बांदीकुई में डीएपी खाद के लिए मची भगदड़ में दो किसान बेहोश, 840 कट्टों के लिए घंटों कतार में खड़े रहे अन्नदाता दौसा जिले के बांदीकुई में करीब एक महीने बाद डीएपी खाद की नई खेप पहुंचते ही अफरा-तफरी मच गई। अव्यवस्था और धक्का-मुक्की के चलते तेज धूप में दो किसानों की तबीयत बिगड़ गई। राजस्थान के दौसा जिले अंतर्गत बांदीकुई कस्बे में मंगलवार को डीएपी खाद हासिल करने की होड़ में किसानों के बीच जबरदस्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय क्रय-विक्रय सहकारी समिति में करीब एक माह के लंबे अंतराल के बाद 840 कट्टे डीएपी खाद पहुंचने की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण इलाकों से सैकड़ों किसान तड़के ही जुटने लगे थे। प्रदेश के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के गृह जिले में अन्नदाताओं को खाद के एक-एक कट्टे के लिए भारी जद्दोजहद का सामना करना पड़ा। टोकन व्यवस्था में अचानक बदलाव से बिगड़े हालात सहकारी समिति परिसर में पहुंचे किसानों का कहना था कि वे सुबह करीब 7 बजे से ही कतारों में लगकर अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे थे। खाद वितरण से पहले किसानों को अपनी जमाबंदी पर मोहर लगवानी थी और उसके बाद टोकन प्राप्त करना था। अलग-अलग औपचारिकताओं के लिए अलग-अलग कतारें लगवाए जाने से किसानों की मुश्किलें पहले से ही बढ़ी हुई थीं। कई घंटे कतार में खड़े रहने के बाद अचानक घोषणा की गई कि खाद लेने के लिए किसानों को पहले कृषि विभाग के कार्यालय जाकर नया टोकन लेना होगा। यह सूचना फैलते ही पहले से कतार में खड़े किसान एक साथ टोकन हासिल करने के लिए कार्यालय की तरफ दौड़ पड़े। अचानक मची इस आपाधापी के कारण समिति परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई और देखते ही देखते धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई। धूप और धक्का-मुक्की में दो किसान गिरे बेहोश तेज धूप और बेकाबू भीड़ के बीच कतार में खड़े किसान संतोष शर्मा की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों और अन्य किसानों ने तुरंत उन्हें संभाला और पानी पिलाया। इसके बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 108 एंबुलेंस बुलाकर उन्हें बांदीकुई उप जिला अस्पताल भेजा गया। इसी हंगामे के बीच भीड़ के दबाव से एक महिला किसान की भी तबीयत खराब हो गई और वह भी अचेत होकर गिर पड़ीं, जिन्हें लोगों ने तत्काल भीड़ से बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार दिलाया। 20 दिन से आपूर्ति ठप रहने पर फूटा रोष घटनास्थल पर बढ़ती भीड़ और हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस का अतिरिक्त जाप्ता मौके पर पहुंचा और मोर्चा संभालते हुए खाद वितरण की कतारों को व्यवस्थित किया। वहां मौजूद किसानों ने खाद की अनियमित आपूर्ति को लेकर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। अन्नदाताओं का स्पष्ट कहना था कि वे पिछले करीब 20 दिनों से डीएपी खाद की राह देख रहे थे, लेकिन जब आपूर्ति आई तो प्रशासनिक कुप्रबंधन ने हालात बेकाबू कर दिए। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि क्षेत्र में समय रहते नियमित और सुचारू खाद आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो उनकी परेशानियां और गहरा जाएंगी। इसका आप पर असर खाद वितरण में मची इस अफरा-तफरी का सीधा असर इलाके के किसानों की खेती और रोजमर्रा की व्यवस्था पर पड़ा है। • भारत में: रबी और बुवाई सत्र के दौरान उर्वरक की कमी कई ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर फसल बोने में देरी कर सकती है। आपूर्ति बाधित होने पर कृषि पैदावार और किसानों की लागत दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ता है। • दौसा में: बांदीकुई और आसपास के किसानों को 20 दिनों के इंतजार के बाद भी टोकन और जमाबंदी की दोहरी कतारों से जूझना पड़ रहा है। पर्याप्त स्टॉक समय पर न मिलने से छोटे किसानों का दैनिक कामकाज और खेतों की तैयारी प्रभावित हो रही है। ऐसा क्यों हुआ सहकारी समिति में खाद की सीमित खेप पहुंचने और टोकन प्रक्रिया में ऐन वक्त पर किए गए फेरबदल के कारण यह हंगामा हुआ। • आपूर्ति में लंबा व्यवधान: बांदीकुई क्रय-विक्रय सहकारी समिति में करीब एक महीने से डीएपी खाद की नई खेप नहीं आई थी, जिससे मांग का दबाव काफी बढ़ चुका था। किसानों को पिछले 20 दिनों से आपूर्ति बहाल होने की प्रतीक्षा थी। • मांग की तुलना में कम स्टॉक: समिति के पास केवल 840 कट्टे खाद पहुंची थी, जबकि जरूरत सैकड़ों किसानों को थी। स्टॉक खत्म हो जाने के डर से हर कोई पहले खाद हासिल करने की होड़ में लग गया। • टोकन वितरण में अव्यवस्था: सुबह 7 बजे से कतार में लगे किसानों को कई घंटे बाद बताया गया कि टोकन कृषि विभाग कार्यालय से मिलेगा। इस अचानक बदलाव के कारण कतारें टूट गईं और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। सवाल-जवाब 1. बांदीकुई में किसानों के बीच विवाद और धक्का-मुक्की क्यों हुई? क्रय-विक्रय सहकारी समिति में करीब एक माह बाद 840 कट्टे डीएपी खाद पहुंची थी, जिसे लेने के लिए टोकन वितरण व्यवस्था बदलने पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। 2. धक्का-मुक्की और धूप के कारण किन लोगों की तबीयत खराब हुई? कतार में खड़े किसान संतोष शर्मा और एक महिला किसान की तबीयत बिगड़ गई तथा वे दोनों बेहोश होकर गिर पड़े। 3. किसान सुबह कितने बजे से कतार में खड़े थे? किसान सुबह करीब 7 बजे से ही जमाबंदी पर मोहर लगवाने और खाद लेने के लिए लाइन में लगे हुए थे। 4. किसानों को खाद का इंतजार कितने दिनों से था? किसानों के अनुसार वे पिछले करीब 20 दिनों से डीएपी खाद की आपूर्ति का इंतजार कर रहे थे। https://trendkia.com/rajasthan/bandikui-men-dap-khada-ke-lie-machi-bhagadara-men-do-kisana-behosha-840-katton-ke-lie-ghnton-katara-men-khare-rahe-annadata-44078 TrendKia — Har trend, sabse pehle.