# बारां रेलवे स्टेशन पर नल के पास छूटा मोबाइल, आरपीएफ ने पाली के यात्री को सुरक्षित लौटाया

> अजमेर से अनूपपुर जा रहे यात्री का 16 हजार रुपये का फोन बारां स्टेशन पर छूट गया था, जिसे आरपीएफ ने 'ऑपरेशन अमानत' के तहत बरामद कर कानूनी प्रक्रिया के बाद उनके परिचित को सुपुर्द कर दिया।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/baran-relave-steshana-para-nala-ke-pasa-chhuta-mobaila-rpf-ne-pali-ke-yatri-ko-surakshita-lautaya-45197 · **Language:** Hindi
**Tags:** आरपीएफ, ऑपरेशन अमानत, बारां रेलवे स्टेशन, कोटा मंडल, अजमेर दुर्ग एक्सप्रेस, भारतीय रेलवे, राजस्थान

ट्रेन यात्रा के दौरान जल्दबाजी या असावधानी से सामान छूट जाना अक्सर यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर देता है। राजस्थान के कोटा रेल मंडल में आने वाले बारां स्टेशन पर ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां प्लेटफॉर्म पर पानी पीने उतरे एक यात्री का महंगा स्मार्टफोन नल के पास छूट गया था। रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने मुस्तैदी दिखाते हुए न केवल उस लावारिस फोन को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया, बल्कि तकनीकी पड़ताल के बाद असली मालिक की पहचान कर उसे पूरे नियमों के साथ वापस भी दिलवाया।

## सफर के दौरान बारां स्टेशन पर यूं छूटा था स्मार्टफोन
पाली जिले के रहने वाले मानक राम गाड़ी संख्या 18208 अजमेर-दुर्ग एक्सप्रेस में सवार होकर अजमेर से अनूपपुर की यात्रा कर रहे थे। सफर के बीच जब यह ट्रेन कोटा मंडल के बारां रेलवे स्टेशन पहुंची, तो प्यास बुझाने के इरादे से वे बोगी से नीचे उतरे। प्लेटफॉर्म पर लगे पानी के नल के पास उन्होंने अपना 16 हजार रुपये का मोबाइल फोन रख दिया और पानी पीने लगे। इसी बीच ट्रेन के चलने का वक्त हो गया। वे आनन-फानन में अपनी बोगी में सवार हो गए, लेकिन हड़बड़ाहट में उनका ध्यान फोन पर नहीं गया। गाड़ी जब स्टेशन छोड़कर आगे निकल गई, तब उन्हें अपनी इस चूक का अहसास हुआ, जिससे वे खासे चिंतित हो उठे।

## गश्त के दौरान जवान की पड़ी नजर, तुरंत पोस्ट में कराया जमा
स्टेशन परिसर की सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए रेलवे सुरक्षा बल के जवान चौबीसों घंटे निगरानी रखते हैं। घटना के समय आरक्षक विकास कुमार प्लेटफॉर्म क्षेत्र में मुआयना कर रहे थे। नल के नजदीक जब उनकी दृष्टि लावारिस हालत में रखे एक स्मार्टफोन पर पड़ी, तो उन्होंने बिना देर किए उसे अपनी निगरानी में लिया। इसके बाद वे उस हैंडसेट को बारां आरपीएफ थाने लेकर पहुंचे और वहां आधिकारिक रूप से दर्ज कराया। तकनीकी माध्यमों का सहारा लेकर फोन से जुड़े विवरण खंगाले गए, जिससे आखिरकार फोन के स्वामी मानक राम से संपर्क साधना संभव हो सका। उन्हें फोन के महफूज होने की खबर दी गई, जिससे यात्री को बड़ी राहत मिली।

## पहचान और टिकट की जांच के बाद मित्र को सौंपा गया हैंडसेट
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने इस पूरे घटनाक्रम का ब्योरा साझा करते हुए बताया कि मानक राम स्वयं यात्रा में आगे निकल चुके थे, इसलिए उन्होंने फोन प्राप्त करने के लिए अपने एक नजदीकी साथी प्रताप राम को अधिकृत किया। प्रताप राम भी पाली जिले के निवासी हैं और वे सूचना पाकर बारां स्थित सुरक्षा बल कार्यालय पहुंचे। वहां मौजूद सहायक उप निरीक्षक रामराज मीना ने हैंडसेट सुपुर्द करने से पहले निर्धारित कानूनी औपचारिकताओं को पूरी सतर्कता से निभाया।

अधिकारियों ने यात्रा टिकट, पहचान पत्र और फोन के मालिकाना हक से जुड़े सभी आवश्यक प्रमाणों का मिलान किया। यात्री मानक राम से भी दूरभाष पर बात करके उनके साथी को फोन सौंपने की पुष्टि ली गई। इसके बाद दो स्वतंत्र गवाहों को साथ रखकर आवश्यक प्रपत्र तैयार किए गए और 16 हजार रुपये मूल्य का वह फोन प्रताप राम के हवाले कर दिया गया।

