बाड़मेर में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने पकड़ा एक लाख का इनामी तस्कर, बचने के लिए घर में पाल रखे थे आठ कुत्ते राजस्थान में तीन साल से फरार चल रहे एक लाख रुपये के इनामी तस्कर कंवराराम को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने ऑपरेशन विषकपिल के तहत बाड़मेर से गिरफ्तार कर लिया है। राजस्थान में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन अभियान के दौरान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। टास्क फोर्स की टीम ने राज्य के शीर्ष 25 नशा तस्करों की सूची में शामिल एक लाख रुपये के इनामी अपराधी कंवराराम को बाड़मेर इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। यह शातिर आरोपी पिछले तीन वर्षों से कानून की गिरफ्त से लगातार बचता फिर रहा था और अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चालाक रणनीति अपनाए हुए था। ऑपरेशन विषकपिल के तहत बाड़मेर में हुई कार्रवाई नशा तस्करों की धरपकड़ के लिए विशेष रूप से तैयार की गई कार्ययोजना के तहत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 'ऑपरेशन विषकपिल' शुरू किया था। इस खास अभियान के तहत टास्क फोर्स की टीम ने बाड़मेर में सटीक सूचना के आधार पर दबिश देकर कंवराराम को चारों तरफ से घेर लिया और उसे हिरासत में ले लिया। पुलिस महानिरीक्षक (IG) विकास कुमार ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि फरार चल रहे नशा तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण कामयाबी है। कानून से बचने के लिए बना रखा था अनूठा सुरक्षा चक्र गिरफ्तारी से बचने के लिए कंवराराम लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता था और पुलिस तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों की हर गतिविधि पर गुप्त नजर रखता था। जांच में सामने आया कि उसने अपने ठिकाने पर सुरक्षा कवच के रूप में आठ कुत्ते पाल रखे थे। जैसे ही उसके घर या ठिकाने के आसपास कोई अनजान व्यक्ति या पुलिसकर्मी कदम रखता, ये कुत्ते तुरंत भौंकने और सतर्क होने लगते थे। कुत्तों के इस व्यवहार से कंवराराम को दूर से ही बाहरी हलचल की भनक लग जाती थी और वह किसी भी संभावित छापे से पहले ही फरार होने में सफल हो जाता था। राजस्थान और मध्यप्रदेश में दर्ज हैं 14 आपराधिक मुकदमे कंवराराम का आपराधिक रिकॉर्ड काफी लंबा और गंभीर है। उसके खिलाफ राजस्थान के साथ-साथ पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में भी स्वापक औषधि और मन प्रभावी पदार्थ (NDPS) अधिनियम के तहत कई गंभीर मामले दर्ज हैं। मादक पदार्थों की तस्करी के अलावा उस पर हत्या और जानलेवा मारपीट जैसे जघन्य अपराधों के मुकदमे भी शामिल हैं। कुल मिलाकर उसके ऊपर 14 आपराधिक प्रकरण दर्ज पाए गए हैं। तस्करी के नेटवर्क और संपर्कों की पड़ताल में जुटी पुलिस एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन के बाद मुख्यालय स्तर से कंवराराम की गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का नकद इनाम घोषित किया गया था। वह राज्य के शीर्ष 25 नशा माफियाओं की प्राथमिक सूची में शुमार था, जिसके कारण उसकी तलाश बेहद गंभीरता से की जा रही थी। अब इस कुख्यात तस्कर के पकड़े जाने के बाद जांच अधिकारी उसके अंतरराज्यीय नशा सिंडिकेट, माल की आपूर्ति श्रृंखला और उससे जुड़े अन्य सहयोगियों के बारे में सघन पूछताछ कर रहे हैं। इसका आप पर असर इस कुख्यात तस्कर की गिरफ्तारी से राजस्थान और मध्यप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय मादक पदार्थ सिंडिकेट को बड़ा