बाड़मेर के चौहटन में भारी बारिश से तबाही, सलारिया और मिये का तला में बाढ़ जैसे हालात बाड़मेर के चौहटन क्षेत्र में भारी मूसलाधार बारिश के चलते कई गांवों में पानी भर गया है, जिससे लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर के चौहटन उपखंड में देर रात हुई मूसलाधार बारिश ने आम लोगों के जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार और तेज गति से बरसे पानी के कारण सरहदी इलाकों में बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति बन गई है। विशेष रूप से सेड़वा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सलारिया और मिये का तला गांवों में हालात काफी चिंताजनक हो गए हैं, जहां दर्जनों घरों के भीतर भारी मात्रा में पानी भर गया है। अचानक हुए इस जलभराव के कारण ग्रामीणों को बेहद विकट परिस्थितियों और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पानी के सैलाब ने उनके रोजमर्रा के जीवन की रफ्तार को थाम दिया है। रात के सन्नाटे में पानी का हमला और ग्रामीणों में दहशत देर रात जब ग्रामीण सो रहे थे, तभी अचानक शुरू हुई मूसलाधार बारिश के चलते गांवों की गलियों और निचले रिहाइशी इलाकों में पानी का स्तर बहुत तेजी से बढ़ने लगा। देखते ही देखते सड़कों पर बहता पानी लोगों के मकानों के भीतर तक दाखिल हो गया। अचानक घरों में पानी घुसने से ग्रामीणों के बीच अफरा-तफरी और डर का माहौल बन गया। अपनी और अपने बच्चों की जान सुरक्षित करने के लिए कई परिवारों को रात के अंधेरे में ही अपने घरों को छोड़कर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। इस अचानक आई मुसीबत के कारण लोगों को अपने जरूरी सामान को बचाने का मौका भी नहीं मिला, जिससे घरों में रखा खाने-पीने का अनाज, पहनने के कपड़े, कीमती फर्नीचर और बिस्तर पूरी तरह से पानी में डूबकर बर्बाद हो गए। इस भारी नुकसान से प्रभावित परिवारों को गंभीर आर्थिक झटका लगा है। प्रशासनिक अमला सक्रिय, राहत और बचाव अभियान तेज जलभराव और तबाही की खबर मिलते ही जिला प्रशासन और स्थानीय राजस्व विभाग की टीमें तुरंत हरकत में आ गईं। प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों का दल बिना समय गंवाए प्रभावित सीमावर्ती गांवों में पहुंचा और जमीनी हालात का जायजा लिया। स्थानीय अधिकारियों ने पानी में फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की तत्काल व्यवस्था की। प्रशासन की ओर से संकट की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद और सहायता सामग्री उपलब्ध कराने का पूरा भरोसा दिया गया है। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में गश्त कर रहे हैं और स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं ताकि बारिश दोबारा तेज होने की स्थिति में तुरंत कदम उठाए जा सकें। सेड़वा क्षेत्र में गंभीर स्थिति, मौसम विभाग की चेतावनी प्राप्त जानकारी के अनुसार, सेड़वा क्षेत्र के सलारिया और मिये का तला गांव इस प्राकृतिक आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जहां से लगातार मकानों में पानी भरने की सूचनाएं मिल रही हैं। मौसम का मिजाज अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। आसमान में लगातार काले बादल छाए हुए हैं और रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण राहत कार्यों में भी बाधा आ रही है। इस नाजुक स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने निचले और जलभराव वाले इलाकों में रहने वाले नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि वे बिना किसी जरूरी काम के घरों से बाहर न निकलें और पानी से भरे रास्तों पर जाने से पूरी तरह परहेज करें। साथ ही अधिकारियों को हर समय सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, जिला प्रशासन ने स्थानीय लोगों से किसी भी तरह की अफवाहों पर भरोसा न करने का आग्रह किया है। प्रशासन ने अपील की है कि आपदा या संकट की स्थिति में लोग सीधे नियंत्रण कक्ष या स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करें ताकि सही समय पर सटीक मदद पहुंचाई जा सके। यदि आने वाले समय में भी बारिश का यह सिलसिला थमा नहीं, तो जलभराव की समस्या और अधिक विकराल रूप ले सकती है। प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि इस संकटकाल में आम जनता की जान-माल की रक्षा करना ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इसका आप पर असर • भारत में: ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर जल निकासी व्यवस्था के कारण भारी बारिश भारी आर्थिक नुकसान और विस्थापन का कारण बनती है, जिससे मानसून के दौरान ग्रामीण जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। • बाड़मेर में: सलारिया, मिये का तला और चौहटन के प्रभावित निवासियों को जलभराव खत्म होने तक प्रशासनिक राहत पर निर्भर रहना होगा और बुनियादी सामान व अनाज का नुकसान झेलना पड़ेगा। सवाल-जवाब 1. बाड़मेर के कौन से क्षेत्र इस भारी बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं? बाड़मेर जिले के चौहटन उपखंड और विशेष रूप से सेड़वा क्षेत्र के सलारिया और मिये का तला गांव इस भारी बारिश से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। 2. अचानक आई इस बाढ़ के कारण ग्रामीणों को किस प्रकार का नुकसान हुआ है? घरों में पानी घुसने से ग्रामीणों का अनाज, कपड़े, कीमती फर्नीचर और बिस्तर पूरी तरह भीगकर खराब हो गए हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। 3. पीड़ितों की मदद के लिए प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं? जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की टीमों ने प्रभावित गांवों में पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया, फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया और राहत सामग्री उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। 4. क्या प्रभावित इलाकों में मौसम अब सामान्य हो गया है? नहीं, प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी घने बादल छाए हुए हैं और रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी है, जिससे जलभराव की स्थिति बनी हुई है। 5. प्रशासन ने आम जनता के लिए क्या एडवाइजरी जारी की है? प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने, जलभराव वाले रास्तों से दूर रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। https://trendkia.com/rajasthan/barmer-ke-chohtan-men-bhari-barisha-se-tabahi-salaria-aura-miye-ka-tala-men-barha-jaise-halata-10445 TrendKia — Har trend, sabse pehle.