## क्या है 'ऑपरेशन अमानत' और इसका दायरा
भारतीय रेल में यात्रियों का विश्वास मजबूत करने के मकसद से सुरक्षा बल की ओर से 'ऑपरेशन अमानत' चलाया जा रहा है। इस विशेष मुहिम का प्राथमिक लक्ष्य ट्रेनों और स्टेशन परिसरों में भूलवश छूटे सामान, बैग, आभूषण, नकदी, आवश्यक प्रपत्रों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खोजकर उनके वास्तविक स्वामियों तक पहुंचाना है। बारां स्टेशन पर घटित यह घटना दर्शाती है कि सुरक्षा बल के कर्मी किस तरह सजगता से आम नागरिकों की संपत्ति की रक्षा कर रहे हैं। प्रशासन ने यात्रियों से यह आग्रह भी दोहराया है कि आवागमन के दौरान वे अपनी निजी और मूल्यवान वस्तुओं को लेकर पूरी तरह सतर्क रहें।

## इसका आप पर असर
ट्रेन यात्रा के दौरान सामान छूटने पर रेलवे का विशेष सुरक्षा तंत्र यात्रियों की मदद करता है और सामान की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करता है।

- **भारत में:** यदि किसी भी यात्री का सामान ट्रेन या स्टेशन पर छूट जाता है, तो वे निकटतम सुरक्षा बल चौकी या हेल्पलाइन नंबर 139 पर संपर्क कर सकते हैं। 'ऑपरेशन अमानत' के अंतर्गत आरपीएफ लावारिस मिले सामान का विवरण दर्ज कर सही मालिक की पहचान करती है।
- **कोटा और बारां में:** कोटा मंडल के अंतर्गत स्टेशनों पर सुरक्षा कर्मियों की नियमित गश्त जारी है, जिससे संदिग्ध या लावारिस वस्तुओं की त्वरित निगरानी होती है। बारां या आसपास के स्टेशनों पर सामान छूटने की स्थिति में यात्री पहचान पत्र और वैध टिकट दिखाकर अपनी संपत्ति पुनः प्राप्त कर सकते हैं।
- **यात्रियों के लिए सावधानी:** किसी भी स्टेशन पर पानी लेने या खाद्य सामग्री खरीदने के लिए उतरते समय निजी गैजेट्स साथ रखने की सलाह दी जाती है। हड़बड़ाहट से बचने के लिए ट्रेन रुकने की अवधि का ध्यान रखें और उतरते समय अपना सामान सुरक्षित स्थान पर ही रखें।
- **सामान प्राप्ति की प्रक्रिया:** यदि कोई यात्री व्यक्तिगत रूप से नहीं पहुंच सकता, तो वह अपने किसी अधिकृत प्रतिनिधि को दस्तावेज देकर भेज सकता है। आरपीएफ दूरभाष पर सत्यापन और गवाहों के समक्ष कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही सामान सौंपती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटना यात्री द्वारा पानी पीने के लिए जल्दबाजी में प्लेटफॉर्म पर उतरने और अचानक ट्रेन चलने की हड़बड़ाहट में फोन भूल जाने के कारण हुई।

- **सीधा कारण:** यात्री मानक राम बारां स्टेशन पर पानी के नल के पास अपना 16 हजार रुपये का मोबाइल रखकर पानी पीने लगे थे। ट्रेन के प्रस्थान का समय होते ही वे जल्दबाजी में कोच में चढ़ गए और फोन नल के पास ही छूट गया।
- **बरामदगी की परिस्थितियां:** स्टेशन पर रात्रि गश्त कर रहे आरपीएफ आरक्षक विकास कुमार ने नल के पास पड़े लावारिस मोबाइल को देखा और तत्काल सुरक्षा बल पोस्ट में जमा कराया। इसके बाद तकनीकी सहायता के माध्यम से यात्री के विवरण की पहचान संभव हो सकी।
- **सुरक्षा बल का सक्रिय अभियान:** भारतीय रेलवे में 'ऑपरेशन अमानत' के तहत जवानों को लावारिस या छूटे सामान की पहचान कर मूल मालिक तक पहुंचाने के स्पष्ट निर्देश प्राप्त हैं। इसी संस्थागत प्रक्रिया के चलते सत्यापन और गवाहों की मौजूदगी में फोन मित्र को सौंपा गया।

## सवाल-जवाब

### 1. यात्री का मोबाइल किस स्टेशन पर छूटा था?
यात्री का मोबाइल पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल के अंतर्गत आने वाले बारां रेलवे स्टेशन पर छूटा था।

### 2. यात्री किस ट्रेन से और कहां तक का सफर कर रहे थे?
यात्री मानक राम गाड़ी संख्या 18208 अजमेर-दुर्ग एक्सप्रेस में अजमेर से अनूपपुर तक की यात्रा कर रहे थे।

### 3. छूटे हुए मोबाइल फोन की अनुमानित कीमत कितनी थी?
बरामद किए गए कीमती मोबाइल फोन की कीमत 16 हजार रुपये थी।

### 4. मोबाइल फोन सबसे पहले किस सुरक्षा कर्मी को मिला?
प्लेटफॉर्म पर गश्त कर रहे आरपीएफ आरक्षक विकास कुमार ने लावारिस हालत में पड़े इस फोन को बरामद किया था।

### 5. यात्री की गैर-मौजूदगी में फोन किसे और कैसे सौंपा गया?
टिकट, पहचान पत्र और यात्री की फोन पर सहमति लेने के बाद सहायक उप निरीक्षक रामराज मीना ने दो स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में फोन उनके मित्र प्रताप राम को सौंपा।

### 6. रेलवे का 'ऑपरेशन अमानत' क्या है?
यह आरपीएफ का विशेष अभियान है जिसके तहत ट्रेनों और स्टेशनों पर छूटे यात्रियों के कीमती सामान को सुरक्षित बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों तक पहुंचाया जाता है।

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