झटका लगा है। • भारत में: अंतरराज्यीय नशा तस्करों के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई से दूसरे राज्यों में नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला कमजोर होगी। इससे सीमावर्ती राज्यों में अवैध नशीली दवाओं की आवाजाही पर लगाम लगाने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मदद मिलेगी। • राजस्थान में: बाड़मेर और आसपास के इलाकों में नशा तस्करों के खिलाफ पुलिस अभियान और अधिक तेज होगा। स्थानीय युवा वर्ग को नशे के जाल में धकेलने वाले गिरोहों के अन्य सक्रिय सदस्यों तक पहुंचने में जांच टीमों को अहम सुराग मिलेंगे। • अपराध नियंत्रण: हत्या और मारपीट जैसे 14 मामलों में नामजद अपराधी के पकड़े जाने से इलाके में कानून व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। तीन साल से फरार अपराधी की धरपकड़ से अन्य वांछित अपराधियों पर भी दबाव बढ़ेगा। • नागरिक सुरक्षा: नशा तस्करी के गुप्त ठिकानों पर कार्रवाई से ग्रामीण और सीमावर्ती बस्तियों में सुरक्षा की स्थिति बेहतर होगी। लोग अपने आसपास होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी निडर होकर पुलिस को दे सकेंगे। ऐसा क्यों हुआ यह कार्रवाई राजस्थान में वांछित और इनामी अपराधियों को पकड़ने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियानों के तहत की गई है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन के बाद से ही शीर्ष नशा तस्करों की पहचान कर उन्हें दबोचने की योजना बनाई गई थी। • शीर्ष 25 अपराधियों की सूची: कंवराराम प्रदेश के 25 सबसे बड़े नारकोटिक्स अपराधियों की सूची में शामिल था। उसके आपराधिक कद और लगातार फरारी को देखते हुए मुख्यालय ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। • विशेष कार्ययोजना का क्रियान्वयन: तीन साल तक वह पुलिस को चकमा देने में इसलिए सफल रहा क्योंकि उसने आठ कुत्तों को प्रारंभिक अलार्म के रूप में तैनात कर रखा था और लगातार ठिकाने बदलता था। टास्क फोर्स ने 'ऑपरेशन विषकपिल' के तहत गोपनीय रणनीति बनाकर इस अभेद्य सुरक्षा घेरे को तोड़ा। • अंतरराज्यीय आपराधिक पृष्ठभूमि: राजस्थान और मध्यप्रदेश में एनडीपीएस, हत्या और मारपीट के 14 गंभीर मामले दर्ज होने के कारण उसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बन चुकी थी। सवाल-जवाब 1. कंवराराम को किस जांच एजेंसी ने और कहां से गिरफ्तार किया? कंवराराम को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने राजस्थान के बाड़मेर जिले से गिरफ्तार किया है। 2. कंवराराम पर कितना इनाम घोषित था और वह कब से फरार चल रहा था? उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था और वह पिछले तीन वर्षों से फरार चल रहा था। 3. पुलिस की छापेमारी से बचने के लिए आरोपी क्या तरीका अपनाता था? वह लगातार अपने ठिकाने बदलता था और उसने अपने घर पर आठ कुत्ते पाल रखे थे, जो किसी भी अनजान व्यक्ति के आने पर सतर्क कर देते थे। 4. कंवराराम के खिलाफ कुल कितने आपराधिक मामले दर्ज हैं? उसके खिलाफ राजस्थान और मध्यप्रदेश में एनडीपीएस एक्ट, हत्या और मारपीट सहित कुल 14 आपराधिक मामले दर्ज हैं। 5. इस कार्रवाई को किस विशेष अभियान के तहत अंजाम दिया गया? इस गिरफ्तारी को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन विषकपिल' के तहत अंजाम दिया गया। https://trendkia.com/rajasthan/barmer-men-enti-narakotiksa-taska-phorsa-ne-pakara-eka-lakha-ka-inami-taskara-bachane-ke-lie-ghara-men-pala-rakhe-the-atha-kutte-47660 TrendKia — Har trend, sabse pehle.