ने गमना भाई की बहन के बारे में क्या कहा था?
पालनपुर में जांच के बाद डॉक्टरों ने कहा था कि उनकी बहन के मां बनने की कोई संभावना नहीं है.

### 4. गमना भाई ने इससे पहले रामदेवरा की कितनी यात्राएं की थीं?
उन्होंने पहले बिना चप्पल पहने चार बार जमीन नापते हुए यात्राएं की थीं और पांचवीं बार दंडवत प्रार्थना की थी.

### 5. रास्ते में गमना भाई को किस प्रकार का सहयोग मिल रहा है?
उनके परिवार के सदस्य और स्थानीय श्रद्धालु भोजन, पानी और देखभाल के साथ यात्रा में लगातार सहयोग दे रहे हैं.

## प्रेरणा और सबक
यह कहानी विपरीत परिस्थितियों में धैर्य, विश्वास और निस्वार्थ प्रेम की अमूल्य सीख देती है.

- **अटूट इच्छाशक्ति:** डॉक्टरों के मना करने के बावजूद गमना भाई ने उम्मीद नहीं खोई और लगातार प्रयास जारी रखे.
- **निस्वार्थ रिश्ते:** अपनी बहन की खुशी के लिए वर्षों तक कठिन शारीरिक तपस्या और यात्राएं करना रिश्ते की गहराई को दर्शाता है.
- **वचनबद्धता:** मन्नत पूरी होने के बाद भी अपने कठिन वादे को निष्ठापूर्वक पूरा करना सच्चे संकल्प का प्रमाण है.

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