# बांदलगुड़ा जागीर में चार साल से रुका पुल निर्माण, नाले किनारे जान जोखिम में डालकर आवाजाही को मजबूर लोग

> हैदराबाद के बांदलगुड़ा जागीर में सन सिटी और अत्तापुर को जोड़ने वाला पुल पिछले तीन-चार साल से सिर्फ दो पिलर तक अटका है, जिससे स्थानीय लोगों और स्कूली बच्चों को नाले किनारे के खतरनाक कच्चे रास्ते से रोज गुजरना पड़ रहा है.

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/bandlaguda-jagir-men-chara-sala-se-ruka-pula-nirmana-nale-kinare-jana-jokhima-men-dalakara-avajahi-ko-majabura-loga-29551 · **Language:** Hindi
**Tags:** हैदराबाद पुल, बांदलगुड़ा जागीर, सन सिटी अत्तापुर, जीएचएमसी, अधूरा निर्माण, स्कूली बच्चे सुरक्षा

हैदराबाद के बांदलगुड़ा जागीर इलाके में एक पुल का निर्माण पिछले करीब चार साल से अटका पड़ा है और इसकी वजह से हर दिन हजारों लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है. सन सिटी और अत्तापुर को जोड़ने के लिए बनाया जा रहा यह पुल अभी सिर्फ दो पिलर तक ही सीमित है, जबकि शहर के बाकी हिस्सों में चौड़ी सड़कें और नए फ्लाईओवर तेजी से बन रहे हैं. इलाके से गुजरने वाले हर शख्स के लिए यह अधूरा ढांचा अब एक ऐसी परियोजना की याद दिलाता है जो बीच रास्ते में भुला दी गई.

## कैसे शुरू हुई यह परियोजना
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, ईसा नदी और उससे जुड़े नाले के आर-पार आवाजाही आसान बनाने के लिए यह पुल बनाया जाना था. इसका मकसद था कि सन सिटी, जनचैतन्य कॉलोनी और आसपास की बड़ी रिहायशी बस्तियों में रहने वाले लोगों को मुख्य अत्तापुर और मेहदीपटनम मार्ग तक पहुंचने के लिए लंबा चक्कर न लगाना पड़े. काम की शुरुआत में जमीन पर पिलर खड़े किए गए, लेकिन इसके तुरंत बाद बजट की कमी और प्रशासनिक तालमेल न बैठ पाने के चलते निर्माण एजेंसी ने काम रोक दिया. तब से लेकर आज तक यह अधूरा ढांचा वहीं खड़ा है और सरकारी लापरवाही की मिसाल बन चुका है.

## नाले किनारे का खतरनाक रास्ता
पुल का काम रुकने के बाद इलाके के लोगों के पास कोई सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता नहीं बचा. मजबूरी में लोग नाले के किनारे बने संकरे, कच्चे और बदहाल रास्ते को ही बाईपास की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. यह रास्ता इतना तंग और जर्जर है कि यहां दोपहिया वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ना आम बात हो गई है. मुश्किल तब और बढ़ जाती है जब इसी संकरी पगडंडी से भारी वाटर टैंकर, डंपर और दूसरे व्यावसायिक वाहन भी गुजरते हैं. बारिश के मौसम में यहां मिट्टी धंसने और नाले का पानी बढ़ने से किसी बड़े हादसे का खतरा हमेशा बना रहता है. रोज इसी रास्ते से गुजरने वाले अभिभावक और दोपहिया सवार कहते हैं कि हर सुबह बिना किसी सुरक्षा भरोसे के ही यह सफर तय करना पड़ता है.

## मंजूरी 2021 में मिली, काम 2023 में ठप
यह पुल परियोजना 2021 के आखिर और 2022 की शुरुआत में राज्य सरकार और हैदराबाद सड़क विकास निगम लिमिटेड की तरफ से प्रशासनिक मंजूरी पाकर आगे बढ़ी थी. दरअसल यह मूसी और ईसा नदी पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के मकसद से मंजूर किए गए 14 नए पुलों की बड़ी योजना का ही एक हिस्सा था, और यह पुल इसी नेटवर्क की एक अहम कड़ी माना गया था. 2022 में निर्माण एजेंसी तय होने के बाद काम शुरू हुआ, जिसमें पहले चरण में ईसा नदी और नाले वाले हिस्से में पिलर की नींव डाली गई और दो पिलर खड़े किए गए. लेकिन 2022 के आखिर से 2023 के बीच किसी मोड़ पर यह काम अचानक बंद हो गया. यानी पिछले करीब तीन से चार साल से यह ढांचा सिर्फ दो पिलरों तक ही सिमटा हुआ है.

## स्कूली बच्चों के लिए रोज की मुसीबत
सन सिटी और उसके आसपास कई बड़े अंतरराष्ट्रीय और निजी स्कूल मौजूद हैं. अत्तापुर और चिन्तलमेट की तरफ से आने वाले छात्रों और स्कूल बसों के सामने रोज दो ही विकल्प बचते हैं, या तो घंटों लंबे ट्रैफिक जाम में फंसना या फिर उसी जोखिम भरे कच्चे रास्ते से गुजरना. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बारे में प्रशासन और जीएचएमसी के अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.

## निवासियों की मांग
इलाके के नागरिकों की मांग है कि मानसून के दौरान हादसों का खतरा बढ़ने को देखते हुए इस अधूरे पुल का निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर तुरंत फिर से शुरू कराया जाए, ताकि हजारों लोगों और स्कूली बच्चों को रोज की इस जोखिम भरी आवाजाही से राहत मिल सके. जब तक काम दोबारा शुरू नहीं होता, तब तक नाले किनारे का यही कच्चा रास्ता इन रिहायशी इलाकों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ने वाला इकलौता जरिया बना रहेगा.

## इसका आप पर असर
यह मामला सीधे तौर पर बांदलगुड़ा जागीर और आसपास रहने वाले लोगों से जुड़ा है, लेकिन यह उन तमाम शहरी इलाकों की तस्वीर भी दिखाता है जहां इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बीच में अटक जाते हैं.

- **भारत में:** यह घटना दिखाती है कि बड़े शहरों में भी पुल और सड़क जैसी बुनियादी परियोजनाएं बजट या तालमेल की कमी से सालों तक अधूरी रह सकती हैं. ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों को अपनी सुरक्षा और आवाजाही के लिए खुद प्रशासन से लगातार आवाज उठानी पड़ती है.
- **हैदराबाद में:** सन सिटी, जनचैतन्य कॉलोनी, अत्तापुर और चिन्तलमेट इलाके में रहने वाले और स्कूल जाने वाले हजारों लोगों को अभी भी नाले किनारे के खतरनाक कच्चे रास्ते से रोज गुजरना पड़ेगा. मानसून के दौरान यह खतरा और बढ़ जाएगा, इसलिए यहां के अभिभावकों और वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी.
- **दोपहिया चालकों के लिए:** जब तक पुल पूरा नहीं होता, संकरे रास्ते पर संतुलन बिगड़ने का खतरा बना रहेगा, इसलिए धीमी रफ्तार और सतर्कता जरूरी होगी.
- **अभिभावकों के लिए:** स्कूल बस और बच्चों की आवाजाही के समय को लेकर अतिरिक्त समय का इंतजाम रखना पड़ सकता है, क्योंकि ट्रैफिक जाम या जोखिम भरे रास्ते में देरी संभव है.

## ऐसा क्यों हुआ
यह पुल इसलिए अधूरा पड़ा है क्योंकि पिलर खड़े होने के तुरंत बाद बजट की कमी और प्रशासनिक तालमेल न बन पाने के चलते निर्माण एजेंसी ने काम रोक दिया.

- **सीधा कारण:** शुरुआती चरण में नींव डालने और दो पिलर खड़े करने के बाद, फंड की कमी और अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल न होने से काम बीच में ही रुक गया.
- **समय का सिलसिला:** 2021 के आखिर और 2022 की शुरुआत में मंजूरी मिली, 2022 में एजेंसी तय हुई और उसी साल के आखिर से 2023 के बीच काम अचानक बंद हो गया, तब से आगे कोई प्रगति नहीं हुई.
- **बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा:** यह पुल मूसी और ईसा नदी पर ट्रैफिक दबाव घटाने के लिए मंजूर किए गए 14 नए पुलों की योजना का एक हिस्सा था, ऐसे बड़े प्रोजेक्ट में तालमेल बिगड़ने पर एक-एक कड़ी अटक सकती है.
- **आगे क्या:** स्थानीय लोगों ने प्रशासन और जीएचएमसी को कई ज्ञापन दिए हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई शुरू होने की कोई पुष्टि नहीं है.

## सवाल-जवाब

### 1. यह पुल कहां बनाया जा रहा है?
हैदराबाद के बांदलगुड़ा जागीर इलाके में सन सिटी और अत्तापुर को जोड़ने के लिए.

### 2. पुल का काम कब से बंद पड़ा है?
पिलर खड़े होने के बाद 2022 के आखिर से 2023 के बीच काम रुक गया था, यानी करीब तीन से चार साल से यह अधूरा पड़ा है.

### 3. अभी तक पुल का कितना काम हो चुका है?
अभी तक सिर्फ दो पिलर ही खड़े किए जा सके हैं.

### 4. लोग फिलहाल आवाजाही के लिए किस रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं?
नाले के किनारे बने संकरे, कच्चे और बदहाल रास्ते को बाईपास की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.

### 5. इस पुल को मंजूरी कब मिली थी?
2021 के आखिर और 2022 की शुरुआत में राज्य सरकार और हैदराबाद सड़क विकास निगम लिमिटेड की तरफ से मंजूरी मिली थी.

### 6. निर्माण रुकने से सबसे ज्यादा किसे परेशानी हो रही है?
स्थानीय निवासियों के साथ-साथ अत्तापुर और चिन्तलमेट से आने वाले स्कूली बच्चों और स्कूल बसों को.

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._